
यीशु की ओर दौड़ना
पेरिस की यात्रा के दौरान, बेन और उसके दोस्तों ने खुद को शहर के प्रसिद्ध संग्रहालयों में से एक में पाया। हालांकि बेन कला का छात्र नहीं था, फिर भी जब उसने यूजीन बर्नांड द्वारा एक चित्रकारी द डिसाइपल पीटर एंड जॉन रंनिंग टू द सेपलकर(The Disciples Peter and John Running to the Sepulcher) को देखा तो वह विस्मय में था। बिना कुछ कहे, पतरस और यूहन्ना के चेहरे और उनके हाथों की स्थिति बहुत कुछ कहती है, दर्शकों को उनकी जगह पर खुद को रखने और अपनी उत्तेजक भावनाओं को साझा करने के लिए आमंत्रित करती है।
यूहन्ना 20:1-10, के आधार पर, पेंटिंग यीशु की खाली कब्र की दिशा में दौड़ते हुए दोनों चेलों को चित्रित करती है (पद. 4)। यह अति उत्कृष्ट कृति भावनात्मक रूप से संघर्ष कर रहे दो चेलों की गहनता को दिखाती है। यद्यपि उस समय उनका विश्वास पूरी तरह से निर्मित नहीं था, पर वे सही दिशा में दौड़ रहे थे, और अंततः पुनरुत्थित यीशु ने स्वयं को उनके सामने प्रकट किया (पद. 19-29)। उनकी खोज सदियों से यीशु के खोजकर्ताओं से कुछ अलग नहीं थी। हालाँकि हम एक खाली कब्र या एक शानदार कला के अनुभवों से दूर हो सकते हैं, पर हम सुसमाचार को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। पवित्रशास्त्र हमें आशा और खोज करने और यीशु और उसके प्रेम की दिशा में चलने के लिए विवश करता है—यहाँ तक कि संदेहों, प्रश्नों और अनिश्चितताओं के साथ भी। कल, जब हम हम ईस्टर मनाते हैं, हम परमेश्वर की विश्वसनीयता को याद करते हैं : “तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे” (यिर्मयाह 29:13)।

लाल रंग की बूंदें
स्कॉटिश नेशनल गैलरी में से चलते हुए, मैं डच कलाकार विंसेंट वान गाग की ऑलिव ट्रीज़ की कई पेंटिंग्स में से एक की प्रभावशाली ब्रश की कला और जीवन से भरपूर चमकीले रंगों की ओर आकर्षित हुआ। कई इतिहासकारों का मानना है कि यह काम जैतून के पहाड़ पर गतसमनी के बगीचे में यीशु के अनुभव से प्रेरित था । जिस चीज़ ने मुझे विशेष रूप से आकर्षित किया, वह थी पेंटिंग के कैनवास पर प्राचीन पेड़ों के बीच रंग के छोटे-छोटे लाल छींटे ।
सभी जैतून के पेड़ उस पहाड़ पर स्थित होने के कारण उसे जैतून के पहाड़ से जाना जाता है l उस रात वहाँ यीशु प्रार्थना करने के लिए गए जब उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि उनका चेला यहूदा उन्हें धोखा देगा। यीशु यह जानकर पीड़ा से व्याकुल थे कि विश्वासघात का परिणाम सूली पर उनका चढ़ना होगा। जब उन्होंने प्रार्थना की, “उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदों के समान भूमि पर गिर रहा था” (लूका 22:44) l यीशु की व्यथा बगीचे में स्पष्ट थी क्योंकि वह उस सार्वजनिक मृत्यु की पीड़ा और अपमान का सामना करने के लिए तैयार हो रहे थे जिसका परिणाम बहुत पहले गुड फ्राइडे के दिन उनका लहू बहाया जाना था ।
वान गॉग की पेंटिंग पर लाल रंग हमें याद दिलाता है कि यीशु को “बहुत दुःख उठाना था और तुच्छ समझा जाना” था (मरकुस 8:31)। जबकि पीड़ा उनकी कहानी का हिस्सा है, तथापि, यह अब चित्र पर प्रबल नहीं है। मृत्यु पर यीशु की विजय हमारे क्लेशों को भी बदल देती है, जिससे यह हमारे जीवन के सुंदर परिदृश्य का एक हिस्सा बन जाता है जिसे वह रच रहा है।

