परमेश्वर की पहुँच में
एक अधिकारी द्वारा मेरी तलाशी लेने के बाद, मैंने जिला बंदीगृह में कदम रखा, और आगंतुकों वाले रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके भीड़ से भरे प्रतीक्षालय में बैठ गया। मैंने चुपचाप प्रार्थना की, मैं बड़ों को बेचैन और आहें भरते हुए और छोटे बच्चों को इन्तज़ार करने के बारे में शिकायत करते देख रहा था। एक घंटे से अधिक समय के बाद, एक सशस्त्र सिपाही ने मेरे नाम सहित कुछ नामों की सूची की पुकार लगाई। वह मेरे समूह को एक कमरे में ले गया और हमारी निर्धारित कुर्सियों पर बैठने के लिए हमें इशारा किया। जब कांच की मोटी खिड़की के दूसरी तरफ मेरा सौतेला बेटा कुर्सी पर आकर बैठा और उसने टेलीफोन का रिसीवर उठाया, तो मेरी बेबसी की गहराई ने मुझे अभिभूत कर दिया। परन्तु जब मैं रोया, तो परमेश्वर ने मुझे यह आश्वासन दिया कि मेरा सौतेला बेटा अभी भी परमेश्वर की पहुँच में है।
भजन संहिता 139 अध्याय में, दाऊद परमेश्वर से कहता है, “तू मेरा उठना और बैठना जानता है ... तू मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है” (पद 1-3)। एक सब कुछ जानने वाले परमेश्वर के प्रति उसकी यह उद्घोषणा परमेश्वर की घनिष्ठ देखभाल और सुरक्षा के उत्सव की ओर अगुवाई करती है (पद 5)। परमेश्वर के ज्ञान की विशालता और उसके व्यक्तिगत स्पर्श की गहराई से अभिभूत होकर, दाऊद ने दो आलंकारिक प्रश्न पूछे: “मैं तेरे आत्मा से भागकर किधर जाऊँ? या तेरे सामने से किधर भागूँ?” (पद 7)।
जब हम या हमारे प्रियजन ऐसी परिस्थितियों में फँस जाते हैं जो हमें निराश और असहाय महसूस करवाती हैं, उस समय पर परमेश्वर का हाथ मजबूत और स्थिर बना रहता है। यहाँ तक कि जब हम यह विश्वास कर लेते हैं कि हम उसके प्रेमपूर्ण छुटकारे से बहुत दूर भटक गए हैं, उस समय पर भी हम हमेशा उसकी पहुँच में होते हैं।
प्रभु देखता है, समझता है, और परवाह करता है
कभी-कभी, पुराने दर्द और थकान के साथ रहने से घर में अलग-थलग और अकेलापन महसूस होता है। मैंने अक्सर महसूस किया है कि परमेश्वर और दूसरों ने मुझे अनदेखा किया है। अपने सेवा-कुत्ते के साथ सुबह-सुबह प्रार्थना-चलने के दौरान, मैं इन भावनाओं से जूझ रहा था। मैंने दूर से एक गर्म हवा का गुब्बारा देखा। इसकी टोकरी के लोग हमारे शांत पड़ोस के सारे दृश्य का आनंद ले सकते थे, लेकिन वे वास्तव में मुझे नहीं देख पा रहे थें । जैसे-जैसे मैं अपने पड़ोसियों के घरों के पास से गुज़र रहा था, मैंने आह भरी। उन बंद दरवाजों के पीछे कितने लोग अनदेखी और महत्वहीन महसूस करते हैं? जैसे ही मैंने अपना चलना समाप्त किया, मैंने परमेश्वर से अपने पड़ोसियों को यह बताने के अवसर देने के लिए कहा कि मैं उन्हें देखता हूँ और उनकी देखभाल करता हूँ, और वह भी करता है।
परमेश्वर ने तारों की ठीक-ठीक संख्या निर्धारित की, जिनसे उसने अस्तित्व में आने की बात कही। उसने प्रत्येक तारे को एक नाम से पहचाना (भजन संहिता 147:4), एक अंतरंग कार्य जो उसके ध्यान को सबसे छोटे विवरण पर प्रदर्शित करता है। उसकी शक्ति - अंतर्दृष्टि, विवेक, और ज्ञान - की भूत, वर्तमान, या भविष्य में "कोई सीमा नहीं" है (पद. 5)।
