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अभिमान और धोखा

प्रेमी परमेश्वर, आपके विनम्र सुधार के लिए धन्यवाद। अपने झुके कंधो के साथ, मैंने उन कठिन शब्दों को बड़बड़ाया। मैं बहुत अहंकारी रहा हूँ, यह सोचकर कि मैं सब अपने आप कर सकता हूँ। महीनों से, मैं सफल कार्य परियोजनाओं का आनंद ले रहा था, और प्रशंसाओं ने मुझे अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने और परमेश्वर की अगुवाई को अस्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। पर एक चुनौतीपूर्ण परियोजना ने मुझे एहसास दिलाया कि मैं उतना बुद्धिमान नहीं हूँ जितना मैं सोचता हूँ। मेरे घमंडी हृदय ने मुझे यह विश्वास दिलाकर धोखा दिया था कि मुझे परमेश्वर की सहायता की आवश्यकता नहीं है।

एदोम के शक्तिशाली राज्य ने अपने घमंड के कारण परमेश्वर से अनुशासन प्राप्त किया। एदोम पहाड़ी इलाकों के बीच स्थित था, जिससे वह दुश्मनों द्वारा आक्रमण करने के लिए मुश्किल प्रतीत होता था (ओबद्याह 1:3)। एदोम एक समृद्ध राष्ट्र भी था, जो सामरिक व्यापरिक मार्गों के केंद्र में स्थित था और तांबे में समृद्ध था, जो प्राचीन समय में एक अत्यधिक मूल्यवान वस्तु थी। वह अच्छी चीजों से भरा हुआ था किन्तु घमंड से भी। परमेश्वर के लोगों पर अत्याचार करने के बावजूद इसके नागरिकों का मानना था कि उनका राज्य अजेय है (पद 10-14)। परन्तु परमेश्वर ने ओबद्याह भविष्यद्वक्ता का उपयोग उन्हें अपने न्याय के बारे में बताने के लिए किया। राष्ट्र एदोम के खिलाफ उठ खड़े होंगे, और एक राज्य जो पहले शक्तिशाली था रक्षाहीन और तुच्छ होगा (पद 1-2)।

घमंड हमें यह धोखा देता है कि हम सोचें कि हम परमेश्वर के बिना अपना जीवन अपने तरीके से जी सकते हैं। यह हमें अधिकार, सुधार और कमजोरी के प्रति अभेद्य महसूस कराता है। परन्तु परमेश्वर हमें अपने आप को उसके सामने दीन करने के लिए बुलाता है (1 पतरस 5:6)। जब हम अपने अभिमान से मुड़ते हैं और पश्चाताप चुनते हैं, तो परमेश्वर हमें उस पर पूर्ण विश्वास की ओर ले जाता है।

ईश्वरीय कोमलता

मैंने एक बार सुना कि एक व्यवसायी ने अपने कॉलेज के वर्षों को ऐसा बताया जब वह प्राय: अवसाद के कारण "असहाय और आशाहीन महसूस करते थे। दु:ख की बात है कि उन्होंने कभी भी इन भावनाओं के बारे में डॉक्टर से बात नहीं की, बल्कि इसके बजाय और अधिक कठोर योजनाएँ बनाना शुरू कर दिया - अपने स्थानीय पुस्तकालय से आत्महत्या पर एक किताब मंगवाना और अपनी जान लेने का दिन नियत करना।

परमेश्वर असहाय और आशाहीन लोगों की परवाह करते है। हम इसे इस प्रकार से देखते है जो आश्चर्यकर्म उसने बाइबिल के पात्रों के उनके अंधकारमय समय में किए। जब योना मरना चाहता था, तो परमेश्वर ने उसके साथ कोमलता से बातचीत करी। (योना 4:3-10)। जब एलिय्याह ने परमेश्वर से उसकी जान लेने के लिए कहा (1 राजा 19:4), परमेश्वर ने उसे तरोताजा करने के लिए रोटी और पानी प्रदान किया (पद 5-9), उससे धीरे से बात की (पद 11-13), और उसे यह देखने में मदद की कि वह उतना अकेला नहीं है जितना वह सोच रहा था (पद 18)। परमेश्वर टूटे हुए मन वालों के पास कोमलता और वास्तविक सहायता के साथ आता है।

