
हम अकेले नहीं हैं
फ्रेड्रिक ब्राउन की लघु रोमांचक कहानी “नॉक”(दस्तक/Knock) में उन्होंने लिखा, पृथ्वी (गृह/planet) पर का आखिरी आदमी एक कमरे में अकेला बैठा थाl दरवाजे पर दस्तक हुयीl” हाँ! वे कौन हो सकते हैं,और वे क्या चाहते हैं? उसके लिए कौन रहस्यमय प्राणी आया है? आदमी अकेला नहीं है l
हम भी नहीं हैं l
लौदीकिया की कलीसिया ने अपने द्वार पर दस्तक सुनीI (प्रकाशितवाक्य 3:20) उनके लिए कौन सा अलौकिक प्राणी आया था? उसका नाम यीशु था, “प्रथम और अंतिम . . . जो जीवता हैI” (1:17-18) उसकी आखें आग की तरह प्रज्वलित थीं, और उसका मुख “ऐसा प्रज्वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है” (पद.16) जब उसके सबसे अच्छे मित्र यूहन्ना ने उसकी महिमा की एक झलक देखी, तो वह “उसके पांवों पर मुर्दा सा गिर पड़ा” (पद.17) मसीह में विश्वास का आरम्भ परमश्वर के भय से होती हैl
हम अकेले नहीं हैं,और यह सुकून देने वाला भी हैl यीशु “परमेश्वर की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्व की छाप है,और सब वस्तुओं को अपनी सामर्थ्य के वचन से संभालता है”(इब्रानियों 1:3) फिर भी मसीह हमें मारने के लिए नहीं बल्कि हमसे प्रेम करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करता हैl उसका निमंत्रण सुने, “यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा, और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20) हमारा विश्वास डर से शुरू होता है—दरवाजे पर कौन है?—और यह एक स्वागत और मजबूत आलिंगन में समाप्त होता है l यीशु हमेशा हमारे साथ रहने की प्रतिज्ञा करता है, भले ही हम पृथ्वी पर अंतिम व्यक्ति हों l ईश्वर का धन्यवाद हो, हम अकेले नहीं हैं l

पवित्रशास्त्र प्रशिक्षण
1800 के अंत में, विभिन्न स्थानों के लोगों ने एक ही समय में एक सी सेवकाई संसाधनों का विकास किया l पहला 1877 में मोंट्रियल,कनाडा में थाl 1898 में, न्यूयार्क शहर में एक और विचार/प्रत्यय शुरू की गयी l1922 तक, इनमें से कुछ पांच हज़ार कार्यक्रम हर वर्ष गर्मियों में उत्तरी अमेरिका में सक्रिय थे l
इस प्रकार वेकेशन बाइबल स्कूल(VBS) का प्रारंभिक इतिहास शुरू हुआl जिस जुनून(passion) उन VBS अग्रदूतों को प्रेरित किया, वह युवा लोगों के लिए बाइबल जानने की इच्छा थी l
पौलुस को अपने युवा शिष्य, तीमुथियुस के लिए भी ऐसा ही जुनून था, यह लिखते हुए कि “सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है” और “और हर एक भले काम के लिए” तैयार करता हैI (2 तीमुथियुस 3:16-17) लेकिन यह केवल हितकारी सुझाव नहीं था कि “अपनी बाइबल पढ़ना अच्छा है l” पौलुस की सलाह सख्त चेतावनी का पालन करती है कि “अंतिम दिनों में कठिन समय आएँगे” (पद.1) झूठे शिक्षकों के साथ जो “सत्य की पहचान कभी नहीं” कर पाते हैं (पद.7)यह ज़रूरी है कि हम पवित्रशास्त्र के द्वारा स्वयं की रक्षा करें, क्योंकि यह हमें हमारे उद्धारकर्ता के ज्ञान में डुबो(ध्यानमग्न) देता है, हमें “मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धिमान बना सकता है” (पद.15)
