परमेश्वर पर केन्द्रित दृष्
उन्नीसवीं सदी के स्कॉटिश पास्टर थॉमस चामर् ने एक बार पहाड़ी क्षेत्र में घोड़ा गाड़ी में सवारी करने की कहानी सुनाई थी, जो एक डरावनी खड़ी चट्टान के साथ एक संकीर्ण पहाड़ी के कगार से जुड़ी हुई थी। दोनों घोड़ों में से एक घोड़ा चौंक गया था, गाड़ी हांकने वाले को यह डर था कि कहीं वे (घोड़े) घबरा कर गिरकर मर न जाएँ, वह बार-बार अपना चाबुक चलाता रहा। ख़तरे को पार कर लेने के बाद चामर् ने गाड़ी हांकने वाले से पूछा कि उसने इतने ज़ोर से चाबुक का इस्तेमाल क्यों किया। उसने कहा, "मुझे घोड़ों को सोचने के लिए कुछ और देने की ज़रूरत थी।" "मुझे उनका ध्यान अपनी ओर खींचने की ज़रूरत थी।"
हमारे चारों ओर आशंकाओं और खतरों से भरी दुनिया में, हम सभी को अपना ध्यान केन्द्रित करने के लिए किसी और चीज़ की आवश्यकता है। हालाँकि, हमें केवल मानसिक विकर्षण से कहीं अधिक की आवश्यकता है -- एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक तरकीब। हमें जिस चीज़ की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह यह है कि अपने दिमाग को अपने सभी प्रकार के भय से अधिक शक्तिशाली वास्तविकता पर केंद्रित करना। जैसा कि यशायाह ने यहूदिया में परमेश्वर के लोगों से कहा, हमें वास्तव में अपने मन को परमेश्वर पर केंद्रित करने की आवश्यकता है। यशायाह वादा करता है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है (यशायाह 26:3)। और हम प्रभु पर सदैव भरोसा रख सकते हैं, क्योंकि "प्रभु परमेश्वर सनातन चट्टान है" (पद-4)।
शांति—यह उन सभी के लिए उपहार है जो अपनी दृष्टी परमेश्वर पर केंद्रित करते हैं। और उनकी शांति हमारे बुरे विचारों को दूर रखने की एक तकनीक से कहीं अधिक प्रदान करती है। जो लोग अपने भविष्य, अपनी आशाओं और अपनी चिंताओं को त्याग देंगे, उनके लिए पवित्र आत्मा जीवन जीने का एक बिल्कुल नया तरीका संभव बनाता है। विन्न कोलियर
यीशु में दृढ़ रहना
जब मैं वर्षों पहले सेमिनरी में पढ़ रहा था, तो हमारे यहां साप्ताहिक चैपल आराधना सभा होती थी। एक सभा में, जब हम छात्र " कितना महान, कितना महान" गा रहे थे, तो मैंने अपने तीन प्रिय प्रोफेसरों को उत्साह के साथ गाते हुए देखा। उनके चेहरों पर खुशी झलक रही थी, जो परमेश्वर में उनके विश्वास से ही संभव हुआ। वर्षों बाद, जब हर एक जानलेवा बीमारी से गुज़रा, यह विश्वास ही था जिसने उन्हें सहन करने और दूसरों को प्रोत्साहित करने में सक्षम बनाया।
आज, मेरे शिक्षकों के गायन की याद मुझे मेरी आजमाइशों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। मेरे लिए, वे उन लोगों की कई प्रेरक कहानियों में से कुछ हैं जो विश्वास के आधार पर जीते थे। वे इस बात की याद दिलाते हैं कि हम इब्रानियों 12:2-3 में लेखक के आह्वान का पालन कैसे कर सकते हैं ताकि हम अपनी आँखें यीशु पर केंद्रित कर सकें जो "जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था . . . क्रूस का दुख सहा"(पद.2)।