जब आत्महत्या पर उसकी पुस्तक एकत्र करने के लिए तैयार थी पुस्तकालय ने छात्र को सूचित किया। लेकिन कुछ गड़बड़ी में, नोट उनके बजाय उनके माता-पिता के पते पर चला गया। जब उनकी माँ ने व्याकुल होकर उन्हें कॉल किया, तो उन्होंने महसूस किया कि उनकी आत्महत्या से कितनी तबाही होगी। उस पते में अगर गड़बड़ी न होती, वे कहते हैं, तो वे आज यहॉँ पर नहीं होते।

मुझे इस बात पर विश्वास नहीं कि छात्र भाग्य या संयोग से बचा था। चाहे वह रोटी और पानी हो जब हमें इसकी आवश्यकता हो, या समय पर गलत पता, जब रहस्यमय अंत:क्षेप (हस्तशेप} हमारे जीवन को बचाता है, तो यह बताता है कि यह ईश्वर के अद्भुत पवित्र प्रेम के कारण है। ।

परमेश्वर की चाल

मुझे स्क्रैबल का एक अच्छा खेल पसंद है। एक विशेष खेल के बाद, मेरे दोस्तों ने एक चाल का नाम मेरे नाम पर रखा — इसे "कटारा" कहा। मैं पूरे खेल में पीछे छूट रही थी, लेकिन इसके अंत में - बैग में कोई गोटी (टाइल) नहीं बची थी - मैंने सात-अक्षर का शब्द बनाया। इसका मतलब था कि खेल खत्म हो गया था, और मुझे अपने सभी विरोधियों के बची हुई गोटियों (टाइलों) से पचास बोनस अंक और साथ ही सभी अंक प्राप्त हुए, जिससे मैं अंतिम स्थान से पहले स्थान पर पहुँच गयी। अब जब भी हम खेलते हैं और कोई पीछे चल रहा होता है, तो वे याद करते हैं कि क्या हुआ था और एक "कटारा" की उम्मीद रखते हैं।

अतीत में जो हुआ उसे याद करने से हमारी आत्माएं उभरती हैं और हमें आशा मिलती है। और ठीक यही इस्राएलियों ने फसह मनाते समय किया। फसह स्मरण कराता है कि परमेश्वर ने इस्राएलियों के लिए क्या किया था जब वे मिस्र में थे, फिरौन और उसके दल द्वारा उत्पीड़ित थे (निर्गमन 1:6-14)। परमेश्वर की दोहाई देने के बाद, उसने लोगों को शक्तिशाली तरीके से छुड़ाया। उसने उनसे कहा कि वे अपने दरवाजे की चौखट पर लहू लगा दें ताकि मृत्यु का दूत उनके पहिलौठे लोगों और जानवरों को "पार" कर दे (12:12-13)। तब वें मृत्यु से सुरक्षित रखे जाएंगे।

सदियों बाद, यीशु में विश्वासी नियमित रूप से प्रभुभोज में सहभागी होते हुए क्रूस पर उसके बलिदान को याद करते हुए — हमे वो प्रदान किया गया जो पाप और मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए आवश्यक है (1 कुरिन्थियों 11:23-26)। अतीत में किये परमेश्वर के प्रेमपूर्ण कार्यों को याद करना हमें आज के लिए आशा देता है।

घर पर विश्वास की बातचीत

"घर जैसी कोई और जगह नहीं होती। घर जैसी कोई और जगह नहीं होती ।" द विजार्ड ऑफ ओज़ में डोरथी द्वारा बोली जाने वाली यह न भुलाने वाली पंक्तियाँ एक कहानी कहने वाले यंत्र को प्रकट करती हैं जो स्टार वॉर्स से लेकर द लायन किंग तक की हमारी सबसे स्मरणीय कहानियों में सबसे अधिक पाई जाती हैं। इसे "हीरो की यात्रा" के रूप में जाना जाता है। संक्षेप में: एक साधारण व्यक्ति एक साधारण जीवन जी रहा होता है जब एक असाधारण रोमांच पैदा किया जाता है। पात्र घर छोड़ देता है और एक अलग दुनिया की यात्रा करता है जहां परीक्षा और परेशानी प्रतीक्षा करती है, साथ ही सलाहकार और खलनायक भी। यदि वह परीक्षा पास कर लेता या लेती है और वीर साबित होता या होती है, तो घर लौटना उन कहानियों और उनसे प्राप्त हुए ज्ञान के साथ अंतिम चरण होता है। अंतिम भाग निर्णायक होता है।

