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परमेश्वर हमें सुनता है

पहली कक्षा के छात्र ने आपातकालीन स्थिति के दिए गए नंबर पर फ़ोन’ किया। आपातकालीन ऑपरेटर ने उसका फ़ोन उठायाI। “मुझे मदद की ज़रूरत है,” लड़के ने कहा। “मुझे टेक-अवे करना हैं” (सीखना हैं)।” ऑपरेटर सहायता के लिए आगे बढ़ता, उससे पहले उसने एक महिला को कमरे में प्रवेश करते और यह कहते हुए सुना, “जॉनी, तुम क्या कर रहे हो?” जॉनी ने बताया कि वह अपना गणित का होमवर्क नहीं कर पा रहा है, इसलिए जब उसे मदद की ज़रूरत पड़ी तो उसने वही किया जो उसकी माँ ने उसे सिखाया था। उसने आपातकालीन नंबर पर कॉल किया। जॉनी के लिए, उसकी वर्तमान आवश्यकता आपातकाल के समान थी। दयालु ऑपरेटर के लिए, उस पल में छोटे लड़के को उसके होमवर्क में मदद करना सर्वोच्च प्राथमिकता थी।

जब भजन संहिताकार दाऊद को सहायता की आवश्यकता पड़ी, तो उसने कहा, “हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालूम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं” (भजन संहिता संहिता 39:4)। उसने कहा, “मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है” (पद 7)। इसलिए, उसने उससे उसकी “मदद की पुकार” सुनने और उसका उत्तर देने की विनती की (पद 12)। फिर चौकाने वाले ढंग से उसने परमेश्वर से "उसे न देखने" को कहा (पद 13)। हालाँकि दाऊद की ज़रूरतें अनकही हैं, पूरे पवित्रशास्त्र में उसने यही बात कही कि परमेश्वर हमेशा उसके साथ रहेगा, उसकी प्रार्थनाएँ सुनेगा और उनका उत्तर देगा।

परमेश्वर की नियमितता में हमारा विश्वास हमें अपनी अस्थिर भावनाओं को संसाधित करने में सहायता करता है, यह पुष्टि करते हुए कि न बदलने वाले परमेश्वर के लिए कोई भी विनती बहुत बड़ी या बहुत छोटी नहीं है। वह हमें सुनता है, हमारी परवाह करता है और हमारी हर प्रार्थना का उत्तर देता है। सोची डिक्सन

 

जब विश्वास करना देखना है

“मैं जो देख रहा था उस पर विश्वास नहीं कर पा रहा था!” मेरी पत्नी कैरी ने मुझे खिड़की के पास बुलाया और हमारे बाड़े के ठीक बाहर जंगल में एक हिरणी को दिखाया, जो हमारे आँगन के एक छोर से दूसरे छोर तक उछल-कूद कर रही थी। बाड़े के अंदर हमारे बड़े कुत्ते, उसकी गति से ताल-मेल मिला रहे थे, लेकिन वे भौंक नहीं रहे थे। लगभग एक घंटे तक वे आगे-पीछे चलते रहे। जब हिरणी रुकी और उनका सामना किया, कुत्ते भी रुक गए, अपने आगे के पैरों को सीधा किया और पीछे की ओर झुक गए, फिर से दौड़ने के लिए तैयार हो गए। यह शिकारी और शिकार जैसा बर्ताव नहीं लग रहा था; हिरणी और कुत्ते एक-दूसरे की संगति का आनंद लेते हुए एक साथ खेल रहे थे!

कैरी और मेरे लिए, उनकी सुबह की उछल-कूद ने परमेश्वर के आने वाले राज्य की एक तस्वीर प्रदान की। भविष्यवक्ता यशायाह ने उस राज्य के बारे में परमेश्वर के वादे की घोषणा इन शब्दों के साथ की, “देख, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी उत्पन्न करने पर हूं,” (यशायाह 65:17)। वह आगे कहता है कि “भेड़िया और मेम्ना एक साथ चरा करेंगे, और सिंह बैल के समान भूसा खाएगा” (पद 25)। न कोई शिकारी होगा, न कोई शिकार। सिर्फ दोस्त।

