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हेरोइन(मादक पदार्थ) की लत मार्मिक रूप से दुखद है l इसका उपयोग करनेवाले इसके प्रति रोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, इस प्रकार मादक पदार्थ के उस ऊँचे स्तर के लिए उन्हें और अधिक नशा करना पड़ता है l जल्द ही वे जितना नशीला पदार्थ लेते हैं ये उनकी मृत्यु  के लिए पर्याप्त से अधिक होता है l जब नशेड़ी सुनते हैं कि कोई एकाएक अधिक नशा करने से मर गया है, ज़रूरी नहीं उनका पहला विचार डर होगा परन्तु “वह मुझे कहाँ मिल सकता है?”

सी.एस. ल्युईस अपनी पुस्तक स्क्रूटेप लेटर्स में परीक्षा की कला की शैतान की व्याख्या के प्रति अपने कल्पनाशील अवलोकन में इस गिरते बिगाड़ के विषय चेतावनी देते हैं l थोड़ी अभिलाषा के साथ आरम्भ करें – यदि संभव है तो परमेश्वर की अच्छी अभिलाषाओं में से एक से – और परमेश्वर ने जिस तरह निषेध किया है उस प्रकार से पेश करें l जब कोई व्यक्ति मुँह मारता है, उसे थोड़ा दें यद्यपि उसे अधिक पाने का प्रलोभन दें l “हमेशा कम होनेवाली अभिलाषा के लिए हमेशा बढ़नेवाली तृष्णा,” का प्रबंध करें, जब तक कि अंत में हमें “उस व्यक्ति की आत्मा न मिल जाए और उसके बदले उसे कुछ न दें l”

नीतिवचन 7 यौन पाप की परीक्षा के सम्बन्ध में इस विनाशक चक्र का वर्णन करता है l यौन परमेश्वर का अच्छा उपहार है, परन्तु जब हम विवाह के बाहर इसके आनंद को खोजते है हम “बैल” के जैसे होते हैं जो “कसाई-खाने को” जाता है (पद.22) l हमसे मजबूत लोगों ने हानिकारक शीर्ष बिन्दुओं को पाने का प्रयास करके खुद को बर्बाद किया है, इसलिए “सुनो” और “तेरा मन [गलत] मार्ग की ओर न फिरे” (पद.24-25) l पाप आकर्षक और लत लगाने वाला हो सकता है, परन्तु इसका अंत मृत्यु है (पद. 27) l परमेश्वर की सामर्थ्य में – पाप की परीक्षा से दूर रहकर, हम उसमें सच्चा आनंद और परिपूर्णता प्राप्त कर सकते हैं l

परमेश्वर के लिए परिश्रम

जितनों की परवरिश विलियम कैरी (1761-1834) के साथ उस इंग्लिश गाँव में हुयी शायद वे सोचते थे कि वह अधिक उपलब्धि हासिल नहीं कर पाएगा, परन्तु आज उसे आधुनिक मिशंस का पिता कहा जाता है l जुलाहे माता-पिता से जन्मा, वह बहुत सफल शिक्षक या मोची नहीं बन सका, जब वह स्वयं यूनानी, इब्री, और लतीनी भाषा सीखा रहा था l अनेक वर्षों के बाद, उसने भारत में मिशनरी बनने के अपने सपने को पहचाना l परन्तु उसने अनेक वर्षों तक कठिनाईयों का सामना किया, जिसमें उसके बच्चे की मृत्यु हुयी, पत्नी मानसिक समस्याओं में रही और वह जिनके बीच में सेवा करता था उनसे कोई प्रतिउत्तर प्राप्त नहीं किया l

किस बात ने उसे कठिनाईयों के मध्य सेवा करने की उर्जा दी जब उसने पूरी बाइबल को छह और उसके कुछ हिस्सों को अन्य उन्तीस भाषाओं में अनुवाद किया l “मैं परिश्रम कर सकता हूँ,” उसने कहा l “मैं किसी भी निश्चित लक्ष्य/उद्य्यम में दृढ रह सकता हूँ l” हर तरह की प्ररिक्षाओं का सामना करते हुए उसने परमेश्वर की सेवा जारी रखी l

मसीह के प्रति यह निरंतर निष्ठा ही है जिसके विषय इब्रानियों का लेखक सलाह देता है l वह अपने पाठकों से जब वे परमेश्वर का आदर करने का प्रयास कर रहे हैं उनसे “आलसी [नहीं बनने] (इब्रानियों 6:12) का आह्वान करता है, परन्तु अंत तक पूरी आशा के लिए . . . प्रयत्न [करने को कहता है] (पद.11) l उसने उनको आश्वस्त किया कि परमेश्वर “तुम्हारे काम, और उस प्रेम को भूल [नहीं सकता है], . . .  जो तुम ने उसके नाम के लिए . . . दिखाया [है] (पद.10) l