दुष्ट आत्मा-ग्रस्त व्यक्ति की कहानी अभिनेता (हीरो) की यात्रा के समान है। यह दिलचस्प है कि अंतिम दृश्य में उस व्यक्ति ने यीशु से विनती की कि वह उसे "अपने साथ रहने" दे (मरकुस 5:18)। तौभी यीशु ने उससे कहा: "अपने घर अपने लोगों के पास जा" (पद 19)। इस आदमी की यात्रा में उन लोगों के लिए घर लौटना महत्वपूर्ण था जो उसे सबसे अच्छे से जानते थे और उन्हें अपनी अद्भुत कहानी सुनाना।

परमेश्वर हम में से प्रत्येक को अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग परिदृश्यों में बुलाते हैं। लेकिन हम में से कुछ के लिए, हमारी विश्वास यात्रा के लिए घर जाना और अपनी कहानी उन लोगों को बताना महत्वपूर्ण हो सकता है जो हमें सबसे अच्छे से जानते हैं। हम में से कुछ के लिए यह बुलाहट है "घर जैसी कोई जगह नहीं।"

पर्याप्त समय

जब मैंने अपने दोस्त के बुकशेल्फ़ पर लियो टॉल्स्टॉय के ‘युद्ध और शांति’ पुस्तक श्रृंखला देखी, तो मैंने स्वीकार किया, "मैंने वास्तव में इसे कभी भी पूरा नहीं किया है।" "ठीक है," मार्टी ने हंसते हुए कहा, "जब मैं शिक्षण से सेवानिवृत्त हुआ, तो मुझे यह एक मित्र से उपहार के रूप में मिला, जिसने मुझसे कहा, 'अब आपके पास इसे पढ़ने का समय होगा।"

सभोपदेशक 3 के पहले आठ पद कुछ मन को प्रसन्न करने वाले विकल्पों के साथ जीवन की गतिविधियों की एक परिचित, प्राकृतिक लय को बताते हैं। चाहे हम खुद को जीवन के किसी भी पड़ाव में पाए, हम जो कुछ भी करना चाहते हैं उसे करने के लिए समय निकालना प्राय: कठिन होता है। और अपने समय के सदुपयोग हेतु बुद्धिमानी से निर्णय लेने के लिए, एक योजना बनाना मददगार है (भजन 90:12)।

प्रत्येक दिन परमेश्वर के साथ बिताया गया समय हमारे आत्मिक स्वास्थ्य के लिए एक प्राथमिकता है। फलदायक कार्य करना हमारी आत्मा के लिए सन्तोषजनक है (सभोपदेशक 3:13)। परमेश्वर की सेवा करना और अन्य लोगों की मदद करना हमारे लिए आवश्यक है जिससे परमेश्वर का उद्देश्य हमारे लिए पूरा हो (इफिसियों 2:10)। और आराम या आराम का समय व्यर्थ नहीं जाता बल्कि शरीर और आत्मा को तरोताजा करने वाला होता है।

बेशक, यहां और अभी पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करना आसान है - उन चीजों के लिए समय निकालना जो हमारे लिए सबसे ज्यादा अर्थ रखती हैं। लेकिन सभोपदेशक 3:11 कहता है कि परमेश्वर ने हमारे हृदयों में "अनन्त काल" को रखा है — जो हमें अनन्तकाल की चीजों को प्राथमिकता देने की याद दिलाता है। यह हमें एक ऐसे विचार के आमने-सामने ला सकता है — परमेश्वर का शाश्वत दृष्टिकोण "शुरुआत से अंत तक।"