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जीवन परिवर्तन

स्टीफेन का पालन पोषण पूर्वी लंदन के एक अशिष्ट इलाके में हुआ था और वह दस वर्ष की उम्र से ही अपराध में फंस गया था l उसने कहा, “यदि सभी लोग नशीला पदार्थ बेचते हैं और डकैती और धोखेबाजी करते हैं, आप भी अवश्य उसमें लिप्त हो जाएंगे l” परन्तु बीस बर्ष की उम्र में, उसने एक स्वप्न देखा जिसने उसे बदल दिया : “मैंने परमेश्वर को कहते हुए सुना, स्टीफेन, तुम हत्या करने के कारण जेल जानेवाले हो l” यह सजीव स्वप्न एक चेतावनी थी, और वह परमेश्वर की ओर लौटकर यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण कर लिया – और पवित्र आत्मा ने उसका जीवन रूपान्तरित कर दिया l

स्टीफेन ने एक संस्था स्थापित की जो स्पोर्ट्स के द्वारा शहर के सामजिक और आर्थिक रूप से समस्याग्रस्त बच्चों को अनुशासन, नैतिकता, और आदर सिखाती है l वह परमेश्वर को सफलता का श्रेय देते हुए जो उसने अपने जीवन में अनुभव किया है बच्चों के साथ प्रार्थना करता है और उनको प्रशिक्षित करता है l उसके अनुसार, “भटके हुए सपनों का पुनःनिर्माण l”

परमेश्वर के पीछे चलते हुए और अपने अतीत को पीछे छोड़ते हुए, हम – स्टीफेन की तरह – इफिसियों को दिए गए पौलुस के निर्देश का अनुसरण करते हैं कि जीवन के नये मार्ग पर चलो l यद्यपि हमारा पुराना मनुष्यत्व “जो भरमानेवाली आभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है,” हम हर दिन “नए मनुष्यत्व को [पहिनने का प्रयास करते हैं] जो परमेश्वर के अनुरूप . . . सृजा गया है” (इफिसियों 4:22,24) l सभी विश्वासी परमेश्वर से उन्हें पवित्र आत्मा द्वारा और अधिक उसके समान बनाने का आग्रह करके इस निरंतर प्रक्रिया को ग्रहण करते हैं l

स्टीफेन ने कहा, “मेरे जीवन के पूर्ण परिवर्तन में विश्वास ही निर्णायक आधार था l” यह किस प्रकार आपके लिए सत्य रहा है?

अनुग्रह द्वारा छुआ गया

लीफ एन्गर्स के उपन्यास पीस लाइक ए रिवर(Peace Like a River) में, तीन बच्चों का पिता जेरेमिया लैंड एक स्थानीय स्कूल में चौकीदार है l वह गहरे, और कभी-कभी अद्भुत विश्वास वाला व्यक्ति है l पूरे किताब में, उसका विश्वास अक्सर परखा गया है l

चेस्टर होल्डन, एक निर्दयी विचित्र स्वाभाव वाला अधीक्षक जेरेमिया के स्कूल का संचालक  है l जेरेमिया के उत्कृष्ट कार्य नैतिकता के बावजूद – बिना शिकायत किये फैले हुए गंदे पानी को साफ़ करना, अधीक्षक द्वारा तोड़ी गयी बोतलों को उठाना – होल्डन चाहता है कि वह कार्य छोड़कर चला जाए l एक दिन सभी विद्यार्थियों के सामने, वह जेरेमिया पर मतवालापन का दोष लगाकर उसे नौकरी से बर्खास्त कर देता हैं l यह अपमानजनक दृश्य है l

जेरेमिया किस प्रकार उत्तर देता है? वह अन्यायपूर्ण बर्खास्तगी के लिए कानूनी कार्यवाही कर सकता था या खुद पर अभियोग लगा सकता था l वह चुपचाप अन्याय को स्वीकार करते हुए चला जा सकता था l थोड़ी देर के लिए सोचें कि आप क्या करते?