विलियम कैरी के जीवन के अंतिम वर्षों में, उसने स्मरण किया कि किस प्रकार निरंतर परमेश्वर ने उसकी ज़रूरतों को पूरी किया l “वह कभी भी अपने वादे में चूका नहीं, इसलिए मैं भी उसकी सेवा में कभी विफल नहीं हूँगा l” परमेश्वर हमें भी प्रतिदिन उसकी सेवा करने में सामर्थी बनाए l

सेवाकालीन प्रशिक्षण

ब्राज़ील की एक कंपनी की एक प्रबंधक ने अपने ऑफिस के अभिरक्षकों से एक लिखित रिपोर्ट मांगी l प्रतिदिन वह जानना चाहती थी प्रत्येक कमरे को किसने साफ़ किया, कौन से कमरे छूट गए, और कर्मचारियों ने प्रत्येक कमरे में कितना समय लगाया l पहला “दैनिक रिपोर्ट” एक सप्ताह बाद आया, जो अधूरा था l

जब प्रबंधक ने इस पर ध्यान दिया, उन्होंने पाया कि अधिकतर कर्मचारी असाक्षर थे l वह उनको कार्य मुक्त कर सकती थी, परन्तु उन्होंने उनके लिए साक्षरता कक्षाएं आरंभ करवायीं l पांच महीनों के भीतर, सभी लोग बुनियादी स्तर पर पढ़ना सीख गए थे और उन्होंने अपना काम जारी रखा l

परमेश्वर अक्सर हमारे संघर्षों को उसके लिए काम करते रहने के लिए अवसर के रूप में उपयोग करता है l पतरस का जीवन अनुभवहीनता और गलतियों से चिन्हित था l पानी पर चलने की कोशिश करते समय उसका विश्वास डगमगा गया l यीशु को मंदिर का कर देना चाहिए या नहीं वह इसके विषय अनिश्चित था (मत्ती 17:24-27) l उसने क्रूसीकरण और पुनरुत्थान सम्बंधित मसीह की भविष्यवाणी का भी इनकार किया (16:21-23) l हर एक मामले के द्वारा यीशु ने पतरस को अपने विषय सिखाया वह कौन था – प्रतिज्ञात मसीह (पद.16) l पतरस ने सुना और सीखा जो उसे आरंभिक कलीसिया की स्थापना में जानना ज़रूरी था (पद.18) l

यदि आज आप किसी पराजय से हतोत्साहित हैं, तो याद रखें कि यीशु उसका उपयोग आपको सिखाने और अपनी सेवा में आगे ले जाने के लिए कर सकता है l वह पतरस की कमज़ोरियों के बावजूद उसके साथ कार्य करता रहा, और वह हमें भी अपने द्वितीय आगमन तक अपने राज्य को बनाने में लगातार उपयोग करता रहेगा l

चीजों को सम्पूर्ण बनाना

एक डाक्यूमेंट्री(दस्तावेज़ी फिल्म) लुक एंड सी : वेन्डेल बेरी का चित्र(Look & See: A Portrait of Wendell Berry), में रचयिता बेरी कहते हैं कि किस तरह तलाक हमारे संसार की स्थिति की व्याख्या करता है l हम एक दूसरे से,  हमारे इतिहास से, देश से, अलग किये जाते हैं l चीजें जिन्हें सम्पूर्ण रहना चाहिए था खंडित की जाती हैं l जब हमसे पुछा जाता है कि इस दुखद सच्चाई के विषय हमें क्या करना चाहिए, बेरी ने कहा, “हम सभी बातों को पुनः सम्पूर्ण नहीं बना सकते हैं l हम केवल दो चीजों को लेते हैं और उन्हें एक कर देते हैं l” हम दो खंडित चीजें को लेकर उन्हें एक बना देते हैं l

“धन्य हैं वे, जो मेल करानेवाले हैं,” यीशु ने हमसे कहा (मत्ती 5:9) l मेल कराने का अर्थ है शालोम लाना l और शालोम का सन्दर्भ संसार को सही करना है l एक धर्मवैज्ञानिक शालोम को इस प्रकार चित्रित करता है “विश्वव्यापी खुशहाली, सम्पूर्णता और सुख . . . l [यह] वैसा है जैसे चीजों को होना चाहिए l” शालोम खंडित को लेकर सम्पूर्ण बनाना है l यीशु के मार्गदर्शन अनुसार, हम भी चीजों को सही करने का प्रयत्न करें l वह हमें मेल करानेवाले, “पृथ्वी का नमक” और “जगत की ज्योति” बनने की चुनौती देता है (पद.13-14) l

संसार में मेल करानेवाले बनने के बहुत तरीके हैं, प्रतिदिन हम टूटेपन से संघर्ष करें न कि उसके आगे हार मान लें l परमेश्वर की सामर्थ्य में, हम किसी मित्रता को नहीं टूटने देने या संघर्ष कर रहे किसी पड़ोस को कमजोर न होने देने, या बेपरवाही और अकेलापन का चुनाव न करें l टूटे स्थानों को ढूंढें, भरोसा करते हुए कि परमेश्वर उनको पुनः सम्पूर्ण बनाने में हमें बुद्धि और कौशल देगा l