
परमेश्वर का प्रेम अधिक ताकतवर है
2020 में एलिस्सा मेंडोज़ा ने मध्य रात्रि के समय अपने पिता से एक चौकाने वाला ई-मेल प्राप्त किया । उस संदेश में निर्देश था कि उसे अपनी माँ के लिए माता-पिता की 25वीं वर्षगाठ पर क्या करना था l यह चौकाने वाला क्यों था? एलिस्सा के पिता 10 महीने पहले गुजर चुके थे । उसने यह जाना कि उन्होंने इसे अपनी बीमारी के दौरान लिखा था और ई-मेल को भजने के लिए नियत किया था, यह जानते हुए कि शायद वह जीवित नहीं रहेंगे l उन्होंने आने वाले वर्षों में अपनी पत्नी के जन्मदिन, आनेवाले वर्षगांठ, और वेलेंटाइन डे पर भेजने के लिए फूलों की व्यवस्था करके कीमत भी चुका दी थी l
यह कहानी उस प्रकार के प्रेम के उदाहरण के रूप में हो सकता है जिसका सविस्तार वर्णन श्रेष्ठगीत में किया गया है l “क्योंकि प्रेम मृत्यु के तुल्य सामर्थी है, और ईर्ष्या कब्र के समान निर्दयी है” (8:6) प्रेम के साथ कब्र और मृत्यु की तुलना करना अजीब लगता है, लेकिन वे ताकतवर हैं क्योंकि वे अपने बन्दियों को छोड़ते नहीं हैं l हलांकि, सच्चा प्रेम भी अपने प्रियजनों को नहीं छोड़ेगा । यह किताब पद 6-7 में अपने शिखर पर पहुंचता है, वैवाहिक प्रेम को इतना शक्तिशाली बताते हुए कि “पानी के बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता” (पद.7) l
सम्पूर्ण बाइबल में, एक पति और पत्नी के प्रेम की तुलना परमेश्वर के प्रेम से की गयी है (यशायाह 54:5; इफिसियों 5:25; प्रकाशितवाक्य 21:2) । यीशु दूल्हा है और कलीसिया उसकी दुल्हन । परमेश्वर ने मसीह को मृत्यु का सामना करने के लिए भेजकर हमारे लिए अपना प्रेम दिखाया (यूहन्ना 3:16) । चाहे हम शादी-शुदा हैं या कुंवारें, हम याद कर सकते हैं कि प्रभु का प्रेम किसी भी चीज़ से जिसकी हम कल्पना कर सकते हैं से कहीं अधिक सामर्थी है ।

परमेश्वर द्वारा प्रदत्त आनंद
जब दिव्या घर से बाहर होती है, वह हमेशा दूसरों के सामने मुस्कुराने की कोशिश करती है । यह उसका दूसरे लोगों तक पहुंचने का तरीका है जिन्हें एक मित्रवत चेहरा देखने की जरूरत है । उसे बदले में ज़्यादातर, एक वास्तविक मुस्कान मिलता है । परन्तु एक ऐसे समय में जब दिव्या को चेहरे पर मास्क पहनना पड़ा, उसने यह एहसास किया कि लोग अब उसका मुंह नहीं देख सकते थे, इस प्रकार कोई भी उसकी मुस्कराहट नहीं देख पाता था । यह दुख:द है, उसने सोचा, लेकिन मैं रुकने वाली नहीं l शायद वे मेरे आँखों में देखेंगे कि मैं मुस्कुरा रही हूँ ।
उस विचार के पीछे वास्तव में थोड़ा विज्ञान है । मुंह के कोने के लिए और वह जो आँखों को सिकोड़ती हैं वे मांसपेशियां एक के पीछे एक काम कर सकती हैं l यह डूशेन(Duchenne) मुस्कराहट कहलाता है और इसे “आँखों से मुस्कुराना” वर्णित किया गया है ।
नीतिवचन हमें याद दिलाता है कि “आँखों की चमक से मन को आनंद होता है” और “मन का आनंद अच्छी औषधि है” (15:30; 17:22) । अक्सर, प्रभु के बच्चों की मुस्कुराहट, उस अलौकिक आनंद से उपजती है जो हमारे पास है । यह परमेश्वर से एक उपहार है जो निरंतर हमारे जीवनों में उमंडता है, जब हम उन लोगों को उत्साहित करते हैं जो भारी बोझ उठाकर चल रहे हैं या उनके साथ साझा करते हैं जो अपने जीवन के सवालों के जबाब ढूंढ रहे हैं । यहाँ तक कि जब हम पीड़ा अनुभव करते हैं, तब भी हमारा आनंद चमक सकता है ।
जब जीवन अँधेरामय महसूस होता है, ख़ुशी का चुनाव करें l आपकी मुस्कराहट परमेश्वर के प्रेम और आपके जीवन में उसकी उपस्थिति के प्रकाश को प्रतिबिम्बित करने वाली आशा की एक खिड़की बनने दें l