परमेश्वर प्रत्येक हताश पुकार को सुनता है और प्रत्येक मौन आंसू को उसी तरह स्पष्ट रूप से देखता है जैसे वह संतोष और पेट की हंसी की प्रत्येक श्वास को देखता है। वह देखता है कि कब हम ठोकर खा रहे होते हैं और कब हम विजयी होकर खड़े होते हैं। वह हमारे गहरे भय, हमारे अंतरतम विचारों और हमारे बेतहाशा सपनों को समझता है। वह जानता है कि हम कहाँ थे और हम कहाँ जा रहे हैं। जैसे परमेश्वर हमें अपने पड़ोसियों को देखने, सुनने और प्यार करने में मदद करता है, हम उसे देखने, समझने और हमारी देखभाल करने के लिए उस पर भरोसा कर सकते हैं।
यीशु की तरह प्रेम करना
अटलांटा, जॉर्जिया के एक स्टेशन पर ट्रेन की प्रतीक्षा करते समय, पैंट औरनीचे तक बटन शर्ट पहने एक युवक एक बेंच पर बैठा था। जब वह अपनी टाई के साथ संघर्ष कर रहा था, तो एक वृद्ध महिला ने अपने पति को मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया। जब बुजुर्ग व्यक्ति झुका और युवक को टाई बांधने का तरीका सिखाने लगा, तो एक अजनबी ने तीनों की तस्वीर ले ली। जब यह तस्वीर ऑनलाइन वायरल हुई, तो कई दर्शकों ने दयालुता के एकाएक प्रदर्शन की शक्ति के बारे में टिप्पणियां लिखी।
यीशु में विश्वासियों के लिए, दूसरों के प्रति दया उस आत्म-बलिदान चिंता को दर्शाती है जो उसने हम जैसे लोगों के लिए दिखाई। यह परमेश्वर के प्रेम की अभिव्यक्ति है और वह चाहता है कि उसके चेले इसे जिए: "हमें एक दूसरे से प्रेम रखना चाहिए" (1 यूहन्ना 3:11 पर जोर दिया गया है)। यूहन्ना भाई या बहन से घृणा करने को हत्या के समान ठहराता है (पद 15)। फिर जो कार्य में प्रेम के उदाहरण के रूप में है मसीह की ओर मुड़ता है (पद. 16)।
निःस्वार्थ प्रेम को बलिदान का एक असाधारण प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। निःस्वार्थ प्रेम के लिए बस यह आवश्यक है कि हम परमेश्वर के उन सभी जो उसके स्वरुप के है मूल्य को स्वीकार करें और उनकी आवश्यकताओं को अपनी जरूरतों से ऊपर रखें। . . रोज रोज। वे सामान्य प्रतीत होने वाले क्षण जब हम दूसरों की जरूरतों पर ध्यान देने के लिए पर्याप्त देखभाल करते हैं और जो हम मदद कर सकते हैं वह करते हैं, निस्वार्थ होते हैं, जब हम प्रेम से प्रेरित होते हैं। जब हम अपने व्यक्तिगत स्थान से परे देखते हैं, दूसरों की सेवा करने और देने के लिए अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलते हैं, खासकर जब हमें देने की ज़रूरत नहीं होती है, तो हम यीशु की तरह प्रेम करते हैं I
स्तुति के आँसू
वर्षों पहले, मैंने अपनी माँ की देखभाल की थी क्योंकि वह धर्मशाला में थी (गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए एक विशेष अस्पताल)। मैंने उन चार महीनों के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिया कि उसने मुझे उनकी देखभाल करने वाले के रूप में सेवा करने का मौका दिया और उस दुःखी प्रक्रिया में उससे सहायता मांगी। अपनी मिली-जुली भावनाओं से जूझते हुए मुझे अक्सर परमेश्वर की स्तुति करने में संघर्ष होता था। लेकिन जैसे ही मेरी माँ ने अपनी आखिरी सांस ली और मैं बेकाबू होकर रोया, मैंने फुसफुसाया, "हल्लिलूयाह"। कई सालो तक मैं ने खुद को दोषी समझा ऐसे भयानक क्षण में परमेश्वर की स्तुति करने के लिए , जब तक कि मैंने भजन 30 को करीब से नहीं देखा।
