
पवित्र आराधना
जोसफ ने एक चर्च की पासबानी की जो अपने कार्यक्रमों और मंचीय प्रस्तुतियों के लिए जाना जाता था l वे बहुत अच्छे तरीके से किये जाते थे, फिर भी उन्हें चिंता थी कि चर्च की व्यस्तता एक व्यवसाय में बदल गयी थी l क्या चर्च सही कारणों से या अपनी गतिविधियों के कारण बढ़ रहा था? जोसफ पता लगाना चाहता था, इसलिए उसने एक साल के लिए सभी अतिरिक्त चर्च कार्यक्रमों को रद्द कर दिया l उनकी मण्डली एक जीवित मंदिर होने पर ध्यान केन्द्रित करने वाली थी जहाँ लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं l
जोसफ का निर्णय अति लगता है, जब तक कि आपने ध्यान नहीं देते हैं कि यीशु मंदिर के बाहरी आंगन में प्रवेश किया l पवित्र स्थान जिसे साधारण प्रार्थनाओं से भरा होना चाहिए था, आराधना व्यवसाय का भंवर बन गया था l यहाँ से अपने कबूतर ले जाओ! परमेश्वर की आवश्यकता के अनुसार सफ़ेद सोसन!” यीशु ने व्यापारियों के चौकियाँ उलट दी और उन लोगों को रोक दिया जिन्होंने उनसे सामान ख़रीदा था l जो कुछ वे कर रहे थे, उस पर क्रोधित होकर, उसने यशायाह 56 और यिर्मयाह 7 को उद्धरित किया : “मेरा घर सब जातियों के लिए प्रार्थना का घर कहलाएगा पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है” (मरकुस 11:17) l अन्यजातियों का आँगन, बाहरी लोगों के लिए आराधना करने का स्थान, पैसे कमाने के लिए एक सांसारिक बाज़ार में बदल गया था l
व्यापार में या व्यस्त रहने में कुछ गलत नहीं है l परन्तु यह चर्च का आशय नहीं है l हम परमेश्वर के जीवित मंदिर हैं, और हमारा मुख्य काम यीशु की आराधना करना है l जैसा कि यीशु ने किया था, हमें सभवतः किसी भी चौकी को उलटना ज़रूरी नहीं है, लेकिन वह हमें समान रूप से कुछ कठोर कार्य करने के लिए बुला रहा हो l

अत्यधिक विशेषता होना
मशीन ऑपरेटर्स के पास एक सामान्य खतरा होता है जो उनके विभाग के जुड़ा होता है – दुर्घटनाओं का खतरा l एक सामान्य चोट उँगलियों का भारी मशीनों के पहियों के बीच आ जाना होता है; खासतौर पर अंगूठे की हानि बहुत कठिन हो सकती है l यह जीविका का अंत करने वाली चोट नहीं है, परन्तु अंगूठे का नहीं होना चीजों को बदल देती है l अपने अंगूठे का उपयोग किये बिना, अपने दांतों को ब्रश करने या शर्ट का बटन लगाने या अपने बालों को कंघी करने या अपने जूते बाधने या यहाँ तक कि खाने की कोशिश करें l आपके शरीर के उस छोटे से अनदेखे सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है l
प्रेरित पौलुस चर्च में एक समान परिदृश्य को इंगित करता है l जो अक्सर कम दिखाई देते हैं और अक्सर कम मुखर सदस्य कभी-कभी दूसरों से “मुझे आपकी ज़रूरत नहीं है” की प्रतिक्रिया अनुभव करते हैं (1 कुरिन्थियों `12:21) l आमतौर पर यह अव्यक्त होता है, परन्तु कई बार ऐसा प्रगट रूप में कहा जाता है l
परमेश्वर हमें एक दूसरे के लिए समान चिंता और सम्मान करने के लिए कहता है (पद.25) l हम में से हर एक मसीह के शरीर का अंग है (पद.27), प्राप्त वरदान के बावजूद, और हमें एक दूसरे की ज़रूरत है l एक प्रकार से हम में से कुछ आखें और कान हैं, और हम में से कुछ अंगूठे हैं l लेकिन हम में से प्रत्येक मसीह की देह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, कभी-कभी जो आँखों से जितना दिखाई देता है उससे कहीं अधिक l

