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नया और निश्चित

तीन वर्ष तक, घरेलु ज़रूरतों के अलावा, सुज़न ने अपने लिए कुछ भी नहीं ख़रीदा l कोविड-19 महामारी ने मेरे मित्र की आय को प्रभावित किया और उसने एक साधारण जीवन शैली अपना ली l उसने बताया, “एक दिन, अपने अपार्टमेन्ट की सफाई करते समय, मैंने देखा कि मेरी चीज़ें कितनी जर्जर और फीकी दिख रही थीं l” “तभी मुझे नयी चीज़ों की कमी महसूस होने लगी—ताज़गी और उत्साह की अनुभूति l मेरा परिवेश थका हुआ और नीरस लग रहा था l मुझे ऐसा लगा जैसे आगे देखने के लिए कुछ भी नहीं है l” 

सुज़न को बाइबल की एक अविश्वसनीय पुस्तक में प्रोत्साहन मिला l यरूशलेम के बेबीलोन के कब्जे में आने के बाद यिर्मयाह द्वारा लिखित, विलापगीत नबी और लोगों द्वारा सहे गए दुःख  के खुले घाव का वर्णन करता है l हालाँकि, दुःख की निराशा के बीच, आशा के लिए निश्चित आधार है—परमेश्वर का प्रेम l यिर्मयाह ने लिखा, “उसकी दया अमर है l प्रति भोर वह नयी होती रहती है”(3:22-23) l 

सुज़न को स्मरण आया कि परमेश्वर का गहरा प्यार हर दिन नए सिरे से आता है l जब परिस्थितियाँ हमें यह महसूस कराती हैं कि अब आगे देखने के लिए कुछ नहीं है, तो हम उसकी विश्वासयोग्यता को स्मरण कर सकते हैं और आशा कर सकते हैं कि वह हमारे लिए कैसे प्रबंध/प्रदान करेगा l हम विश्वास के साथ परमेश्वर पर आशा रख सकते हैं, यह जानते हुए कि हमारी आशा कभी व्यर्थ नहीं जाती(पद.24-25) क्योंकि यह उसे दृढ़ प्रेम और करुणा में सुरक्षित है l 

सुज़न कहती है, “परमेश्वर का प्यार मेरे लिए हर दिन कुछ नया है l” “मैं आशा के साथ आगे देख सकती हूँ l”

 

स्वतंत्रता का परमेश्वर

राष्ट्रपति अब्राहन लिंकन ने गुलामी में रखे गए लोगों को ढाई वर्ष पहले मुक्त कराया था और विपक्ष ने आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी टेक्सास राज्य ने अभी भी गुलाम लोगों की स्वतंत्रता को स्वीकार नहीं किया था l हालाँकि, 19 जून, 1865 को, गार्डन ग्रेज़र नामक सेना के एक सेनापति ने टेक्सास के एक शहर में प्रवेश किया और मांग की कि सभी गुलाम व्यक्तियों को रिहा कर दिया जाए l उस आश्चर्य और ख़ुशी की कल्पना कीजिए जब बेड़ियाँ टूट गयीं और बंधन में पड़े लोगों ने आजादी की घोषणा सुनी l 

परमेश्वर उत्पीड़ितों को देखता है, और अंततः वह अन्याय के बोझ तले दबे लोगों के लिए आज़ादी की घोषणा करेगा l यह अब भी उतना ही सच है जितना मूसा के दिनों में सच था l परमेश्वर ने एक जलती हुयी झाड़ी से उसे एक जरुरी सन्देश के साथ दर्शन दिए : “मैंने अपने प्रजा के लोग जो मिस्र में हैं, उनके दुःख को निश्चय देखा है” (निर्गमन 3:7) l उसने न केवल इस्राएल के विरुद्ध मिस्र की क्रूरता देखी—बल्कि उसने इसके बारे में कुछ करने की योजना भी बनायी l परमेश्वर ने घोषणा की, “अब मैं उतर आया हूँ कि उन्हें . . . एक अच्छे और बड़े देश में . . . पहुंचाऊं” (पद.8) l उसका मकसद इस्राएल को आजादी की घोषणा करने का था, और मूसा उसका मुखपत्र/प्रवक्ता होगा l “मैं तुझे फिरौन के पास भेजता हूँ कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए” (पद.10) l 

हालाँकि परमेश्वर का समय उतनी जल्दी नहीं आएगा जितनी हम आशा करते हैं, एक दिन वह हमें सभी बन्धनों और अन्याय से मुक्त करेगा l वह उन सभी को आशा और मुक्ति देता है जो उत्पीड़ित हैं l 

