
अंत से शुरू करें
“आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं?” मुझसे एक बच्चे के रूप में अक्सर यह सवाल पुछा जाता था l और जबाब हवा की तरह बदल जाते थे l एक चिकित्सक l दमकर कर्मी l एक मिशनरी l किसी आराधना का अगुआ l एक भौतिक विज्ञानी – या एक पसंदीदा टीवी चरित्र l अब, चार बच्चों के पिता के रूप में, मुझे लगता है कि उनसे ये सवाल पूछना कितना मुशिकल होगा l ऐसे समय होते हैं जब मैं कहना चाहता हूँ, “मुझे पता है कि तुम किसमें महान बनोगे!” माता-पिता कभी-कभी अपने वच्चों में अधिक देख सकते हैं, जो बच्चे स्वयं में नहीं देख सकते हैं l
फिलिप्पियों के विश्वासियों में पौलुस ने जो देखा, उससे यह समझ में आता है – वे जिनसे वह प्यार करता था और जिनके लिए प्रार्थना करता था (फिलिप्पियों 1:3) l वह अंत देख सकता था; वह जानता था कि जब सब कहा और किया जाएगा तो वे कैसे होंगे l बाइबल हमें कहानी के अंत का भव्य दर्शन देती है - पुनरुत्थान और सभी चीजों का नवीकरण (देखें 1 कुरिन्थियों 15 और प्रकाशितवाक्य 21) l लेकिन यह हमें यह भी बताती है कि कहानी कौन लिख रहा है l
पौलुस ने जेल से लिखे एक पत्र की शुरूआती पंक्तियों में, फिलिप्पी की कलीसिया को याद दिलाया कि “जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फिलिप्पियों 1:6) l यीशु ने काम शुरू किया और वही इसे पूरा करेगा l शब्द पूरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है – कहानी सिर्फ पूरी नहीं होती, क्योंकि परमेश्वर कुछ भी अधुरा नहीं छोड़ता है l

विचित्र आराम
लीसा को मिले कार्ड पर लिखा पद उसकी स्थिति से मेल नहीं खा रहा था : “तब यहोवा ने सेवक की आँखें खोल दीं, और जब वह देख सका, तब क्या देखा कि एलिशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भर हुआ है” (2 राजा 6:17) l मुझे कैंसर है! उसने व्याकुलता में सोचा l मैंने हाल ही में एक बच्चा खोया है! स्वर्गदूतों की सेना के विषय यह पद लागू नहीं होता l
फिर “स्वर्गदूत” दिखाई देना आरम्भ हो गए l कैंसर से बचे हुए लोगों ने उसे अपना समय और सुनने वाला कान दिया l उसके पति को एक विदेशी सैन्य कार्यभार से जल्दी मुक्ति मिल गयी l दोस्तों ने उसके साथ प्रार्थना की l लेकिन वह पल जब उसने सबसे ज्यादा परमेश्वर के प्यार को महसूस किया, जब उसकी दोस्त पैटी पेपर टिशु के दो डिब्बे लेकर आई l उन्हें टेबल पर रखकर वह रोने लगी l पैटी को पता था l उसने भी गर्भपात/अकाल प्रसवों को झेला था l
लीसा कहती है, “वह सबसे अधिक मायने रखता था l” “कार्ड की सार्थकता अब समझ में आ गयी l मेरे ‘स्वर्गदूत सैनिक’ वहाँ सब समय थे l”
जब एक सेना ने इस्राएल को घेर लिया, तो वास्तविक स्वर्गदूतों की सेना ने एलिशा की रक्षा की l लेकिन एलिशा का सेवक उन्हें देख नहीं पा रहा था l “हम क्या करें?” वह नबी के पास आकर चिल्लाया (पद.15) l एलिशा ने बस प्रार्थना की, “हे यहोवा, इसकी आँखें खोल दे कि यह देख सके” (पद.17) l
जब हम परमेश्वर की ओर देखते हैं, तो हमारा संकट हमें दिखाएगा कि वास्तव में क्या मायने रखता है और कि हम अकेले नहीं हैं l हम सीखते हैं कि आराम देनेवाली परमेश्वर की उपस्थिति हमें कभी नहीं छोड़ती l वह हमें असीम आश्चर्यजनक तरीकों से अपना प्यार दिखाता है l