जब आजमाइशें—अत्याचार या जीवन की चुनौतियों से—चलते रहना कठिन हो जाता है, तो हमारे पास उन लोगों का उदाहरण है जिन्होंने परमेश्वर के वचनों पर और उसके वादों पर विश्वास किया । हम "वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है धीरज से [दौड़ सकते हैं]" (पद.1), यह याद करते हुए कि यीशु—और जो हमसे पहले चले गए हैं—सहन करने में सक्षम थे। लेखक हमसे "उस पर ध्यान करने" का आग्रह करता है . . . ताकि [हम]निराश होकर हियाव न छोड़ दें"(पद.3)।
मेरे शिक्षक, जो अब स्वर्ग में खुश हैं, संभवतः कहेंगे : "विश्वास का जीवन इसके लायक है। चलते रहिये।" करेन ह्वांग
परमेश्वर का कार्यकर्ता
मध्य पूर्व के एक शरणार्थी शिविर में, जब रेज़ा को बाइबल मिली, तो उसे यीशु के बारे में पता चला और वह उस पर विश्वास करने लगा। मसीह के नाम में उसकी पहली प्रार्थना थी, "मुझे अपने कार्यकर्ता के रूप में उपयोग करें।" बाद में, शिविर छोड़ने के पश्चात्, परमेश्वर ने उस प्रार्थना का जवाब दिया जब उसे अचानक से एक राहत एजेंसी में नौकरी मिल गई, और वह उन लोगों की सेवा करने के लिए शिविर में लौट आया जिन्हें वह जानता था और प्यार करता था। उसने खेल-कूद क्लब, भाषा कक्षाएं और कानूनी परामर्श की स्थापना की—"कुछ भी जो लोगों को आशा दे सकता है।" वह इन कार्यक्रमों को दूसरों की सेवा करने और परमेश्वर के ज्ञान और प्रेम को साझा करने के एक तरीके के रूप में देखता है।
अपनी बाइबल पढ़ते समय, रेज़ा को उत्पत्ति से यूसुफ की कहानी के साथ तत्काल संबंध महसूस हुआ। उसने देखा कि जब वह जेल में था तब परमेश्वर ने अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए यूसुफ का उपयोग कैसे किया। चूँकि परमेश्वर यूसुफ के साथ था, उसने उस पर दया की और उस पर अनुग्रह किया। जेल प्रबंधक ने यूसुफ को प्रभारी बना दिया और उसे वहां के मामलों पर ध्यान नहीं देना पड़ा क्योंकि परमेश्वर ने यूसुफ को "जो कुछ वह करता था . . . उस में सफलता देता था।" (उत्पत्ति 39:23)।
परमेश्वर भी हमारे साथ रहने का वादा करता है l चाहे हम कारावास का सामना कर रहे हों— शाब्दिक या आलंकारिक—कठिनाई, विस्थापन, मनोव्यथा, या दुःख, हम भरोसा कर सकते हैं कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा। जिस तरह उसने रेज़ा को शिविर में लोगों की सेवा करने और यूसुफ को जेल में उत्तरदायित्व निभाने में सक्षम बनाया l वह हमेशा हमारे पास रहेगा। एमी बूशर पाई
एक साधारण अनुरोध
"सोने जाने से पहले कृपया सामने का कमरा साफ कर देना", मैंने अपनी एक बेटी से कहा। तुरंत उत्तर आया, "वह क्यों नहीं करती है?"
