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Articles by एमी पिटरसन

सहज उपाए

पार्क के गाइड का अनुसरण करते हुए, मैंने कुछ नोट्स लिख लिए जब वह बहामा के अतिप्राचीन जंगल के वनस्पतियों के विषय बता रहा था l उसने हमें बताया कि किन पेड़ों से दूर रहना था l उसने कहा, “जहरली लकड़ी वाले पेड़ से काला रस निकलता है जिससे दर्द करनेवाली खुजली हो जाती है l परन्तु चिंता की कोई बात नहीं है! उसका इलाज उसी के निकट वाले पौधे में है l उसने बताया, “गोंध वाले धूप/धूना के पेड़ के लाल छाल को काटकर  उसके रस को खुजली पर मल दीजिए l वह तुरंत ठीक होना शुरू हो जाएगा l”

आश्चर्य से मेरी पेंसिल गिरने से बची l मैंने उस जंगल में उद्धार की तस्वीर पाने की आशा नहीं की थी l परन्तु मैंने गोंध वाले धूप के पेड़ में यीशु को देखा l जहां भी पाप का जहर पाया जाता है वह सहज उपाए है l उस पेड़ के लाल छाल की तरह, यीशु का लहू चंगाई देता है l

नबी यशायाह समझ गया था कि मानवता को चंगाई की ज़रूरत थी l पाप की खुजली ने हमें प्रभावित की थी l यशायाह ने प्रतिज्ञा की कि हमारी चंगाई “उस दुखी पुरुष” की ओर से आने वाली थी जो हमारी दुखों को अपने ऊपर ले लेगा (यशायाह 53:3) l वह व्यक्ति यीशु था l हम बीमार थे, परन्तु मसीह हमारे बदले घायल होने को तैयार था l जब हम उस पर विश्वास करते हैं, हम पाप की बीमारी से चंगाई पाते हैं (पद.5) l जो चंगाई प्राप्त कर चुके हैं उनके समान जीना सीखने में पूरा जीवन लग सकता है अर्थात् अपने पापों को पहचानकर अपने नए मनुष्त्व के पक्ष में उनको अस्वीकार करना – परन्तु यीशु के कारण, हम कर सकते हैं l

सम्बन्ध रखने के लिए रचे गए

तनहा लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अनेक देशों में रेंट-ए-फैमिली(rent-a-family) उद्योग बढ़ रहा है l कुछ लोग इस सेवा का उपयोग दिखाने के लिए करते हैं, ताकि किसी सामाजिक अवसर पर वे सुखी परिवार वाले दिखाई दें l कुछ लोग बेपरवाह सम्बन्धियों के सामने झूठा स्वांग रचने के लिए अदाकारों को भाड़े पर बुलाते हैं, ताकि थोड़े समय के लिए ही सही, वे कौटुम्बिक संबंद का अनुभव कर सकें जिसकी वे इच्छा रखते हैं l

यह विचारधारा एक बुनियादी सच्चाई को प्रतिबिंबित करता है : मनुष्य सम्बन्ध रखने के लिए रचे गए हैं l उत्पत्ति में सृष्टि की कहानी में, परमेश्वर हर एक चीज़ को जो उसने बनाया था देखता है और देखता है कि वह “बहुत अच्छा है”(1:31) l परन्तु परमेश्वर आदम को देखकर कहता है, “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं”(2:18) l मनुष्य को एक और मनुष्य की ज़रूरत थी l

बाइबल हमें केवल रिश्ता रखने की हमारी आवश्यकता के विषय ही नहीं बताती है l वह हमें यह भी बताती है कि कहाँ सम्बन्ध मिल सकता है : यीशु के अनुयायियों में l यीशु ने अपनी मृत्यु के समय, अपने मित्र युहन्ना से मसीह की माँ को अपनी माँ स्वीकारने को कहा l यीशु के जाने के बाद भी वे आपस में एक परिवार के रूप में रहने वाले थे (युहन्ना 19:26-27) l और पौलुस ने विश्वासियों को दूसरों से माता-पिता और भाई-बहन का सा बर्ताव करने का निर्देश दिया (1 तीमुथियुस 5:1-2) l भजनकार हमसे कहता है कि संसार में परमेश्वर के छुटकारे के काम का एक हिस्सा “अनाथों का घर [बसाना]” है (भजन 68:6), और परमेश्वर ने कलीसिया को यह काम करने के लिए एक सर्वोत्तम स्थान के रूप में अभिकल्पित किया है l

परमेश्वर का धन्यवाद हो, जिसने हमें सम्बन्ध रखने के लिए बनाया है और अपने लोगों को हमारा परिवार होने के लिए दिया है!