बाइबल का अध्ययन करना केवल बच्चों के लिए ही नहीं है; यह वयस्कों के लिए भी है l और यह सिर्फ गर्मियों के अवकाश के लिए नहीं है; यह हर दिन के लिए हैं l पौलुस ने तीमुथियुस को लिखा, “बचपन से पवित्रशास्त्र तेरा जाना हुआ है” (पद.15), लेकिन आरम्भ करने के लिए कभी देर नहीं होती l हम जीवन के किसी भी अवस्था में हों, बाइबल का ज्ञान हमें यीशु से जोड़ता है l यह हम सबके लिए परमेश्वर का VBS पाठ है l

परमेश्वर के सामने चुप रहना
एक जीवित व्यक्ति की पहली तस्वीर 1838 में लुई डागुएरे द्वारा ली गयी थी l तस्वीर में दोपहर के मध्य पेरिस में अन्यथा खाली सड़क पर एक आकृति को दर्शाया गया है l लेकिन इसके बारे में एक स्पष्ट रहस्य है; सड़क और फुटपाथों पर दिन के उस समय गाड़ियों और पैदल चलने वालों के यातायात से हलचल होनी चाहिए थी, फिर भी कोई दिखाई नहीं देता है l
वह आदमी अकेला नहीं था l लोग और घोड़े भी बुलवर्ड ड्यू टेम्पल(Boulevard du Temple) में मौजूद थे, वह लोकप्रिय क्षेत्र जहाँ यह तस्वीर ली गयी थी l वे तस्वीर में दिखे ही नहीं l तस्वीर को तैयार करने के लिए संसर्ग समय(exposure)(जिसे डागरेरोटाइप के रूप में जाना जाता है) को एक छवि लेने में सात मिनट लग गए, जो उस समय के दौरान स्थिर/अचल रहना था l ऐसा प्रतीत होता है कि फूटपाथ पर मौजूद व्यक्ति अकेला व्यक्ति था जिसकी फोटो खिंची गयी थी क्योकि वह ही स्थिर खड़ा था—वह अपने जूते पोलिश करा रहा था l
कभी-कभी स्थिरता वह कर देती है जो गति और प्रयास नहीं कर सकते l भजन 46:10 में परमेश्वर अपने लोगों से कहता है, “चुप हो जाओ और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ l” यहाँ तक कि जब राष्ट्र “झल्ला उठते हैं” (पद.6) और “पृथ्वी” चाहे उलट जाए (पद.2), तब भी जो चुपचाप उस पर भरोसा करते हैं, वे उसमें “अति सहज से मिलनेवाला सहायक” पाएँगे (पद.1)
इब्रानी भाषा की क्रिया(verb) “चुप रहो” का अनुवाद “प्रयास करना बंद करो” भी किया जा सकता है l जब हम अपने सीमित प्रयासों पर निर्भर रहने के बजाय परमेश्वर में विश्राम करते हैं, तो हम पाते हैं कि वह हमारा अजेय “शरणस्थान और बल” हैI (पद.1)

परिवर्तन का खेल
हाथ मिलाने ने बहुत कुछ कह दियाl1963 में मार्च की एक रात को, कॉलेज के दो बास्केटबॉल खिलाड़ियों ने—एक अश्वेत, एक श्वेत—अलगाववादियों की नफरत को झुठलाया और हाथ मिलाकर, मिसिसिपी राज्य के इतिहास में पहली बार चिन्हित किया कि इसकी सभी श्वेत पुरुषों की टीम एक एकीकृत(integrated) टीम के खिलाफ खेलीl एक राष्ट्रीय टूर्नामेंट में लोयोला यूनिवर्सिटी शिकागो के खिलाफ “परिवर्तन के खेल/game of change” में प्रतिस्पर्धा करने के लिए,मिसिसिपी राज्य टुकड़ी(squad) ने अपने राज्य को छोड़ने के लिए नकली खिलाड़ियों का उपयोग करके उन्हें रोकने के लिए निषेधाज्ञा से परहेज किया l इस बीच, लोयोला के अश्वेत खिलाड़ियों ने, पॉपकॉर्न और बर्फ की मार, और यात्रा के दौरान बंद दरवाजों का सामना करते हुए, पूरे सीजन(उप्युक्त् काल/ अवधि) में नस्लीय अपमान सहा था l
