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चरित्र परिवर्तन

परिवार सत्रहवीं सदी के व्याकरणविद्(grammarian-व्याकरण जाननेवाला) डॉमिनिक बहॉर्स के बिस्तर के आसपास इकठ्ठा हुआ, जो मृत्यु शय्या पर था l जब उन्होंने अंतिम साँसें लीं, कहते हैं कि उन्होंने कहा, “मैं मरने वाला हूँ या मैं मरने जा रहा हूँ; कोई भी अभिव्यक्ति सही है l” अपनी मृत्यु शय्या पर व्याकरण की परवाह कौन करेगा? एक मात्र वही व्यक्ति जिसने जीवन भर व्याकरण की परवाह की l 

जब तक हम बुढ़ापे तक पहुँचते हैं, हम काफी हद तक अपने तरीकों में तैयार को चुके होते हैं l हमारे पास अपने विकल्पों को उन आदतों में बदलने के लिए जीवन भर का समय रहा होगा जो अच्छे या बुरे चरित्र में बदल(calcify) जाती है l हम वही हैं जो बनने के लिए हमने चुना है l 

जब हमारा चरित्र युवा और लचीला है तो ईश्वरीय आदतें विकसित करना आसान होता है l पतरस आग्रह करता है, “तुम सब प्रकार का यत्न करके अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ, और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ”(2 पतरस 1:5-7) l इन गुणों का अभ्यास करें, और “तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनंत राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे”(पद.11) l 

पतरस की सूची में कौन से गुण आपमें सबसे अधिक जीवित हैं? किन गुणों पर अभी भी काम रहने की ज़रूरत है? हम वास्तव में नहीं बदल सकते जो हम बन गए हैं, लेकिन यीशु बदल सकता है l उससे आपको बदलने और सशक्त बनाने के लिए कहें l यह एक धीमी, कठिन यात्रा हो सकती है, लेकिन यीशु हमें वही देने में माहिर है जिसकी हमें ज़रूरत है l उससे अपने चरित्र को बदलने के लिए कहें ताकि आप अधिक से अधिक उसके जैसे बन सकें l 

शालोम(शान्ति) के प्रतिनिधि

2015 में, कोलोराडो स्प्रिंग्स, कोलोराडो में स्थानीय सेवाकाइयों ने मिलकर शहर की सेवा की और COSILoveYou(City Gospel Movement/शहर सुसमाचार आन्दोलन) का जन्म हुआ l प्रत्येक पतझड़ में, सिटीसर्व(CityServe) नामक एक कार्यक्रम में, समूह विश्वासियों को समुदाय की सेवा के लिए भेजता है l

कई साल पहले, मुझे और मेरे बच्चों को सिटीसर्व(CityServe) के दौरान शहर के केंद्र में एक प्राथमिक विद्यालय में भेजा गया था l हम ने सफाई की l हमने खरपतवार निकाली l और हमने एक कला परियोजना पर काम किया, एक चेन-लिंक बाड़ के द्वारा रंगीन प्लास्टिक टेप को इस तरह लगाया कि यह पहाड़ों जैसा लगे l सरल, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सुन्दर l 

जब भी मैं स्कूल के पास से गुजरता हूँ, हमारी विनम्र कला परियोजना मुझे यिर्मयाह 29 की याद दिलाती है l वहाँ, परमेश्वर ने अपने लोगों को बसने और जिस शहर में वे थे, उसकी सेवा करने का निर्देश दिया, भले ही वे निर्वासन में थे और वहाँ रहना नहीं चाहते थे l  

नबी ने कहा, “जिस नगर में मैं ने तुम को बंदी करके भेज दिया है, उसके कुशल का यत्न किया करो और उसके हित के लिए यहोवा से प्रार्थना किया करो”(पद.7) l यहाँ शांति शब्द इब्री भाषा में शालोम(Shalom) है l और इसमें सम्पूर्णता और समृद्धि का विचार शामिल है जिसे केवल परमेश्वर की भलाई और छुटकारा ही ला सकती है l 