यशायाह के शब्द हमें दिखाते हैं कि परमेश्वर के अनंतकाल के राज्य में जानवर होंगे; वे यह भी इशारा करते हैं कि परमेश्वर अपनी रचना के लिए क्या तैयारी कर रहा है, विशेषकर “उन लोगों के लिए जो उससे प्रेम करते हैं”(1 कुरिन्थियों 2:9)। वह कितनी सुंदर जगह होगी! जब हम विश्वास के साथ उस पर भरोसा करते हैं, परमेश्वर हमारी आँखों को उस वास्तविकता की ओर उठाता है जो आने वाली है: उसकी उपस्थिति में हमेशा की शांति और सुरक्षा! जेम्स बैंक्स

 

नम्रतापूर्वक मदद माँगना

जैसे-जैसे हमारी पार्टी का दिन नजदीक आ रहा था, मैं और मेरी पत्नी योजना बनाने लगे। बहुत सारे लोगों को आना था, क्या हमें खाना बनाने के लिए केटरर को बुलाना चाहिए? यदि हम खुद ही खाना पकाते हैं तो क्या हमें एक बड़ा चूल्हा खरीदना चाहिए? उस दिन बारिश की थोड़ी संभावना भी हो सकती है, क्या हमें तंबू भी लगाना चाहिए? जल्द ही हमारी पार्टी महँगी होने लगी, और थोड़ी असामाजिक भीI (जहां कुछ लोग अलग-थलग पड़ जाये या अनियंत्रणता का मोहौल हो)। स्वयं सब कुछ प्रदान करने का प्रयास करके, हम दूसरों की सहायता प्राप्त करने का अवसर गँवा रहे थे ।

समुदाय के बारे में बाइबल का दृष्टिकोण है, देना और प्राप्त करना। पतन से पहले, आदम को एक सहायक की ज़रूरत थी (उत्पत्ति 2:18), हमें दूसरों की सलाह की ज़रूरत है (नीतिवचन 15:22) और अपना बोझ एक दूसरे के साथ बाँटना है(गलातियों 6:2)। शुरुआती कलीसिया में “सब वस्तुएँ साझा” की जाती थी , जिससे वें एक-दूसरे की “संपत्ति और सामान” से लाभ उठाते थे (प्रेरितों के काम 2:44-45)। स्वतंत्र रूप से जीने के बजाय, उन्होंने सुंदर परस्पर निर्भरता में साझा किया, उधार लिया, दिया और प्राप्त किया। ।

आख़िरकार हमने मेहमानों से हमारी पार्टी में कोई भी व्यंजन या कुछ भी मीठा लाने के लिए कहा। हमारे पड़ोसी अपना बड़ा स्टोव लेकर आए, और एक दोस्त ने अपना तंबू लगाया। मदद मांगने से हमें करीबी रिश्ते बनाने में मदद मिली और लोगों द्वारा पकाए और लाए गए अलग-अलग यंजन, पार्टी में खाने के कई विविधता (किस्म) और ख़ुशी लाए। हमारे जैसे युग में आत्मनिर्भर होना, घमंड का स्रोत भी हो सकता है। परन्तु “परमेश्वर दीनों पर अनुग्रह करता है।” (याकूब 4:6), जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो विनम्रतापूर्वक मदद मांगते हैं। शेरिडेन वोयसी

 

बुद्धिमान देखभाल

यह दृश्य शोकाकुल था l पचपन पायलट व्हेलों(व्हेल की एक प्रजाति) का एक झुण्ड स्कॉटिश समुद्र तट पर फंस गया था l स्वयंसेवकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन अंततः उनकी मृत्यु हो गयी l कोई नहीं जानता कि इस तरह बड़े पैमाने पर फंसना क्यों होता है, लेकिन यह व्हेल के मजबूत सामाजिक बन्धनों के कारण हो सकता है l जब एक परेशानी में पड़ता है, तो बाकी मदद के लिए आते हैं—एक देखभाल करने वाली प्रवृत्ति जो प्रतिकूल रूप से नुकसान पहुँचा सकती है l

बाइबल स्पष्ट रूप से हमें दूसरों की मदद करने के लिए कहती है, लेकिन ऐसा करने में हमें बुद्धिमान भी होना चाहिए l उदाहरण के लिए, जब हम किसी ऐसे व्यक्ति को पुनर्स्थापित/बहाल करने में मदद करते हैं जो पाप में फंस गया है, तो हमें सावधान रहना चाहिए कि हम स्वयं उस पाप में न घसीटे जाएँ (गलातियों 6:1), और जब हमें अपने पड़ोसियों से प्रेम करना है, तो हम से भी प्रेम करें (मत्ती 22:39) l नीतिवचन 22:3 कहता है, “चतुर मनुष्य विपत्ति को आते देखकर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़कर दण्ड भोगते हैं l” यह एक अच्छा अनुस्मारक है जब दूसरों की मदद करने से हमें नुकसान होने लगता है l