दो अच्छे हैं
हवाई में,1997 के आयरनमैंन ट्रायथलॉन (एक ऐसा खेल जिसमें साइकिल चलाना, तैराकी और लम्बी दूरी दौड़ना शामिल है) में, दो महिलाएँ समापन रेखा तक पहुँचने के लिए लड़खड़ाते हुए संघर्ष करती रहीं l जब तक सियन वेल्च वेंडी इंग्राहम से टकराई नहीं, तब तक थकीं हुई, धाविकाएँ अपने डगमगाते पैरों पर डटी रहीं l दोनों ज़मीं पर गिर गयीं l खड़े होने के लिए संघर्ष करते हुए, वे आगे को लड़खड़ा गयीं, और समापन रेखा से लगभग बीस मीटर पहले फिर गिर पड़ीं l जब वेंडी अत्यंत धीमी गति से आगे बढ़ने लगी, तो भीड़ ने तालियाँ बजाईं l जब उसकी प्रतियोगी ने पीछा किया, तो उन्होंने जोर से शाबाशी दी l वेंडी ने चौथे स्थान पर समापन रेखा पार की, और वह अपने समर्थकों की खुली बाहों में गिरी l फिर वह मुड़कर अपनी गिरी हुयी बहन के पास पहुँचीं l सियन आगे की ओर झुककर, अपनी थकी हुए भुजा वेंडी के हाथों की ओर और समापन रेखा कि ओर बढ़ाया l जैसे ही उसने पांचवें स्थान पर दौड़ पूरी की, भीड़ ने ऊँची आवाज़ में उनको अनुमोदित किया l
इस जोड़े द्वारा 140 मील की दौड़ पूरी करने से बहुत लोग प्रेरित हुए l परन्तु थके प्रतियोगी के एक साथ धीरज से दौड़ने की छवि मेरे मन में अंकित है, और सभोपदेशक 4:9-11 में जीवन को समर्थ बनानेवाली सच्चाई को दृढ़ करता है l
जीवन में हम सभी को सहायता चाहिए इस बात को स्वीकार करने में कोई शर्म की बात नहीं है (पद.9), विशेषकर इसलिए कि हम ईमानदारी से अपनी आवश्यकताओं से इन्कार नहीं कर सकते हैं या सर्वज्ञानी परमेश्वर से उसे छिपा नहीं सकते हैं l एक समय या किसी अन्य समय पर, चाहे वह शारीरिक या भावनात्मक रूप से हो, हम सभी गिरते हैं l जब हम दृढ़ रहते हैं यह जानना कि हम अकेले नहीं हैं हमें आराम पहुंचाता है l जब हमारा स्वर्गिक पिता हमारी मदद करता है, वह हमें दूसरे ज़रुरतमंदों तक पहुँचने में समर्थ बनाते हुए, यह निश्चय देता है कि वे भी अकेले नहीं हैं l

योजनाएँ बाधित
वाक् चिकित्सक (speech therapist) बनने की जेन की योजना तब समाप्त हुयी जब प्रशिक्षण(internship) से पता चला कि नौकरी उनके लिए भावनात्मक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण थी l फिर उसे एक पत्रिका के लिए लिखने का अवसर दिया गया l उसने खुद को एक लेखक के रूप में कभी नहीं देखा था, लेकिन सालों बाद उसने अपने लेखन के माध्यम से ज़रुरात्मन्द परिवारों की वकालत करते हुए पाया l वह कहती है, “पीछे मुड़कर देखकर, मैं देख सकती हूँ कि परमेश्वर ने मेरी योजना क्यों बदली l मेरे लिए उसके पास और भी बड़ी योजना थी l”
बाइबल में बाधित योजनाओं की कई कहानियाँ हैं l अपनी दूसरी मिशनरी यात्रा पर, पौलुस ने सुसमाचार को बितूनिया में लाना चाहा, लेकिन यीशु की आत्मा ने उसे रोक दिया (प्रेरितों 16:6-7) l यह रहस्यपूर्ण प्रतीत हुआ होगा : यीशु उन योजनाओं को क्यों बाधित कर रह था जो परमेश्वर प्रदत्त एक मिशन के अनुरूप थीं? एक रात एक सपने में जवाब आया : मैसिडोनिया को उसकी और अधिक ज़रूरत थी l वहाँ, पौलुस यूरोप में पहला चर्च स्थापित करनेवाला था l सुलैमान ने यह भी देखा, “मनुष्य के मन में बहुत सी कल्पनाएँ होती हैं, परन्तु जो युक्ति यहोवा करता है, वही स्थिर रहती है” (नीतिवचन 19:21) l
योजनाएँ बनाना समझदारी है l एक प्रसिद्ध कहावत है, “योजना बनाने में विफल, और आप विफल होने की योजना बनाते हैं l” परन्तु परमेश्वर अपनी योजना के द्वारा हमारी योजनाएं विफल कर सकता है l हमारी चुनौती सुनना और मानना है, यह जानकार कि हम परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं l यदि हम उसकी इच्छा के प्रति समर्पण करते हैं, तो हम स्वयं को अपने जीवन के लिए उसके उद्देश्य में ढाले हुए पाएंगे l
जब हम योजनाएं बनाना जारी रखते हैं, हम एक नया मोड़ जोड़ सकते हैं : सुनने की योजना बनाएँ l परमेश्वर की योजना सुनें l
