श्रेणी  |  odb

अच्छा चारवाहा

जब पास्टर वॉरेन ने सुना कि उनके चर्च में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और परिवार को छोड़ दिया है, तो उन्होंने परमेश्वर से प्रार्थना की कि वह उस व्यक्ति से कही पर अचानक से मिलने में उसकी मदद करें ताकि उन्हें उस व्यक्ति से बात-चीत करने का मौका मिल जाए। और परमेश्वर ने ऐसा ही किया! जब वारेन एक रेस्टोरेंट में गए तो उन्होंने उस सज्जन को पास ही में एक टेबल/मेज़ पर बैठे देखा। "क्या इस मेज़ पर दूसरे भूखे व्यक्ति के लिए कुछ जगह है?" उन्होंने पूछा, और जल्द ही,कुछ ही पलों में वे गहराई से अपनी भावनाए साझा कर रहे थे और एक साथ प्रार्थना कर रहे थे।

एक पास्टर के रूप में, वॉरेन अपने चर्च समुदाय के लोगों के लिए एक चरवाहे के रूप में कार्य कर रहे थे, यहाँ तक कि परमेश्वर ने भविष्यवक्ता यहेजकेल के माध्यम से कहा कि वह अपने झुंड की देखभाल करेगा। परमेश्वर ने अपनी बिखरी हुई भेड़ों की देखभाल करने, उन्हें बचाने और उन्हें एक साथ इकट्ठा करने की प्रतिज्ञा की (यहेजकेल 34:12-13) वह “उन्हें अच्छे चरागाह में चराएगा” और “खोई हुई को ढूँढ़ेगा और भटकी हुई को लौटा लाएगा”; वह "घायलों पर पट्टी बांधेगा, और निर्बलों को बलवन्त करेगा" (पद. 14-16) इनमें से प्रत्येक चित्र के माध्यम से अपने लोगों के लिए परमेश्वर का प्रेम प्रतिध्वनित होता है। यद्यपि यहेजकेल के शब्द परमेश्वर के भविष्य के कार्यों का अनुमान लगाते हैं, वे परमेश्वर और चरवाहे के अनंत हृदय को दर्शाते हैं जो एक दिन स्वयं को यीशु में प्रकट करेंगे।

चाहे हमारी स्थिति कुछ भी हो, परमेश्वर हम में से प्रत्येक के पास पहुँचता है, हमें बचाने की कोशिश करता है और हमें एक समृद्ध चरागाह में शरण देता है। वह चाहता है कि हम अच्छे चरवाहे का अनुसरण करें, वह जो अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण देता हैI (देखें यूहन्ना 10:14-15)

सबसे अकेला आदमी

20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन अपने चंद्र लैंडिंग मॉड्यूल(लूनर लैंडिंग मॉड्यूल/Lunar Module Landing ) से बाहर निकले और चंद्रमा की सतह पर चलने वाले पहले इंसान बने। लेकिन हम अक्सर उनकी टीम के तीसरे व्यक्ति माइकल कोलिन्स के बारे में नहीं सोचते हैं, जो अपोलो 11 के लिए कमांड मॉड्यूल उड़ा रहे थे।

चांद की सतह का परीक्षण करने के लिए उनके साथियों के सीढ़ी से नीचे उतरने के बाद, कोलिन्स चंद्रमा से दूर की ओर अकेले इंतजार कर रहे थे। वह नील, बज़ और पृथ्वी पर सभी के संपर्क से बाहर हो गये थे। नासा के मिशन नियंत्रण ने टिप्पणी की, "आदम के बाद से माइक कोलिन्स के रूप में किसी भी मानव ने इस तरह के अकेलापन नहीं जाना।"

ऐसे समय होते हैं जब हम पूरी तरह से अकेला महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, कल्पना कीजिए, याकूब के पुत्र यूसुफ को कैसा लगा होगा जब उसके भाइयों द्वारा उसे बेच दिए जाने के बाद उसे इस्राएल से मिस्र ले जाया गया था (उत्पत्ति 37:23-28) फिर उसे झूठे आरोपों में जेल में डाल कर और भी अलग-थलग कर दिया गया (39:19-20)