कुछ वर्ष पहले, दो बहुत ज़रूरतमंद लोग हमारे चर्च में आने लगे l जल्द ही, मण्डली के देखभाल करने वाले उनकी मांग को पूरा करने में थकने लगे l इसका समाधान उस पति-पत्नी को दूर करना नहीं था, बल्कि सीमाएं तय करना था ताकि सहायता करनेवालों को हानि न पहुंचे l यीशु, सर्वश्रेष्ठ सहायक, ने भी आराम के लिए समय लिया (मरकुस 4:38), और उसने सुनिश्चित किया कि उसके शिष्यों की ज़रूरतें दूसरों की ज़रूरतों का स्थान न ले ले(6:31) l बुद्धिमान देखभाल उसके उदाहरण का अनुसरण करती है l अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देकर, हम दीर्घकाल में अधिक देखभाल कर सकेंगे l शेरिडेन वोयसे

 

आपके हाथ में क्या है?

उद्धार प्राप्त करने और अपना जीवन परमेश्वर को समर्पित करने के कुछ वर्षों के बाद, मैंने महसूस किया कि वह मुझे अपनी पत्रकारिता आजीविका त्यागने का निर्देश दे रहा है l जैसे ही मैंने अपनी कलम रखी, मेरे शब्द भी कही छुप गए, मैं यह महसूस किए बिना नहीं रह सका कि एक दिन परमेश्वर मुझे अपनी महिमा के लिए लिखने के लिए बुलाएगा l अपने व्यक्तिगत जंगल/सुनसान प्रदेश में भटकने के वर्षों के दौरान मुझे निर्गमन 4 में मूसा और उसकी लाठी की कहानी से प्रोत्साहन मिला l

मूसा, जो फिरौन के महल में पला-बढ़ा था और जिसका भविष्य आशाजनक था, मिस्र से भाग गया और एक चरवाहे के रूप में गुमनामी में रह रहा था जब परमेश्वर ने उसे बुलाया l मूसा ने सोचा होगा कि उसके पास परमेश्वर को देने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन कि वह अपने महिमा के लिए किसी को भी और किसी भी चीज़ का उपयोग कर सकता है l

“तुम्हारे हाथ में वह क्या है?” परमेश्वर ने पूछा l मूसा ने उत्तर दिया, “एक लाठी l” परमेश्वर ने कहा, “इसे भूमि पर फेंक दे” (निर्गमन 4:2-3) l मूसा की साधारण लाठी सांप बन गयी l जब उसने सांप को पकड़ लिया, तो परमेश्वर ने उसे वापस लाठी में बदल दिया (पद.3-4)l यह चिन्ह इसलिए दिया गया था ताकि इस्राएली विशवास करें कि “यहोवा, उनके पूर्वजों का परमेश्वर—अब्राहम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर और याकूब का परमेश्वर—उनके सामने प्रकट हुआ है” (पद.5) l जैसे ही मूसा ने अपने लाठी को नीचे फेंका और उसे फिर से उठाया, मैंने परमेश्वर की आज्ञाकारिता में एक पत्रकार के रूप में अपनी आजीविका/career उसके समक्ष रख दी l बाद में, उसने मुझे फिर से कलम उठाने के लिए निर्देशित किया और अब मैं उसके लिए लिख रही हूँ l

हमें परमेश्वर द्वारा उपयोग किये जाने के लिए बहुत कुछ की ज़रूरत नहीं है l हम बस उन प्रतिभाओं से उसकी सेवा कर सकते हैं जो उन्होंने हमें दी है l पता नहीं कि कहाँ से शुरुआत करें?आपके हाथ में क्या है? नैंसी गैविलेन्स

 

न्याय का परमेश्वर

एक किशोर के रूप में, रेयान ने अपनी माँ को कैंसर के कारण खो दिया l उसने खुद को बेघर पाया और जल्द ही स्कूल छोड़ दिया l वह निराशा महसूस करता था और अक्सर भूखा रहता था l वर्षों बाद, रेयान ने एक गैर-लाभकारी संस्था की स्थापना की जो दूसरों को, विशेष रूप से छोटे बच्चों को, अपने बगीचे में उगाए गए आहार को रोपने, फ़सल काटने और तैयार करने के लिए सशक्त बनाती है l संगठन इस विश्वास पर बना है कि किसी को भी भोजन के बिना नहीं रहना चाहिए और जिनके पास कुछ है उन्हें उन लोगों की देखभाल करनी चाहिए जिनके पास नहीं है l दूसरों के लिए रेयान की चिंता न्याय और दया के लिए परमेश्वर के हृदय से प्रतिध्वनित होती है l