आश्चर्यजनक रूप से, परमेश्वर हममें से हर एक को शालोम/शांति के अपने प्रतिनिधि/एजेंट बनने के लिए आमंत्रित करता है—ठीक वहीँ जहां हम हैं l हमें उन जगहों पर सुन्दरता उत्पन्न करने और सरल, ठोस तरीकों से उद्धार/छुटकारा का अभ्यास करने के लिए आमंत्रित किया गया है जहाँ उसने हमें रखा है l 

बुद्धिमान चुनाव करना

क्या मैं अपनी दिवंगत माँ का घर बेच दूँ? मेरी प्यारी, विधवा माँ के निधन के बाद उस फैसले ने मेरे हृदय को बोझिल किया l भावुकता ने मेरे अहसासों को प्रेरित किया l फिर भी, मेरी बहन और मैंने ने उनके खाली घर की सफाई और मरम्मत में दो साल बिताएं, और उसे बेचना चाहा l यह 2008 की बात है, और विश्विक मंदी(global recession) के कारण हमारे पास कोई खरीददार नहीं था l हम कीमत कम करते रहे लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला l फिर, एक सुबह अपनी बाइबल पढ़ते समय इस अंश पर मेरी नज़र पड़ी : “जहाँ बैल नहीं, वहाँ गौशाला स्वच्छ तो रहता है, परन्तु बैल के बल से अनाज की बढ़ती होती है”(नीतिवचन 14:4) l 

कहावत में खेती की बात की गयी थी, लेकिन मैं इसके सन्देश से चकित थी l एक खाली स्टॉल साफ़-सुथरा रहता है, लेकिन केवल निवासियों के रहने से ही फसल की पैदावार हो सकती है l या, हमारे लिए, उपयोगिता और पारिवारिक विरासत की फसल l मैंने अपनी बहन को फोन करके पूछा, “अगर हम माँ का घर रखेंगे तो कैसा रहेगा? हम इसे किराए पर दे सकते हैं l”

चुनाव ने हमें आश्चर्यचकित कर दिया l माँ के घर को निवेश में बदलने की हमारी कोई योजना नहीं थी l लेकिन बाइबल, एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में व्यवहारिक बुद्धिमत्ता भी देती है l जैसा कि दाऊद ने प्रार्थना की, “हे यहोवा, अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे”(भजन संहिता 25:4) l 

हमारे चुनाव से, मुझे और मेरी बहन को कई प्यारे परिवारों को माँ का घर किराये पर देने का सौभाग्य मिला है l हमने यह जीवन बदल देनेवाला सत्य भी सीखा : “पवित्रशास्त्र हमारे निर्णयों का मार्गदर्शन करने में मदद करता है l भजनकार ने लिखा, “तेरा वचन मेरे पावों के लिए दीपक है, और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है”(भजन सहिंता 119:105) l 

नियोजित भेंट/नियुक्ति

22 नवम्बर, 1963 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी, दार्शनिक और लेखक ऑल्ड्स हक्सले, और मसीही प्रचारक/पक्षसमर्थक(apologist) सी.एस. ल्युईस सभी की मृत्यु हो गयी l मौलिक रूप से भिन्न विश्वदृष्टिकोण वाले तीन प्रसिद्ध व्यक्ति l हक्सले, अज्ञेयवादी/अनीश्वरवादी(agnostic), अभी भी पूर्वी रहस्यवाद(Eastern mysticism) में डूबा हुआ था l कैनेडी, हालाँकि एक रोमन कैथोलिक थे, मानवतावादी दर्शन(humanistic philosophy) पर कायम थे l और ल्युईस एक पूर्व नास्तिक थे जो एक एंग्लिकन/इंग्लैंड के चर्च से सम्बंधित या सदस्य(Anglican) के रूप में यीशु में एक मुखर विश्वासी बन गया l मृत्यु किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं करती क्योंकि इन तीनों प्रसिद्ध व्यक्तियों को एक ही दिन मृत्यु का सामना करना पड़ा l 