सीखाने में क्रियाशील

मेरा छह साल का बेटा, ओवेन, एक बोर्ड-गेम पाकर उत्तेजित हो गया l परन्तु आधे घंटे तक नियम पढ़ने के बाद, वह निराश हो गया l वह समझ नहीं पा रहा था खेल कैसे खेला जाता थे l खेल जाननेवाला उसके मित्र द्वारा समझाए जाने पर, आख़िरकार ओवेन अपने उपहार का आनंद लिया l

उनको खेलते हुए देखकर, मैंने स्मरण किया कि एक अनुभवी शिक्षक होने पर कुछ नया सीखना अधिक सरल होता है l हमारे सीखते समय, निर्देशों को पढ़ना सहायक होता है, परन्तु समझाने वाले एक मित्र के होने से एक बड़ा अंतर होता है l

प्रेरित पौलुस भी इसे समझता था l तीतुस को लिखते हुए कि किस प्रकार विश्वास में उसकी कलीसिया को उन्नति करने में वह सहायता कर सकता था, पौलुस ने अनुभवी विश्वासियों के महत्व पर बल दिया जो मसीही विशवास का नमूना बन सकते थे l अवश्य ही “दुरुस्त सिद्धांत” सिखाना महत्वपूर्ण था, परन्तु यह केवल बताने के विषय नहीं था – उसे व्यवहारिक रूप से जीना भी ज़रूरी था l पौलुस ने लिखा कि बूढ़े पुरुष और स्त्रियाँ संयमी, पवित्र, और प्रेमी हों (तीतुस 2:2-5) l उसने कहा, “सब बातों में अपने आप को भले कामों का नमूना बना” (पद.7) l

मैं ठोस शिक्षा के लिए धन्यवादित हूँ, परन्तु मैं उन अनेक लोगों के लिए भी धन्यवादित हूँ जो क्रियाशील शिक्षक रहे हैं l उन्होंने खुद के जीवन से मुझे दिखाया है कि मसीह का शिष्य कैसा होता है और मेरे लिए उस पथ पर चलना उन्होंने सरल बना दिया है l

प्रभु आनंद होता है

अभी हाल ही में मेरी नानी ने मुझे ढेर सारी पुरानी तस्वीरें भेजीं, और जब मैं उनको देख रही थी, एक ने मेरा ध्यान खींच लिया l उसमें, मैं दो वर्ष की हूँ, और मैं चूल्हे के पास बैठी हुयी हूँ l दूसरी ओर, मेरे पिता मेरी माँ के कंधे पर हाथ रखे हुए हैं l दोनों प्रेम और आनंद भाव से मुझे निहार रहे हैं l

मैंने इस तस्वीर को अपने कपड़े की आलमारी पर लगा दिया, जहाँ मैं इसे प्रतिदिन सुबह देखती हूँ l यह उनका मुझसे प्रेम करने की अच्छी ताकीद है l यद्यपि, सच्चाई यह है, कि अच्छे माता-पिता का प्रेम भी अधूरा है l मैंने इस तस्वीर को सुरक्षित किया क्योंकि यह मुझे याद दिलाता है कि यद्यपि मानव प्रेम कभी-कभी चूक जाता है, परमेश्वर का प्रेम कभी नहीं चूकता है – और वचन अनुसार, परमेश्वर मुझे उसी तरह निहार रहा है जैसे मेरे माता-पिता इस तस्वीर में मुझे निहार रहे हैं l

नबी सपन्याह इस प्रेम का वर्णन इस प्रकार करता है जो मुझे चकित करता है l वह वर्णन करता है कि परमेश्वर गाता हुआ अपने लोगों के लिए मगन होता है l परमेश्वर के लोग इस प्रेम को अर्जित नहीं किये थे l वे अवज्ञाकारी थे या परस्पर करुणा से व्यवहार नहीं किये थे l किन्तु सपन्याह ने प्रतिज्ञा दी कि अंत में, परमेश्वर का प्रेम उनकी हार से अधिक महत्वपूर्ण होगा l परमेश्वर उनके दंड को क्षमा करेगा (सपन्याह 3:15), और वह उनके लिए आनंदित होगा (पद.17) l वह अपने लोगों को अपनी बाहों में इकठ्ठा करेगा, उनको घर लौटा लाएगा, और उनको पुनर्स्थापित करेगा l

प्रति भोर विचार करने योग्य यही प्रेम है l

हमें एक दूसरे की ज़रूरत है

जब मैं अपने बच्चों के संग लम्बी पैदल यात्रा कर रही थी, हमें रौशनी दिखाई दी, पगडण्डी पर छोटे गुच्छों में उगते हुए लचीले हरे पौधे l संकेतचिन्ह के अनुसार, सामान्य तौर पर इस पौधे को डिअर मोस(एक प्रकार का शैवाल/घास) कहा जाता है, किन्तु वास्तव में वह शैवाल है ही नहीं l यह एक प्रकार की काई(lichen) है l…

सतर्क रहें!

