श्रेणी  |  odb

सही पहचान

जब मेरी सहेली ने मेरे द्वारा खींची गई तस्वीरों की समीक्षा की, तो उसने उन शारीरिक विशेषताओं की ओर इशारा किया, जिन्हें उन्होंने खामियों के रूप में देखा था। मैंने उसे करीब से देखने के लिए कहा। "मैं राजाओं के सर्वशक्तिमान राजा की एक सुंदर और प्यारी बेटी को देखती हूँ," मैंने कहा। "मैं परमेश्वर और अन्य लोगों के एक दयालु प्रेमी को देखती हूं, जिनकी वास्तविक दया, उदारता और विश्वास ने इतने सारे जीवन में बदलाव किया है।" जब मैंने उसकी आँखों में आँसुओं को देखा, तो मैंने कहा, "मुझे लगता है कि आपको एक ताज चाहिए!" उस दोपहर बाद में, हमने अपने दोस्त के लिए एकदम सही ताज चुना ताकि वह अपनी असली पहचान कभी न भूलें।

जब हम यीशु को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, तो वह हमें प्रेम से ताज पहनाता है और हमें अपनी सन्तान कहता है (1 यूहन्ना 3:1)। वह हमें विश्वास में दृढ़ रहने की शक्ति देता है ताकि "हमें हिवाव हो, और हम उसके आने पर उसके सामने लज्जित न हों” (2:28)। यद्यपि वह हमें वैसे ही स्वीकार करता है जैसे हम हैं, उसका प्रेम हमें शुद्ध करता है और हमें उसकी समानता में बदल देता है (3:2–3)। वह हमें उसके लिए हमारी आवश्यकता को पहचानने और पश्चाताप करने में मदद करता है जब हम पाप से दूर होने की शक्ति में आनन्दित होते हैं (पद 7–9)। हम विश्वासयोग्य आज्ञाकारिता और प्रेम में रह सकते हैं (पद 10), उसके सत्य को अपने हृदयों में छिपाकर और उसकी आत्मा को अपने जीवनों में उपस्थित जानकर l 

मेरे दोस्त को उस दिन वास्तव में एक ताज या किसी अन्य हलके गहने की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन हम दोनों को परमेश्वर के प्रिय बच्चों के रूप में अपने मूल्य की याद दिलाने की आवश्यकता थी।

विविधता का जश्न

एक विश्वविद्यालय में 2019 के ग्रेजुएशन समारोह में, 608 छात्रों ने अपने प्रमाण पत्र प्राप्त करने की तैयारी की। प्रिंसिपल ने छात्रों को उस देश का नाम पढ़ने के लिए खड़े होने के लिए कहा जहां वे पैदा हुए थे: अफगानिस्तान, बोलीविया, बोस्निया। . . . प्रिंसिपल तब तक पढ़ते रहे जब तक उन्होंने साठ देशों का नाम नहीं लिया और हर छात्र एक साथ खड़े होकर जय-जयकार कर रहा था। साठ देश; एक विश्वविद्यालय।

विविधता के बीच एकता की सुंदरता एक शक्तिशाली छवि थी जिसने परमेश्वर के दिल के करीब कुछ मनाया गया─एकता में रहने वाले लोग।

हम भजन 133 में परमेश्वर के लोगों के बीच एकता के लिए प्रोत्साहन के विषय में पढ़ते हैं, आरोहण का एक भजन─एक गीत गाया जाता था जब लोग वार्षिक समारोहों के लिए यरूशलेम में प्रवेश करते थे। भजन ने लोगों को सामंजस्य के साथ रहने के लाभों के बारे में याद दिलाया (पद 1) मतभेदों के बावजूद जो विभाजन का कारण बन सकते हैं। विशद कल्पना में, एकता को ताज़ा ओस (पद 3) और तेल के रूप में वर्णित किया गया है─याजकों का अभिषेक करने के लिए उपयोग किया जाता था (निर्गमन 29:7)─एक याजक के सिर, दाढ़ी और कपड़ों के "नीचे बहना" (पद 2)। साथ में, ये छवियां इस वास्तविकता की ओर इशारा करती हैं कि एकता में परमेश्वर के आशीर्वाद इतने भव्य रूप से प्रवाहित होते हैं कि उन्हें समेटा नही जा सकता है।

