आंतरिक चंगाई की खोज
अमेरिकी राज्य मिशिगन का एक हमेशा व्यस्त व्यक्ति, कार्सन शिकार करता था, मछली पकड़ता था, गंदी बाइक चलाता था और स्केटबोर्ड करता था। उन्हें बाहर की हर चीज से प्यार था। लेकिन उसकी एक मोटरसाइकिल दुर्घटना हुई और सीने से नीचे लकवाग्रस्त हो गया। जल्द ही निराशा में डूब गया, और उसने भविष्य के बारे में ज्यादा कुछ नहीं देखा। फिर एक दिन उसके कुछ साथियों ने उसे फिर से शिकार पर जाने को कह दिया। कुछ समय के लिए वह अपनी चोट के बारे में भूल गया क्योंकि उसने अपने चारों ओर की सुंदरता का आनंद लिया। इस अनुभव ने उन्हें आंतरिक चंगाई किया और उनके जीवन के लिए एक नया उद्देश्य प्रेरित किया - एक गैर-लाभकारी संगठन हंट 2 हील के माध्यम से उनके जैसे अन्य लोगों के लिए समान अनुभव प्रदान करने के लिए। वह कहते हैं कि उनकी दुर्घटना "भेष में एक आशीर्वाद" थी। . . . अब मैं वापस देने में सक्षम हूं, जो मैं हमेशा से करना चाहता हूं। मैं खुश हूं।" वह चलने-फिरने में अक्षम लोगों और उनकी देखभाल करने वालों को चंगाई खोजने के लिए जगह उपलब्ध कराने को लेकर उत्साहित हैं।
भविष्यद्वक्ता यशायाह ने उसके आने की भविष्यवाणी की थी जो टूटे हुएपन को चंगा करेगा (यशायाह 61)। वह "टूटे मन पर मरहम पट्टी बाँधेगा" और "सब विलाप करने वालों को शान्ति देगा" (पद. 1-2)। यीशु ने अपने गृहनगर आराधनालय में इस शास्त्र को पढ़ने के बाद कहा, "आज यह शास्त्र तुम्हारे सामने पूरा हुआ" (लूका 4:21)। यीशु हमें बचाने और हमें चंगा करने के लिए आया था।
क्या आपको आंतरिक चंगाई की आवश्यकता है? यीशु की ओर मुड़ें और वह आपको "निराशा की आत्मा के स्थान पर स्तुति का वस्त्र पहिनाएगा" (यशायाह 61:3).
सेवा करने की चुनौती
हालाँकि वह केवल तेरह साल का था, लेकिन डेविऑन ने दूसरों की सेवा करने की चुनौती स्वीकार की। उसने और उसकी माँ ने एक ऐसे व्यक्ति के बारे में एक कहानी सुनी थी जिसने बच्चों को गर्मी की छुट्टी के दौरान पचास लॉन मुफ्त में काटने के लिए कहा था। उनका केंद्र बुजुर्गों, एकल माताओं, विकलांग लोगों या ऐसे किसी भी व्यक्ति की सहायता करना था, जिन्हें तुरंत मदद की आवश्यकता हो । संस्थापक (जिन्होंने पचास राज्यों में पचास लॉन काटे थे) ने कार्य नैतिकता के महत्व को सिखाने और समुदाय को कुछ लौटाने की चुनौती रची थी। गर्मी और अन्य गतिविधियों की उपलब्धता के बावजूद एक बालक गर्मियों में कुछ पाने की कोशिश कर सकता है, डेविऑन ने दूसरों की सेवा करना चुना और चुनौती पूरी की।
सेवा करने की चुनौती यीशु में विश्वासियों के लिए भी है। सभी लोगों के लिए मरने से पहले की शाम को, यीशु ने अपने मित्रों के साथ रात का भोजन खाया (यूहन्ना 13:1-2)। वह खुद पर आने वाली पीड़ा और मृत्यु के बारे में अच्छे से जानता था, फिर भी वह भोजन से उठा, उसने एक अंगोछा लपेटा, और अपने चेलों के पैर धोने लगा (पद. 3-5)। "अब जब कि मैं, तुम्हारे प्रभु और शिक्षक, ने तुम्हारे पांव धोए हैं, तो तुम भी एक दूसरे के पांव धोओ," उसने कहा (पद 14)।
यीशु, एक विनम्र सेवक और हमारा उदाहरण, लोगों की परवाह करता था: उसने अंधों और बीमारों को चंगा किया, अपने राज्य का सुसमाचार सुनाया, और अपने मित्रों के लिए अपना जीवन दे दी। क्योंकि मसीह आपसे प्रेम करता है, उससे पूछें कि वह इस सप्ताह किसकी सेवा चाहता है कि आप करे।
नीचे झुकना
एक युवा माँ अपनी बेटी का पीछा करती है, जो अपनी छोटी साइकिल को अपने छोटे पैरों से जितना तेज़ उससे हो सके चलाती है। लेकिन जितनी गति वह चाहती थी उससे अधिक चला रही थी, वह छोट्टी बच्ची अचानक साइकिल से लुढ़क गई और रोने लगी कि उसके टखने में चोट लग गई। उसकी माँ शांति से अपने घुटनों पर बैठी, नीचे झुकी, और “दर्द को दूर करने” के लिए उसे चूमा। छोटी लड़की कूदी, अपनी साइकिल पर फिर चढ़ी, और उसे चलाया। क्या आप नहीं चाहते कि हमारे सारे दर्द इतनी आसानी से दूर हो जाएं!
