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परमेश्वर हमें उठाए चलता है

2015 में, बाढ़ ने चेन्नई के शहर को तेज बारिश, हवा और जल भराव द्वारा जलप्लावित

कर दिया जिससे बहुत लोग प्रभावित हुए──देश के इतिहास में एक सबसे खराब प्राकृतिक आपदा । जब वह अपने एक महीने के बच्चे के साथ घर में शरण लिए हुए था, वह जानता था कि उसे वह स्थान छोड़ना होगा l यद्यपि वह दृष्टिहीन था, उसे अपने बेटे को बचाना था l कोमलता से, उसने अपने बच्चे को बचाने के लिए उसे अपने कन्धों पर रखा और ठुड्डी तक पानी में उतर गया l 

यदि एक सांसारिक पिता बड़ी बाधा का सामना करते हुए अपने बेटे की मदद करने के लिए उत्सुक था, तो स्वर्गीय पिता के बारे में सोचे कि वह अपने बच्चों के बारे में और कितना अधिक चिंतित रहता है । पुराने नियम में, मूसा ने याद किया कि परमेश्वर के लोगों द्वारा डगमगाते विश्वास के खतरे का अनुभव करने के बावजूद, वह उन्हें उठाकर लिए चला l उसने इस्राएलियों को याद दिलाया कि कैसे परमेश्वर ने उन्हें छुड़ाया, मरुभूमि में उनके लिए भोजन और जल का प्रबंध किया, उनके शत्रुओं से लड़ा, बादल और आग के खम्भे द्वारा इस्राएलियों का मार्गदर्शन करता रहा l अनेक तरीकों पर विचार करते हुए जिसके द्वारा परमेश्वर ने उनके पक्ष में काम किया था, मूसा ने कहा, “फिर तुम ने जंगल में भी देखा, कि जिस रीति कोई पुरूष अपने लड़के को उठाए चलता है, उसी रीति हमारा परमेश्वर यहोवा हम को इस स्थान पर पहुँचने तक, उस सारे मार्ग में जिस से हम आए हैं, उठाये रहा” (व्यवस्थाविवरण 1:31) l

जंगल की यात्रा इस्राएलियों के लिए सरल नहीं थी, और उनका विश्वास कई बार घटा l लेकिन वह परमेश्वर की सुरक्षा और प्रावधान के सबूत से भरा हुयी थी──पिता का एक बेटे को उठाकर लिए चलने की तस्वीर──कोमलता, साहस और आत्मविश्वास के साथ──एक अद्भुत तस्वीर है कि परमेश्वर ने कैसे इस्राएलियों की देखभाल की । हमारे द्वारा चुनौतियों का सामना करने के बावजूद जो हमारे विश्वास की परीक्षा करता है, हम याद कर सकते हैं कि परमेश्वर वहां रहकर हमें उसमें से लिए चल रहा है l 

सबसे बड़ी स्वर समता

जब एक प्रमुख अंग्रेजी पत्रिका ने दुनिया के एक सौ इक्यावन प्रमुख संगीतकारों को बीस की सूची बनाने के लिए कहा, जिन्हें वे अब तक की सबसे बड़ी स्वर-समता(symphony) मानते थे, तो बीथोवन की रचनाएँ शीर्ष पर आ गईं l वह काम जिसके शीर्षक का मतलब है “वीरतापूर्ण/बहादुराना(heroic),” दुनिया भर में राजनितिक अशांति के दौरान लिखा गया था l लेकिन यह बीथोवन के अपने संघर्ष से भी निकला क्योंकि उन्होंने धीरे-धीरे सुनने की शक्ति खो दी थी l यह संगीत भावना की पराकाष्ठ की अस्थिरता का आह्वान करता है जो व्यक्त करता है कि चुनौतियों का सामना करते हुए मानव होने और जीवित रहने का क्या मतलब होता है l आनंद, दुःख, और अंतिम विजय की अविवेचित उतार-चढ़ाव में बीथोवन की तीसरी सिम्फनी/स्वर-समता मानव आत्मा के प्रति अमर उपहार माना जाता है l  

कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखी पौलुस की पहली पत्री समान कारणों से हमारे ध्यान के योग्य है l संगीत की गणना/score के बजाय प्रेरित शब्दों के द्वारा वह आशीष में बढ़ता है (1:4-9), आत्मा को कुचलने वाले संघर्ष के दुःख में कम होता है (11:17-22), और वरदान प्राप्त लोगों के सामंजस्य में फिर उठता है जो एक साथ एक दूसरे और प्रभु की महिमा के लिए काम करते है (12:6-7) l 

फर्क यहाँ यह है कि हम अपने मनुष्य की आत्मा की जीत को परमेश्वर की आत्मा के प्रति  श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं l जैसे पौलुस हमसे मिलकर खुद को पिता के द्वारा एक साथ बुलाया हुआ, पुत्र के द्वारा अगुआई प्राप्त, और उसके आत्मा के द्वारा प्रेरित──शोर के लिए नहीं, परन्तु हमारी सबसे बड़ी सिम्फनी/समस्वरता में योगदान देने के लिए एक साथ मसीह के अवर्णित प्रेम, का अनुभव करने के लिए आग्रह करता है ।

परमेश्वर की मदद ढूँढना

1800 के दशक के अंत में पांच सालों तक, अमेरिका के एक छोटे शहर में टिड्डियाँ  उतरकर फसलों को बर्बाद कीं l किसानों ने टिड्डियों को तारकोल में फंसाने और उनके अण्डों को नष्ट करने के लिए अपने खेतों में आग लगा दी l हताश महसूस करते हुए और भुखमरी की कगार पर, बहुत से लोगों ने राज्यव्यापी प्रार्थना दिवस की मांग की, जो मिलकर परमेश्वर की सहायता लेने के लिए तरस रहे थे l राज्यपाल नर्म हो गए, और 26 अप्रैल को प्रार्थना करने के लिए अलग कर दिया l

सामूहिक प्रार्थना के बाद के दिनों में,मौसम गर्म हो गया और अण्डों में जान आनी शुरू हो गयी lकिन्तु फिर चार दिन बाद तापमान में गिरावट ने लोगों को आचम्भित और प्रसन्न किया, क्योंकि ठंडे तापमान ने लार्वा को मार डाला l लोग फिर से अपने मक्का, गेहूँ, और जई(oats) का फसल लगाने वाले थे l

यहोशापात राजा के शासनकाल में परमेश्वर के लोगों के बचाव के पीछे प्रार्थना ही थी l जब राजा को पता चला कि एक विशाल सेना उसके विरुद्ध आ रही है, उसने परमेश्वर के लोगों को प्रार्थना और उपवास के लिए बुलायाlलोगों ने परमेश्वर को याद दिलाया कि उसने उन्हें  बीते समयों में कैसे बचाया था l और यहोशापात ने कहा कि यदि आपदा उन पर आती है, “तलवार या मरी अथवा अकाल,” यह जानते हुए कि वह सुनेगा और उनको बचा लेगा वे परमेश्वर को पुकारेंगे (2 इतिहास 20:9) l

परमेश्वर ने अपने लोगों को आक्रमणकारी सेना से बचाया, और जब हम संकट में उसको पुकारते हैं वह हमारी सुनता है l चाहे जो भी आपकी चिंता हो——चाहे एक रिश्ते का मामला या प्राकृतिक संसार से कोई खतरा हो——उसे परमेश्वर के सामने प्रार्थना में ले जाएं l उसके लिए कुछ भी अधिक कठिन नहीं है l

असली मसीहत

वर्षों पहले मैंने एक मसीही संस्था में एक पद के लिए आवेदन किया था और मेरे समक्ष शराब, तम्बाकू और मनोरंजन के कुछ रूपों के उपयोग से सम्बंधित कानूनी नियमों की एक सूची प्रस्तुत की गयी थी l स्पष्टीकरण था, “हम अपने कर्मचारियों से मसीही व्यवहार की अपेक्षा करते हैं l” मैं इस सूची से सहमत हो सकता था, क्योंकि मैंने, ज्यादातर अपने विश्वास से असंबंधित कारणों से, उन चीजों को नहीं किया था l पर मेरे तर्कवादी पक्ष ने सोचा, उनके पास अंहकारी, असंवेदनशील, कठोर, आत्मिक रूप से उदासीन और आलोचनात्मक न होने की सूची क्यों नहीं है? उनमें से कोई भी संबोधित नहीं किया गया था l

