मसीह की सामर्थ्य
2013 में, लगभग छह सौ प्रत्यक्ष दर्शकों ने कलाबाज निक वॉलेंडा को ग्रैंड कैनियन(Grand Canyon) के पास 1500 फीट चौड़ी खाई के ऊपर एक तंग रस्से पर चलते हुए देखा l उसने 2 इंच मोटी स्टील के रस्से पर कदम रखकर यीशु को धन्यवाद दिया जब उसके मुख्य कैमरा ने नीचे घाटी की ओर इशारा किया l उसने प्रार्थना और यीशु की स्तुति करते हुए रस्से पर इतनी शांति से चला मानो वह फूटपाथ पर टहल रहा हो l हवा के विरुद्ध होने पर, वह रुक कर झुक गया l वह उठा और “उस रस्से को शांत करने” के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हुए अपना संतुलन वापस प्राप्त किया l उस तनी रस्सी पर हर कदम के साथ, उसने मसीह की शक्ति पर अपने भरोसे को तब और अब सुनने वाले हर किसी के सामने प्रदर्शित किया, जैसा कि वीडियों दुनिया भर में देखा जाता है l
जब तूफ़ान ने गलील के समुद्र में शिष्यों को लहरों से घेर लिए, तो सहायता के लिए उनकी याचनाओं में डर दिखाई दिया (मरकुस 4:35-38) l यीशु द्वारा तूफ़ान को शांत करने के बाद, वे जान गए कि वह हवाओं और बाकी सब चीजों को नियंत्रित करता है (पद.39-42) l धीरे-धीरे उस पर उनका भरोसा बढ़ा l उनके व्यक्तिगत अनुभव दूसरों को यीशु की गहरी उपलब्धता और असाधारण ताकत को पहचानने में मदद कर सकते हैं l
जीवन के तूफानों का अनुभव करते समय या दुःख की गहरी घाटियों पर फैले भरोसे की तनी रस्सी पर चलते समय, हम मसीह की शक्ति में विश्वास का प्रदर्शन कर सकते हैं l परमेश्वर हमारे विश्वास-कदम का उपयोग दूसरों को उसमें आशा रखने के लिए प्रेरित करने के लिए करेगा l
हमेशा विश्वासयोग्य परमेश्वर
जब ज़ेवियर प्राथमिक विद्यार्थी था, मैं उसे स्कूल पहुँचाने और लाने जाती थी l एक दिन, मैं उसे लेने देर से पहुंची l मैं कार पार्क करके व्यग्रतापूर्वक प्रार्थना करते हुए उसकी कक्षा की ओर भागी l मैंने उसे अपने बैग को गले लगाए हुए बेंच पर अपने टीचर के बगल में बैठा पायी l “मिजो, मुझे खेद है l क्या तुम ठीक हो?” उसने लम्बी सांस ली l “मैं ठीक हूँ, लेकिन आपके विलम्ब से मैं नाराज़ हूँ l” मैं उसे कैसे दोष दे सकती हूँ? मैं खुद पर भी क्रोधित थी l मैं अपने बेटा से प्यार करती थी लेकिन मैं जानती थी कि ऐसा कई बार होगा जब मैं उसे निराश करुँगी l मैं यह भी जानती थी कि किसी दिन वह परमेश्वर से निराश हो सकता था l इसलिए मैंने उसे कड़ी मेहनत से सिखाया कि परमेश्वर ने कभी भी अपनी प्रतिज्ञा नहीं थोड़ी और न ही तोड़ेगा l
भजन 33 हमें आनंदित प्रशंसा के साथ परमेश्वर की विश्वासयोग्यता का उत्सव मनाने के लिए उत्साहित करता है (पद.1-3) क्योंकि “यहोवा का वचन सीधा है; और उसका सब काम सच्चाई से होता है” (पद. 4) l परमेश्वर द्वारा रचित संसार को उसकी शक्ति और निर्भरता के मूर्त प्रमाण के रूप में उपयोग करते हुए (पद.5-7), भजनकार “सारी पृथ्वी के [लोगों को]” परमेश्वर की आराधना के लिए बुलाता है (पद.8) l
जब योजनाएँ विफल हो जाएँ या लोग हमें निराश करें, तो हम परमेश्वर में निराश होने के लिए प्रलोभित हो सकते हैं l हालाँकि, हम परमेश्वर की विश्वसनीयता पर भरोसा कर सकते हैं क्योंकि उसकी योजनाएँ “सर्वदा स्थिर” रहती हैं (पद.11) l हम परमेश्वर की प्रशंसा कर सकते हैं, भले ही चीजें गलत हो क्योंकि हमारा प्रेमी सृष्टिकर्ता सब कुछ और सबका पालन-पोषण करता है l परमेश्वर हमेशा विश्वासयोग्य है l
