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मैं कौन हूँ?

रोबर्ट टॉड लिंकन अपने पिता, प्रिय अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के व्यापक शरण में रहते थे l अपने पिता की मृत्यु के लम्बे समय बाद, रोबर्ट की पहचान उनके पिता की जबर्दस्त उपस्थिति से घिर गयी थी l लिंकन के घनिष्ठ मित्र निकोलस मुरे बटलर ने लिखा कि रोबर्ट अक्सर कहा करते थे, “कोई भी मुझे युद्ध सचिव के रूप में या इंग्लैण्ड का मंत्री अथवा पुलमैन कंपनी के अध्यक्ष के रूप में चाहता था; वे अब्राहम लिंकन के बेटा को चाहते थे l  

ऐसी निराशा मशहूर के बच्चों तक ही सिमित नहीं है l हम सभी इस भावना से परिचित हैं कि हम जो हैं उसके लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं l फिर भी कहीं भी हमारे मूल्य की गहराई इस बात से अधिक स्पष्ट नहीं है कि परमेश्वर हमसे कितना प्यार करता है l फिर भी तुलनात्मक रूप में परमेश्वर हमसे प्रेम करता है हमारे मूल्य की गहराई से कहीं अधिक प्रगट है l

प्रेरित पौलुस ने हमें पहचाना कि हम अपने पापों में कौन थे, और हम मसीह में कौन बनते हैं l उसने लिखा, “जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिए मरा” (रोमियों 5:6) l हम जो हैं उसके कारण परमेश्वर हमसे प्रेम करता है—हमारे सबसे बुरे हाल में भी! पौलुस ने लिखा, “परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिए मरा” (पद.8) l परमेश्वर हमें इतना महत्व देता है कि उसने अपने पुत्र को हमारे लिए क्रूस पर जाने की अनुमति दी l

हम कौन हैं? हम परमेश्वर के प्यारे बच्चे हैं l इससे अधिक कौन मांग सकता है?

हमारे सभी दिनों का परमेश्वर

एक असफल सर्जरी के बाद, जोन के डॉक्टर ने कहा कि पांच हफ़्तों के अन्दर उसकी एक और सर्जरी होगी l समय के साथ, घबराहट बढ़ती गयी l जोन और उसका पति वरिष्ठ नागरिक थे, और उनके परिजन दूर रहते थे l उनको एक अपरिचित शहर तक ड्राइव करना था और एक जटिल हॉस्पिटल प्रणाली से जूझना था, और एक नए विशेषज्ञ के साथ काम करना था l

यद्यपि ये परिस्थितियाँ अपरिहार्य लग रही थी, परमेश्वर ने उनकी परवाह की l इस यात्रा में, उनकी कार का नेवीगेशन प्रणाली खराब हो गया, लेकिन वे समय पर पहुँच गए क्योंकि उनके पास कागज़ का एक नक्शा था l परमेश्वर ने बुद्धि दी l हॉस्पिटल में, एक मसीही पास्टर ने उनके साथ प्रार्थना की और बाद में उस दिन सहायता करने की पेशकश की l परमेश्वर ने सहायता किया l ऑपरेशन के बाद, जोन को सफल सर्जरी की ख़ुशी का समाचार मिला l

जबकि हम हमेशा चंगाई या बचाव का अनुभव नहीं करेंगे, परमेश्वर विश्वासयोग्य है और संवेदनशील लोगों के निकट रहता है—चाहे युवा, वृद्ध, या अन्यथा वंचित l शताब्दियों पूर्व, जब बेबीलोन की बंधुवाई ने इस्राएलियों को कमज़ोर कर दिया था, यशायाह ने उन्हें स्मरण दिलाया कि परमेश्वर ने उनको जन्म ही से संभाला था और निरंतर उनकी देखभाल करनेवाला था l नबी द्वारा, परमेश्वर ने कहा, “तुम्हारे बाल पकने समय तक तुम्हें उठाए” (यशायाह 46:4) l

परमेश्वर हमें तब नहीं छोड़ेगा जब हमें उसकी सबसे अधिक आवश्यकता होगी l वह हमारी ज़रूरतों को पूरा कर सकता है और हमें याद दिलाता है कि वह हमारे जीवन के हर मोड़ पर हमारे साथ है l वह हमारे सभी दिनों का परमेश्वर है l

परमेश्वर के लिए अच्छी परेशानी

एक दिन, छठी कक्षा के एक विद्यार्थी ने एक सहपाठी को एक छोटे उस्तरा से अपना हाथ काटते देखा l सही काम के प्रयास में, उसने उससे लेकर फेंक दिया l आश्चर्यजनक रूप से, सराहना के बजाय, उसे दस दिन का स्कूल निलंबन प्राप्त हुआ l क्यों? उसके पास कुछ समय के लिए उस्तरा था—जिसकी स्कूल में अनुमति नहीं थी l यह पूछे जाने पर कि क्या वह दोबारा ऐसा करेगी, उसने उत्तर दिया : “भले ही मैं परेशानी में पड़ जाऊं . . . मैं इसे दोहराउंगी l” जिस तरह इस लड़की के अच्छे काम करने की कोशिश ने उसे परेशानी में डाल दिया (उसका निलंबन बाद में उलट दिया गया था), यीशु का राज्य के हस्तक्षेप के कार्य ने उसे धार्मिक अगुओं के साथ अच्छी परेशानी में डाल दिया l