यीशु के लिए खिलना
मैं ट्यूलिप्स(tulips) के बारे में सच्चा नहीं था l मेरी छोटी बेटी की ओर से एक तोहफा, पैक किये हुए कन्द/बल्ब उसके साथ विदेश यात्रा के बाद उसके साथ अमरीका की यात्रा किये l इसलिए मैंने उन बल्बों को बड़े उत्सुकता के साथ स्वीकार करने का दिखावा किया, जितना कि मैं बेटी के साथ फिर से मिलने के लिए उत्सुक थी । पर ट्यूलिप मेरे कम पसंदीदा फूल हैं l कई जल्दी खिलते हैं और शीघ्र मुर्झा जाते हैं l इसी बीच, जुलाई के मौसम ने, उसे लगाने के लिए काफी गर्म हो गया l
अंततः, हलांकि, सितम्बर के अंत में, मैंने “मेरी बेटी के” फूलों के बल्ब को लगा दिया──उसके बारे में सोचते हुए और इस प्रकार उसे प्रेम से लगाया । चट्टानी मिटटी को हर बार पलटने के साथ, उन फूलों के बल्ब के बारे में मेरी चिंता बढ़ती गयी l उन पौधों के स्थान को आखरी बार थपथपाने के बाद, बसंत के मौसम में फिर से खिलते हुए ट्यूलिप देखने की आशा में मैंने उन कन्दों/बल्ब को आशीष दी, “आराम से सो जाओ l”
मेरी छोटी परियोजना हमें एक दूसरे से प्रेम करने के लिए परमेश्वर के आह्वान का एक नम्र अनुस्मारक बन गया, भले ही हम एक दूसरे के “पसंदीदा” न हों । एक दूसरे के दोषपूर्ण “खरपतवार” के आगे भविष्य में देखते हुए, हम परमेश्वर द्वारा दूसरों के प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए सक्षम हैं, यहाँ तक कि अनिश्चित स्वभाव के मौसमों में भी l फिर समय के साथ, हमलोगों के होते हुए भी आपसी प्रेम खिलता है l यीशु ने कहा, “यदि आपस में प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो” (पद.35) l उसके द्वारा छांटें जाने के बाद, हम धन्य किये जाते हैं कि हम खिलें, जैसे कि मेरे ट्युलिप अगले वसंत में खिले──उसी सप्ताहांत में मेरी बेटी एक छोटी मुलाकात के लिए आयी l “देखो क्या खिल रहे हैं!” मैंने कहा l अंत में, मैं l

प्रार्थना और धूल और तारे के विषय
अदिति और आकाश तुरंत बच्चा चाहते थे, लेकिन उनके चिकित्सक ने उनसे कहा कि वे एक बच्चे को जन्म देने में असमर्थ हैं । अदिति ने एक मित्र से कहा : “मैंने खुद को परमेश्वर के साथ कुछ बहुत ही ईमानदार बात करते हुए पाया ।” लेकिन यह उन “बातचीत” में से एक के बाद उसने और आकाश ने अपने पास्टर से बात की, जिन्होंने उन्हें अपने चर्च में गोद लेने की सेवा के बारे में बताया l एक साल बाद उन्हें एक दत्तक बच्चे की आशीष मिली l
उत्पति 15 में, बाइबल हमें एक और ईमानदार बातचीत के बारे में बताती है──यह संवाद अब्राम और परमेश्वर के बीच था । परमेश्वर ने उससे कहा था, “हे अब्राम, मत डर; . . . तेरा अत्यन्त बड़ा प्रतिफल मैं हूँ” (पद.1) । परन्तु, अपने भविष्य के बारे में परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विषय अनिश्चित, अब्राम ने खुलकर उत्तर दिया : “हे प्रभु यहोवा मैं तो निर्वंश हूं . . . अतः तू मुझे क्या देगा?” (पद.2) l
पूर्व में परमेश्वर ने अब्राम से वायदा किया था, “मैं तेरे वंश को पृथ्वी की धूल के किनकों के समान बहुत करूंगा,”(13:16) अब अब्राम ने──बहुत ही मानवीय क्षण में── उसे परमेश्वर को याद दिलाया । लेकिन परमेश्वर के उत्तर पर ध्यान दे : उसने अब्राम को ऊपर देख
कर “तारागन को गिन──क्या तू उनको गिन सकता है?,” कहकर उसे आश्वस्त किया, और यह संकेत दिया कि उसका वंश ऐसा ही होगा (15:5) ।
परमेश्वर कितना अच्छा है, न केवल ऐसी स्पष्ट प्रार्थना की अनुमति देने में लेकिन कोमलता से अब्राम को आश्वस्त करने में भी! बाद में, परमेश्वर उसका नाम अब्राहम (बहुतों का पिता) कर दिया l अब्राहम की तरह, आप और मैं खुले तौर पर उसके साथ अपना हृदय साझा कर सकते हैं और जान सकते हैं कि हम उस पर करने के लिए भरोसा कर सकते हैं जो हमारे लिए और दूसरों के लिए सर्वोत्तम है l