जब हमारी बेटियाँ छोटी थीं तब हमारे घर में ऐसा हल्का विरोध अक्सर होता था। मेरी प्रतिक्रिया हमेशा एक ही थी : "अपनी बहनों के बारे में चिंता मत करो; मैंने तुम से कहा है।"
यूहन्ना 21 में, हम शिष्यों के बीच इस मानवीय प्रवृत्ति को चित्रित होते हुए देखते हैं। पतरस द्वारा तीन बार उसका इन्कार किये जाने के बाद यीशु ने पतरस को बहाल कर दिया था (यूहन्ना 18:15-18, 25-27 देखें)। अब यीशु ने पतरस से कहा, मेरे पीछे हो ले! (21:19)—एक सरल लेकिन कठिन आदेश । यीशु ने समझाया कि पतरस मृत्यु तक उसका अनुसरण करेगा (पद.18-19)।
पतरस के पास यीशु के शब्दों को समझने का समय ही नहीं था, इससे पहले उसने उसके पीछे आते शिष्य के बारे में पूछा : "हे प्रभु, इस का क्या?" (पद.21) l यीशु ने उत्तर दिया, "यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या?" फिर उसने कहा, "तू मेरे पीछे हो ले।" (पद.22)।
कितनी बार हम पतरस की तरह होते हैं! हम दूसरों की विश्वास यात्राओं के बारे में सोचते हैं न कि परमेश्वर हमारे साथ क्या कर रहा है उसके बारे में । अपने जीवन के अंत में, जब यूहन्ना 21 में यीशु की मृत्यु की भविष्यवाणी बहुत करीब थी, पतरस ने मसीह के सरल आदेश को विस्तार से बताया : "आज्ञाकारी बालकों के समान अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो । पर जैसा तुम्हारा बुलानेवाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो।"(1 पतरस 1:14-15)। यह हममें से प्रत्येक को यीशु पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए पर्याप्त है, न कि हमारे आस-पास के लोगों पर। मैट लूकस
प्रार्थना के लिए एक आह्वान
अब्राहम लिंकन ने अपने एक मित्र को गुप्त रूप से कहा, "मैं कई बार इस दबाने वाला दृढ़ निश्चय के कारण घुटनों पर बैठा हूँ क्योंकि मेरे पास जाने के लिए और कोई जगह नहीं थी ।" अमेरिकी गृहयुद्ध के भयावह वर्षों में, राष्ट्रपति लिंकन ने न केवल उत्साही प्रार्थना में समय बिताया, बल्कि पूरे देश को अपने साथ शामिल होने के लिए भी बुलाया। 1861 में, उन्होंने "अपमान, प्रार्थना और उपवास" का दिन" घोषित किया। और उन्होंने 1863 में फिर से ऐसा करते हुए कहा, "यह राष्ट्रों के साथ-साथ मनुष्यों का भी कर्तव्य है कि वे परमेश्वर की सर्वशक्तिमान शक्ति पर अपनी निर्भरता रखें: विनम्र दुःख के साथ अपने पापों और अपराधों को स्वीकार करें, फिर भी आश्वस्त आशा के साथ कि सच्चा पश्चाताप दया और क्षमा की ओर ले जाएगा।"
इस्राएलियों के सत्तर वर्ष तक बेबीलोन में बंदी रहने के बाद, राजा अर्तक्षत्र ने इस्राएलियों को यरूशलेम लौटने की अनुमति दी, बचे हुये कुछ लोग वापस लौटे। और जब नहेम्याह, जो एक इस्राएली (नहेम्याह 1:6) और बेबीलोन के राजा का पिलानेवाला था(पद.11) को पता चला कि जो लोग लौट आए थे वे "बड़े दुर्दशा में पड़े है, और उनकी निंदा होती है" (पद.3), तो वह "बैठ कर रोने लगा" और कितने दिन तक विलाप करता, और . . . प्रार्थना करता रहा (पद.4)। उसने अपने राष्ट्र के लिए दिन रात प्रार्थना की (पद. 5-11)। और बाद में, उसने भी अपने लोगों को उपवास और प्रार्थना करने के लिए बुलाया (9:1-37)।
सदियों बाद, रोमन साम्राज्य के दिनों में, प्रेरित पौलुस ने इसी तरह अपने पाठकों से अधिकार प्राप्त लोगों के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया (1 तीमुथियुस 2:1-2)। हमारा परमेश्वर अभी भी उन मामलों के बारे में हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है जो दूसरों के जीवन को प्रभावित करते हैं। एलिसन कीडा
