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प्रतिज्ञा पूरी हुई

बचपन में मैं हर गर्मियों में अपने दादा-दादी के साथ एक हफ़्ते का मज़ा लेने के लिए दो सौ मील की यात्रा करता था। मुझे बाद में पता चला कि मैंने उन दो लोगों से कितनी ज्ञान की बातें सीखीं, जिन्हें मैं प्यार करता था। उनके जीवन के अनुभवों और परमेश्वर के साथ चलने से उन्हें ऐसे नज़रिए मिले, जिनकी कल्पना मेरा छोटा दिमाग अभी तक नहीं कर सकता था। परमेश्वर की वफ़ादारी के बारे में उनसे बातचीत ने मुझे आश्वस्त किया कि परमेश्वर भरोसेमंद है और वह अपना हर वादा पूरा करता है।   
जब एक स्वर्गदूत यीशु की माता, मरियम से मिलने आया तो उस समय पर वह एक किशोरी थी। जिब्राईल के द्वारा लाया गया वह अविश्वसनीय समाचार अभिभूत करने वाला रहा होगा, फिर भी उसने अनुग्रह के साथ उस कार्य को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया (लूका 1:38)। लेकिन शायद उनकी बुजुर्ग रिश्तेदार इलीशिबा से मुलाकात - जो एक चमत्कारी गर्भावस्था के बीच में थी (कुछ विद्वानों का मानना ​​है कि वह साठ साल की रही होगी) - उन्हें आराम मिला क्योंकि इलीशिबा ने जिब्राईल के शब्दों की उत्साहपूर्वक पुष्टि की कि वह प्रतिज्ञा किए गए बच्चे मसीहा की मां थीं। (पद 39-45)। 
जैसे-जैसे हम मसीह में बढ़ते और परिपक्व होते जाते हैं, जैसे मेरे दादा-दादी करते थे, वैसे-वैसे हम सीखते जाते हैं कि वह अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करता है। उसने इलीशिबा और उसके पति जकर्याह के लिए एक संतान की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया (पद 57-58)। और वह पुत्र, अर्थात् यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, उस प्रतिज्ञा का अग्रदूत (संदेशवाहक) बना जो सैकड़ों वर्ष पहले की गई थी, अर्थात् वह प्रतिज्ञा जो मनुष्यजाति के भविष्य की दिशा को बदल देगी। प्रतिज्ञा किया हुआ मसीहा, अर्थात् संसार का उद्धारकर्ता, आ रहा है! (मत्ती 1:21–23) 
—सिंडी हैस कास्पर 

मार्गदर्शन स्वीकारना

जब हम खलिहान में खड़े थे जहाँ मेरी मित्र मिशेल मेरी बेटी को घोड़े की सवारी करना सिखा रही थी, तो वहाँ हवा से चमड़े और घास की गंध आ रही थी। जब मिशेल ने यह दिखाया कि लगाम को घोड़े के दांतों के पीछे कैसे रखा जाता है तो उस समय पर मिशेल के सफेद टट्टू (छोटा घोड़ा) ने अपना मुँह खोल दिया। जैसे ही मेरी बेटी ने उसके कानों पर लगी लगाम खींची, तो मिशेल ने उसे समझाया कि लगाम इसलिए महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे सवार को घोड़े को धीमा करने और उसे बाईं या दाईं ओर चलाने का अधिकार मिलता है।  
घोड़े की लगाम, मनुष्य की जीभ की तरह ही, छोटी परन्तु महत्वपूर्ण होती है। दोनों ही का किसी बड़ी और शक्तिशाली वस्तु पर बहुत अधिक प्रभाव होता है— और लगाम के मामले में, यह घोड़ा होता है। जीभ के मामले में, यह हमारे शब्द होते हैं (याकूब 3:3, 5)।  
हमारे शब्द अलग-अलग दिशाओं में दौड़ सकते हैं। “इसी से हम प्रभु और पिता की स्तुति करते हैं, और इसी से मनुष्यों को...श्राप देते हैं” (पद 9)। दुर्भाग्य से, बाइबल इस बात की चेतावनी देती है कि हमारी बोली (बात-चीत) को नियंत्रित करना बहुत कठिन है क्योंकि शब्द हमारे हृदयों से निकलते हैं (लूका 6:45)। इस बात के लिए धन्यवाद हो कि प्रत्येक विश्वासी में वास करने वाला परमेश्वर का आत्मा, हमें धीरज, भलाई और संयम में उन्नति करने में सहायता करता है (गलातियों 5:22-23)। जब हम आत्मा के साथ सहयोग करते हैं, तो हमारे हृदय बदल जाते हैं और हमारे शब्द भी बदल जाते हैं। गाली-गलौज प्रशंसा करने में बदल जाता है। झूठ सच में बदल जाता है । आलोचना प्रोत्साहन में बदल जाती है।  
जीभ को वश में करने का अर्थ केवल स्वयं को सही बातें कहने के लिए प्रशिक्षित करना नहीं होता है। यह पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन को स्वीकार करना है ताकि हमारे शब्द उस करुणा और प्रोत्साहन को उत्पन्न करें जिसकी संसार को आवश्यकता है।  
—जेनीफर बेनसन शुल्ड्ट 