यीशु कहते हैं, “अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उनका भला करो l जो तुम्हें श्राप दें, उनको आशीष दो; जो तुम्हारा अपमान करें, उनके लिए प्रार्थना करो” (लूका 6:27-28) l ये चुनौती भरे शब्द बुराई से छुटकारा पाने या न्याय की प्रक्रिया को रोकने के लिए नहीं हैं l इसके बदले, एक गंभीर प्रश्न पूछकर, यह हमें परमेश्वर का अनुसरण करने का आह्वान देते हैं (पद.36) : किस तरह मैं अपने शत्रु को परमेश्वर की इच्छानुकूल व्यक्ति  बनने में सहायता कर सकता हूँ?

जेरेमिया एक क्षण तक होल्डन को ध्यान से देखता है, फिर आगे बढ़कर उसके चेहरे को स्पर्श करता है l होल्डन बचाव में पीछे हटता है, उसके बाद आश्चर्य के साथ अपनी ठुड्डी और गालों को छूता है l उसकी दागदार त्वचा चंगी हो चुकी है l

अनुग्रह द्वारा एक शत्रु स्पर्श किया गया l

हमारा नया घर

1892 में एलिस द्वीप से होकर अमेरिका में प्रवेश करनेवाली पहली प्रवासी नागरिक, ऐनी मूर एक नए घर और एक नया आरम्भ के विचार पर अविश्वसनीय उत्तेजना महसूस की होगी l बाद में उस स्थान से लाखों लोग जाने वाले थे l मात्र एक किशोरी, ऐनी एक नए जीवन का आरम्भ करने के लिए आयरलैंड के कठिन जीवन को पीछे छोड़ चुकी थी l अपने हाथ में केवल एक छोटा बैग लेकर, वह ढेर सारे सपने, आशा, और अपेक्षाएँ लेकर अवसर के एक देश में आई थी l

कितना अधिक उत्तेजना और आश्चर्य परमेश्वर के बच्चे अनुभव करेंगे जब हम “नए आकाश और नयी पृथ्वी” को देखेंगे (प्रकाशितवाक्य 21:1) l हम उसमें प्रवेश करेंगे जिसे प्रकाशितवाक्य की पुस्तक “पवित्र नगर , [नया] यरूशलेम” कहती है (पद.2) l प्रेरित युहन्ना इस अद्भुत स्थान का वर्णन प्रभावशाली अलंकृत भाषा के साथ करता है l वहां पर “बिल्लौर की सी झलकती हुयी, जीवन के जल की नदी [दिखाई देगी], जो परमेश्वर और मेम्ने के सिंहासन से [बहती होगी] (22:1) l जल जीवन और बहुतायत का प्रतीक है, और उसका श्रोत स्वयं अनंत परमेश्वर होगा l युहन्ना कहता है कि “फिर श्राप न होगा” (पद.3) l वह सुन्दर, पवित्र सम्बन्ध जो परमेश्वर मनुष्यों और खुद के बीच चाहता है पूरी तौर से पुनःस्थापित हो जाएगा l

यह जानना कितना अविश्वसनीय है कि परमेश्वर, अपने बच्चों से प्रेम करता है और उन्हें अपने पुत्र के जीवन द्वारा खरीद लिया है, एक अद्भुत नया घर तैयार कर रहा है – जहां पर वह खुद हमारे साथ निवास करेगा और हमारा परमेश्वर होगा (21:3) l

आत्मिक रूप से थकित?

ज़ैक एस्वाइन अपनी पुस्तक द इम्परफेक्ट पास्टर में लिखते हैं, “भावनात्मक रूप से, कभी-कभी हमने एक दिन का काम एक घंटे में कर दिया है l” यद्यपि वह विशेषकर उन जिम्मेदारियों के विषय सन्दर्भ दे रहे थे जो अक्सर पासबान उठाते हैं, और यह हममें से किसी के लिए भी सच है l वज़नी मनोभाव और जिम्मेदारियां हमें शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक तौर पर थका देती हैं l और केवल हमें सोने की इच्छा होती है l

