
चौराहे पर परमेश्वर
कई दिनों की बीमारी और फिर तेज़ बुखार के बाद, यह स्पष्ट था कि मेरे पति को आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता थी। अस्पताल ने उन्हें तुरंत भर्ती कर लिया; एक दिन अगले दिन में बदल गया। उनकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन इतना नहीं कि उन्हें अस्पताल से छोड़ दिया जाये। मुझे अपने पति के साथ रहने या एक महत्वपूर्ण कार्य यात्रा को पूरा करने के कठिन विकल्प का सामना करना पड़ा जहां कई लोग और परियोजनाएं शामिल थीं। मेरे पति ने मुझे आश्वासन दिया कि वह ठीक हो जायेंगे। लेकिन मेरा दिल उसके और मेरे काम के बीच बंटा हुआ था।
परमेश्वर के लोगों को जीवन के निर्णयों के चौराहे पर उनकी सहायता की आवश्यकता थी। बहुत बार, उन्होंने उसके प्रकट निर्देशों का पालन नहीं किया था। इसलिए मूसा ने लोगों से उसकी आज्ञाओं का पालन करके "जीवन को चुनने" का आग्रह किया (व्यवस्थाविवरण 30:19)। बाद में, भविष्यवक्ता यिर्मयाह ने परमेश्वर के भटके हुए लोगों को दिशा-निर्देश दिए, और उन्हें उसके मार्गों पर चलने के लिए प्रेरित किया : “सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी पर चलो” (यिर्मयाह 6:16)। पवित्रशास्त्र के प्राचीन मार्ग और ईश्वर के पिछले प्रावधान हमें निर्देशित कर सकते हैं।
मैंने खुद को एक भौतिक चौराहे पर कल्पना की और यिर्मयाह के ज्ञान के नमूना (template) को लागू किया। मेरे पति को मेरी जरूरत थी, और मेरे काम को भी। तभी, मेरे संचालक ने फोन किया और मुझे घर पर रहने के लिए प्रोत्साहित किया। मैंने राहत की सांस ली और चौराहे पर परमेश्वर के प्रावधान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। परमेश्वर का निर्देश हमेशा स्पष्ट रूप से नहीं आता, लेकिन आता है। जब हम चौराहे पर खड़े हों, तो आइए सुनिश्चित करें कि हम उसकी तलाश करें।

मसीह में शांत विश्वसनीयता
पहले तो मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।
मैं अपने होटल में नाश्ते के लिए आया था। भोजन कक्ष में सब कुछ साफ़ था। बुफ़े टेबल(buffet table) भरी हुई थी. रेफ्रिजरेटर में सामान भरा हुआ था, बर्तन डिब्बे भरे हुए थे। सब कुछ सही था।
फिर मैंने उसे देखा l एक सीधा-सादा आदमी ने इसे फिर से भरा, उसे पोछा l उसने अपनी ओर ध्यान नहीं खींचा, लेकिन जितनी देर मैं बैठा रहा, उतना ही मैं चकित होता गया। वह आदमी बहुत तेज़ी से काम कर रहा था, हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था, और इससे पहले कि किसी को किसी चीज़ की ज़रूरत हो सब कुछ फिर से भर रहा था। मैंने देखा कि एक खाद्य सेवा अनुभवी के रूप में, हर चीज पर उसका निरंतर ध्यान था । सब कुछ सही था क्योंकि यह आदमी ईमानदारी से काम कर रहा था—भले ही केवल कुछ लोगों ने ही ध्यान दिया हो।
इस आदमी को इतनी सावधानी से काम करते हुए देखकर, मुझे थिस्सलुनिकियों को कहे गए पौलुस के शब्द याद आए l “चुपचाप रहने और अपना-अपना काम काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो; ताकि बाहरवालों से आदर प्राप्त करो” (1 थिस्सलुनीकियों 4:11-12)। पौलुस ने समझा कि यह इस बात की शांत गवाही देता है कि कैसे सुसमाचार दूसरों के लिए सेवा के छोटे-से प्रतीत होने वाले कार्य को भी गरिमा और उद्देश्य के साथ प्रेरित कर सकता है
मैं नहीं जानता कि जिस व्यक्ति को मैंने उस दिन देखा था वह यीशु में विश्वास करने वाला था या नहीं । लेकिन मैं आभारी हूं कि उसके शांत लगन (परिश्रम) ने मुझे शांत विश्वसनीयता(ईमानदारी) के साथ जीने के लिए परमेश्वर पर भरोसा करने की याद दिलाई जो उसके विश्वसनीय तरीकों को दर्शाता है।