युसूफ एक विदेशी भूमि में जेल में बिना किसी परिवार के कहीं भी कैसे जीवित रहा होगा? इसे सुनें: जब तक यूसुफ बन्दीगृह में था,“पर यहोवा युसुफ़ के संग संग रहा" (पद. 20-21) उत्पत्ति 39 में हमें इस सांत्वनादायक सत्य की चार बार याद दिलाई गई है।

क्या आप अकेला या दूसरों से अलग-थलग महसूस करते हैं? परमेश्वर की उपस्थिति की सच्चाई को थामे रहें, जिसका वादा स्वयं यीशु ने किया था: "और देखो मैं जगत के अंत तक सदा तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20) अपने उद्धारकर्ता के रूप में यीशु के साथ, आप कभी अकेले नहीं होते।

मैं केवल कल्पना कर सकती हूं

मैं एक महिला के पीछे चर्च की बेंच पर बैठ गयी जैसे अराधना मंडली ने "आई कैन ओनली इमेजिन"(I can only imagine) की धुन बजाना शुरू कियाI अपने हाथों को ऊपर उठाकर, मैंने परमेश्वर की स्तुति की जैसे महिला की मधुर आवाज मेरी आवाज़ के साथ मेल खाती गयी। मुझे अपने स्वास्थ्य संघर्षों के बारे में बताने के बाद, हमने उसके आगामी कैंसर उपचार के दौरान एक साथ प्रार्थना करने का फैसला किया।

कुछ महीने बाद, लुईस ने मुझे बताया कि उसे मरने का डर है। उसके अस्पताल के बिस्तर पर झुक कर, मैंने अपना सिर उसके बगल में टिका दिया, एक प्रार्थना फुसफुसाई, और चुपचाप हमारा गीत गाया। मैं केवल कल्पना कर सकती हूं कि लुईस के लिए यह कैसा होगा जब उसने कुछ ही दिनों बाद यीशु के सम्मुख आराधना की होगी।

प्रेरित पौलुस ने अपने उन पाठकों के लिए सांत्वनादायक आश्वासन दिया जो मृत्यु का सामना कर रहे थे (2 कुरिन्थियों 5:1) अनंत काल के इस तरफ अनुभव की गई पीड़ा कराहने का कारण हो सकती है, परन्तु हमारी आशा हमारे स्वर्गीय निवास-यीशु के साथ हमारे अनन्त अस्तित्व (पद. 2-4) पर टिकी हुई है। यद्यपि परमेश्वर ने हमें उसके साथ अनन्त जीवन के लिए हुड़कने के लिए रचा है (पद. 5-6 ) उसकी प्रतिज्ञाएँ अब उसके लिए ही जीने के लिए हमारे जीवन जीने के तरीके को प्रभावित करने के लिए हैंI (पद. 7-10) 

जैसा कि हम यीशु को खुश करने के लिए जीते हैं और उसके लौटने या हमें घर बुलाने की प्रतीक्षा करते हैं, हम उसकी निरंतर उपस्थिति की शांति में आनन्दित हो सकते हैं। हम उस क्षण क्या अनुभव करेंगे जब हम अपने पार्थिव शरीरों को छोड़ेंगे और अनंत काल में यीशु के साथ जुड़ेंगे? हम केवल कल्पना कर सकते हैं!

आपका क्या नाम है?