गिनने से परे प्यार
"मैं तुम्हें किस तरह से प्यार करती हूँ? मुझे तरीकों को गिनने दें।" ये शब्द एलिजाबेथ बैरेट ब्राउनिंग के सोनेट्स फ्रॉम द पोर्च्युगीज की अंग्रेजी भाषा की सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से हैं। उन्होंने इन्हें शादी से पहले रॉबर्ट ब्राउनिंग को लिखा था, और वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी कविताओं का पूरा संग्रह प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया। लेकिन चूँकि गीतों की भाषा बहुत कोमल थी, व्यक्तिगत गोपनीयता की इच्छा से बैरेट ने उन्हें इस तरह प्रकाशित किया जैसे कि वे किसी पुर्तगाली लेखक के अनुवाद हों।
कभी-कभी जब हम खुलेआम दूसरों के प्रति स्नेह व्यक्त करते हैं तो हमें अजीब महसूस हो सकता है। लेकिन इसके विपरीत, बाइबल परमेश्वर के प्रेम की अपनी प्रस्तुति से पीछे नहीं हटती। यिर्मयाह ने अपने लोगों के प्रति परमेश्वर के स्नेह को इन कोमल शब्दों में वर्णित किया : "मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करूणा बनाए रखी है"(यिर्मयाह 31:3)। भले ही उसके लोग उससे दूर हो गए थे, फिर भी परमेश्वर ने उन्हें बहाल करने और व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपने पास लाने का वादा किया। "मैं इस्राएल को विश्राम देने के लिये तैयार हुआ," उसने उनसे कहा (पद.2)।
यीशु परमेश्वर के सबल बनानेवाला प्रेम की चरम अभिव्यक्ति हैं, जो उसके पास आने वाले किसी भी व्यक्ति को शांति और आराम देता है। चरनी से लेकर क्रूस से लेकर खाली कब्र तक, वह एक भटकी हुई दुनिया को अपने पास बुलाने की परमेश्वर की इच्छा का प्रतीक है। बाइबल को शुरू से अंत तक पढ़ें और आप बार-बार परमेश्वर के प्रेम के "तरीके गिनेंगे"; लेकिन वे शाश्वत हैं, आप कभी भी उनके अंत तक नहीं पहुंचेंगे। जेम्स बैंक्स
इच्छुक उद्धारकर्ता
देर रात गाड़ी चलाते समय निकोलस ने देखा कि एक घर में आग लगी हुई है। उसने रास्ते में गाड़ी पार्क की, जलते हुए घर में घुस गया और चार बच्चों को सुरक्षित बाहर ले आया। जब बच्चों की किशोरी दाई को एहसास हुआ कि भाई-बहनों में से एक अभी भी अंदर है, तो उसने निकोलस को बताया। बिना किसी हिचकिचाहट के, वह आग में फिर से गया। छह साल की बच्ची के साथ दूसरी मंजिल पर फंसे निकोलस ने खिड़की तोड़ दी। जैसे ही आपातकालीन टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, वह बच्चे को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान पर कूद गया। खुद से ज्यादा दूसरों की चिंता करते हुए उसने सभी बच्चों को बचा लिया।
दूसरों की खातिर अपनी सुरक्षा का त्याग करने की इच्छा से निकोलस ने वीरता का प्रदर्शन किया। प्रेम का यह शक्तिशाली कार्य एक अन्य इच्छुक बचानेवाले—यीशु—द्वारा दिखाए गए त्यागपूर्ण प्रेम को दर्शाता है, जिसने हमें पाप और मृत्यु से बचाने के लिए अपना जीवन दे दिया। "क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।" (रोमियों 5:6)। प्रेरित पौलुस ने इस बात पर जोर दिया कि यीशु—जो देह में पूर्ण रूप से परमेश्वर और पूर्ण रूप से मनुष्य है—ने अपना जीवन देकर हमारे पापों की कीमत चुकाने का चुनाव किया, एक ऐसी कीमत जिसे हम कभी भी अपने आप से नहीं चुका सकते थे। "परमेश्वर हम पर अपने प्रेम कि भलाई इस रीति से प्रगट करता है कि जब हम पापी हि थे तभी मसीह हमारे लिए मारा" (पद.8)।
जब हम अपने इच्छुक उद्धारकर्ता, यीशु को धन्यवाद देते हैं और उस पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें अपने शब्दों और कार्यों से दूसरों से त्यागपूर्ण प्रेम करने के लिए सशक्त बना सकता है। सोचिल डिक्सन
