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प्रकाश के हज़ार बिंदु

संयुक्त राज्य अमेरिका में उत्तर-पश्चिमी अलबामा में डिसमल्स कैनियन(Dismals Canyon) कई पर्यटकों को आकर्षित करता है, अधिकतर मई और जून में जब जुगनू के लार्वा फूटकर जुगनू बन जाते हैं l रात में, ये शानदार नीली चमक बिखेरते हैं, और हज़ारों मिलकर एक असाधारण रौशनी उत्पन्न करते हैं l   
एक तरह से, प्रेरित पौलुस मसीह में विश्वासियों को जुगनू कहता है l वह समझाता है कि “तुम तो पहले अन्धकार थे, परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो” (इफिसियों 5:8) l लेकिन कभी-कभी हम सोचते हैं कि “मेरा यह छोटा सा प्रकाश अंतर कैसे ला सकता है l पौलुस का सुझाव है कि यह एकल कार्य नहीं है l वह हमें “ज्योति की संतान” कहता है (पद.8) और समझाता है कि हम “ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में सहभागी” हैं (कुलुस्सियों 1:12) l संसार में ज्योति होना सामूहिक प्रयास है, मसीह की देह का कार्य है, कलीसिया का कार्य है l पौलुस ने हम जुगनुओं की तस्वीर के साथ इसे पुष्ट किया है जो एक साथ आराधना करते हैं,, “आपस में भजन और स्तुतिगान, और आत्मिक गीत गाते हुए” (इफिसियों 5:19) l   
जब हम निराश हो जाते हैं, यह सोचकर कि हमारे जीवन की गवाही आधी रात के अंधेरे में बस एक छोटा सा बिंदु है, तो हम बाइबल से आश्वासन ले सकते हैं।  हम अकेले नहीं हैं l एक साथ, जब परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है, हम एक अंतर लाते हैं और एक शानदार रौशनी चमकाते हैं l ऐसा लगता है कि जुगनुओं की एक पूरी मण्डली बहुत सारी दिलचस्पी आकर्षित कर सकती है l  
—केनेथ पीटरसन 
 

दासत्व से मुक्ति

“आप मूसा के समान हैं, हमें दासत्व से छुड़ानेवाले!” जमीला चिल्लाई l पाकिस्तान में एक बंधुआ ईंट-भट्ठा मज़दूर के रूप में, वह और उसका परिवार भट्ठा मालिक को दिए गए अत्यधिक ऋण के कारण पीड़ित थे। उन्होंने अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा सिर्फ़ ब्याज चुकाने में खर्च कर दिया। लेकिन जब उन्हें एक गैर-लाभकारी एजेंसी से एक उपहार मिला जिसने उन्हें उनके ऋण से मुक्त कर दिया, तो उन्हें बहुत राहत महसूस हुई। अपनी आज़ादी के लिए एजेंसी के प्रतिनिधि को धन्यवाद देते हुए, यीशु में विश्वास रखने वाली जमीला ने मूसा और इस्राएलियों को गुलामी से मुक्त करने के परमेश्वर के उदाहरण की ओर इशारा किया। 
कठोर परिस्थितियों में काम करते हुए, सैकड़ों वर्षों से इस्राएलियों को मिस्रियों द्वारा सताया गया था l उन्होंने मदद के लिए परमेश्वर को पुकारा (निर्गमन 2:23) l लेकिन उनके काम का बोझ बढ़ गया, क्योंकि फिरौन ने उन्हें ईंटें बनाने के साथ-साथ पुआल भी इकठ्ठा करने का आदेश दिया (5:6-8) l जब इस्राएलियों ने उत्पीड़न के विरुद्ध पुकारना जारी रखा, तो परमेश्वर ने उनके परमेश्वर होने की अपनी प्रतिज्ञा दोहरायी (6:7) l वे अब और दास नहीं रहेंगे, क्योंकि वह उन्हें “अपनी भुजा बढ़ाकर” छुड़ा लेगा (पद.6) l  
परमेश्वर के निर्देशन में, मूसा इस्राएलियों को मिस्र से बाहर ले गया (अध्याय 14 देखें) l आज भी परमेश्वर हमें क्रूस पर अपने पुत्र, यीशु की फैली हुयी भुजाओं द्वारा छुड़ाता है l हम उस पाप के बहुत बड़े दासत्व से मुक्त हैं जिसने कभी हमें नियंत्रित किया था l हम अब गुलाम नहीं, स्वतंत्र हैं! 
 