यीशु में विश्वासियों के लिए, जातीयता, राष्ट्रीयता, या उम्र जैसे मतभेदों के बावजूद, आत्मा में एक गहरी एकता है (इफिसियों 4:3)। जब हम एक साथ खड़े होते हैं और उस सामान्य बंधन का जश्न मनाते हैं जब यीशु हमारी अगुवाई करते हैं, तो हम अपने ईश्वर प्रदत्त मतभेदों को स्वीकार कर सकते हैं और सच्ची एकता के स्रोत का जश्न मना सकते हैं।

हमें अपने चर्च समुदाय की आवश्यकता है

मैं एक दक्षिणी बैपटिस्ट उपदेशक के पहलौठे पुत्र के रूप में पला-बढ़ा हूं। हर रविवार को उम्मीद स्पष्ट थी : मुझे चर्च में रहना था। संभावित अपवाद? शायद अगर मुझे तेज बुखार होता। लेकिन सच्चाई यह है कि, मुझे जाना बहुत पसंद था, और मैं कई बार बुखार में भी गया। लेकिन दुनिया बदल गई है, और चर्च में नियमित उपस्थिति पहले की तरह नहीं है। बेशक, त्वरित सवाल यह है कि क्यों? उत्तर कई और विविध हैं। लेखक कैथलीन नॉरिस ने उन उत्तरों को एक पासबान से प्राप्त प्रतिक्रिया के साथ सामना करते हुए कहा, "हम चर्च क्यों जाते हैं?" उन्होंने कहा, "हम अन्य लोगों के लिए चर्च जाते हैं। क्योंकि वहां किसी को आपकी जरूरत हो सकती है।"

अब किसी भी तरह से हमारे चर्च जाने का एकमात्र कारण है यह नहीं है, लेकिन उसकी प्रतिक्रिया इब्रानियों के लिए लेखक के दिल की धड़कन के साथ प्रतिध्वनित होती है। उसने विश्वासियों को विश्वास में बने रहने के लिए आग्रह किया, और उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसने "एक दूसरे के साथ इकठ्ठा होना न [छोड़ने]" पर जोर दिया (इब्रानियों 10:25)। क्यों? क्योंकि हमारी अनुपस्थिति में कुछ महत्वपूर्ण छूट जाएगा : "एक दूसरे को समझाते रहें” (पद 25)। हमें "प्रेम और भले कामों में उकसाने के लिए” आपसी प्रोत्साहन की आवश्यकता है (पद 24)।

भाइयों-बहनों, मिलते रहें, क्योंकि वहाँ किसी को आपकी आवश्यकता हो सकती है। और संगत सच्चाई यह है कि आपको उनकी भी आवश्यकता हो सकती है।

एक बड़ा उजियाला

2018 में, बारह थाई लड़के और उनके फूटबाल कोच दोपहर का आनंद लेने के लिए एक भूल-भूलैया के सदृश गुफा में उतरे । अप्रत्याशित रूप से बढ़ते पानी के कारण उन्हें गुफा में अन्दर और अन्दर जाने के लिए विवश होना पड़ा, बचाव दल ने उन्हें ढाई सप्ताह के बाद बाहर निकाला । बढ़ते पानी के कारण निराश गोताखोर, लड़कों को बचाने का प्रयास किया जब वे छह टिमटिमाते टॉर्च के साथ एक छोटे चट्टान पर बैठे थे । उन्होंने अँधेरे में घंटो बिताए, उम्मीद की कि किसी तरह प्रकाश──और सहायता──पहुंचेगी । 