"मंदिर के समर्पण के लिए" दाऊद के गीत में, उसने परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और दया के लिए उसकी आराधना की (पद. 1-3)। उसने दूसरों को "उसके पवित्र नाम की स्तुति" करने के लिए प्रोत्साहित किया (पद. 4)। तब दाऊद पाता है कि परमेश्वर कठिनाई और आशा को कितनी घनिष्ठता से जोड़ता है (पद. 5)। उसने दुःख और आनन्द के समय को स्वीकार किया, सुरक्षित महसूस करने और निराश होने के समय को स्वीकार किया (पद. 6-7)। मदद के लिए उसकी पुकार परमेश्वर पर भरोसे के साथ बनी रही (पद. 7-10)। दाऊद के रोने और नाचने, शोक और आनंद के क्षणों में उसकी स्तुति की प्रतिध्वनि सुनाई देती है (पद 11)। मानो कष्ट सहने के रहस्य और जटिलता को स्वीकार करते हुए और परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर आशा रखते हुए, दाऊद ने परमेश्वर के प्रति अपनी अंतहीन भक्ति को प्रकट किया (पद. 12)।
दाऊद की तरह, हम गा सकते हैं, "हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं तेरी स्तुति सदा करता रहूंगा" (पद. 12)। चाहे हम खुश हों या आहत, परमेश्वर हमें उस पर अपना भरोसा रखने में मदद कर सकता है और खुशी के नारे और स्तुति के आँसुओं के साथ उसकी आराधना करने में हमारी अगुवाई कर सकता है।
परमेश्वर के वचन की सामर्थ्य
1968 में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर, अपोलो 8 अंतरिक्ष यात्री-फ्रैंक बोरमैन, जिम लोवेल और बिल एंडर्स चंद्र कक्षा में प्रवेश करने वाले पहले इंसान बने। जैसे उन्होंने चाँद की परिक्रमा दस बार की, उन्होंने चाँद और पृथ्वी की तस्वीरों को साझा किया। एक लाइव प्रसारण के दौरान, उन्होंने बारी-बारी से उत्पत्ति 1 को पढ़ा। चालीसवीं वर्षगांठ समारोह में, बोरमैन ने कहा, “हमें बताया गया था कि क्रिसमस की पूर्व संध्या पर हमारे पास मानव आवाज सुनने वाले सबसे ज्यादा दर्शक होंगे। और नासा से हमें केवल यही निर्देश मिला था कि हम कुछ उचित करें।” अपोलो 8 अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा बोले गए बाइबल के पद आज भी ऐतिहासिक रिकॉर्डिंग सुनने वाले लोगों के दिलों में सच्चाई के बीज बोते हैं।
यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा, प्रभु कहते हैं “कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; ”(यशायाह 55:3)। उद्धार के अपने मुफ्त प्रस्ताव को प्रकट करते हुए, वह हमें अपने पापों से मुड़ने और उनकी दया और क्षमा को ग्रहण करने के लिए आमंत्रित करते हैं (vv. 6-7)। वह अपने विचारों और कार्यों के दिव्य अधिकार की घोषणा करते हैं, जो वास्तव में समझने के लिए हमारे लिए बहुत विशाल है (vv. 8-9)।
फिर भी, परमेश्वर हमें पवित्रशास्त्र के जीवन बदलने वाले शब्दों को बाँटने का अवसर देते हैं, जो यीशु को केन्द्रित करता, और पुष्टि करता है कि अपने लोगों की आत्मिक बढ़ौती के लिए वे ही जिम्मेदार है (vv.10-13)।
पवित्र आत्मा हमें सुसमाचार बाँटने में मदद करता है जैसे पिता अपनी सिद्ध योजना और गति के अनुसार अपने सारे वादों को पूरा करते तो।
आपसी प्रोत्साहन
अधिक चिकित्सा असफलताओं से मारे जाने के, एक और सप्ताह के बाद, मैं सोफे पर गिर पड़ा । मैं किसी चीज के बारे में सोचना नहीं चाहता था। मैं किसी से बात करना नहीं चाहता था। मैं प्रार्थना तक नहीं कर पा रहा था। जैसे ही मैंने टीवी ऑन किया निराशा और शंका ने मुझे भारी कर दिया। मैंने एक विज्ञापन देखना शुरू किया जो एक लड़की को अपने छोट्टे भाई से बात करते हुए दिखा रहा था। “तुम एक चैंपियन हो,” जैसे-जैसे वह इसे दृढ़ता के साथ कहती रही, उसकी और साथ में मेरी मुस्कराहट बढ़ गई।