यीशु के पीछे चलना नियमों की सूची द्वारा परिभाषित नहीं किया जा सकता है l यह जिन्दगी का एक रहस्यपूर्ण गुण है जिसे परिमाणित करना मुश्किल है लेकिन उसे सर्वोत्तम रूप से “सुन्दर” वर्णित किया जा सकता है l

मत्ती 5:3-10 के धन्य वचन उस सुन्दरता को समेटते हैं :जिन लोगों में यीशु का आत्मा निवास करता है और जो उस पर निर्भर हैं वे दीन और अत्यधिक विनम्र होते हैं l वे दूसरों की पीड़ा द्वारा गहराई से प्रभावित होते हैं l वे कोमल और दयालु होते हैं l वे खुद में और दूसरों में भलाई की लालसा रखते हैं l वे उन पर कृपालु होते है जो संघर्ष करते हैं और असफल होते हैं l वे यीशु के लिए अपने प्रेम में एकचित होते हैं l वे शांतिपूर्ण होते हैं और  शांति की विरासत पीछे छोड़ते हैं l वे उन पर दयालु होते हैं जो उनका दुस्र्पयोग करते हैं, बुराई के बदले भलाई लौटाते हैं । और वे धन्य हैं, एक शब्द जिसका गहराई में अर्थ है “आनंदित l”

इस तरह का जीवन दूसरों का ध्यान आकर्षित करता है और उनका होता हैजो यीशु के पास आते हैं और उसे उससे मांगते हैं l

परमेश्वर की सामर्थ्य का प्रदर्शन

वह आकाशीय बिजली की चमक के साथ तूफान था, और मेरी 6 वर्षकी बेटी और मैं फर्श पर बैठे हुए कांच के दरवाजे से चमकदार प्रदर्शन देख रहे थे l वह दोहराती रही, “वाह! परमेश्वर बहुत बड़ा है l” मुझे भी ऐसा ही महसूस हुआl यह हम दोनों के लिए स्पष्ट था किहम कितने छोटे थे, और परमेश्वर कितना सामर्थी होगा l अय्यूब की किताब की कुछ पंक्तियाँ मेरे दिमाग में कौंध गयीं, “किस मार्ग से उजियाला फैलाया जाता है, और पुरवाई पृथ्वी पर बहाई जाती है? (अय्यूब 38:24) l

अय्यूब को परमेश्वर की सामर्थ्य की याद दिलाना ज़रूरी था (पद.34-41) l उसकी जिन्दगी बिखर गई थी l उसके बच्चों की मृत्यु हो गयी थी l वह तबाह हो गया था l वह बीमार था l उसके मित्रों ने कोई सहानुभूति नहीं दिखाई l उसकी पत्नी ने उसे अपना विश्वास त्यागने के लिए प्रोत्साहित किया (2:9) l अंत में, अय्यूब ने परमेश्वर से पूछा “क्यों?”(अध्याय 24) और उसने एक आंधी में से उत्तर दिया (अध्याय 38) l

परमेश्वर ने अय्यूब को संसार की भौतिक विशेषताओं पर अपने नियन्त्रण की याद दिलायी (अध्याय 38) l इसने उसे दिलासा दिया और उसने प्रतियूत्तर दिया,“मैं ने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं” (42:5) l अर्थात् “परमेश्वर, अब मेरी समझ में आ गया, कि आप मेरीसोच में फिट नहीं होते हैं l” 

जब जिन्दगी बिखर जाए, तो कभी कभी सबसे ज्यादा सुकून देने वाली चीज जो हम कर सकते है वह फर्श पर लेटकर आकाशीय बिजली को देखना है——यह याद करने के लिए कि परमेश्वर काफी बड़ा है और हमारी देखभाल करने के लिए पर्याप्त प्रेमी है l हम अपने पसंदीदा आराधना गीत भी गाना शुरू कर सकते हैं जो हमारे परमेश्वर की सामर्थ्य और महानता के बारे में बताते हैं l