1 राजा 19 में, नबी एलिय्याह ने खुद को हर तरह से कमज़ोर पाया l हम पढ़ते हैं कि रानी इज़ेबेल ने यह जानकार कि उसने बाल के नबियों को मार डाला है (देखें 18:16-40), उसकी हत्या करने की धमकी दी (पद.1-2) l एलिय्याह अत्यधिक भयभीत होकर अपना प्राण लेकर भागा और अपनी मृत्यु मांगने लगा (19:3-4) l

अपनी विपत्ति में, वह सो गया l एक स्वर्गदूत ने उसे दो बार छूकर उससे कहा, “उठकर खा” (पद.5,7) l दूसरी बार के बाद, एलिय्याह परमेश्वर द्वारा दिए गए भोजन से शक्ति पाकर, “चालीस दिन रात चलते-चलते” एक गुफा में पहुँचा (पद.8-9) l वहां पर, प्रभु उसको दर्शन दिया और उसे पुनः सशक्त करके भेजा (19:3-4) – और वह तरोताज़ा होकर परमेश्वर द्वारा दिये गए कार्य को निरंतर करने में सक्षम हुआ l

कभी-कभी हमें भी प्रभु में प्रोत्साहित होने की ज़रूरत है l यह दूसरे विश्वासी के साथ संवाद, एक उपासना गीत, या प्रार्थना और परमेश्वर के वचन में समय देने के रूप में हो सकता है l

क्या आप थक गए हैं? परमेश्वर को अपना बोझ देकर तरोताज़ा हो जाएं! वह आपका बोझ उठाएगा l

सम्बन्ध रखने के लिए रचे गए

तनहा लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अनेक देशों में रेंट-ए-फैमिली(rent-a-family) उद्योग बढ़ रहा है l कुछ लोग इस सेवा का उपयोग दिखाने के लिए करते हैं, ताकि किसी सामाजिक अवसर पर वे सुखी परिवार वाले दिखाई दें l कुछ लोग बेपरवाह सम्बन्धियों के सामने झूठा स्वांग रचने के लिए अदाकारों को भाड़े पर बुलाते हैं, ताकि थोड़े समय के लिए ही सही, वे कौटुम्बिक संबंद का अनुभव कर सकें जिसकी वे इच्छा रखते हैं l

यह विचारधारा एक बुनियादी सच्चाई को प्रतिबिंबित करता है : मनुष्य सम्बन्ध रखने के लिए रचे गए हैं l उत्पत्ति में सृष्टि की कहानी में, परमेश्वर हर एक चीज़ को जो उसने बनाया था देखता है और देखता है कि वह “बहुत अच्छा है”(1:31) l परन्तु परमेश्वर आदम को देखकर कहता है, “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं”(2:18) l मनुष्य को एक और मनुष्य की ज़रूरत थी l

बाइबल हमें केवल रिश्ता रखने की हमारी आवश्यकता के विषय ही नहीं बताती है l वह हमें यह भी बताती है कि कहाँ सम्बन्ध मिल सकता है : यीशु के अनुयायियों में l यीशु ने अपनी मृत्यु के समय, अपने मित्र युहन्ना से मसीह की माँ को अपनी माँ स्वीकारने को कहा l यीशु के जाने के बाद भी वे आपस में एक परिवार के रूप में रहने वाले थे (युहन्ना 19:26-27) l और पौलुस ने विश्वासियों को दूसरों से माता-पिता और भाई-बहन का सा बर्ताव करने का निर्देश दिया (1 तीमुथियुस 5:1-2) l भजनकार हमसे कहता है कि संसार में परमेश्वर के छुटकारे के काम का एक हिस्सा “अनाथों का घर [बसाना]” है (भजन 68:6), और परमेश्वर ने कलीसिया को यह काम करने के लिए एक सर्वोत्तम स्थान के रूप में अभिकल्पित किया है l

परमेश्वर का धन्यवाद हो, जिसने हमें सम्बन्ध रखने के लिए बनाया है और अपने लोगों को हमारा परिवार होने के लिए दिया है!