घुसपैठिये को निकालना
जब मेरे पति बिस्तर से उठकर रसोई में गए, तो बहुत सबेरा नहीं हुआ था l मैंने बत्ती को जलते और बुझते हुए देखा और उनकी हरकत पर आश्चर्य किया l तब मुझे याद आया कि पिछली सुबह मैं रसोई के काउंटर पर एक “घुसपैठिए” को देखकर चिल्लाई थी l अनुदित : छह पैरों वाला किस्म का अवांछनीय प्राणी l मेरे पति मेरे संदेह को जानते थे और उसे निकालने के लिए तुरंत पहुंच गए थे l आज सुबह वह यह सुनिश्चित करने के लिए जल्दी उठे कि हमारा रसोई कीड़ा रहित(bug-free) हो ताकि मैं बिना किसी चिंता के प्रवेश कर सकूँ l गजब के पति है!
मेरे पति मुझे अपने मन में रखते हुए जागे, खुद की ज़रूरत के ऊपर मेरी ज़रूरत को l मेरे लिए, उनकी क्रिया पौलुस द्वारा इफिसियों 5:25 में वर्णित प्रेम को दर्शाती है, “हे पतियो, अपनी अपनी पत्नी से प्रेम रखो जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिए दे दिया l” पौलुस आगे बढ़ता है, “पति अपनी अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे” (पद.28) l पौलुस द्वारा पति के प्रेम की तुलना यीशु मसीह के प्रेम से करना इस केंद्र बिंदु पर है कि कैसे यीशु ने अपनी ज़रूरतों के आगे हमारी ज़रूरतों को रखा l मेरे पति को पता है कि मैं कुछ घुसपैठियों से डरती हूँ, और इसलिए उन्होंने मेरी चिंता को अपनी प्राथमिकता बना दिया l
यह सिद्धांत केवल पतियों पर लागू नहीं होता है l यीशु के उदाहरण के बाद, हम में से प्रत्येक तनाव, भय, शर्म या चिंता के किसी घुसपैठिये को दूर करने में मदद करने के लिए प्यार से त्याग कर सकता है ताकि कोई व्यक्ति दुनिया में अधिक स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सके l

वह हमें नहीं छोड़ेगा
जूलियो अमेरिका में जॉर्ज वाशिंगटन ब्रिज के पार साइकिल से जा रहा था – एक व्यस्त सड़क, जो न्यूयॉर्क शहर और न्यू जर्सी को जोड़ती है – जब उसे जीवन –या – मौत की स्थिति का सामना करना पड़ा l एक आदमी पुल के किनारे पर खड़ा नदी में कूदने की तैयारी कर रहा था l यह जानते हुए कि पुलिस समय पर नहीं आएगी, जुलियों ने त्वरित कार्यवाई की l वह याद करता है कि वह अपनी साइकिल से उतरा और अपनी बाहों को फैलाते हुए बोला : “ऐसा मत करो l हम तुमसे प्यार करते हैं l” फिर, एक लाठी लिए हुए चरवाहे की तरह, उसने उस परेशान आदमी को पकड़ लिया, और दूसरे राहगीर की मदद से उसे सुरक्षित बचा लिया l ख़बरों के मुताबिक, जुलियो उस आदमी को छोड़ना नहीं चाहता था, भले ही वह सुरक्षित था l
दो सहस्त्राब्दी पहले, एक जीवन-या-मृत्यु की स्थिति में, अच्छा चरवाहा, यीशु, ने कहा कि वह अपना जीवन उनको बचाने के लिए त्यागेगा जो उस पर विश्वास करेंगे और वह उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा l उसने संक्षेप में बताया कि वह अपने भेड़ों को कैसे आशीष देगा : वे व्यक्तिगत रूप से उसे जानेंगे, अनंत जीवन का उपहार पाएंगे, नाश नहीं होंगे, और उसकी देखभाल में सुरक्षित रहेंगे l यह सुरक्षा कमजोर और निर्बल भेड़ की क्षमता पर निर्भर नहीं करती है, लेकिन चरवाहा की पर्याप्तता पर जिसके “हाथ से [कोई भी उन्हें छीन] नहीं” सकेगा (यूहन्ना 10:28-29) l
जब हम व्याकुल थे और आशाहीन महसूस कर रहे थे, तो यीशु ने हमें बचाया; अब हम उसके साथ अपने सम्बन्ध में महफूज़ और सुरक्षित महसूस कर सकते हैं l वह हमसे प्यार करता है, हमें खोजता है, हमें ढूंढ़ लेता है, हमें बचाता है, और हमें कभी नहीं छोड़ने का वादा करता है l