ज्यादा अनुग्रह की आवश्यकता
जताया। उसके जाने के बाद एक और महिला मेरे पास आई। " उसके बारे में चिंता मत करो। वह वही है जिसे हम ई.जी.आर.(E.G.R) कहते हैं—Extra Grace Required (ज्यादा अनुग्रह की आवश्यकता)।”
मैं हँसा। जल्द ही मैंने उस लेबल का हर बार इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जब भी मेरा किसी के साथ मतभेद होता था। वर्षों बाद, मैं उसी कलीसिया में बैठकर उस ई.जी.आर. के मृत्युलेख को सुन रहा था। पादरी ने साझा किया कि कैसे उसने पर्दे के पीछे रहकर परमेश्वर की सेवा की और उदारतापूर्वक दूसरों को दिया। मैंने परमेश्वर से मुझे उसके और किसी और के बारे में न्याय और गपशप करने के लिए क्षमा माँगा, जिसे मैंने अतीत में ई. जी. आर के रूप में लेबल किया था। आखिरकार, मुझे ज्यादा अनुग्रह का उतना ही आवश्यकता था जितना यीशु में किसी अन्य विश्वासी को।
इफिसियों 2 में, प्रेरित पौलुस कहता है कि सब विश्वासी "...स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे .." (पद.3)। परन्तु परमेश्वर ने हमें उद्धार का उपहार दिया है, एक उपहार जिसके योग्य हम ने कुछ नहीं किया, एक उपहार जिसे हम कभी अर्जित नहीं कर पाते “...ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे” (पद 9)। कोई नहीं।
जब हम इस जीवन भर की यात्रा के दौरान पल-पल परमेश्वर को समर्पित होते हैं, पवित्र आत्मा हमारे चरित्र को बदलने के लिए काम करेगा ताकि हम मसीह के चरित्र को प्रतिबिंबित कर सकें। हर विश्वासी को ज्यादा अनुग्रह की आवश्यकता है। परन्तु हम कृतज्ञ हो सकते हैं कि परमेश्वर का अनुग्रह पर्याप्त है (2 कुरिन्थियों 12:9)।
यीशु का अनुकरण करो
एक "भेष बदलने का स्वामी" इंडोनेशिया के पानी और ग्रेट बैरियर रीफ में रहता है। नकली ऑक्टोपस, अन्य ऑक्टोपस की तरह, अपने आसपास के साथ मिश्रण करने के लिए अपने त्वचा के रंग को बदल सकता है। जब ज़हरीली लायनफ़िश और यहाँ तक कि घातक समुद्री साँप जैसे जीवों की नकल करने का धमकी मिलता तो यह बुद्धिमान जीव अपना आकार, चाल-ढाल और व्यवहार भी बदलता है।
नकली ऑक्टोपस के विपरीत, यीशु में विश्वास करने वालों का उद्देश्य उस दुनिया से जो हमें घेरा है अलग दिखना है। हम उन लोगों से भयभीत महसूस कर सकते हैं जो हमसे असहमत हैं और उनमें शामिल होने के लिए प्रलोभित हो जाते हैं ताकि हमें मसीह के अनुयायियों के रूप में पहचाना न जाए। हालाँकि, प्रेरित पौलुस हमसे आग्रह करता है कि हमारे जीवन के प्रत्येक पहलू में यीशु का प्रतिनिधित्व करते हुए हम अपने शरीरों को एक “जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान” (रोमियों 12:1) के रूप में पेश करें।
मित्र या परिवार के सदस्य हम पर "इस संसार के सदृश" के अनुरूप होने का दबाव डालने का प्रयास कर सकते हैं (पद. 2)। लेकिन हम परमेश्वर की संतानों के रूप में जो हम कहते हैं उसके साथ अपने जीवन को जोड़कर हम दिखा सकते हैं कि हम किसकी सेवा करते हैं। जब हम शास्त्रों का पालन करते हैं और उनके प्रेमपूर्ण चरित्र को प्रतिबिंबित करते हैं, तो हमारा जीवन यह प्रदर्शित कर सकता है कि आज्ञाकारिता का प्रतिफल हमेशा किसी भी हानि से अधिक होता है। आज आप यीशु का अनुकरण कैसे करेंगे?
