
आपके मांगने से पहले ही
मेरे मित्र रॉबर्ट और कॉलिन ने दशकों तक एक स्वस्थ विवाह का अनुभव किया है, और मुझे उन्हें बातचीत करते हुए देखना अच्छा लगता है l रात्री भोजन के समय मांगने से पहले ही उनमें से एक आगे बढ़कर दूसरे को मक्खन देगा l दूसरा बिलकुल ठीक समय पर गिलास को भर देगा l जब वे कहानी बताएँगे, वे एक दूसरे के वाक्यों को पूरा करते हैं l कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि वे एक दूसरे के मन को पढ़ सकते हैं l
यह तसल्लीदायक है कि परमेश्वर जानता है और किसी भी व्यक्ति की तुलना में जिसे हम जानते हैं और प्रेम करते हैं हमारी अधिक देखभाल करता है l जब नबी यशायाह आनेवाले राज्य में परमेश्वर और उसके लोगों के बीच संबंध का वर्णन करता है, तो वह एक कोमल, अन्तरंग रिश्ता का वर्णन करता है l परमेश्वर अपने लोगों के बारे में कहता है, “उनके पुकारने से पहले ही मैं उनको उत्तर दूंगा, और उनके मांगते ही मैं उनकी सुन लूँगा” (यशायाह 65:24) l
लेकिन यह कैसे सच हो सकता है? ऐसी चीजें हैं जिनके विषय बिना प्रत्युत्तर प्राप्त किये मैंने सालों तक प्रार्थना की है l मेरा मानना है कि जैसे-जैसे हम परमेश्वर के साथ अंतरंगता में बढ़ते हैं, अपने दिलों को उसके साथ जोड़ते हैं, हम उसके समय और देखभाल पर भरोसा करना सीख सकते हैं l हम वही इच्छा करना शुरू कर सकते हैं जो परमेश्वर चाहता है l जब हम प्रार्थना करते हैं, तो हम अन्य चीजों में से उन चीजों को मांगते हैं जो परमेश्वर के राज्य का हिस्सा हैं जैसा कि यशायाह 65 में वर्णित है : दुःख का अंत (पद.19) l सभी लोगों के लिए सुरक्षित घर और भर पेट भोजन और सभी के लिए अर्थपूर्ण काम (पद.21-23) l स्वाभाविक संसार में शांति (पद.25) l जब परमेश्वर का राज्य अपने पूर्णता में आएगा, तब परमेश्वर पूर्ण रूप से इन प्रार्थनाओं का उत्तर देगा l

अद्भुत कौशल
हमारे कॉलेज गायन समूह के अगुआ ने समूह का निर्देशन किया और उसी समय पियानो पर हमारा साथ देते हुए, कुशलता से उन जिम्मेदारियों को संतुलित किया l एक संगीत कार्यक्रम के समापन पर, वह ख़ास तौर से थके हुए लग रहे थे, इसलिए मैंने उनसे पूछा कि क्या वह ठीक थे l उन्होंने जवाब दिया, “मुझे पहले कभी ऐसा नहीं करना पड़ा l” फिर उन्होंने समझाया l “पियानो धुन से इतना बाहर था कि मुझे पूरे संगीत समारोह में दो अलग-अलग स्वरतान में बजाना पड़ा – मेरा बांया हाथ एक सुर बजा रहा था और दूसरा मेरा दाहिना हाथ!” उसके द्वारा दिखाया गया कौशल चौंकानेवाला था, जिससे मैं अति उत्साहित हुआ, और मैं उस व्यक्तित्व से चकित हुआ जो इंसानों को इस तरह की चीजों के लिए सक्षम बनाता है l
राजा दाऊद ने आश्चर्य का एक और बड़ा भाव व्यक्त किया जब उसने लिखा, “मैं तेरा धन्यवाद करूँगा, इसलिए कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूँ . . . और मैं इसे भलीभांति जानता हूँ” (भजन 139:14) l चाहे लोगों की क्षमताओं में या प्रकृति के चमत्कारों में, सृजन के चमत्कार हमारे सृष्टिकर्ता की महिमा की ओर इशारा करते हैं l
एक दिन, जब हम परमेश्वर की उपस्थिति में होंगे, हर पीढ़ी के लोग इन शब्दों के साथ उसकी उपासना करेंगे, “हे हमारे प्रभु और परमेश्वर, तू ही महिमा और आदर और सामर्थ्य के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएं सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थीं और सृजी गयीं” (प्रकाशितवाक्य 4:11) l परमेश्वर ने हमें जो अद्भुत कौशल दिया है और जो महान सुन्दरता परमेश्वर ने बनायी है वह उसकी उपासना करने का पर्याप्त कारण है l

