श्रेणी  |  odb

अत्यधिक विशेषता होना

फिल्म देखनेवालों ने एमिली ब्लंट (एक अमेरिकी अभिनेत्री) की खूबसूरत आवाज़ को मैरी पॉपिंस रिटर्न्स(Mary Poppins Returns) में मुख्य कलाकार की भूमिका में सुना l आश्चर्यजनक रूप से, उसके विवाह के चार साल बीतने पर ही उसके पति को उसके मुखर प्रतिभा का पता चला l एक साक्षात्कार में, उसने पहली बार उसको गाते हुए सुनकर, यह सोचते हुए अपने आश्चर्य का खुलासा किया, “तुम मुझे यह कब बताने जा रही थी?”

रिश्तों में हमें अक्सर नयी, कभी-कभी अप्रत्याशित, बारीकियों की जानकारी मिलती है, जो हमें आश्चर्यचकित करते हैं l मरकुस के सुसमाचार में, मसीह के शिष्यों ने आरम्भ में यीशु की अधूरी तस्वीर के साथ शुरुआत की और संघर्ष किया कि वह कौन है l हालाँकि, गलील के झील में आमना-सामना होने पर,यीशु से अपने को और अधिक प्रकट किया – इस समय प्रकृति की शक्ति के ऊपर उसकी सामर्थ्य का विस्तार l 

5,000 से अधिक लोगों की भीड़ को खिलाने के बाद, यीशु ने अपने शिष्यों को गलील के झील में भेजा, जहाँ वे एक भयंकर अंधी में फंस गए l भोर होने से ठीक पहले, शिष्य किसी को पानी पर चलते देख कर घबरा गए l मसीह की परिचित आवाज़ ने शांति के शब्द बोले, “ढाढ़स बांधो : मैं हूँ; डरो मत!” (मरकुस 6:50) l उसके बाद उसने उग्र आंधी को शांत किया l ऐसी महान शक्ति को देखने के बाद, शिष्य “आश्चर्य करने लगे” (6”51) जब वे मसीह की सामर्थ्य के इस अनुभव को पूरी तरह से समझने में संघर्ष करते रहे l 

जब हम अपने जीवन की आँधियों के विषय यीशु और उसकी शक्ति का अनुभव करते हैं, तो हम एक और पूरी तस्वीर प्राप्त करते हैं कि वह कौन है l और हम चकित होते हैं l 

दुःख में सामर्थ्य

1948 में, एक भूमिगत चर्च के पादरी, हार्लेन पोपोव को उनके घर से “थोड़ी पूछताछ” के लिए ले जाया गया l दो सप्ताह बाद, उससे चौबीसों घंटे पूछताछ की गयी और दस दिनों तक भोजन नहीं दिया गया l हर बार उसने जासूस होने से इनकार किया, तो उसे पीटा गया l पोपोव न केवल अपने कठोर बर्ताव से बचे, बल्कि अपने साथी कैदियों को भी यीशु के पास ले आए l अंत में, ग्यारह साल बाद, उन्हें रिहा कर दिया गया और उन्होंने अपने विश्वास को साझा करना जारी रखा जब तक कि, दो साल बाद, वह उस देश को छोड़ कर पुनः अपने परिवार से जुड़ नहीं गए l वे आनेवाले वषों में बंद देशों में बाइबल वितरित करने हेतु प्रचार करते रहे और धन इकठ्ठा करते रहे l 

यूगों से यीशु में अनगिनत विश्वासियों की तरह, पोपोव को उनके विश्वास के कारण सताया गया था l मसीह, अपनी खुद की यातना और मृत्यु और उसके अनुयायियों के समक्ष बाद में आने वाले उत्पीडन से बहुत पहले कहा था, “धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है” (मत्ती 5:10) l वह आगे कहता है, “धन्य हो तुम जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निंदा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बातें कहें” (पद.11) l 

“धन्य”? यीशु का क्या मतलब हो सकता है? वह उसके साथ रिश्ते में मिलनेवाली पूर्णता, आनंद और आराम का जिक्र कर रहा था (पद. 4, 8-10) l पोपोव दृढ़ रहा क्योंकि उसने महसूस किया कि परमेश्वर की उपस्थिति उसके कष्ट में भी शक्ति प्रदान कर रही थी l जब हम परमेश्वर के साथ चलते हैं, तो हमारी परिस्थितिचाहे कुछ भी हो, हम भी उसकी शांति का अनुभव कर सकते हैं l वह हमारे साथ है l 

