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एक दूसरे की सहायता करें

जब एक कम स्थापित स्कूल की क्रिकेट टीम क्रिकेट टीम क्रिकेट जोनल टूर्नामेंट(zonal tournament) के लिए मैदान में उतरी, तो स्टैंड में मौजूद प्रशंसकों ने कमजोर टीम के लिए उत्साह बढ़ाया l इस टीम से पहले दौर से आगे बढ़ने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उन्होंने ऐसा किया l और अब उन्होंने स्टैंड से अपने स्कूल के गाने की आवाज़ सुनी जो उन्हें उत्साहित कर रही थी, हालाँकि उनके साथ कोई बैंड नहीं था l उनके प्रतिद्वंद्वी स्कूल बैंड ने हालाँकि जीत का पक्ष लिया था, लेकिन खेल से कुछ मिनट पहले उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी का स्कूल गाना सीख लिया था l बैंड केवल वे गाने बजा सकता था, जिन्हें वे जानते थे, लेकिन उन्होंने दूसरे स्कूल और दूसरी टीम की सहायता करने के लिए गाना सीखने का फैसला किया l 

इस बैंड की गतिविधियों को फिलिप्पियों में वर्णित एकता के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है l पौलुस ने फिलिप्पी के आरंभिक चर्च को—और आज हमें—एकता में रहने, या “एक मन” (फिलिप्पियों 2:2) रहने के लिए कहा, खासकर इसलिए क्योंकि वे मसीह में एकजुट थे l ऐसा करने के लिए, प्रेरित ने उन्हें स्वार्थी महत्वाकांक्षा छोड़ने और अपने हितों से पहले दूसरों के हितों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया l 

दूसरों को अपने से ऊपर महत्व देना स्वाभाविक रूप से नहीं आ सकता है l पौलुस ने लिखा, “विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो”(पद.3) l “हर एक अपने ही हित की नहीं, वरंन् दूसरों के हित कि भी चिंता करें”(पद.4) l 

हम दूसरों का समर्थन कैसे कर सकते हैं? उनकी रुचियों पर ध्यानपूर्वक विचार करके, चाहे उनके युद्ध गीत सीख करके या उन्हें जो कुछ भी आवश्यकता हो उस प्रदान करके l 

परिवार से बढ़कर

जोन को एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पूर्ण प्रोफेसर के रूप में स्थापित किया गया था l उसका बड़ा भाई डेविड प्रसन्न था, लेकिन, जैसा कि भाई करते हैं, वह जोन को चिढ़ाने से खुद को नहीं रोक सका कि जब वे लड़के थे तो कैसे उसने उसे कुश्ती में जमीं पर गिरा दिया था l जोन जीवन में बहुत आगे बढ़ गया था, लेकिन वह हमेशा डेविड का छोटा भाई रहेगा l 

परिवार को प्रभावित करना कठिन है—भले ही आप मसीहा(Messiah) हों l यीशु नासरत के लोगों के बीच बड़ा हुआ था, इसलिए उन्हें यह विश्वास करने में कठनाई हुयी कि वह विशेष था l फिर भी वे उससे चकित हुए l “कैसे सामर्थ्य के काम इसके हाथों से प्रगट होते हैं? क्या यह वही बढ़ई नहीं, जो मरियम का पुत्र . . . है? (मरकुस 6:2-3) l यीशु ने उनसे कहा, “भविष्यद्वक्ता अपने देश, और अपने कुटुम्ब, और अपने घर को छोड़ और कही भी निरादर नहीं होता” (पद.4) l ये लोग यीशु को अच्छी तरह से जानते थे, लेकिन वे विश्वास नहीं कर सकते थे कि वह परमेश्वर का पुत्र था l 

शायद आपका पालन-पोषण एक धार्मिक घर में हुआ हो l आपकी आरंभिक यादों में चर्च जाना और भजन गाना शामिल है l यीशु को हमेशा परिवार जैसे महसूस हुआ है l यदि आप उस पर विश्वास करते हैं और उसका अनुसरण करते हैं, तो यीशु आपका परिवार है l वह “[हमें] भाई-बहन कहने से नहीं लजाता” (इब्रानियों 2:11) l परमेश्वर के परिवार में यीशु हमारा बड़ा भाई है (रोमियों 8:29)! यह एक बड़ा विशेषाधिकार है, लेकिन हमारी निकटता उसे सामान्य बना सकती है l सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति परिवार है इसका मतलब यह नहीं है कि वह विशेष नहीं है l 

क्या आप खुश नहीं है कि यीशु परिवार है, और परिवार से भी बढ़कर? जैसा कि आप आज उसका अनुसरण करते हैं, वह और अधिक व्यक्तिगत और अधिक विशेष हो जाए l 