बिल का भुगतान हो चुका है
“आपके साथ क्या हुआ?” लागोस में एक अस्पताल के बिस्तर पर झुककर नाइजीरियाई व्यापारी, पीटर ने पूछा l “किसी ने मुझे गोली मार दी,” युवक ने उत्तर दिया, उसकी जांघ पर पट्टी बंधी थी l यद्यपि वह घायल व्यक्ति घर जाने लायक था, उसे छुट्टी नहीं मिलती जब तक कि वह अपना बिल चुका नहीं देता – एक नीति जिसका अनुसरण इस क्षेत्र के कई सरकारी अस्पताल करते हैं l एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ परामर्श करने के बाद, पीटर ने उस धर्मार्थ निधि के द्वारा जिसे उसने पहले कभी अपने मसीही विश्वास को व्यक्त करे के तरीके के रूप में स्थापित किया था गुमनाम रूप से बिल भुगतान कर दिया l बदले में, वह आशा करता है कि मुक्त होने का उपहार पाने वाले एक दिन दूसरों को भी देंगे l
परमेश्वर की उदारता में से देने का प्रसंग पूरे बाइबल में धड़कता है l मिसाल के तौर पर, जब मूसा ने इस्राएलियों को कैसे प्रतिज्ञात देश में रहना है का निर्देश दिया, तो उसने उन्हें पहले परमेश्वर को वापस देने के लिए कहा (व्यवस्थाविवरण 26:1-3 देखें) और ज़रुरतमंदों की देखभाल करने के लिए – परदेशी, अनाथ, और विधवा (पद.12) l क्योंकि वे दूध और मधु की धाराओं के देश की भूमि” में रहते थे (पद.15), उन्हें ज़रुरतमंदों के लिए परमेश्वर के प्यार को व्यक्त करना था l
हम भी अपने भौतिक सामानों को साझा करके परमेश्वर के प्रेम को फैला सकते हैं, चाहे वह बड़ा हो या छोटा l हमारे पास व्यक्तिगत रूप से पीटर की तरह देने का अवसर नहीं हो सकता है, लेकिन हम परमेश्वर को यह दिखाने के लिए कह सकते हैं कि हमें कैसे देना है या किसे हमारी सहायता की आवश्यकता है l

जीवन से भी उत्तम
यद्यपि मेरी यीशु से प्यार करती थी – जीवन कठिन था, बहुत कठिन l दो बेटों के साथ दो पोतों की मृत्यु हो चुकी थी दोनों ही गोली के शिकार हुए थे l और मेरी को खुद अशक्त करनेवाला दिल का दौरा पड़ा जिससे वह एक ओर लकवाग्रस्त हो गयी थी l फिर भी, जैसे ही वह सक्षम हुयी उसने चर्च की आराधनाओं में जाने के लिए अपना रास्ता बना लिया जहाँ यह उसके लिए असामान्य नहीं था – खंडित बोली के साथ – प्रभु की प्रशंसा करने के लिए ऐसे शब्दों का उपयोग, “मेरी आत्मा यीशु से प्यार करती हैं; उसका नाम धन्य हो!”
मेरी द्वारा परमेश्वर की प्रशंसा करने से बहुत पहले, दाऊद ने भजन 63 के शब्दों को कलमबद्ध किया था l भजन का शीर्षलेख बताता है कि दाऊद ने लिखा था कि “जब वह यहूदा के जंगल में था l” यद्यपि वह एक कम चाहनेयोग्य – निराशाजनक भी – स्थिति में था, वह निराश नहीं हुआ क्योंकि उसकी आशा परमेश्वर में थी l “हे परमेश्वर, तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूँढूँगा; . . . सुखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है” (पद.1) l
शायद आप खुद को बिना सही दिशा और अपर्याप्त संसाधन के साथ, कठिनाई के स्थान में पाते हैं l असुविधाजनक परिस्थितियाँ हमें भ्रमित कर सकती हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वे हमें पटरी से उतार दे, जब हम उससे चिपके रहते हैं जो हमसे प्रेम करता है (पद.3), हमें को संतुष्ट करता है (पद.5), हमारी सहायता करता है (पद.7), और जिसका दाहिना हाथ हमें थामता है (पद.8) l क्योंकि परमेश्वर का प्रेम जीवन से उत्तम है, मेरी और दाऊद के समान, हम परमेश्वर की प्रशंसा और सम्मान करने वाले होंठों के द्वारा संतुष्टि व्यक्त कर सकते हैं (पद.3-5) l