—एमी बाउचर पाई 

परमेश्वर की उपस्थिति की प्राथमिकता

2009 में, अमेरिका में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की एक शोध टीम ने एक प्रयोग में दो सौ से अधिक छात्रों का अध्ययन किया जिसमें कार्यों और स्मृति अभ्यासों के बीच अदला-बदली करना शामिल था l आश्चर्यजनक रूप से, पाया गया कि जो छात्र स्वयं को एक समय में अनेक कार्य करने में कुशल मानते थे, एक समय में एक कार्य करनेवालों की तुलना में बुरा प्रदर्शन किया l बहुकार्य ने विचारों पर ध्यान केन्द्रित करना और अप्रासंगिक जानकारी को फ़िल्टर करना अधिक कठिन बना दिया l जब हमारा मन विकर्षित हो तो ध्यान केन्द्रित करना एक चुनौती हो सकती है l  
जब यीशु मरियम और मार्था के घर आया, मार्था काम में व्यस्त थी और “सेवा करते करते घबरा गयी” थी (लूका 10:40) l उसकी बहन मरियम ने बैठकर यीशु से सीखने, बुद्धि और शांति प्राप्त करने का चुनाव किया जो उससे छीना न जाएगा (पद. 39-42) l जब मार्था ने यीशु से मरियम को उसका सहयोग  करने के लिए उत्साहित करने के लिए कहा, तो उसने उत्तर दिया, “तू बहुत बातों के लिए चिंता करती और घबराती है l परन्तु एक बात आवश्यक है” (पद. 41-42) l  
परमेश्वर हमारा ध्यान चाहता है l लेकिन, मार्था की तरह, हम अक्सर कार्यों और समस्याओं से विचलित होते हैं l हम परमेश्वर की उपस्थिति की उपेक्षा करते हैं, यद्यपि वह हमें आवश्यक बुद्धि और आशा दे सकता है l जब हम प्रार्थना द्वारा उसके साथ समय बिताने और पवित्रशास्त्र पर मनन को प्राथमिकता देते हैं, तो वह हमें उन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और शक्ति देगा जिनका हम सामना करते हैं l  
—किमया लोडर 

शरण देनेवाले लोग

 
शरणार्थी बच्चों की कहानियों से प्रेरित होकर फिल और सैंडी ने उनमें से दो के लिए अपना दिल और घर खोल दिया। हवाई अड्डे पर उन्हें लेने के बाद, वे घबराए हुए चुपचाप घर चले गए। क्या वे इसके लिए तैयार थे? वे एक ही संस्कृति, भाषा या धर्म साझा नहीं करते थे, लेकिन वे इन अनमोल बच्चों के लिए शरण देने वाले लोग बन गए थे। बोअज़ रूथ की कहानी से प्रेरित हुआ। उसने सुना था कि कैसे उसने नाओमी का समर्थन करने के लिए अपने लोगों को छोड़ दिया, और जब रूथ उसके खेत में कटाई करने आई, तो बोअज़ ने उसके लिए यह आशीर्वाद प्रार्थना की,  "यहोवा तेरी करनी का फल दे, और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों के तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दें"  (रूत 2:12)। 
रूत ने एक रात बोअज़ की नींद में बाधा डालते हुए उसे उसकी आशीष की याद दिलाई। अपने पैरों के पास हलचल से जागते हुए, बोअज़ ने पूछा, "तुम कौन हो?" रूत ने उत्तर दिया, “मैं तो तेरी दासी रूत हूँ; तू अपनी दासी को अपनी चद्दर ओढ़ा दे, क्योंकि तू हमारी भूमि छुड़ानेवाला कुटुम्बी है” (3:9) l  
चद्दर और पंखों के लिए इब्रानी शब्द एक ही है  l बोअज़ ने रुत से विवाह करके उसे शरण दी, और उनके परपोते दाऊद ने इस्राएल के परमेश्वर की प्रशंसा में उनकी कहानी को दोहराया : “हे परमेश्वर, तेरी करुणा कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखों के तले शरण लेते हैं” (भजन 36:7) l  
—माइक विटनर 

विश्वसनीय और कमजोर

 
एक चर्च मित्र ने संदेश भेजा "अरे, पोह फैंग! इस महीने की देखभाल समूह बैठक के लिए, आइए हम सभी को जेम्स 5:16 में बताए अनुसार कार्य करने के लिए कहें। आइए हम विश्वास और गोपनीयता का एक सुरक्षित वातावरण बनाएं, ताकि हम अपने जीवन में संघर्ष के क्षेत्र को साझा कर सकें और एक दूसरे के लिए प्रार्थना कर सकें।" एक पल के लिए, मुझे यकीन नहीं था कि कैसे जवाब दूं। जबकि हमारे छोटे समूह के सदस्य एक दूसरे को सालों से जानते हैं, हमने कभी भी खुलकर अपने सभी दुखों और संघर्षों को एक दूसरे के साथ साझा नहीं किया। आखिरकार, कमजोर होना डरावना है। 
लेकिन सच्चाई यह है कि हम सभी पापी हैं और संघर्ष करते हैं l हम सभी को यीशु की ज़रूरत है l परमेश्वर के अद्भुत अनुग्रह और मसीह पर हमारे भरोसे के बारे में असली बातचीत हमें उस पर भरोसा के लिए प्रोत्साहित करने का एक तरीका है l यीशु के साथ, हम परेशानी-मुक्त जीवन का दिखावा करना छोड़ सकते हैं। 
तो मैंने जवाब दिया, “हाँ! चलो ऐसा करते हैं!” शुरू में, यह अजीब था। लेकिन जैसे ही एक व्यक्ति ने खुलकर अपनी बात साझा की, दूसरे ने भी जल्द ही ऐसा किया। हालाँकि कुछ लोग चुप रहे, लेकिन समझ बनी रही। किसी पर दबाव नहीं था। हमने समय का अंत जेम्स 5:16 के दूसरे भाग में बताए अनुसार किया, “एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो।” उस दिन मैंने यीशु में विश्वासियों के साथ संगति की सुंदरता का अनुभव किया। मसीह में हमारे समान विश्वास के कारण, हम एक दूसरे के साथ कमज़ोर हो सकते हैं और अपनी कमज़ोरियों और संघर्षों में मदद के लिए उस पर और दूसरों पर निर्भर हो सकते हैं। 
—पोह फैंग चिया