प्रेरित पौलुस ने अपने लगातार संघर्ष में परमेश्वर की सांत्वना को अनुभव किया और चलता भी रहा। उसने उन परीक्षणों में से कुछ को 2 कुरिन्थियों 11:23-29 में सूचीबद्ध किया: “कोड़े, बेंतें, पथराव, बार बार जागते रहने में; भूख–प्यास में; सब कलीसियाओं की चिन्ता”। उसने गहराई से सीखा कि परमेश्वर “जो दया का पिता और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है। ” (1:3) या जैसा कोई अन्य संस्करण इसका अनुवाद करता है : “वह कोमल प्रेम देने वाला पिता है”(NIRV)। ठीक वैसे ही जैसे कोई माँ अपने बच्चे को सांत्वना देती है, परमेश्वर हमारे दर्द में कोमलता से हमारी देखभाल करने के लिए नीचे झुकते हैं।
हमें सांत्वना देने का परमेश्वर का प्रेममय तरीका अनेक और विविध हैं। वह हमें पवित्रशास्त्र का एक पद दे सकते हैं जो हमें आगे बढ़ने को प्रोत्साहित कर सकता, या हो सकता है कोई एक विशेष नोट भेजे या एक मित्र को बात करने को प्रेरित करें जो हमारे आत्मा को छू सकता है। जबकि संघर्ष दूर नहीं जा सकता, हम उठ सकते और आगे पेडल कर सकते है, क्योंकि परमेश्वर हमें मदद करने के लिए नीचे झुकते हैं।
कर्म द्वारा विश्वास प्रकट करना
2021 में जून की एक शाम को एक चक्रवात ने एक समुदाय में से होकर गुज़रते हुए, एक परिवार के खलिहान को नष्ट कर दिया l यह एक दुखद हानि थी क्योंकि 1800 के दशक के उत्तरार्ध से खलिहान पारिवारिक संपत्ति थी l जब जॉन और उसकी पत्नी गाड़ी से उसी रास्ते चर्च जा रहे थे, तो उन्होंने वहाँ हुए नुक्सान को देखा और सोचा कि वे कैसे सहायता कर सकते हैं l इसलिए वे ठहर गए और जब उन्हें पता चला कि परिवार को सफाई में मदद की जरुरत है l वे अपनी कार को तेजी से घुमाते हुए,कपड़े बदलने के लिए घर चले गए और लौट कर प्रचंड हवाओं द्वारा उत्पन्न गंदगी को साफ़ करने के लिए दिन भर रुके l उन्होंने उस परिवार की सेवा करते हुए अपने विश्वास को अमल में लाया l
याकूब ने कहा कि “विश्वास भी कर्म बिना मरा हुआ है” (याकूब 2:26) l वह अब्राहम का उदाहरण देता है, जिसने आज्ञाकारिता में परमेश्वर का अनुसरण किया जब वह नहीं जानता था कि वह कहाँ जा रहा है (पद..23; देखें उत्पत्ति 12:1-4; 15:6; इब्रानियों 11:8) l याकूब ने राहाब का भी उल्लेख किया, जिसने इस्राएल के परमेश्वर में अपना विश्वास दिखाया जब उसने उन भेदियों को छिपा दिया जो यरीहो शहर की पड़ताल करने आए थे (याकूब 2:25; यहोशु 2;6:17 देखें l
“यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो इससे क्या लाभ?” (याकूब 2:14) l मैथ्यू हेनरी टिप्पणी करता है, “विश्वास जड़ है, तो अच्छे काम फल हैं, और हमें यह देखना चाहिए कि हमारे पास दोनों हो l” परमेश्वर को हमारे अच्छे कर्मों की आवश्यकता नहीं है,लेकिन हमारा विश्वास हमारे कार्यों से सिद्ध होता है l
परमेश्वर से प्रेम और उस पर झुकना
सुनील मजाकिया, स्मार्ट और लोकप्रिय था। लेकिन गुप्त रूप से वह डिप्रेशन से जूझ रहा था। पंद्रह साल की उम्र में उसके आत्महत्या करने के बाद, उसकी माँ प्रतिभा ने उसके बारे में कहा, "यह समझना मुश्किल है कि कोई व्यक्ति जिसके लिए इतना कुछ हो रहा था वह उस मुकाम पर कैसे आगया। सुनील . . आत्महत्या से अछूता नहीं था। "एकांत के कुछ ऐसे क्षण होते थे जब प्रतिभा अपना दुःख परमेश्वर के सामने उँड़ेलती थी। वह कहती है कि आत्महत्या के बाद का गहरा दुख "दुख का एक अलग स्तर" है। फिर भी उसने और उसके परिवार ने सामर्थ के लिए परमेश्वर और दूसरों पर निर्भर रहना सीख लिया था, और अब वें ऐसे लोगों से प्रेम करने में अपना समय उपयोग करते है जो अवसाद से जूझ रहे हैं।
