परमेश्वर को जानना
मेरी आयरलैंड की यात्रा में, मैं सजावटी शेमरॉक पौधे की भरमार (प्रचुरता) से अभिभूत था। ऐसा प्रतीत होता था कि वह छोटा-सा हरे रंग का, तीन पत्तियों वाला पौधा - कपड़े, टोपी, गहने, और अन्य बहुत से सामानों में सभी दुकानों में मिल जाता था!
पूरे आयरलैंड में केवल एक प्रचुर पौधे से अधिक, शेमरॉक को पीढ़ियों से त्रिएक (ट्रिनिटी), ऐतिहासिक ईसाई विश्वास को समझाने के एक सरल तरीके के रूप में अपनाया गया था कि ईश्वर एक सार है जो तीन अलग-अलग व्यक्तियों में अनंत काल तक मौजूद है: परमेश्वर पिता, परमेश्वर पुत्र, और परमेश्वर पवित्र आत्मा. जबकि त्रिएक की सभी मानवीय व्याख्याएँ अपर्याप्त हैं, शेमरॉक एक सहायक प्रतीक है क्योंकि यह तीन अलग-अलग पत्तियों वाला एक ही पदार्थ से बना एक पौधा है।
त्रिएक शब्द पवित्रशास्त्र में नहीं पाया जाता है, लेकिन यह उस धार्मिक सत्य का सारांश प्रस्तुत करता है जिसे हम उन अंशों में स्पष्ट रूप से देखते हैं जहां त्रिएक के सभी तीन व्यक्ति एक ही समय में मौजूद हैं। जब यीशु, परमेश्वर पुत्र, बपतिस्मा लेते हैं, तो परमेश्वर की आत्मा को "कबूतर की तरह" स्वर्ग से उतरते हुए देखा जाता है, और परमेश्वर पिता की आवाज यह कहते हुए सुनी जाती है, "तुम मेरे पुत्र हो" (मरकुस 1:11)।
यीशु में विश्वास करने वाले आयरिश लोगों ने शेमरॉक का उपयोग किया क्योंकि वे लोगों को परमेश्वर को जानने में मदद करना चाहते थे। जैसे-जैसे हम त्रिएक की सुंदरता को पूरी तरह से समझते हैं, यह हमें परमेश्वर को जानने में मदद करता है और "आत्मा और सच्चाई से" उसकी आराधना करने की हमारी क्षमता को गहरा करता है (यूहन्ना 4:24)।

परमेश्वर की महान गाथा
लाइफ मैगज़ीन के 12 जुलाई, 1968 के मुखपृष्ठ पर बियाफ्रा (नाइजीरिया में गृहयुद्ध के दौरान) के भूख से मर रहे बच्चों की भयानक तस्वीर प्रकाशित की गई थी। एक जवान लड़के ने परेशान होकर उस मैगज़ीन की एक प्रतिलिपि (कॉपी) पास्टर के पास ले जाकर पूछा, “क्या परमेश्वर को इस बारे में मालूम है?” उस पास्टर ने उत्तर दिया, “मैं जानता हूँ कि तुम इस बात को नहीं समझ सकते, परन्तु, हाँ, परमेश्वर को इस बारे में मालूम है।” इस पर वह लड़का यह कहते हुए बाहर चला गया कि उसे ऐसे परमेश्वर में कोई दिलचस्पी नहीं है।
ऐसे प्रश्न केवल बच्चों को ही नहीं बल्कि हम सभी को परेशान करते हैं। परमेश्वर के रहस्यमयी ज्ञान की पुष्टि के साथ-साथ, मैं इस बात की आशा करता हूँ कि काश उस लड़के ने उस महान गाथा के बारे में सुना होता जिसे परमेश्वर ने लिखना जारी रखा है यहाँ तक कि बियाफ्रा जैसे स्थानों में भी।