मैं गर्म दक्षिणी शहरों में बड़ी हुयी, इसलिए जब मैं उत्तर में रहने लगी, मुझे लम्बे, बर्फीले महीनों के दौरान गाड़ी सुरक्षित चलाना सीखने में काफी समय लगा l मेरे पहले कठिन सर्दियों में, तीन बार बर्फ के टीले में फंस गयी! किन्तु कई वर्षों के अभ्यास के बाद, मैं सर्द स्थितियों में गाड़ी चलाने में आराम महसूस करने लगी l वास्तव में, मैं थोड़ा अधिक सहज महसूस करती थी l मैंने सावधान रहना छोड़ दिया l और ठीक उसी समय मैं बर्फ के गोले को मारते हुए सड़क के किनारे टेलीफोन पोल से टकरा गयी!

शुक्र है, किसी को चोट नहीं लगी, किन्तु उस दिन मैंने कुछ महत्वपूर्ण सीखा l मैंने जान लिया कि निश्चिन्त महसूस करना कितना खतरनाक हो सकता है l सचेत होने के स्थान पर, मैं “ऑटोपायलट (चेतनाशून्य)” हो गयी थी l

हमें अपने आत्मिक जीवन में भी उसी प्रकार की सतर्कता का अभ्यास करना होगा l पतरस विश्वासियों को चेतावनी देता है कि जीवन में बेध्यानी से न चले, परन्तु “सचेत रहें” (1 पतरस 5:8) l शैतान क्रियाशीलता से हमें नाश करने का प्रयास कर रहा है, और इसलिए हमें भी क्रियाशील रहना है, परीक्षा का सामना करना है और अपने विश्वास में दृढ़ रहना है (पद.9) l हालाँकि यह ऐसा कुछ नहीं है जो हमें अपनी ताकत से करना है l परमेश्वर हमारे दुःख में हमारे साथ रहने की और, आखिरकार, हमें “सिद्ध और स्थिर और बलवंत”(पद.10) बनाने की प्रतिज्ञा करता है l उसकी सामर्थ्य से, हम बुराई का सामना करने और उसका अनुसरण करने में सचेत और सावधान रहना सीखते है l

खज़ाने की खोज

गड़ा हुआ खज़ाना। यह एक बच्चे की कहानी की किताब जैसा लगता है। परन्तु एक विलक्ष्ण करोड़पति फॉरेस्ट फेन्न रॉकी माउंटेन्स में कहीं 2 करोड़ मूल्य के जवाहरात और सोने के सन्दूक के छोड़े होने का दावा करते हैं। अनेक लोग इसकी खोज में जा चुके हैं। वास्तव में चार लोगों ने तो इस छिपे हुए धन को खोजने में अपनी जान तक गवाँ दी है।

नीतिवचन का लेखक हमें ठहरने और विचार करने के लिए एक तर्क प्रदान करता है: क्या किसी भी प्रकार का खज़ाना ऐसी खोज के योग्य है? नीतिवचन 4 में एक पिता अपने पुत्र को किस प्रकार उचित रूप से रहने के लिए लिख रहा है, वह सलाह दे रहे है कि किसी भी कीमत पर बुद्धि को खोजना उचित है (पद 7) । वह कहता है कि बुद्धि सम्पूर्ण जीवन भर हमारा मार्गदर्शन करेगी, हमें लड़खड़ाने से बचाएगी और हमें सम्मान का मुकुट पहनाएगी (पद 8-12) । हज़ारों वर्ष पश्चात, याकूब, यीशु का एक शिष्य भी बुद्धि के महत्व पर बल देता है। वह लिखता है “जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।” जब हम बुद्धि को खोजते हैं, तब हम अपने जीवन में सब प्रकार की भली वस्तुओं को भरपूरी से प्राप्त करते हैं।

बुद्धि की खोज करना अंततः, सब प्रकार की बुद्धि और समझ के स्रोत, परमेश्वर की खोज करना है । और जो बुद्धि ऊपर से आती है, उस गड़े हुए खज़ाने से कहीं अधिक मूल्यवान है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। 