परमेश्वर के पुनरुद्धार के लिए तैयार
मेरे पास एक मित्र की ओर से आयीं तस्वीरें आश्चर्यजनक थीं! उनकी पत्नी के लिए एक आश्चर्यजनक उपहार फिर से नई की गई लक्जरी कार : बाहर का शानदार गहरा नीला रंग, चमकदार क्रोम रिम्स, अन्दर की सीट/गद्दियाँ काले रंग की बनाई हुई, और एक मोटर जो अन्य ऊंची कोटि के सुधारों से मेल खा रही थी l उसी वाहन की "पहले" की तस्वीरें भी थीं—एक फीका, घिसा-पिटा, प्रभावहीन पीला रूप । हालाँकि इसकी कल्पना करना कठिन हो सकता है, यह संभव है कि जब वाहन असेंबली लाइन से निकली थी तो यह ध्यान आकर्षित करने वाली रही हो। लेकिन समय, टूट-फूट और अन्य कारकों ने इसे ज्यों का त्यों बनाये जाने के लिये तैयार कर दिया था।
पुनरुद्धार के लिए तैयार! भजन संहिता संहिता 80 में परमेश्वर के लोगों की स्थिति ऐसी ही थी और इस प्रकार बार-बार प्रार्थना की गई : "हे परमेश्वर, हम को ज्यों के त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा!" (पद.3; पद.7,19 देखें)। हालाँकि उनके इतिहास में मिस्र से बचाव और भरपूरी के देश में रोपा जाना शामिल था(पद.8-11), अच्छे समय आए और गए। विद्रोह के कारण, वे परमेश्वर के न्याय का अनुभव कर रहे थे(पद.12-13)। इस प्रकार, उनकी प्रार्थना थी : "हे सेनाओं के परमेश्वर, फिर आ! स्वर्ग से ध्यान देकर देख, और इस दाखलता की सुधि ले"(पद14)l
क्या आपको कभी परमेश्वर से संवेदनाशून्य, दूर या अलग हुआ महसूस होता है? क्या आनंदपूर्ण आत्म-संतुष्टि नहीं है? क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि यीशु और उसके उद्देश्यों के साथ तालमेल नहीं है? परमेश्वर बहाल करने के लिए हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है(पद.1)। परमेश्वर से मांगने से आपको क्या रोक रही है? आर्थर जैक्सन
लोबान का अर्थ
आज एपिफेनी (अवतरण-दिवस—गैर-मसीहियों के लिए मसीह का प्रकटन)है, वह दिन जो गीत "हम तीन राजा पूरब की शान" में वर्णित घटना की याद दिलाता है, जब गैर-यहूदी बुद्धिमान लोग बालक यीशु से मुलाकात किये थे l फिर भी वे राजा नहीं थे, वे सुदूर पूर्व से नहीं थे (जैसा कि पूरब) का पहले मतलब था), और इसकी संभावना भी नहीं है कि वे तीन थे।
हालाँकि, उपहार तीन थे, और गीत प्रत्येक को मानता है। जब मजूसी बैतलहम पहुंचे, "[उन्होंने] अपना-अपना थैला खोलकर [यीशु को] सोना, लोबान और गन्धरस की भेंट चढ़ाई" (मत्ती 2:11)। उपहार यीशु के मिशन(कार्य) का प्रतीक हैं। सोना राजा के रूप में उसकी भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है। पवित्र-स्थान में जलाए गए धूप के साथ मिश्रित लोबान, उनके परमेश्वरत्व को दर्शाता है l गन्धरस, जिसका उपयोग शवों पर लेप लगाने के लिए किया जाता है, हमें ठहराव देता है।
गीत का चौथा पद कहता है, "मुर्र मैं लाया, मौत का निशान/ होगा वह, ग़मगीन परेशान/दुःख उठाके, खून बहा के, होगा वह कुर्बान।" हम कहानी में ऐसा कोई दृश्य नहीं लिखे होते, लेकिन परमेश्वर ने ऐसा किया। यीशु की मृत्यु हमारे उद्धार का केंद्र है। हेरोदेस ने यीशु को तब मारने का भी प्रयास किया जब वह बच्चा था (पद.13)।
गीत का अंतिम पद तीन विषयों को एक साथ जोड़ता है: "शाह खुदा क़ुरबानी वह भी/ शौकत, कुदरत, उल्फत उसकी l" यह क्रिसमस की कहानी को पूरा करता है, हमारी प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है : "कुल जहां में, और आसमान में ज़ाहिर हो जायेगीl" टिम गस्टफसन