धीरे धीरे (कदम दर कदम)
कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी एक दर्जन टीमों ने, जिनमें से हर एक में तीन लोग थे, चार पैरों वाली दौड़ के लिए तैयारी की । प्रत्येक बाहरी व्यक्ति को बीच के व्यक्ति के साथ, रंगीन कपड़े से उनके टखनों और घुटनों पर बांधा गया था,तीन लोगों के प्रत्येक समूह (तिकड़ी) ने समापन रेखा (फिनिश लाइन) पर अपनी आँखें लगा रखी थीं । सीटी बजने पर टीमें आगे बढ़ीं। उनमें से अधिकांश गिर गए और अपने पैर जमाने के लिए संघर्ष करने लगे। कुछ समूहों ने चलने के बजाय कूदना चुना। कुछ ने हार मान ली। लेकिन एक टीम ने अपनी शुरुआत में देरी की, अपनी योजना को पक्का किया, और आगे बढ़ते हुये आपस में बातें करते रहें । वे रास्ते में लड़खड़ाए लेकिन आगे बढ़ते रहे और जल्द ही सभी टीमों को पार कर गए। कदम दर कदम सहयोग करने की उनकी इच्छा ने उन्हें फिनिश लाइन को एक साथ पार करने में सक्षम बनाया।
यीशु में विश्वासियों के समुदाय के भीतर परमेश्वर के लिए जीना अक्सर उतना ही निराशाजनक लगता है जितना कि चार पैरों वाली दौड़ के दौरान आगे बढ़ने की कोशिश करना। हम अक्सर उन लोगों के साथ बातचीत करते समय लड़खड़ा जाते हैं जो हमसे अलग राय रखते हैं।
आने वाले जीवन के लिए स्वयं को एकता में संरेखित करने के लिए पतरस प्रार्थना, आतिथ्य, और अपने वरदानों का उपयोग करने की बात करता है । वह यीशु में विश्वासियों से आग्रह करता है कि “वे एक दूसरे से अधिक प्रेम रखें” (1 पतरस 4:8), बिना कुडकुडाये एक दूसरे का अतिथि सत्कार करें, और परमेश्वदर के अनुग्रह के विश्वानसयोग्य भण्डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगायें (पद 10)। जब हम ईश्वर से हमें संवाद करने और सहयोग करने में मदद करने के लिए कहते हैं, तो हम दुनिया को यह दिखाने में दौड़ का नेतृत्व कर सकते हैं कि मतभेदों का आनन्द कैसे लिया जाये और एकता में एक साथ रहा जाये। ।
परमेश्वर की पहुँच में
एक अधिकारी द्वारा मेरी तलाशी लेने के बाद, मैंने जिला बंदीगृह में कदम रखा, और आगंतुकों वाले रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके भीड़ से भरे प्रतीक्षालय में बैठ गया। मैंने चुपचाप प्रार्थना की, मैं बड़ों को बेचैन और आहें भरते हुए और छोटे बच्चों को इन्तज़ार करने के बारे में शिकायत करते देख रहा था। एक घंटे से अधिक समय के बाद, एक सशस्त्र सिपाही ने मेरे नाम सहित कुछ नामों की सूची की पुकार लगाई। वह मेरे समूह को एक कमरे में ले गया और हमारी निर्धारित कुर्सियों पर बैठने के लिए हमें इशारा किया। जब कांच की मोटी खिड़की के दूसरी तरफ मेरा सौतेला बेटा कुर्सी पर आकर बैठा और उसने टेलीफोन का रिसीवर उठाया, तो मेरी बेबसी की गहराई ने मुझे अभिभूत कर दिया। परन्तु जब मैं रोया, तो परमेश्वर ने मुझे यह आश्वासन दिया कि मेरा सौतेला बेटा अभी भी परमेश्वर की पहुँच में है।
भजन संहिता 139 अध्याय में, दाऊद परमेश्वर से कहता है, “तू मेरा उठना और बैठना जानता है ... तू मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है” (पद 1-3)। एक सब कुछ जानने वाले परमेश्वर के प्रति उसकी यह उद्घोषणा परमेश्वर की घनिष्ठ देखभाल और सुरक्षा के उत्सव की ओर अगुवाई करती है (पद 5)। परमेश्वर के ज्ञान की विशालता और उसके व्यक्तिगत स्पर्श की गहराई से अभिभूत होकर, दाऊद ने दो आलंकारिक प्रश्न पूछे: “मैं तेरे आत्मा से भागकर किधर जाऊँ? या तेरे सामने से किधर भागूँ?” (पद 7)।