परमेश्वर के लोगों ने हमेशा निराशा और संदेह से संघर्ष किया है। भजन 95 को उद्धृत करते हुए, जो यह पुष्टि करता है कि परमेश्वर की आवाज पवित्र आत्मा के द्वारा सुनी जा सकती है, इब्रानियों के लेखक ने यीशु में विश्वासियों को इस्राएलियों द्वारा की गई उन गलतियों से बचने के लिए आगाह किया जो उन्होंने जंगल में घूमते समय करी थी (इब्रानियों 3:7-11)। “ भाइयो, चौकस रहो कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो तुम्हें जीवते परमेश्वर से दूर हटा ले जाए।” उसने लिखा “हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो,” (12-13)।
मसीह में सुरक्षित हमारे आशा की जीवन रेखा के साथ, हम ऊर्जा से भरपूर ईंधन अनुभव कर सकते हैं जिसे हमें बनाए रखने की आवश्यकता है: विश्वासियों की संगति में आपसी प्रोत्साहन (v.13)। जब एक विश्वासी संदेह करता है, दूसरे विश्वासी प्रतिज्ञान और जवाबदेही की पेशकश कर सकते हैं। जैसे-जैसे परमेश्वर हमें सामर्थी बनाते हैं, उसके लोग, हम एक दूसरे को आपसी प्रोत्साहन की सामर्थ प्रदान कर सकते हैं।
स्थायी आशा
डॉक्टरों ने चार वर्षीय सोलोमन का ड्यूकेन मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne Muscular Dystrophy) मांशपेशियों का कमज़ोर व पतली होने की बीमारी के साथ निदान किया l एक साल बाद, डॉक्टरों ने परिवार के साथ व्हीलचेयर के सम्बन्ध में चर्चा की l लेकिन सोलोमन ने विरोध किया कि उसे इसकी ज़रूरत नही पड़ेगी l परिवार और मित्रों ने उसके लिए प्रार्थना की और एक पेशवर प्रशिक्षित सेवा कुत्ते (प्रोफेशनलली ट्रेन्ड सर्विस डॉग/ professionally trained service dog) के लिए धन जुटाया ताकि यथासंभव लम्बे समय तक सोलोमन को व्हीलचेयर से बाहर रखने में सहायता मिल सके l टेल्स of लाइफ(Tails of Life) संगठन, जिसने मेरे कुत्ते कैली को प्रशिक्षित किया था वर्तमान में एक और कुत्ते को सोलोमन की सेवा करने के लिए तैयार कर रहा है l
यद्यपि सोलोमन अपने इलाज को स्वीकार करता है, अक्सर परमेश्वर की प्रशंसा में एक गीत गाता है, कुछ दिन कठिन भी होते हैं l उन कठिन दिनों में से एक में, सोलोमन ने अपनी माँ को गले लगाकर बोला, “मुझे ख़ुशी है कि स्वर्ग में कोई ड्यूकेन बीमारी नहीं है l”
बीमारी के अपक्षयी प्रभाव अनंतकाल के इस पक्ष के सभी लोगों को प्रभावित करते हैं l लेकिन, सोलोमन की तरह, हमारे पास एक स्थायी आशा है जो उन अपरिहार्य कठिन दिनों में हमारे संकल्प को मजबूत कर सकती है l परमेश्वर हमें “नया आकाश और नयी पृथ्वी” की प्रतिज्ञा देता है (प्रकाशितवाक्य 21:1) l हमारा सृष्टिकर्ता हमारे साथ अपना घर बनाकर हमारे बीच में “निवास” करेगा (पद.3) l वह हमारी आँखों से “सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी” (पद.4) l जब प्रतीक्षा “बहुत कठिन” या “बहुत लम्बी” लगती हो हम शांति का अनुभव कर सकते हैं क्यंकि परमेश्वर की प्रतिज्ञा पूरी होगी l
एक साथ बेहतर
मेरी, एक अकेली कामकाजी माँ, शायद ही कभी चर्च या बाइबल अध्ययन से चूकती थी l प्रत्येक सप्ताह, वह अपने पांच बच्चों के साथ बस से चर्च आना- जाना करती थी और वहां तैयारी में और सफाई करने में सहायता करती थीI
