श्रेणी  |  odb

दासत्व से मुक्ति

“आप मूसा के समान हैं, हमें दासत्व से छुड़ानेवाले!” जमीला चिल्लाई l पाकिस्तान में एक बंधुआ ईंट-भट्ठा मजदूर के रूप में, उसे और उसके परिवार को भट्ठा मालिक की अत्यधिक बकाया राशि के कारण कष्ट उठाना पड़ा l उन्होंने अपनी कमाई का अधिकतम हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में किया l लेकिन एक गैर-लाभकारी एंजेंसी से उपहार द्वारा कर्ज मुक्ति के बाद, उन्हें जबस्दस्त राहत महसूस हुयी l एजेंसी के प्रतिनिधि को उनकी आजादी के लिए धन्यवाद देते हुए, यीशु में विश्वासी, जमीला ने परमेश्वर द्वारा मूसा और इस्राएलियों को गुलामी से छुड़ाने के उदाहरण की ओर इशारा किया l

कठोर परिस्थितियों में काम करते हुए, सैकड़ों वर्षों से इस्राएलियों को मिस्रियों द्वारा सताया गया था l उन्होंने मदद के लिए परमेश्वर को पुकारा (निर्गमन 2:23) l लेकिन उनके काम का बोझ बढ़ गया, क्योंकि फिरौन ने उन्हें ईंटें बनाने के साथ-साथ पुआल भी इकठ्ठा करने का आदेश दिया (5:6-8) l जब इस्राएलियों ने उत्पीड़न के विरुद्ध रोना जारी रखा, तो परमेश्वर ने उनके परमेश्वर होने की अपनी प्रतिज्ञा दोहरायी (6:7) l वे अब और दास नहीं रहेंगे, क्योंकि वह उन्हें “अपनी भुजा बढ़ाकर” छुड़ा लेगा (पद.6) l

परमेश्वर के निर्देशन में, मूसा इस्राएलियों को मिस्र से बाहर ले गया (अध्याय 14 देखें) l आज भी परमेश्वर हमें क्रूस पर अपने पुत्र, यीशु की फैली हुयी भुजाओं द्वारा छुड़ाता है l हम उस पाप के बहुत बड़े दासत्व से मुक्त हैं जिसने कभी हमें नियंत्रित किया था l हम अब गुलाम नहीं, स्वतंत्र हैं!

परमेश्वर की उपस्थिति की प्राथमिकता

2009 में, अमेरिका में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की एक शोध टीम ने एक प्रयोग में दो सौ से अधिक छात्रों का अध्ययन किया जिसमें कार्यों और स्मृति अभ्यासों के बीच अदला-बदली करना शामिल था l आश्चर्यजनक रूप से, पाया गया कि जो छात्र स्वयं को एक समय में अनेक कार्य करने में कुशल मानते थे, एक समय में एक कार्य करनेवालों की तुलना में बुरा प्रदर्शन किया l बहुकार्यन ने विचारों पर ध्यान केन्द्रित करना और अप्रासंगिक जानकारी को फ़िल्टर करना अधिक कठिन बना दिया l जब हमारा मन विकर्षित हो तो ध्यान केन्द्रित करना एक चुनौती हो सकती है l

जब यीशु मरियम और मार्था के घर आया, मार्था काम में व्यस्त थी और “सेवा करते करते घबरा गयी” थी (लूका 10:40) l उसकी बहन मरियम ने बैठकर यीशु से सीखने, बुद्धि और शांति प्राप्त करने का चुनाव किया जो उससे छीना न जाएगा (पद. 39-42) l जब मार्था ने यीशु से मरियम को उसका सहयोग  करने के लिए उत्साहित करने के लिए कहा, तो उसने उत्तर दिया, “तू बहुत बातों के लिए चिंता करती और घबराती है l परन्तु एक बात आवश्यक है” (पद. 41-42) l

परमेश्वर हमारा ध्यान चाहता है l लेकिन, मार्था की तरह, हम अक्सर कार्यों और समस्याओं से विचलित होते हैं l हम परमेश्वर की उपस्थिति की उपेक्षा करते हैं, यद्यपि वह हमें आवश्यक बुद्धि और आशा दे सकता है l जब हम प्रार्थना द्वारा उसके साथ समय बिताने और पवित्रशास्त्र पर मनन को प्राथमिकता देते हैं, तो वह हमें उन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और शक्ति देगा जिनका हम सामना करते हैं l

