
यह क्यों की जाए?
जब मैं छठी कक्षा में पढ़ रहे अपने पौत्र, लोगन, की बीजगणित के कुछ जटिल गृहकार्य में सहायता कर रहा था, तो उसने मुझे इंजिनियर बनने के अपने सपने के बारे में बताया l जब हम उसके गृहकार्य में x और y के साथ क्या करना है, पता लगा चुके, तब उसने कहा, “मैं कब इसका उपयोग करूँगा?”
मैं यह कहते हुए मुस्कराए बिना नहीं रह सका, “ठीक है, लोगन, अगर तुम इंजिनियर बनते हो तो तुम इसी का उपयोग करोगे!” उसे बीजगणित और अपने प्रत्याशित भविष्य के बीच के सम्बन्ध का एहसास नहीं था l
कभी-कभी हम पवित्रशास्त्र को इसी तरह से देखते हैं l जब हम धर्मोपदेशों को सुनते हैं और बाइबल के कुछ हिस्सों को पढ़ते हैं, तो हम विचार कर सकते हैं, “मैं इसका उपयोग कब करूँगा?” भजनकार दाऊद के पास कुछ उत्तर थे l उसने कहा कि पवित्रशास्त्र में पाए जाने वाले परमेश्वर के सत्य “प्राण को बहाल करती है,” “साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते है,” और “हृदय को आनंदित कर देते है” (भजन 19:7-8) बाइबल की पहली पांच पुस्तकों में पाया जाने वाला पवित्रशास्त्र का ज्ञान, जैसा कि भजन 19 (साथ ही सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र) में उल्लिखित है, प्रतिदिन आत्मा की अगुवाई पर भरोसा करने में हमारी सहायता करता हैI (नीतिवचन 2:6)
और पवित्रशास्त्र के बगैर, हमें उस महत्वपूर्ण तरीके की कमी रहेगी जो परमेश्वर ने हमें उसे अनुभव करने और उसके प्रेम और तरीकों को बेहतर ढंग से जानने के लिए प्रदान किया है l बाइबल का अध्ययन क्यों करें? क्योंकि “यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आँखों में ज्योति ले आती है I” (भजन 19:8)

विश्राम की अनुमति
मेरी सहेली सूज़ी और मैं समुद्र तट के कुछ शिलाखंडों पर बैठकर, समुद्र के झाग को धनुषाकार छल्ले उछालते हुए देख रहे थे l एक के बाद एक लहरों को लौटकर चट्टानों से टकराते हुए देखकर, सूज़ी बोल पड़ी, “मुझे समुद्र से प्यार हैl वह गतिमान रहता है इसलिए मुझे ज़रूरत नहीं!
क्या यह दिलचस्प नहीं है कि हममें से कुछ महसूस करते हैं कि हमें अपने काम से विश्राम करने के लिए “अनुमति” की ज़रूरत होती है? और बिल्कुल यही है जो हमारा अच्छा परमेश्वर हमें प्रदान करता है! छह दिनों तक, परमेश्वर ने प्रकाश, भूमि, वनस्पति, जानवरों और मनुष्यों को बनाकर पृथ्वी को अस्तित्व में लाया l फिर सातवें दिन, परमेश्वर ने विश्राम किया (उत्पत्ति 1:31-2:2) दस आज्ञाओं में, परमेश्वर ने उसका सम्मान करने के लिए स्वस्थ जीवन के लिए अपने नियमों को सूचीबद्ध किया (निर्गमन 20:3-17) जिसमें सब्त को विश्राम के दिन के रूप में याद रखने की आज्ञा शामिल है (पद.8-11) नए नियम में हम यीशु को नगर के सभी बीमारों को चंगा करते हुए देखते हैं (मरकुस 1:29:34) और फिर अगली सुबह प्रार्थना करने के लिए एकांत स्थान पर जाते हुए पाते हैं (पद.35) उद्देश्यपूर्ण ढंग से, हमारे परमेश्वर ने काम किया और विश्राम किया l
कार्य में, परमेश्वर के प्रावधान की लय और विश्राम के लिए उसका निमंत्रण हमारे चारों ओर गूंजता हैl वसंत के रोपण से ग्रीष्मकाल में वृद्धि, पतझड़ में फसल और शीतकाल में विश्राम मिलाता है l सुबह, दोपहर, दोपहर, शाम, रात l परमेश्वर हमारे जीवन को काम और आराम दोनों के लिए आदेश देता है, हमें दोनों करने की अनुमति देता है l