एक रविवार, पास्टर ने मेरी से कहा कि चर्च के कुछ सदस्यों ने उसके परिवार के लिए उदार उपहार दिए हैं l एक पति-पत्नी ने उस परिवार को कम किराये पर एक घर उपलब्ध कराया l एक और जोड़े ने अपनी कॉफ़ी की दूकान में उसे लाभदायक नौकरी दी l एक युवक ने उसे मरम्मत की हुयी अपनी एक पुरानी कार दी और व्यक्तिगत मैकेनिक के रूप में सेवा देने के लिए प्रतिज्ञा की l मेरी ने परमेश्वर और परस्पर सेवा में समर्पित समुदाय में रहने के आनंद के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिया l
यद्यपि हम मेरी के चर्च परिवार की तरह उदारता से देने में सक्षम न हों, परन्तु, परमेश्वर के लोगों को परस्पर मदद करने के लिए बनाया गया है l सुसमाचार लेखक लूका यीशु में विश्वासियों का “प्रेरितों से शिक्षा पाने, संगति रखने में . . . लौलीन” रहने का वर्णन करता है (प्रेरितों 2:42) l जब हम सहायता करने के साथ साथ अपने संसाधनों को भी जोड़ देते हैं, तब हम यीशु में होकर, आरंभिक विश्वासियों की तरह ज़रूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं (पद.44-45) l जब हम परमेश्वर और एक दूसरे के साथ की निकटता में बढ़ते है, तब हम एक दूसरे की देखभाल कर सकते हैं l परमेश्वर के लोगों के कार्यों द्वारा उसके प्रेम की साक्षी का प्रदर्शन दूसरों को यीशु तक पहुंचा सकता I(46-47) l
हम एक मुस्कराहट और दयालु कार्य द्वारा दूसरों की सेवा कर सकते हैं l हम वित्तीय उपहार(गिफ्ट मनी) या प्रार्थना की पेशकश कर सकते हैं l जब परमेश्वर हमारे भीतर और हमारे द्वारा कार्य करता है, तो हम सरलता से एक साथ बेहतर होते हैं l
आनन्दित होने के कारण
जब मिस ग्लेंडा चर्च सभा क्षेत्र में आईं, तो उनके संक्रामक आनंद ने कमरे को भर दिया। वह अभी एक कठिन चिकित्सा प्रक्रिया से उबरी थी। जैसे ही चर्च सभा समाप्त होने के बाद सामान्य अभिवादन के लिए वह मेरी तरफ आयी, मैंने परमेश्वर को धन्यवाद दिया इतने वर्षों में उन सभी समयों के लिए जब वह मेरे साथ रोती, मुझे कोमलता से सुधारती और मुझे प्रोत्साहन देती। उन्होंने मुझसे माफी भी मांगी है जब उन्हें लगा कि उन्होंने मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। कैसी भी परिस्थिति हो, उन्होंने हमेशा मुझे अपने संघर्षों को ईमानदारी से साझा करने के लिए आमंत्रित करती है और मुझे याद दिलाती है कि हमारे पास परमेश्वर की स्तुति करने के कई कारण हैं।
मामा ग्लेंडा, जैसे की वह मुझे उन्हें बुलाने देती है, उन्होंने मुझे कोमलता से अपने गले लगा लिया। "हाय, बेबी," उन्होंने कहा। हमने एक छोटी बातचीत का आनंद लिया और एक साथ प्रार्थना की। फिर वह चली गई - हमेशा की तरह गुनगुनाती और गाती हुई, किसी और को आशीष देने की तलाश में।
भजन संहिता 64 में, दाऊद अपनी शिकायतों और चिंताओं के साथ साहसपूर्वक परमेश्वर के पास पहुँचा (पद 1)। उसने अपने आस-पास में हो रही दुष्टता से निराश होकर आवाज़ उठाई (पद 2-6)। उसने परमेश्वर की शक्ति या उसके वादों की विश्वसनीयता में विश्वास नहीं खोया (पद 7-9)। वह जानता था कि एक दिन धर्मी लोग यहोवा के कारण आनन्दित होंगे, और उसकी शरण लेंगे; सब सीधे मन के लोग उस की बड़ाई करेंगे!” (पद 10 )।
यीशु की वापसी की प्रतीक्षा करते हुए, हम कठिन समय का सामना करेंगे। लेकिन हमारे पास हमेशा परमेश्वर द्वारा बनाए गए प्रत्येक दिन में आनन्दित होने के कारण होंगे।