इसके बावजूद युवक खेलते रहे l “लोयोला रैम्बलर्स” ने “मिसिसिपी स्टेट बुलडॉग” को 61-51 से पराजित किया, और लोयोला ने आख़िरकार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत ली l लेकिन उस रात वास्तव में किसकी जीत हुयी? नफरत से प्यार की ओर एक कदम l जैसा कि यीशु ने सिखाया, “अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, जो तुम से बैर करें, उनका भला करो” (लूका 6:27)
परमेश्वर का निर्देश जीवन बदलने वाली अवधारणा थी l अपने शत्रुओं से प्रेम करने के लिए जैसा कि मसीह ने सिखाया है, हमें परिवर्तन के उनके क्रांतिकारी आदेश का पालन करना चाहिए l जैसा कि पौलुस ने लिखा, “यदि कोई मसीह में है, तो वह नयी सृष्टि है : पुरानी बातें बीत गयी हैं; देखो, सब बातें नयी हो गयी हैं” (2 कुरिन्थियों 5:17) लेकिन हमारे भीतर उसका नया तरीका पुराने को कैसे पराजित करता है? प्रेम से l फिर, एक दूसरे में, हम अंततः उसे देख सकते हैं l
जो मायने रखता है उसके लिए दौड़ना
युक्रेन की घिरी हुयी राजधानी कीव में अपना घर छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद 2022 में पोस्ट किया गया, मेरी सहेली इरा के स्टेटस अपडेट पर आँसू न आना असंभव था l उसने एक दौड़ प्रतियोगिता(running event) पूरा करने के बाद अपने देश का झंडा उठाते हुए खुद की एक पुरानी तस्वीर साझा की l उसने लिखा, “हम सभी अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के साथ दौड़ रहे हैं जिसे जीवन कहा जाता है l चलिए इसे इन दिनों उससे भी बेहतर दौड़ते हैं l ऐसी चीज़ के साथ जो हमारे दिलों में कभी नहीं मरती l” बाद के दिनों में, मैंने देखा कि मेरी सहेली ने कई तरीकों से उस दौड़ को दौड़ना जारी रखा, क्योंकि उसने हमें अपने देश में पीड़ित लोगों के लिए प्रार्थना करने और उनका समर्थन करने के बारे में अपडेट रखाl (हालात की ताज़ा जानकारी से अवगत कराये रखा)
इरा के शब्दों ने इब्रानियों 12 में विश्वासियों को “धीरज से दौड़ने” (पद.1) की बुलाहट में नयी गहराई दी l यह बुलाहट अध्याय 11 के मार्मिक विवरण के बाद है विश्वास के नायकों,“गवाहों का बड़ा बादल” (12:1) जो साहसी,निरंतर विश्वास के साथ जीते थे—यहाँ तक कि अपने जीवन को जोखिम में डालकर भीI(11:33-38)हालाँकि उन्होंने “सिर्फ दूर से देखा ....और [परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं] को दूर से मान लिया” (पद.13) वे उस अनंत वस्तु के लिए जी रहे थे, जो कभी नहीं मिटती है l
यीशु में सभी विश्वासियों को उसी तरह जीने के लिए बुलाया गया है l क्योंकि शालोम—परमेश्वर के राज्य की शांति का फलना-फूलना—हमारा सब कुछ उसके लिए देने के लायक है l और यह मसीह का उदाहरण और सामर्थ्य ही है जो हमें संभालता है (12:2-3)