दोषी करार दिया गया और स्वतंत्र किया गया

“मैंने यह नहीं किया!” यह एक झूठ था, और मैं इससे लगभग बच ही गया था, जब तक कि परमेश्वर ने मुझे नहीं रोका l जब मैं माध्यमिक स्कूल(middle school) में था, मैं एक प्रदर्शन के दौरान हमारे बैंड के पीछे स्पिटबॉल शूट(spitball shoot) करने वाले समूह का हिस्सा था l हमारे निदेशक एक पूर्व नौसैनिक थे और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध थे, और मैं उनसे डरता था l इसलिए जब अपराध में मेरे साझेदारों ने मुझे फंसाया, तो मैंने इस बारे में उससे झुझ बोला l फिर मैंने अपने पिता से भी झूठ बोला l 

लेकिन ईश्वर झूठ को चलने नहीं देने वाला था l उसने मुझे इसके बारे में बहुत ही दोषी विवेक दिया l कई सप्ताहों तक विरोध करने के बाद, मैं मान गया l मैंने ईश्वर और अपने पिता से क्षमा मांगी l थोड़ी देर बाद, मैं अपने निदेशक के घर गया और रोते हुए स्वीकार किया l शुक्र है, वह दयालु और क्षमाशील था l 

मैं कभी नहीं भूलूंगा कि उस बोझ का हटाया जाना कितना अच्छा लगा l मैं कई सप्ताहों में पहली बार अपराधबोध के बोझ से मुक्त और आनंदित था l दाऊद अपने जीवन में भी दृढ़ विश्वास और स्वीकारोक्ति के समय का वर्णन करता है l वह परमेश्वर से कहता है, “जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियाँ पिघल गयीं l क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा l” वह आगे कहता है, “मैंने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया” (भजन संहिता 32:3-5) l 

परमेश्वर के लिए सत्यता माने रखती है l वह चाहता है कि हम उसके सामने अपने पापों को स्वीकार करें और उन लोगों के लिए क्षमा भी मांगे जिनके साथ हमने अन्याय किया है l दाऊद घोषणा करता है, “तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया [है]” (पद.5) l परमेश्वर की क्षमा की स्वतंत्रता को जानना कितना अच्छा है!

परमेश्वर का उदार प्रेम

उन्हें उस सैन्यकर्मी के रूप में जाना जाता है, जो प्रतिदिन अपने कार्य की जिम्मेदारी लेते हैं और इसके लिए किसी और को दोषी नहीं ठहराते हैं, के विषय उनके आरंभिक भाषण को ऑनलाइन 100 मिलियन(10 करोड़) बार देखा गया l लेकिन सेवानिवृत नेवी सील एडमिरल(अधिकारी) विलियम मैकरैवेन एक और सबक भी उतना ही दिलचस्प बताते हैं l मध्य पूर्व में एक सैन्य अभियान के दौरान, मैकरैवेन ने दुखद रूप से स्वीकार किया कि एक निर्दोष परिवार के कई सदस्य गलती से मारे गए थे l यह मानते हुए कि परिवार से ईमानदाऋ से माफ़ी मांगनी चाहिए, मैकरैवेन ने दुखी पिता से माफ़ी मांगने का साहस किया l 

“मैं एक सैनिक हूँ,” मैकरैवेन ने एक अनुवादक के द्वारा उससे कहा l “लेकिन मेरे भी बच्चे है, और मेरा दिल तुम्हारे लिए दुखी है l” उस मनुष्य की प्रतिक्रिया? उन्होंने मैकरैवेन को क्षमा का उदार उपहार दिया l जैसे कि उस आदमीं के जीवित बेटे ने उससे कहा, “बहुत-बहुत धन्यवाद l हम आपके खिलाफ अपने दिल में कुछ भी नहीं रखेंगे l” 

प्रेरित पौलुस ने ऐसे उदार अनुग्रह के बारे में लिखा : “परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो” (कुलुस्सियों 3:12) l वह जानता था कि जीवन विभिन्न तरीकों से हमारी परीक्षा लेगा, इसलिए उसने कुलुस्से के चर्च में विश्वासियों को निर्देश दिया : “यदि किसी को किसी पर दोष देने का कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो; जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किये, वैसे ही तुम भी करो” (पद.13) l 

क्या चीज़ हमें ऐसा दयालु, क्षमाशील हृदय रखने में सक्षम बनाती है? परमेश्वर का उदार प्रेम l जैसा कि पौलुस ने निष्कर्ष निकाला, “इस सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबंध है बाँध लो” (पद.14) l