यीशु ने अपने उन अनुयायियों के लिए इस कहानी को प्रकट किया, जिन्होंने यह मान लिया था कि कठिनाई से वह उनकी रक्षा करेगा। इसके बजाय मसीह ने उनसे कहा कि “इस संसार में तुम्हें क्लेश होता है।” हालाँकि, यीशु ने जिस बात की पेशकश की, वह उसकी यह प्रतिज्ञा थी कि ये बुराइयाँ अंत नहीं हैं। वास्तव में, उसने पहले से ही “संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33)। और परमेश्वर के अंतिम अध्याय में, हर एक अन्याय को मिटा दिया जाएगा, हर एक दुःख ठीक हो जाएगा।
उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक की पुस्तकें हर अकल्पनीय बुराई को नष्ट करने, हर गलत बात को सही करने की परमेश्वर की कहानी को याद दिलाती हैं। यह कहानी उस प्रेम करने वाले व्यक्ति को प्रस्तुत करती है जिसकी हममें अविवादित रुचि है। यीशु ने अपने चेलों से कहा कि “मैंने ये बातें तुम से इसलिए कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शांति मिले” (पद 33)। सम्भव है कि आज के समय में भी हम उसकी शांति और उपस्थिति में विश्राम करें।

अज्ञात मार्ग
शायद मुझे एक दौड़ में ब्रायन से नहीं जुड़ना चाहिए था l मैं विदेश में था, और अज्ञान था कि हम कहाँ या कितनी दूर जाएंगे या इलाका कैसा होगा l साथ ही, वह एक तेज धावक था l क्या उसके साथ बने रहने की कोशिश में मेरा टखना तो नहीं मुड़ जाएगा? मुझे ब्रायन पर जो रास्ता जानता था भरोसा करना ही था l आरम्भ में, मैं बहुत चिंतित हो गया l पगडण्डी उबड़-खाबड़, असमतल भूमि पर घने जंगल से होकर गुजरती थी l शुक्र है कि ब्रायन मुझ पर नज़र रखता रहा और मुझे आगे के असमतल रास्ते के बारे में चेतावनी देता रहा l
शायद बाइबल के समय में कुछ लोगों ने अपरिचित क्षेत्र में प्रवेश करते समय ऐसा ही महसूस किया था—कनान में अब्राहम, जंगल में इस्राएली, और यीशु के चेले सुसमाचार सुनाने के अपने मिशन पर l उन्हें अंदाजा नहीं था कि यात्रा कैसी होगी, सिवाय इसके कि यह निश्चित ही कठिन होगी l लेकिन उनका नेतृत्व करने वाला आगे का रास्ता जनता था l उन्हें भरोसा करना था कि परमेश्वर उन्हें सामना करने की शक्ति देगा और उनकी देखभाल करेगा l वे उसका अनुसरण कर सकते थे क्योंकि वह जानता था कि आगे क्या है l
इस आश्वासन ने दाऊद को यह दिलासा दिया जब वह भाग रहा था l बड़ी अनिश्चितता के बावजूद, उसने परमेश्वर से कहा : “जब मेरी आत्मा मेरे भीतर से व्याकुल हो . . . तब तू मेरा पथ जानता [है]” (भजन संहिता 142:3) l जीवन में कई बार हम डरते हैं कि आगे क्या है l परन्तु हम यह जानते हैं कि हमारे संग चलने वाला हमारा परमेश्वर, मार्ग जानता है l

पथ पर स्वतंत्रता
बीप बेसबॉल में, नेत्रहीन खिलाड़ी यह जानने के लिए कि क्या करना है और कहाँ जाना है, बीपिंग बॉल या बज़िंग बेस को सुनते हैं l आँखों पर पट्टी वाला बल्लेबाज (दृष्टिहीनता की विभिन्न डिग्री के कारण) और देखनेवाला बॉल फेंकनेवाला एक ही टीम में होते हैं l बल्लेबाज बीपिंग बॉल को मारकर, बीपिंग बेस की ओर दौड़ता हैं l बल्लेबाज आउट हो जाता है यदि एक क्षेत्ररक्षक गेंद को बल्लेबाज के बेस तक पहुँचने से पूर्व पकड़ लेता है; अन्यथा, बल्लेबाज एक रन बनाता है l एक खिलाड़ी ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि वह “दौड़ने में बड़ी स्वतंत्रता” महसूस करता है क्योंकि वह जानता है कि एक स्पष्ट पथ और दिशा है l