आध्यात्मिक नवीनीकरण
चीनी चिकित्सा ने हज़ारों वर्षों से पर्ल पाउडर एक्सफोलिएशन/pearl powder exfoliation(त्वचा की सतह से मृत कोशिकाओं को हटाना) का अभ्यास किया है, जिससे त्वचा के ऊपर की मृत कोशिकाओं को साफ़ करने के लिए पिसे हुए मोतियों का उपयोग किया जाता है l रोमानिया में, कायाकल्प चिकित्सीय मिट्टी/लेप व्यापक रूप से मांग वाला एक्सफोलिएन्ट/exfoliant(त्वचा पर से मृत कोशिकाएं हटाने वाला एक उत्पाद) बन गया है जो त्वचा को युवा और चमकदार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है l पूरे संसार में, लोग शरीर की देखभाल के तरीकों का उपयोग करते हैं, उनका मानना है कि यह सबसे बेजान त्वचा को भी नवीनीकृत करेगा l
हालाँकि, हमारे भौतिक शरीर को बनाए रखने के लिए हमने जो साधन विकसित किये हैं, वे हमें केवल अस्थायी संतुष्टि ही दे सकते हैं l इससे भी बड़ी बात यह है कि हम आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ और मजबूत बने रहें l यीशु में विश्वासियों के रूप में, हमें उसके द्वारा आध्यात्मिक नवीनीकरण का उपहार दिया गया है l प्रेरित पौलुस ने लिखा, “यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्ट होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है” (2 कुरिन्थियों 4:16) जब हम भय, पीड़ा और चिंता जैसी चीजों को थामे रहते हैं तो हम जिन चुनौतियों का सामना करते हैं, वे हमें दबा सकती हैंl आध्यात्मिक नवीनीकरण तब आता है जब हम “देखी हुयी वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं” (पद.18) हम ऐसा अपनी दैनिक चिंताओं को परमेश्वर पर छोड़ देने और पवित्र आत्मा के फल के लिए प्रार्थना करने के द्वारा करते हैं—जिसमें प्रेम, आनंद और शांति शामिल है—हमारे जीवन में नए सिरे से उभरने के लिए (गलातियों 5:22-23) जब हम अपनी परेशानियों को परमेश्वर पर छोड़ते हैं और उसकी आत्मा को हर दिन हमारे माध्यम से चमकने देते हैं, तो वह हमारी आत्माओं को पुनर्स्थापित करता है l

संतोष को पकड़ना
एक मनोचिकित्सक के सलाह स्तम्भ में, उन्होंने ब्रेन्डा नामक एक पाठक को जवाब दिया, जिसने अफ़सोस जताया था कि उसकी महत्वाकांक्षी गतिविधियों ने उसे असंतुष्ट कर दिया था l मनोचिकित्सक के शब्द स्पष्टवादी/रूखे(blunt) थे l मनुष्य को खुश रहने के लिए नहीं बनाया गया है, उन्होंने कहा, “केवल जीवित रहने और प्रजनन करने के लिए l” हम संतोष की “चिढ़ाने वाली और मायावी तितली” का पीछा करने के लिए अभिशप्त हैं, उन्होंने कहा, “हमेशा इसे पकड़ने के लिए नहींl”
मुझे आश्चर्य है कि मनोचिकित्सक के शून्यवादी/नकारवादी(nihilistic) शब्दों को पढ़कर ब्रेन्डा को कैसा लगा होगा और अगर उसने इसके बजाय भजन 131 पढ़ा होता तो उसे कितना अलग आभास होताl अपने शब्दों में, दाऊद हमें संतोष पाने के तरीके पर एक निर्देशित विचार देता है l वह विनम्रता की मुद्रा में आरम्भ करता है,अपनी राजसी महत्वकांक्षाओं को एक तरफ रख देता है, और जबकि जीवन के बड़े सवालों से जूझना महत्वपूर्ण है, वह उन्हें भी एक तरफ रख देता है (पद.1) तब वह परमेश्वर के सामने अपने हृदय को शांत करता है (पद.2) भविष्य को उसके हाथों में सौंपता है (पद.3) l परिणाम खुबसूरत है : वह कहता है, “जैसा दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी माँ की गोद में रहता है, वैसे ही . . . मेरा मन भी रहता है” (पद.2)
हमारी तरह एक टूटी-फूटी दुनिया में, संतोष कई बार हाथ न आने वाला लगेगा l फिलिप्पियों 4:11-13 में प्रेरित पौलुस ने कहा कि संतोष सीखने की चीज़ है l लेकिन अगर हम मानते हैं कि हम केवल “जीवित रहने और पुनरुत्पादन” के लिए रचे गए हैं, तो संतोष निश्चित रूप से एक न पकड़ने वाली तितली ही होगी l दाऊद हमें एक और तरीका दिखाता है: ईश्वर की उपस्थिति में चुपचाप आराम करने के द्वारा संतोष प्राप्त करना l