सेवा करने की चुनौती
यद्यपि वह केवल तेरह साल का था, लेकिन डीएविऑन ने दूसरों की सेवा करने की चुनौती स्वीकार की। उसने और उसकी माँ ने एक ऐसे व्यक्ति के बारे में एक कहानी सुनी थी जिसने बच्चों को गर्मी की छुट्टी के दौरान पचास मैदानों के घास मुफ्त में काटने के लिए कहा था। उनका मकसद बुजुर्गों, एकल माताओं, विकलांग लोगों या ऐसे किसी भी व्यक्ति की सहायता करना था, जिन्हें तुरंत मदद की आवश्यकता हो । संस्थापक (जिन्होंने पचास राज्यों में पचास मैदाओं के घास काटे थे) ने कार्य नैतिकता के महत्व को सिखाने और समुदाय को कुछ लौटाने की चुनौती रची थी। गर्मी और अन्य गतिविधियों की उपलब्धता के बावजूद एक बालक गर्मियों में कुछ पाने की कोशिश कर सकता है, डीएविऑन ने दूसरों की सेवा करना चुना और चुनौती पूरी की।
सेवा करने की चुनौती यीशु में विश्वासियों के लिए भी है। सभी लोगों के लिए अपनी मृत्यु से पहले की शाम को, यीशु ने अपने मित्रों के साथ रात का भोजन खाया (यूहन्ना 13:1-2)। वह खुद पर आने वाली पीड़ा और मृत्यु के बारे में अच्छे से जानता था, फिर भी वह भोजन से उठा, उसने एक अंगोछा लपेटा, और अपने चेलों के पैर धोने लगा (पद. 3-5)। उसने कहा, “यदि मैं ने प्रभु और गुरु होकर तुम्हारे पाँव धोए, तो तुम्हें भी एक दूसरे के पाँव धोना चाहिए।” (पद. 14)।
यीशु, एक विनम्र सेवक और हमारा उदाहरण, लोगों की परवाह करता था : उसने अंधों और बीमारों को चंगा किया, अपने राज्य का सुसमाचार सुनाया, और अपने मित्रों के लिए अपनी जान दे दी। क्योंकि मसीह आपसे प्रेम करता है, उससे पूछें कि वह चाहता है कि आप इस सप्ताह किसकी सेवा करें ।

महान प्रेम
पवित्र सप्ताह के कुछ दिन पहले, जब दुनिया भर के मसीही यीशु के बलिदान को याद करते हैं और उनके पुनरुत्थान का जश्न मनाते हैं, दक्षिण पश्चिम फ़्रांस के एक सुपरमार्केट में एक आतंकवादी ने धावा बोलकर गोलीबारी की और दो लोगों की हत्या कर दी। बातचीत के बाद, आतंकवादी ने सभी को रिहा कर दिया पर एक को बंधक बनाकर रखा, जिसे उसने खुद को बचाने के लिए एक मानव ढाल के रूप में उपयोग किया। खतरे को जानते हुए, पुलिस अधिकारी अरनौद बेल्ट्रैम ने अकल्पनीय काम किया : उन्होंने महिला की जगह स्वेच्छा से खुद को सौंपा । अपराधी ने उसे छोड़ दिया, लेकिन आगे की हाथापाई में बेल्ट्रैम घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई ।
एक पास्टर जो उस पुलिस अधिकारी को जानते थे, उन्होंने उसकी वीरता का जिम्मेदार यीशु में उनके विश्वास को ठहराया, यूहन्ना 15:13 में उसके शब्दों की ओर इशारा करते हुए : “इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं कि कोई अपने मित्रों के लिए अपना प्राण दे l” ये वे शब्द थे जो मसीह ने अपने शिष्यों के साथ उनके अंतिम भोजन के बाद कहे थे। उसने अपने दोस्तों से कहा कि “जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो” (पद.12) और यह कि सबसे बड़ा प्रेम यह है कि एक दूसरे के लिये अपना प्राण दे दे (पद.13) । ठीक यही यीशु ने अगले दिन किया, जब वह हमें हमारे पापों से बचाने के लिए क्रूस पर चढ़ा—जो केवल वही कर सकता था l
हो सकता है हमें कभी भी अरनौद बेल्ट्रैम की वीरता का अनुसरण करने के लिए न बुलाया जाए। लेकिन जब हम परमेश्वर के प्रेम में बने रहते हैं, जब हम उसके महान प्रेम को साझा करना चाहते हैं तो अपनी योजनाओं और इच्छाओं को सामने रखते हुए हम त्यागपूर्वक दूसरों की सेवा कर सकते हैं, ।