वह जो बचाता है

डेस्मंड को “सबसे बहादुर व्यक्तिजो जीवित है” संबोधित किया गया, लेकिन वह वो नहीं था जो दूसरे अपेक्षा करते थे l वह एक सैनिक था जिसने बन्दुक चलाने से माना कर दिया l एक डॉक्टर के रूप में, उसने एक ही लड़ाई में पचहत्तर  घायल सैनिकों को हानि से बचाया, जिनमें से कुछ ने एक बार उन्हें कायर कहा और उनके विश्वास के लिए उनका उपहास किया l भरी गोलाबारी में भागते हुए, इस सैनिक ने लगातार प्रार्थना की, “परमेश्वर, कृपया मुझे एक और मदद करें l” उनकी वीरता के लिए उन्हें मैडल ऑफ़ ऑनर से सम्मानित किया गया l

शास्त्र हमें बताता है कि यीशु को बहुत गलत समझा गया था l जकर्याह नबी द्वारा नबूवत किया गया था (9:9), कि एक दिन, यीशु एक गधे पर सवार होकर यरूशलेम में प्रवेश किया और भीड़ ने “होशाना!” चिलाते हुए डालियों को लहराया (प्रशंसा का एक विस्म्योदगार जिसका अर्थ है “बचाओ!”) l भजन 118:26 का सन्दर्भ देते हुए, वे चिल्लाए : “धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है!” (यूहन्ना 12:13) l लेकिन उस भजन में दूसरा पद “यज्ञपशु को वेदी के सींगों से रस्सियों से बांधो” अर्थात् एक बलिदान लाने की बात करता है (भजन 118:27) l जबकि यूहन्ना 12 में भीड़ एक ऐसे सांसारिक राजा की उम्मीद लगायी थी जो उनको रोमी शासन से स्वतंत्र करेगा, लेकिन यीशु उससे कहीं अधिक था l वह राजाओं का राजा था और हमारा बलिदान – देह में परमेश्वर, स्वेच्छा से हमें हमारे पापों से बचाने के लिए क्रूस को गले लगाने वाला – एक उद्देश्य जिसकी नबूवत सदियों पूर्व की गयी थी l 

यूहन्ना लिखता है, “उसके चेले ये बातें पहले न समझे थे l” केवल बाद में “उनको स्मरण आया कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुयी थीं” (यूहन्ना 12:16) l उसके वचन से आलोकित, परमेश्वर के शाश्वत उद्देश्य स्पष्ट हो गए l वह हमें एक शक्तिशाली उद्धारकर्ता भेजने के लिए पर्याप्त प्यार करता है!

हमारी गहरी लालसा

एक युवा व्यक्ति के रूप में, डैनियल के पास पर्याप्त पैसा नहीं होने का डर था, इसलिए बीस साल के उम्र के आरंभिक काल में, वह महत्वकांक्षी रूप से अपना भविष्य बनाने लगा l एक प्रतिष्ठित कंप्यूटर कम्पनी में सफलता प्राप्त करते हुए, डैनियल ने बड़ी सम्पति हासिल की l उनके पास एक बहुत बड़ा बैंक खाता, एक आलिशान कार और करोड़ों रूपये का एक घर था जिसमें उनके पास वह सब कुछ था जो वह चाहता था; इसके बावजूद भी वह अत्यधिक दुखी था l “मैं चिंतित और असंतुष्ट महसूस करता हूँ,” डैनियल ने कहा l “असलियत में, धन जीवन को सचमुच बदतर बना सकता है l” नगदी के ढेर मित्रता, समुदाय, या आनंद प्रदान नहीं कर सकती है – और अक्सर यह उसके लिए केवल अधिक सिरदर्दी लेकर आयी l 

कुछ लोग अपने जीवन को सुरक्षित करने के प्रयास में धन को इकठ्ठा करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा खर्च करते हैं l यह एक मुर्ख का खेल है l पवित्रशास्त्र बल देता है, “जो रूपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा” (सभोपदेशक 5:10) l कुछ लोग अत्यधिक श्रम करते हैं l वे प्रयास करेंगे और धक्का देंगे, अपनी संपत्ति की तुलना दूसरों से करेंगे और कुछ आर्थिक दर्जा प्राप्त करने की कोशिश करेंगे l और इसके बावजूद भी यदि वे वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करते हैं, तो भी वे असंतुष्ट रहेंगे l यह पर्याप्त नहीं है l जैसे कि सभोपदेशक का लेखक कहता है, “यह भी व्यर्थ है” (पद.10) l 

सच्चाई यह है, परमेश्वर की इच्छा से अलग होकर परिपूर्णता प्राप्त करने का प्रयास करना निरर्थक साबित होगा l जबकि पवित्रशास्त्र हमें कड़ी महनत करने और दुनिया की भलाई के लिए अपने उपहारों का उपयोग करने के लिए कहता है, हम अपनी गहरी लालसाओं को पूरा करने के लिए कभी भी पर्याप्त रूप से जमा नहीं कर सकते l अकेले यीशु एक वास्तविक और संतोषजनक जीवन प्रदान करता है (यूहन्ना 10:10) – ऐसा जीवन जो प्यार भरे रिश्ते पर आधारित है जो वास्तव में पर्याप्त है!