बाइबल कहती है कि मृत्यु मानव अनुभव में तब आई जब आदम और हव्वा ने अदन के बगीचे में अनाज्ञाकारी हुए(उत्पत्ति 3)—एक दुखद सच्चाई जिसने मानव इतिहास को चिन्हित किया है l मृत्यु महान समकारी/बराबर करनेवाला(equalizer) है या, जैसा कि एक व्यक्ति ने कहा है, वह नियुक्ति(appointment) जिसे कोई भी टाल नहीं सकता है l यह इब्रानियों 9:27 का मुद्दा है, जहां हम पढ़ते हैं, “मनुष्यों के लिए एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है l” 

हमें अपनी मृत्यु के बारे में आशा कहाँ से मिलती है और उसके बाद क्या होता है? मसीह में l रोमियों 6:23 इस सत्य को पूरी तरह से दर्शाता है : “क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनंत जीवन है l” परमेश्वर का यह उपहार कैसे उपलब्ध हुआ? यीशु, परमेश्वर का पुत्र, मृत्यु को नष्ट करने के लिए मर गया और हमें हमेशा के लिए जीवन प्रदान करने के लिए कब्र से जी उठा(2 तीमुथियुस 1:10) l 

लोगों से यीशु के बारे में बताएं

पौलुस यहूदी शुद्धिकरण समारोह में मंदिर में गया था(प्रेरितों 21:26) l लेकिन कुछ उपद्रवियों ने सोचा कि वह क़ानून के विरुद्ध शिक्षा दे रहा था, इसलिए उन्होंने उसे मार डालना चाहा(पद.31) l रोमी सैनिक तुरंत हस्तक्षेप कर पौलुस को गिरफ्तार कर लिये, उसे बाँध दिया, और भीड़ के चिल्लाते हुए, “उसका अंत कर दो!”(पद.36) उसे मंदिर क्षेत्र से बाहर ले गए l 

प्रेरित ने इस धमकी पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त दी? उसने पलटन के सरदार से पुछा कि क्या वह “लोगों से बात [कर सकता है]”(पद.39) l जब रोमी सरदार ने अनुमति दी, तो पौलुस, जिसका खून बह रहा था, और घायल था, क्रोधित भीड़ की ओर मुड़ा और यीशु में अपना विश्वास साझा किया(22:1-16) l 

यह दो हज़ार साल से भी पहले की बात है—बाइबल की एक पुरानी कहानी जिससे हमें जुड़ना मुश्किल हो सकता है l ऐसे देश में जहां विश्वासियों पर नियमित रूप से अत्याचार किया जाता है, अभी हाल ही में, पीटर नाम के एक व्यक्ति को उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह जेल में बन्द अपने एक मित्र से मिलने गया था जो यीशु में विश्वास करता था l पीटर को जेल की एक अँधेरी कोठरी में डाल दिया गया और पूछताछ के दौरान उसकी आँखों पर पट्टी बाँध दी गयी l जब आँखों से पट्टी हटाई गयी तो उसने चार सैनिकों को बंदूकें ताने हुए देखा l पीटर की प्रतिक्रिया? उसने इसे अपना विश्वास साझा करने के “एक उत्तम अवसर के रूप में देखा l”

पौलुस और एक आधुनिक/modern-day पीटर एक कठिन, महत्वपूर्ण सत्य की ओर इशारा करते हैं l भले ही परमेश्वर हमें कठिन समय का अनुभव करने की अनुमति देता है—यहाँ तक कि सताव भी—हमारा कार्य एक ही है : “सुसमाचार प्रचार [करें]”(मरकुस 16:15) l वह हमारे साथ रहेगा और हमें अपना विश्वास साझा करने के लिए बुद्धि और सामर्थ्य देगा l