शरण देनेवाले लोग

फिल और सैंडी, शरणार्थी बच्चों की कहानियों से प्रभावित होकर उनमें से दो को अपने हृदय और घर में स्थान दिया l हवाई अड्डे पर उन्हें लेने के बाद, वे चुपचाप घर लौटे l क्या वे इसके लिए तैयार थे? वे एक ही संस्कृति, भाषा या धर्म को साझा नहीं करते थे, लेकिन वे इन अनमोल बच्चों के शरणस्थान बन गए थे l 

रूत की कहानी से बोअज़ भावुक हो गया l उसने सुना था कि कैसे वह नाओमी का सहयोग करने के लिए अपने लोगों को छोड़ी थी और जब रूत उसके खेत में बीनने को आई, तब बोअज़ ने उसके लिए  आशीष की यह प्रार्थना की, “यहोवा तेरे कार्य का फल दे, और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दे” (रूत 2:12) l

रूत ने बोअज़ को उसकी आशीष स्मरण करायी जब एक रात उसने उसकी नींद को बाधित किया l अपने पैरों के निकट हलचल से जागते हुए, बोअज़ ने पूछा, “तुम कौन हो?” रूत ने उत्तर दिया, “मैं तो तेरी दासी रूत हूँ; तू अपनी दासी को अपनी चद्दर ओढ़ा दे, क्योंकि तू हमारी भूमि छुड़ानेवाला कुटुम्बी है” (3:9) l

चद्दर और पंखों के लिए समान इब्रानी शब्द है l बोअज़ ने रुत से विवाह करके उसे शरण दी, और उनके परपोते दाऊद ने इस्राएल के परमेश्वर की प्रशंसा में उनकी कहानी को दोहराया : “हे परमेश्वर, तेरी करुणा कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखों के तले शरण लेते हैं” (भजन 36:7) l

विश्वसनीय और असुरक्षित

“अरे, पोह फैंग!” एक चर्च मित्र ने टेक्स्ट किया l “माह की देखभाल समूह के लिए, आइए हम सभी को याकूब 5:16 करने के लिए कहें l विश्वास और गोपनीयता का एक सुरक्षित वातावरण बनाएं, ताकि हम अपने जीवन में संघर्ष के एक क्षेत्र को साझा कर सकें और परस्पर प्रार्थना कर सकें l”

एक पल के लिए, मुझे यकीन नहीं था कि कैसे जवाब दूँ l जबकि हमारे छोटे समूह के सदस्य एक-दूसरे को वर्षों से जानते हैं, हम वास्तव में कभी भी अपने सभी दुखों और संघर्षों को परस्पर साझा नहीं करते थे l आखिरकार, असुरक्षित होना भयानक है l

लेकिन सच्चाई यह है कि हम सभी पापी हैं और संघर्ष करते हैं l सबको यीशु चाहिए l परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह और मसीह पर हमारे भरोसे के बारे में असली बातचीत हमें उस पर भरोसा के लिए प्रोत्साहित करने का एक तरीका है l यीशु संग, हम परेशानी से मुक्त जीवन का पाखण्ड करना बंद कर सकते हैं l

तो मैंने जवाब दिया, “हाँ! उसे करते हैं!” शुरू में खराब लगा l लेकिन जैसे ही एक व्यक्ति ने साझा किया, तुरंत दूसरा बोला l हालाँकि कुछ चुप रहे, लेकिन समझ थी l दबाव नहीं था l हमने याकूब 5:16 का दूसरा भाग, “एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो” के द्वारा समाप्त किया l

उस दिन मैंने यीशु में विश्वासियों की संगति की सुन्दरता अनुभव किया l मसीह में हमारे समान विश्वास से, हम परस्पर असुरक्षित हो सकते हैं और अपनी निर्बलताओं और संघर्षों में हमारी मदद करने के लिए उस पर और दूसरों पर निर्भर हो सकते हैं l