आशा पाना
समुद्र विज्ञानी सिल्विया अर्ल ने मूँगा-चट्टान(coral reef)) को नष्ट होते प्रत्यक्ष रूप से देखा है। उन्होंने मिशन ब्लू(Mission Blue) की स्थापना की, जो विश्वव्यापी "होप स्पॉट्स(hope spots)” के विकास के लिए समर्पित एक संगठन है। दुनिया भर में ये विशेष स्थान "समुद्र के संकटमय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण" हैं, जो पृथ्वी पर हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। इन क्षेत्रों की साभिप्राय देखभाल के द्वारा, वैज्ञानिकों ने पानी के भीतर समुदायों के संबंधों को बहाल होते और विलोप होने वाली प्रजातियों के जीवन को संरक्षित होते देखा है।
भजन संहिता 33 में, भजनकार स्वीकार करता है कि यहोवा के वचन से सब कुछ बना और यह सुनिश्चित किया कि उसने जो कुछ बनाया वह स्थिर रहेगा (पद.6-9)। चूँकि परमेश्वर पीढ़ी से पीढ़ी तक और राष्ट्रों पर शासन करता है (पद.11-19), वह अकेले ही रिश्तों को बहाल करता है, जीवन बचाता है,और आशा को पुनर्जीवित करता है। हालाँकि, परमेश्वर हमें दुनिया और उसके द्वारा बनाए गए लोगों की देखभाल में उसके साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है।
हर बार जब हम बादलों, धूसर आकाश में बिखरे इंद्रधनुष की दमक या चट्टानी तट से टकराती समुद्र की चमकदार लहरों के लिए परमेश्वर की स्तुति करते हैं, तो हम उसके "अचूक प्रेम" और उपस्थिति की घोषणा कर सकते हैं क्योंकि उस पर “हमारी आशा है” (पद 22) l
जब हम दुनिया की वर्तमान स्थिति पर विचार करते हुए निराशा या भय की ओर प्रलोभित होते हैं, तो हम यह मानना शुरू कर सकते हैं कि हम कोई फर्क नहीं डाल सकते। हालाँकि, जब हम परमेश्वर की देखभाल करने वाली टीम के सदस्यों के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं, तो हम उसे सृष्टिकर्ता के रूप में सम्मान दे सकते हैं और दूसरों को आशा खोजने में मदद कर सकते हैं क्योंकि वे यीशु पर अपना भरोसा रखते हैं।

पुत्र(Son) भी उदित होता है
अर्नेस्ट हेमिंग्वे के पहले समपूर्ण उपन्यास में अत्यधिक शराब पीने वाले दोस्तों को दिखाया गया है, जिन्होंने हाल ही में प्रथम विश्व युद्ध को झेला है। उनमें युद्ध की तबाही के शाब्दिक और लाक्षणिक रूप से घावों के निशान हैं जिसे वे सहन करते हैं और पार्टियों, भव्य साहसिक कार्यों और आसपास सोने के द्वारा इसका सामना करने की कोशिश करते हैं। दर्द के असर को कम करने के लिए हमेशा शराब होती है। कोई भी खुश नहीं है।
हेमिंग्वे की पुस्तक द सन आल्सो राइजेज(The Sun Also Rises) का शीर्षक सीधे सभोपदेशक :5 से आता है। सभोपदेशक में, राजा सुलैमान स्वयं को "शिक्षक" (पद.1) के रूप में संदर्भित करता है। वह देखता है, "सब कुछ व्यर्थ है" (पद. 2) और पूछता है, "उन सब परिशम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?” (पद.3) l सुलैमान ने देखा कि सूर्य कैसे उगता और डूबता है, हवा इधर-उधर बहती है, नदियाँ कभी संतुष्ट न होने वाले समुद्र में बहती रहती हैं (पद.5-7)। अंततः, सब कुछ भुला दिया जाता है (पद.11)।
हेमिंग्वे और सभोपदेशक दोनों ही हमें केवल इस जीवन के लिए जीने की व्यर्थता से सामना कराते हैं। हालाँकि, सुलैमान ने अपनी पुस्तक में दिव्य(divine) के उज्ज्वल संकेत बुने हैं। वहाँ स्थिरता है—और वास्तविक आशा है। सभोपदेशक हमें वैसे ही दिखाता है जैसे हम वास्तव में हैं, लेकिन यह परमेश्व को भी वैसा ही दिखाता है जैसा वह है। सुलैमान ने कहा, "जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा" (3:14) और इसमें हमारी बड़ी आशा है। क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने पुत्र, यीशु का उपहार दिया है।
परमेश्वर के बिना, हम एक अंतहीन, कभी संतुष्ट न होने वाले समुद्र में बह रहे हैं। उसके उदित(risen) पुत्र, यीशु के द्वारा, हमारा उसके साथ मेल हो गया है, और हमें अपना अर्थ, मूल्य और उद्देश्य पता चलता है।