अपने पहले पति की मृत्यु के बाद जीना ने दूसरी शादी कर ली। उनके नए पति के बच्चों ने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया, और अब जब उनका भी निधन हो गया है, तो वे उनसे नफरत करते हैं क्योंकि वह उनके बचपन के निवास स्थान में रह रही है। उनके पति ने उन्हें प्रावधान के लिए एक मामूली राशि छोड़ी; उनके बच्चों का कहना है कि वह उनकी विरासत चुरा रही है। जीना स्वाभाविक रूप से निराश है, और वह कड़वी हो गयी है।

नाओमी का पति परिवार को मोआब ले गया, जहाँ वह और उसके दो पुत्र मर गए। वर्षों बाद, नाओमी सिर्फ़ अपनी बहू रूत के साथ खाली हाथ बेतलेहेम लौट आई। नगर में हलचल मच गई और उन्होंने पूछा, “क्या यह नाओमी है?” (रूत 1:19) उसने कहा कि उन्हें उस नाम का उपयोग नहीं करना चाहिए, जिसका अर्थ है "मेरा सुखद।" उन्हें उसे "मारा" कहना चाहिए, जिसका अर्थ है "कड़वा", क्योंकि "मैं भरी पूरी चली गई थी, परन्तु यहोवा ने मुझे छूछी करके लौटाया हैI" (पद. 20-21)

क्या आपका नाम “कड़वा” होने की कोई संभावना है? आप अपने मित्रों, परिवार या गिरते स्वास्थ्य से निराश हुए हैं। आप कुछ बेहतर पाने के पात्र थे। परन्तु आपको वह नहीं मिला। अब आप कड़वे हो गए हो।

नाओमी बेतलेहेम में कड़वी होकर लौटी, परन्तु वह लौट आई। आप भी घर आ सकते हैं। बेतलहम में पैदा हुए रूत के वंशज यीशु के पास आओ। उसके प्रेम में विश्राम करो।

समय के साथ, परमेश्वर ने नाओमी की कड़वाहट को उसकी सिद्ध योजना की आनन्दपूर्ण पूर्ति से बदल दिया (4:13-22) वह आपकी कड़वाहट को भी बदल सकता है। उसके पास घर आओ।

हम परदेशी हैं

उनके नए देश में सब कुछ अत्यधिक अलग महसूस हुआ — नई भाषा, स्कूल, रीति-रिवाज, यातायात और मौसम। वे सोचते थे कि वे  कैसे कभी भी  इस नए वातावरण में समायोजित हों पाएंगे। एक नए देश में उनके नए जीवन में उनकी मदद करने के लिए पास के एक चर्च के लोग उनके पास इकट्ठे हुए। पल्लवी उस जोड़े को एक स्थानीय खाद्य बाजार में खरीदारी करने के लिए ले गयी ताकि उन्हें दिखा सके कि वहाँ क्या-क्या उपलब्ध है और कैसे चीजें खरीदनी हैं। जब वे बाजार में घूम रहे थे, तब अपनी मातृभूमि के अपने पसंदीदा फल-अनार को देखकर उनकी आँखे बड़ी हो गयी और होठों पर बड़ी सी मुस्कान फैल गयी। उन्होंने अपने प्रत्येक बच्चे के लिए एक-एक अनार खरीदा और कृतज्ञता में एक पल्लवी के हाथों में भी दिया। एक छोटा सा फल और नए मित्र उनके लिए अजनबी, नए देश में बड़ा आश्वासन लेकर आया।

परमेश्वर ने, मूसा के माध्यम से, अपने लोगों के लिए नियमों की एक सूची दी, जिसमें उनके बीच रह रहे परदेशियों को "अपने मूल निवासी" के रूप में मानने की आज्ञा शामिल थीI (लैव्यव्यवस्था 19:34) "उससे अपने समान ही प्रेम रखना" परमेश्वर ने आगे उन्हें आज्ञा दी। यीशु ने इसे परमेश्वर से प्रेम करने के बाद दूसरी सबसे बड़ी आज्ञा कहाI (मत्ती 22:39) क्योंकि परमेश्वर(यहोवा) भी "परदेशियों की रक्षा करता हैI" (भजन संहिता 146:9)

परमेश्वर की आज्ञा मानने के अलावा जब हम नए मित्रों को हमारे देश में जीवन के अनुकूल होने में मदद करते हैं, तो हमें स्मरण होता है कि हम भी एक वास्तविक अर्थ में "पृथ्वी पर परदेशी" हैं (इब्रानियों 11:13) और हम आने वाली नयी स्वर्गीय भूमि की प्रत्याशा में बढ़ते है।