जब हम या हमारे प्रियजन ऐसी परिस्थितियों में फँस जाते हैं जो हमें निराश और असहाय महसूस करवाती हैं, उस समय पर परमेश्वर का हाथ मजबूत और स्थिर बना रहता है। यहाँ तक कि जब हम यह विश्वास कर लेते हैं कि हम उसके प्रेमपूर्ण छुटकारे से बहुत दूर भटक गए हैं, उस समय पर भी हम हमेशा उसकी पहुँच में होते हैं।
प्रभु देखता है, समझता है, और परवाह करता है
कभी-कभी, पुराने दर्द और थकान के साथ रहने से घर में अलग-थलग और अकेलापन महसूस होता है। मैंने अक्सर महसूस किया है कि परमेश्वर और दूसरों ने मुझे अनदेखा किया है। अपने सेवा-कुत्ते के साथ सुबह-सुबह प्रार्थना-चलने के दौरान, मैं इन भावनाओं से जूझ रहा था। मैंने दूर से एक गर्म हवा का गुब्बारा देखा। इसकी टोकरी के लोग हमारे शांत पड़ोस के सारे दृश्य का आनंद ले सकते थे, लेकिन वे वास्तव में मुझे नहीं देख पा रहे थें । जैसे-जैसे मैं अपने पड़ोसियों के घरों के पास से गुज़र रहा था, मैंने आह भरी। उन बंद दरवाजों के पीछे कितने लोग अनदेखी और महत्वहीन महसूस करते हैं? जैसे ही मैंने अपना चलना समाप्त किया, मैंने परमेश्वर से अपने पड़ोसियों को यह बताने के अवसर देने के लिए कहा कि मैं उन्हें देखता हूँ और उनकी देखभाल करता हूँ, और वह भी करता है।
परमेश्वर ने तारों की ठीक-ठीक संख्या निर्धारित की, जिनसे उसने अस्तित्व में आने की बात कही। उसने प्रत्येक तारे को एक नाम से पहचाना (भजन संहिता 147:4), एक अंतरंग कार्य जो उसके ध्यान को सबसे छोटे विवरण पर प्रदर्शित करता है। उसकी शक्ति - अंतर्दृष्टि, विवेक, और ज्ञान - की भूत, वर्तमान, या भविष्य में "कोई सीमा नहीं" है (पद. 5)।
परमेश्वर प्रत्येक हताश पुकार को सुनता है और प्रत्येक मौन आंसू को उसी तरह स्पष्ट रूप से देखता है जैसे वह संतोष और पेट की हंसी की प्रत्येक श्वास को देखता है। वह देखता है कि कब हम ठोकर खा रहे होते हैं और कब हम विजयी होकर खड़े होते हैं। वह हमारे गहरे भय, हमारे अंतरतम विचारों और हमारे बेतहाशा सपनों को समझता है। वह जानता है कि हम कहाँ थे और हम कहाँ जा रहे हैं। जैसे परमेश्वर हमें अपने पड़ोसियों को देखने, सुनने और प्यार करने में मदद करता है, हम उसे देखने, समझने और हमारी देखभाल करने के लिए उस पर भरोसा कर सकते हैं।
यीशु की तरह प्रेम करना
अटलांटा, जॉर्जिया के एक स्टेशन पर ट्रेन की प्रतीक्षा करते समय, पैंट औरनीचे तक बटन शर्ट पहने एक युवक एक बेंच पर बैठा था। जब वह अपनी टाई के साथ संघर्ष कर रहा था, तो एक वृद्ध महिला ने अपने पति को मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया। जब बुजुर्ग व्यक्ति झुका और युवक को टाई बांधने का तरीका सिखाने लगा, तो एक अजनबी ने तीनों की तस्वीर ले ली। जब यह तस्वीर ऑनलाइन वायरल हुई, तो कई दर्शकों ने दयालुता के एकाएक प्रदर्शन की शक्ति के बारे में टिप्पणियां लिखी।