हम जिस दर्द और पीड़ा का सामना करते हैं, परमेश्वर उसकी बहुत परवाह करता है l जब उसने इस्राएल में भयानक अन्याय देखा, तो उसने उनके पाखण्ड को उजागर करने के लिए नबी आमोस को भेजा l जिन लोगों को परमेश्वर ने एक बार मिस्र में उत्पीड़न से बचाया था, वे अब अपने पड़ोसियों को एक जोड़ी जूती के लिए गुलामी में बेच रहे थे (आमोस 2:6 ) l उन्होंने निर्दोष लोगों को धोखा दिया, उत्पीड़ितों को न्याय देने से इनकार कर दिया, और गरीबों के “सर पर की धूल की भी लालच करते [थे]”(पद.6-7), जबकि ये सब भेंट और पवित्र दिनों को लेकर परमेश्वर की आराधना करने का दिखावा करते थे (4:4-5) l

आमोस ने लोगों से विनती की, “बुराई को नहीं, भलाई को ढूढ़ों, ताकि तुम जीवित रहो; और तुम्हारा यह कहना सच ठहरे कि सेनाओं का परमेश्वर यहोवा तुम्हारे संग है” (5:14) l रेयान की तरह, हममें से प्रत्येक ने जीवन में दूसरों से जुड़ने और सहायता करने में सक्षम होने के लिए पर्याप्त दर्द और अन्याय का अनुभव किया है l समय “भलाई की तलाश” करने और हर प्रकार के न्याय को स्थापित करने में उसके साथ शामिल होने का है l केरेन पिम्पो

 

इंतज़ार के काबिल

यात्रा के दौरान रुकने के समय (layover) पर चर्चा करें l फ़िल स्ट्रिंगर को तूफ़ान के कारण विलंबित हुई उड़ान में चढ़ने के लिए अठारह घंटे इंतज़ार करना पड़ा l हालाँकि, उनका धैर्य और दृढ़ता काम आई l न केवल उन्हें अपने गंतव्य तक उड़ान भरने और महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठकों में समय पर पहुँचने का अवसर मिला, बल्कि वे उड़ान में एकमात्र यात्री भी थे!! अन्य सभी यात्रियों ने हार मान ली या अन्य व्यवस्थाएँ की l फ्लाइट परिचारक ने उसे जो भी खाने की चीज़ चाहिए दी, और स्ट्रिंगर कहते हैं, “बेशक, मैं आगे की पंक्ति में बैठा था l जब पूरा विमान आपके पास है तो क्यों नहीं?” परिणाम निश्चित रूप से इंतज़ार के लायक था l

अब्राहम ने वह भी वह सहन किया जो एक लम्बी देरी जैसा महसूस हुआ होगा l बहुत पहले जब उसे अब्राम के नाम से जाना जाता था, परमेश्वर ने उससे कहा था कि वह उसे “एक बड़ी जाति [बनाएगा]” और “भूमण्डल के सारे कुल [उसके] द्वारा आशीष पाएंगे” (उत्पत्ति 12:2-3) l पचहत्तर वर्षीय व्यक्ति के लिए केवल एक ही समस्या थी (पद.4): वह बिना उत्तराधिकारी के एक महान राष्ट्र कैसे बन सकता था? और यद्यपि उसकी प्रतीक्षा कभी-कभी अधूरी रह जाती थी (उसने और पत्नी सारै ने कुछ गलत विचारों के साथ परमेश्वर को अपना वादा पूरा करने में “सहायता” करने का प्रयास किया—देखें 15:2-3; 16:1-2, जब “पुत्र इसहाक उत्पन्न हुआ तब अब्राहम एक सौ वर्ष का था”(21:5) l उसके विश्वास का बाद में इब्रानियों के लेखक द्वारा गुणगान किया गया(11:8-12) l

इंतज़ार करना कठिन हो सकता है l और, अब्राहम की तरह, हम इसे पूरी तरह से नहीं कर सकते है l लेकिन जब हम प्रार्थना करते हैं और परमेश्वर की योजनाओं में आराम करते हैं, तो वह हमें दृढ़ रहने में मदद करता है l उसमें इंतज़ार करना हमेशा सार्थक होता हैं l टॉम फेल्टन