फरीसियों ने यीशु द्वारा एक विकृत हाथ वाले व्यक्ति की चंगाई को उनके नियमों का उल्लंघन बताया l  l मसीह ने उनसे कहा, कि अगर परमेश्वर के लोगों को सब्त के दिन गंभीर परिस्थितियों में पशुओं की देखभाल करने की अनुमति थी, तो “मनुष्य का मूल्य भेड़ से कितना बढ़कर है!” (मत्ती 12:12) l क्योंकि  सब्त का प्रभु होकर, यीशु जो अनुमत है और जो नहीं है को ठीक कर सकता था (पद.6-8) l यह जानते हुए कि इससे धार्मिक अगुवों को ठेस पहुंचेगी, उसने वैसे भी मनुष्य के हाथ को ठीक कर दिया (पद.13-14) l

कभी-कभी मसीह में विश्वासी “अच्छी मुसीबत” में पड़ सकते हैं—जो उसे आदर देता है लेकिन जिससे कुछ लोग खुश नहीं होते—जब वे दूसरों की मदद करते हैं l जब हम परमेश्वर के मार्गदर्शन में ऐसा करते हैं, हम यीशु का अनुकरण करते हुए दर्शाते हैं कि लोग नियमों और रीति-रिवाजों से अधिक महत्वपूर्ण हैं l

यीशु के साथ में भिन्न

व्यापार विश्लेषक फ्रांसिस इवांस 125 बीमा सेल्समैनों का अध्ययन किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें क्या सफलता मिली l आश्चर्यजनक रूप से, योग्यता प्रमुख कारक नहीं थी l इसके बजाय, इवांस ने पाया कि ग्राहक समान राजनीति, शिक्षा और यहाँ तक कि ऊँचाई वाले सेल्समैन से खरीददारी करने की अधिक सम्भावना रखते हैं l विद्वान इसे होमोफिली(homophily) कहते हैं : अपने जैसे लोगों को पसंद करने की प्रवृति l

होमोफिली जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी काम कर रही है, शादी करने और अपने जैसे लोगों से दोस्ती करने की प्रवृत्ति हमारे साथ है l जबकि स्वाभाविक रूप से, अनियंत्रित रहने पर होमोफिली विनाशकारी हो सकती है l जब हम केवल “अपनी तरह” के लोगों को पसंद करते हैं, तो समाज नस्लीय, राजनीतिक और आर्थिक रेखाओं के साथ बट सकता है l

पहली शताब्दी में, यहूदी यहूदियों के, यूनानी यूनानियों के साथ रहे, और अमीर और गरीब कभी भी घुलमिल नहीं पाए l और फिर भी, रोमियों 16:1-16 में, पौलुस रोम की कलीसिया के वर्णन में,  प्रिस्किल्ला और अक्विला(यहूदी), इपैनितुस(यूनानी) फीबे(बहुतों का उपकार करनेवाली”, इसलिए शायद धनवान), और फिलुलुगुस (दासों के लिए सामान्य नाम) को शामिल कर सकता था l ऐसे अलग-अलग लोगों को एक साथ क्या लाया था? यीशु—जिसमें “न तो यहूदी है और न अन्यजाति, न दास और न स्वतंत्र” (गलातियों 3:28) l 

अपने जैसे लोगों के साथ रहना, काम करना और चर्च जाना स्वाभाविक है l यीशु हमें उससे आगे ले जाता है l इस संसार में जो विभिन्न रेखाओं से बटी हुयी है, वह हमें एक ऐसे लोग बना रहा है जो एक साथ हैं पर अलग हैं—एक परिवार के रूप में एक हैं l

प्रकाश के हज़ार बिंदु

संयुक्त राज्य अमेरिका में उत्तर-पश्चिमी अलबामा में डिसमल्स कैनियन/घाटी(Dismals Canyon) कई सैलानियों को आकर्षित करता है, अधिकतर मई और जून में जब जुगनू के लार्वा फूटकर जुगनू बन जाते हैं l रात में, ये शानदार नीली चमक बिखेरते हैं, और हज़ारों मिलकर एक असाधारण रौशनी उत्पन्न करते हैं l

एक तरह से, प्रेरित पौलुस मसीह में विश्वासियों को जुगनू कहता है l वह समझाता है कि “तुम तो पहले अन्धकार थे, परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो” (इफिसियों 5:8) l लेकिन कभी-कभी हम सोचते हैं कि “मेरा यह छोटा सा प्रकाश अंतर कैसे ला सकता है l पौलुस का सुझाव है कि यह एकल कार्य नहीं है l वह हमें “ज्योति की संतान” कहता है (पद.8) और समझाता है कि हम “ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में सहभागी” हैं (कुलुस्सियों 1:12) l संसार में ज्योति होना सामूहिक प्रयास है, मसीह की देह का कार्य है, कलीसिया का कार्य है l पौलुस हम “जुगनुओं” की एक साथ आराधना करते हुए, “आपस में भजन और स्तुतिगान, और आत्मिक गीत” गाते हुए की तस्वीर के साथ इसे पुष्ट करता है (इफिसियों 5:19) l

हतोत्साहित होने पर, यह सोचते हुए कि हमारे जीवन की गवाही घनघोर काले रंग की आधी रात की संस्कृति में बस एक छोटा सा बिंदु है, तो हम बाइबल से भरोसा ले सकते हैं l हम अकेले नहीं हैं l एक साथ, जब परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है, हम एक अंतर लाते हैं और एक शानदार रौशनी चमकाते हैं l ऐसा लगता है कि जुगनुओं की एक पूरी मण्डली बहुत सारी दिलचस्पी आकर्षित कर सकती है l