यशायाह नबी ने आशाहीन अन्धकार से भरा हुआ, हिंसा और लालच से अभिभूत, विद्रोह और शोक से ध्वस्त संसार का वर्णन किया (यशायाह 8:22) । बर्बादी के सिवा कुछ नहीं; टिमटिमाता और बुझता हुआ, अंधकारमय शुन्यता द्वारा समाप्त होने से पूर्व फड़फड़ाता हुआ आशा का दीप । और फिर भी, यशायाह दृढ़ता से कहता है, यह कुंद निराशा अंत नहीं था । परमेश्वर की करुणा के कारण, जल्द ही “जो भूमि व्यथा सह रही थी, अब वह उस निराशा से मुक्त हो जाएगी” (यशायाह 9:1 Ho।y Bib।e, BSI-Hindi C.।.) । परमेश्वर कभी भी अपने लोगों को अस्पष्ट बर्बादी में नहीं छोड़ने वाला था । उस समय नबी ने अपने लोगों के लिए आशा की घोषणा की और उस समय की ओर इशारा किया जब यीशु पाप के कारण अंधकार को दूर करने के लिए आएगा । 

यीशु आ चूका है । और अब हम यशायाह के शब्दों को नूतन अर्थ में सुनते हैं : “जो लोग अंधियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा,” यशायाह कहता है । “जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी” (पद.2) । 

चाहे रात जितनी भी अँधेरी हो, चाहे हमारी स्थिति जितनी भी निराशाजनक हो, हम अंधकार में छोड़े नहीं जाएंगे । यीशु यहाँ है । एक महान ज्योति चमकती है । 

विरोध के सामने परमेश्वर पर भरोसा

एस्तर की परवरिश फिलिपीन्स में एक जनजाति में हुई  जो मसीह में विश्वास के विरुद्ध था । उसने जीवन-घातक बीमारी से अपनी लड़ाई के दौरान एक चाची की प्रार्थना के बाद यीशु के द्वारा उद्धार को स्वीकार किया । आज हिंसा और यहाँ तक कि मृत्यु के जोखिम के बावजूद एस्तेर अपने स्थानीय समुदाए में बाइबल अध्ययन में अगुवाई करती है । वह यह कहते हुए आनंदित सेवा करती है, “मैं यीशु के विषय लोगों को बताना छोड़ नहीं सकती हूँ क्योंकि मैंने अपने जीवन में परमेश्वर की सामर्थ्य, प्रेम, भलाई, और विश्वासयोग्यता का अनुभव किया है ।”

विरोध की सूरत में ईश्वर की सेवा करना आज भी कई लोगों के लिए एक वास्तविकता है, जैसा कि बेबीलोन की कैद में रहनेवाले तीन युवा इस्राएली, शद्रक, मेशक, अबेदनगो के लिए था । दानिय्येल की पुस्तक में, हम सीखते हैं कि उन्होंने आसन्न मृत्यु के सामने भी राजा नबूकदनेस्सर की एक बड़ी सोने के मूरत के सामने प्रार्थना करने से इनकार कर दिया । पुरुषों ने गवाही दी कि परमेश्वर उनको बचाने में सक्षम था, लेकिन “यदि नहीं” भी बचाता है तो भी उन्होंने उसकी सेवा करने का चुनाव किया था (दानिय्येल 3:18) । जब उन्हें आग में फेंक दिया गया, परमेश्वर वास्तव में उनकी पीड़ा में उनके साथ शामिल हुआ (पद.25) । सभी के विस्मय में, वे बच गए और उनके “सिर का एक बाल भी न झुलसा” (पद.27) । 

यदि हम विश्वास के कार्य के कारण दुःख या सताव का सामना करते हैं, प्राचीन और वर्तमान उदाहरण हमें याद दिलाते हैं कि जब हम उसकी आज्ञा मानने का चुनाव करते हैं, परमेश्वर का आत्मा हमें सामर्थ्य देने और हमें थामने के लिए उपस्थित है “भले ही” चीजें हमारी उम्मीद से अलग हों ।