अपनी वास्तविक पहचान को खोजना

मैं कौन हूँ? यह एक प्रश्न है जो मिक इंकपेन द्वारा लिखित बच्चों की एक पुस्तक नथिंग में एक दुखी जानवर पूछता है। एक धूल-धूसरित कोने में छिपा हुआ यह जानवर आने जाने को उसे “नथिंग” कहकर पुकारते हुए सुनता है और सोचता है उसका नाम ही “नथिंग” है।

दूसरे जानवरों से सामना होने पर उसकी याद वापस आती है। नथिंग को याद आता है कि उसकी भी एक पूँछ, मूछें और धारियाँ थीं। परन्तु इसका कोई लाभ नहीं हुआ जब तक उसकी भेंट एक बिल्ली से नहीं हुई, जिसने उसकी सही ओर जाने में और नथिंग को यह याद दिलाने में सहायता की कि वह वास्तव में है कौन: टोबी नामक एक स्टफड कैट। उसके मालिक ने बड़े ही प्रेम के साथ उसे ठीक किया, उसके नए कान, पूँछ, मूछें और धारियाँ सिलीं।

मैं जब कभी भी यह पुस्तक पढ़ती हूँ, तो मैं अपनी पहचान के बारे में सोचने लगती हूँ। मैं कौन हूँ? यूहन्ना, विश्वासियों को लिखते हुए कहता है कि परमेश्वर ने हमें अपनी सन्तान कहा है (1 यूहन्ना 3:1) । हम उस पहचान को पूरी तरह से नहीं समझते, परन्तु जब हम यीशु को देखते हैं, तो हम उसके समान बन जाएँगे (पद 2) । ठीक उस टोबी नामक बिल्ली के समान, हमें उस पहचान में पुनर्स्थापित कर दिया जाएगा, जिसकी इच्छा हमारे लिए रखी गई है, वह पहचान पाप के द्वारा बिगाड़ दी गई थी। अभी हम उस पहचान को आधे हिस्से को समझ सकते हैं और हम एक-दूसरे में परमेश्वर के स्वरूप को पहचान सकते हैं। परन्तु एक दिन, जब हम यीशु को देखेंगे, हम उस पहचान में पूरी तरह से पुनर्स्थापित कर दिए जाएँगे, जिसकी इच्छा परमेश्वर हमारे लिए रखता है। हमें नया बना दिया जाएगा।

दृढ़ प्रेम

“मैं तुमसे प्यार करता हूँ!” मेरे पिता बोले जब मैं कार के दरवाजे को ज़ोर से बंद करके स्कूल की ओर चल दी l मैं छठी कक्षा में थी, और महीनों से हर सुबह एक ही स्थिति थी l स्कूल पहुँचने पर पिता कहते थे, “तुम्हारा दिन अच्छा हो! मैं तुमसे प्यार करता हूँ!” और मैं केवल कहती थी, “अलविदा l” मैं उनसे नाराज़ नहीं थी या उनकी उपेक्षा नहीं करती थी l अपने विचारों में अत्यधिक मशगूल होने के कारण मैं उनके शब्दों पर ध्यान नहीं देती थी l फिर भी, मेरे पिता का प्रेम दृढ़ बना रहा l

परमेश्वर का प्रेम ऐसा ही है – उससे भी अधिक l वह सदा स्थिर रहता है l इस प्रकार के प्रेम के लिए इब्रानी शब्द हेसेद है l पुराना नियम में यह शब्द बार-बार दोहराया गया है, और केवल भजन सहिंता 136 में छब्बीस बार! कोई भी आधुनिक शब्द इसका अर्थ स्पष्ट नहीं कर सकता है; हम इसका अर्थ “दयालुता,” “करुणा,” “दया,” या निष्ठा” लगाते हैं l हेसेद ऐसा प्रेम है जो वाचा प्रतिबद्धता पर आधारित है; प्रेम जो निष्ठावान और विश्वासयोग्य है l परमेश्वर के लोगों द्वारा पाप करने के बावजूद, वह उनसे प्रेम करने में विश्वासयोग्य था l दृढ़ प्रेम परमेश्वर के चरित्र का एक अभिन्न भाग है (निर्गमन 34:6) l

जब मैं बच्ची थी, मैं अपने पिता के प्रेम को अनुदत्त/स्वीकार्य मान लेती थी l कभी-कभी वर्तमान में भी मैं अपने स्वर्गिक पिता के प्रेम के साथ ऐसा ही करती हूँ l मैं परमेश्वर की नहीं सुनती हूँ और उत्तर नहीं देती हूँ l मैं धन्यवादी होना भूल जाती हूँ l फिर भी मैं जानती हूँ कि मेरे लिए परमेश्वर का प्रेम दृढ़ है – एक सच्चाई जो मेरे पूरे जीवन के लिए एक निश्चित आधार है l