आश्चर्यकर्म करने वाला परमेश्वर

सम्मेलन केंद्र में अंधेरा छा गया, और हज़ारों विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपना सिर झुका लिया, जब वक्ता ने समर्पण की प्रार्थना में हमारी अगुवाई की । जब उन्होंने उन लोगों का स्वागत किया, जो विदेशी मिशनों में सेवा करने के लिए बुलाए गए थे, तो मैं महसूस कर सकता था कि मेरी दोस्त लिनेट अपनी सीट छोड़ रही थी और जानती थी कि वह फिलीपींस में रहने और सेवा करने का वादा कर रही थी। फिर भी मुझे खड़े होने की कोई इच्छा नहीं हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका में ज़रूरतों को देखते हुए, मैं अपनी जन्मभूमि में परमेश्वर के प्रेम को साझा करना चाहता था। परन्तु एक दशक बाद, मैने दूसरे देश में परमेश्वर की सेवा करते हुए उन लोगों के बीच अपना घर बनाया जो उसने मेरे पड़ोसियों के रूप में मुझे दिए थे। मैं अपना जीवन कैसे व्यतीत करूँगा, इस बारे में मेरे विचार तब बदल गए जब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि परमेश्वर ने मुझे उस अभियान से अलग कार्य के लिए आमंत्रित किया है जिसका मैंने अनुमान लगाया था। 
जिन लोगों से यीशु मिलता था उनको अक्सर वह आश्चर्यचकित किया करता था, जिसमें वे मछुआरे भी शामिल थे जिन्हें उसने अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया था। जब मसीह ने उन्हें लोगों को पकड़ने का एक नया मिशन (विशेष कार्य) दिया, तो पतरस और अन्द्रियास “तुरंत” अपना जाल छोड़कर उसके पीछे हो लिए (मत्ती 4:20), और याकूब एवं योना ने भी “तुरंत” अपनी नाव छोड़ दी (पद 22)। वे उस पर भरोसा करते हुए यह न जानते हुए भी कि वे कहाँ जा रहे थे, यीशु के साथ इस नए अभियान पर निकल पड़े।  निःसंदेह, परमेश्वर बहुत से लोगों को अपनी सेवा वहीं पर करने के लिए बुलाता है जहाँ पर वे हैं! चाहे रुकना हो या जाना हो, हम सब उसकी ओर हमें अद्भुत अनुभवों और उसके लिए जीवन व्यतीत करने के अवसरों के साथ आश्चर्यचकित करने की आशा से देख सकते हैं, जिस तरह से हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। 
—एमी बाऊचर पाय 

करुणामय कार्य

 
गर्भपात से पीड़ित होने के महीनों बाद, वैलेरी ने गैरेज बिक्री करने का फैसला किया। कुछ मील की दूरी पर रहने वाले उसके एक पड़ोसी शिल्पकार, जेरल्ड ने बड़ी उत्सुकता से उससे बच्चे का वह पालना खरीद लिया जिसे वह बेच रही थी। वहाँ पर बात करते हुए, उसकी पत्नी को वैलेरी के गर्भपात के बारे में मालूम हुआ। घर जाते हुए रास्ते में उसकी स्थिति के बारे में सुनने के बाद, जेरल्ड ने वैलेरी के उस पालने का उपयोग करके उसके लिए एक उपहार बनाने का निर्णय लिया। एक सप्ताह के बाद, उसने आँसुओं के साथ वैलेरी को एक सुंदर बेंच भेंट की। वैलेरी ने कहा कि “संसार में अच्छे लोग भी हैं, और उसका प्रमाण यहाँ पर है।” 
वैलेरी की तरह, रूत और नाओमी को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। नाओमी के पति और दो पुत्रों की मृत्यु हो गई थी। और अब उसके तथा उसकी दुखी बहू रूत के कोई वारिस न थे, और न ही कोई उनका भरण-पोषण करनेवाला था (रूत 1:1-5)। यहीं पर बोअज का आना हुआ। जब रूत बचे हुए अनाज को चुनने के लिए एक खेत में गई, तो खेत के मालिक बोअज ने उसके बारे में पूछा। जब उसे पता चला कि वह कौन है, तो वह उसके प्रति दयालु हुआ (2:5-9)। रूत ने चकित होकर पूछा, “क्या कारण है कि तूने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि करके मेरी सुधि ली है?” (पद 10 ) बोआज़ ने उत्तर दिया कि “जो कुछ तूने पति की मृत्यु के बाद अपनी सास से किया है...यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।” (पद 11) 
बाद में बोअज ने रूत से विवाह किया और नाओमी की देखभाल की (4 अध्याय)। उनके विवाह से, दाऊद और यीशु के एक पूर्वज का जन्म हुआ। जैसे दूसरे के दुःख को बदलने में सहायता करने के लिए परमेश्वर ने जेरल्ड और बोअज को उपयोग किया, वैसे ही वह पीड़ा में पड़े दूसरे लोगों के प्रति करुणा और सहानुभूति प्रकट करने के लिए हमारे माध्यम से भी काम कर सकता है।  
—एलीसन काइडा