यीशु में विश्वासियों के लिए, दूसरों के प्रति दया उस आत्म-बलिदान चिंता को दर्शाती है जो उसने हम जैसे लोगों के लिए दिखाई। यह परमेश्वर के प्रेम की अभिव्यक्ति है और वह चाहता है कि उसके चेले इसे जिए: "हमें एक दूसरे से प्रेम रखना चाहिए" (1 यूहन्ना 3:11 पर जोर दिया गया है)। यूहन्ना भाई या बहन से घृणा करने को हत्या के समान ठहराता है (पद 15)। फिर जो कार्य में प्रेम के उदाहरण के रूप में है मसीह की ओर मुड़ता है (पद. 16)।
निःस्वार्थ प्रेम को बलिदान का एक असाधारण प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। निःस्वार्थ प्रेम के लिए बस यह आवश्यक है कि हम परमेश्वर के उन सभी जो उसके स्वरुप के है मूल्य को स्वीकार करें और उनकी आवश्यकताओं को अपनी जरूरतों से ऊपर रखें। . . रोज रोज। वे सामान्य प्रतीत होने वाले क्षण जब हम दूसरों की जरूरतों पर ध्यान देने के लिए पर्याप्त देखभाल करते हैं और जो हम मदद कर सकते हैं वह करते हैं, निस्वार्थ होते हैं, जब हम प्रेम से प्रेरित होते हैं। जब हम अपने व्यक्तिगत स्थान से परे देखते हैं, दूसरों की सेवा करने और देने के लिए अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलते हैं, खासकर जब हमें देने की ज़रूरत नहीं होती है, तो हम यीशु की तरह प्रेम करते हैं I
स्तुति के आँसू
वर्षों पहले, मैंने अपनी माँ की देखभाल की थी क्योंकि वह धर्मशाला में थी (गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए एक विशेष अस्पताल)। मैंने उन चार महीनों के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिया कि उसने मुझे उनकी देखभाल करने वाले के रूप में सेवा करने का मौका दिया और उस दुःखी प्रक्रिया में उससे सहायता मांगी। अपनी मिली-जुली भावनाओं से जूझते हुए मुझे अक्सर परमेश्वर की स्तुति करने में संघर्ष होता था। लेकिन जैसे ही मेरी माँ ने अपनी आखिरी सांस ली और मैं बेकाबू होकर रोया, मैंने फुसफुसाया, "हल्लिलूयाह"। कई सालो तक मैं ने खुद को दोषी समझा ऐसे भयानक क्षण में परमेश्वर की स्तुति करने के लिए , जब तक कि मैंने भजन 30 को करीब से नहीं देखा।
"मंदिर के समर्पण के लिए" दाऊद के गीत में, उसने परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और दया के लिए उसकी आराधना की (पद. 1-3)। उसने दूसरों को "उसके पवित्र नाम की स्तुति" करने के लिए प्रोत्साहित किया (पद. 4)। तब दाऊद पाता है कि परमेश्वर कठिनाई और आशा को कितनी घनिष्ठता से जोड़ता है (पद. 5)। उसने दुःख और आनन्द के समय को स्वीकार किया, सुरक्षित महसूस करने और निराश होने के समय को स्वीकार किया (पद. 6-7)। मदद के लिए उसकी पुकार परमेश्वर पर भरोसे के साथ बनी रही (पद. 7-10)। दाऊद के रोने और नाचने, शोक और आनंद के क्षणों में उसकी स्तुति की प्रतिध्वनि सुनाई देती है (पद 11)। मानो कष्ट सहने के रहस्य और जटिलता को स्वीकार करते हुए और परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर आशा रखते हुए, दाऊद ने परमेश्वर के प्रति अपनी अंतहीन भक्ति को प्रकट किया (पद. 12)।
दाऊद की तरह, हम गा सकते हैं, "हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं तेरी स्तुति सदा करता रहूंगा" (पद. 12)। चाहे हम खुश हों या आहत, परमेश्वर हमें उस पर अपना भरोसा रखने में मदद कर सकता है और खुशी के नारे और स्तुति के आँसुओं के साथ उसकी आराधना करने में हमारी अगुवाई कर सकता है।