यशायाह की पुस्तक हमें बताती है कि परमेश्वर, “जो स्वयं सच्चाई है, वह धर्मी की अगुवाई करता है” (26:7) l जब यह लिखी गयी थी, तब इस्राएलियों का मार्ग बिलकुल चौरस नहीं था; वे अनाज्ञाकारिता के लिए ईश्वरीय न्याय सह रहे थे l यशायाह ने उन्हें विश्वास और आज्ञाकारिता में चलने का उपदेश दिया—जो अक्सर कठिन लेकिन सुगम मार्ग होता है l परमेश्वर के “नाम के स्मरण” के लिए लालायित होना (पद.8) उनके दिलों का केंद्र होना था l
यीशु में विश्वासी होकर, हम परमेश्वर के बारे में और अधिक जानते हैं और उसके विश्वासयोग्य चरित्र में अपना भरोसा बढ़ाते हैं क्योंकि हम आज्ञा मानकर उसके मार्गों का पालन करते हैं l हो सकता है कि जीवन में हमारा मार्ग हमेशा सहज न दिखे या महसूस हो, लेकिन हम भरोसा करके निश्चित हैं कि परमेश्वर साथ है और रास्ता बना रहा है l हम भी स्वतंत्रता महसूस कर सकते हैं जब हम अपने लिए परमेश्वर के सर्वोत्तम मार्ग पर आज्ञाकारिता से दौड़ते हैं l

जब आप थके हुए हो
मैं एक कार्यदिवस के अंत की शांति में बैठी थी, मेरा लैपटॉप मेरे सामने था l उस दिन के काम से मुझे खुश होना चाहिए था, लेकिन मैं थक गयी थी l काम पर एक समस्या की चिंता से मेरे कन्धों में दर्द था, और एक परेशान रिश्ते से मेरा दिमाग थका हुआ था l उस रात इन सबसे बचने के लिए मैं टीवी देखने लगी l
लेकिन “प्रभु,” मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं l मैं अत्यधिक थकान से और अधिक नहीं कह पायी l मेरी सारी थकान उस एक शब्द में समा गयी l और किसी तरह, मैं जान गयी कि मुझे कहाँ जाना चाहिए l
यीशु हमसे कहता है, “मेरे पास आओ,” जो थके हुए और बोझ से दबे हुए हुए हो, “मैं तुम्हें विश्राम दूँगा” (मत्ती 11:28) l रात की अच्छी नींद से, टेलीविजन द्वारा प्रदान की जाने वाली वास्तविकता से विश्राम नहीं l समस्या समाधान से भी राहत नहीं मिलती l हालाँकि ये आराम के अच्छे श्रोत हो सकते हैं, लेकिन ये अल्पकालिक हैं और हमारी परिस्थितयों पर निर्भर करती हैं l
इसके विपरीत, यीशु द्वारा प्रदत्त विश्राम उसके अपरिवर्तनीय चरित्र द्वारा स्थायी और निश्चित है l वह हमेशा अच्छा है l वह हमें हमारी आत्मा के लिए सच्चा विश्राम देता है क्योंकि सब कुछ उसके वश में है l हम उस पर भरोसा कर सकते हैं और उसके प्रति समर्पित हो सकते हैं, सहन कर सकते हैं और यहाँ तक कि कठिन स्थितियों में भी बढ़ सकते हैं क्योंकि वही सामर्थ्य और पुनर्स्थापन दे सकता है l
“मेरे पास आओ,” यीशु हमसे कहता है l “मेरे पास आओ l”