 

अकेले/अनाथों का मित्र

जब हौली कुक नौकरी के लिए लन्दन गयीं तो उनका एक भी मित्र नहीं था l उसे सप्ताहांत(weekend) दुखदायी लगता था l वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, निराश महसूस करने के मामले में यह शहर अपने आप में सबसे ऊपर है—जबकि पड़ोसी लिस्बन, पुर्तगाल, में केवल 10 फ़ीसदी निवासियों की तुलना में 55 फ़ीसदी लन्दनवासियों का कहना है कि वे अकेले हैं l 

सम्बन्ध/लगाव/वास्ता के लिए, हौली ने अपने डर को खारिज कर दिया और द लन्दन लोनली गर्ल्स क्लब(The London Lonely Girls Club) नामक एक सोशल मीडिया समूह बनाया और इसमें लगभाग पैतीस हजार लोग शामिल हुए l हर कुछ सप्ताहों में छोटे समूह की बैठकें पार्क पिकनिक, कला पाठ, आभूषण कार्यशालाएं, रात्रिभोज और यहाँ तक कि पिल्लों(puppies) के साथ आउटडोर व्यायाम सत्र की पेशकश करती हैं l 

अकेलेपन की चुनौती नयी नहीं है, न ही अलगाव की हमारी भावनाओं को चंगा करनेवाला l दाऊद ने लिखा, हमारा अनंत परमेश्वर, “परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है; और बंदियों को छुड़ाकर संपन्न करता है” (भजन 68:6) l परमेश्वर से मसीह-समान मित्रों के लिए रास्ता बताना हमारे लिए एक पवित्र विशेषाधिकार है और, इस प्रकार, एक अनुरोध जिसे हम स्वतंत्र रूप से उसके पास ले जा सकते हैं l दाऊद ने आगे कहा, “परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है” (पद.5) l “धन्य है प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठता है” (पद.9) l 

यीशु क्या ही प्यारा मित्र है! वह हमें हमेशा के मित्र देता है, जिसका आरम्भ हर पल उसकी गौरवशाली उपस्थिति से होती है l जैसा कि हौली कहती है, “मित्र का समय आत्मा के लिए अच्छा होता है l”

 

उदार विश्वास

कुछ साल पहले, हमारे चर्च को राजनितिक नेतृत्व में उथल-पुथल भरे बदलाव के बाद अपने देश से भाग रहे शरणार्थियों के अतिथि-सत्कार के लिए आमंत्रित किया गया था l कई परिवार केवल उतना ही लेकर आए जितना वे एक छोटे बैग में रख सकते थे l हमारे कई चर्च परिवारों ने उनके लिए अपने घर दिए, जिनमें कुछ ऐसे भी थे जिनके पास बहुत कम जगह थी l 

जब वे प्रतिज्ञात देश में प्रवेश किये तो उनका दयालु आतिथ्य इस्राएलियों को दिए गए परमेश्वर के तिगुना आदेश को दर्शाता है (व्यवस्थाविवरण 24:19-21) l एक कृषक समाज के रूप में, वे फसल का महत्व समझते थे l अगले वर्ष तक के लिए फसलें प्राप्त करना आवश्यक था l यह परमेश्वर की आज्ञा को “परदेशी, अनाथ, और विधवा” के लिए [कुछ] छोड़ने” (पद.19) को उस पर भरोसा करने का एक अनुरोध भी बनाता है l इस्राएलियों को उदारता का अभ्यास न केवल तब देना था जब वे जानते थे कि उनके पास पर्याप्त है, बल्कि ऐसे हृदय से देना जो परमेश्वर के प्रबंध पर भरोसा करता हो l ऐसा आतिथ्य एक अनुस्मारक भी था “कि [वे] मिस्र में दास थे” (पद.18,22) l वे एक समय उत्पीडित और निराश्रित थे l उनकी उदारता उन्हें बंधन से मुक्त करने में परमेश्वर की दयालुता की याद दिलाती थी l 

यीशु में विश्वास करने वालों से भी इसी तरह उदार होने का आग्रह किया जाता है l पौलुस हमें याद दिलाता है, “वह [मसीह]धनी होकर भी तुम्हारे लिए कंगाल बन गया, ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ” (2 कुरिन्थियों 8:9) l हम देते हैं क्योंकि उसने हमें दिया है l