प्रतिभा का सिद्धांत अब "प्रेम और निर्भरता" बन गया था। यह विचार पुराने नियम की रूत की कहानी में भी देखा जाता है। नाओमी ने अपने पति और दो पुत्रों को खो दिया—एक जिसका विवाह रूत से हुआ था (रूत १:३-५)। नाओमी, कटु और उदासी से भरी, रूत से अपनी माँ के परिवार में लौटने का आग्रह किया जहाँ उसकी देखभाल की जा सकती थी। रूत, हालांकि दुख में थी, पर अपनी सास से "चिपकी रही" और उसके साथ रहने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रतिबद्ध थी (वव. १४-१७)। वे नाओमी की मातृभूमि बेतलेहेम लौट आए, जहाँ रूत एक परदेशी थी। परन्तु प्रेम और निर्भरता के लिए उनके पास एक दूसरे का साथ था, और परमेश्वर ने उनके लिए प्रयोजन किया (२:११-१२)।
हमारे दुःख के समय में, परमेश्वर का प्रेम स्थिर रहता है। वह हमेशा हमारे पास है की हम उस पर निर्भर रह सके जैसे हम भी उसकी सामर्थ द्वारा दूसरों पर निर्भर रहते और उनसे प्रेम करते हैं।
जीवित और संपन्न
एक एनिमेटेड अंग्रेजी फिल्म में एक गुफावासी परिवार का मानना है कि जीवित रहने का एकमात्र तरीका है अगर पैक [उनका छोटा परिवार] एक साथ रहता है। वे दुनिया और दूसरों से डरते हैं, इसलिए रहने के लिए एक सुरक्षित जगह की तलाश में वे अपने चुने हुए क्षेत्र में पहले से ही एक अजीब परिवार के मिलने पर डर से भर जाते हैं। लेकिन वे जल्द ही अपने नए पड़ोसियों के मतभेदों को अपनाना सीख जाते हैं, उनसे ताकत हासिल करते हैं और एक साथ जीवित रहते हैं। वे पाते हैं कि वे वास्तव में उनके साथ आनन्दित हैं और उन्हें पूरी तरह से जीवन जीने के लिए दूसरों की आवश्यकता है।
रिश्ते में रहना जोखिम भरा हो सकता है लोग हमें चोट पहुँचा सकते हैं, और पहुंचाते हैं। फिर भी यह अच्छे कारण के लिए है कि परमेश्वर ने अपने लोगों को एक देह (चर्च) में एक साथ रखा है। दूसरों के साथ संगति में, हम समझ में बढ़ते हैं (इफिसियों4:13)। विनम्र, शान्त और धैर्यवान होने में मदद के लिए हम उस पर निर्भर रहना सीखते हैं (पद 2)। हम एक दूसरे को प्रेम में (पद 16) बनाने के द्वारा एक दूसरे की मदद करते हैं। जब हम एक साथ इकट्ठे होते हैं तो हम अपने वरदानों का उपयोग करते हैं और दूसरों से सीखते हैं जो उनका उपयोग करते हैं जो बदले में हमें परमेश्वर के साथ चलने और उसकी सेवा करने में सक्षम बनाता है।
जब वह आपकी अगुवाई करता है तो परमेश्वर के लोगों के बीच अपना स्थान ढूँढ़ें, यदि आपको वह अभी तक नहीं मिला है। आप जीवित रहने से ज्यादा कुछ करेंगे — साझा किये प्रेम में आप परमेश्वर के लिए सम्मान लाएंगे और यीशु के समान बनेंगे। और जब हम यीशु और अन्य लोगों के साथ बढ़ते संबंधों से गुजरते हैं तो हम सब उस पर निर्भर हों।
दूसरों के साथ चलना
बिली, एक प्रेम करने वाला और वफादार कुत्ता, 2020 में एक इंटरनेट स्टार बन गया। उसके मालिक, रसेल, का टखना टूट गया था और चलने के लिए बैसाखी का उपयोग करते थे। जल्द ही कुत्ता भी जब अपने मालिक के साथ चलता तो लंगड़ाने लगता। चिंतित, रसेल बिली को पशु चिकित्सक के पास ले गया, जिसने कहा कि उसके साथ कुछ भी गलत नहीं है! वह ठीक से भागता जब वह अकेला होता। बाद में यह पता चला कि कुत्ता जब अपने मालिक के साथ चलता, तो झूठमूठ लंगड़ाता था। इसे आप कह सकते है कि किसी के दर्द के साथ एक समान होने की कोशिश करना!
रोम की कलीसिया को प्रेरित पौलुस के निर्देशों में दूसरों के साथ चलना सबसे आगे आता है। उसने दस आज्ञाओं में से अंतिम पाँच आज्ञाओं का सार इस प्रकार दिया: "अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखो" (रोमियों 13:9)। हम पद 8 में भी दूसरों के साथ चलने के महत्व को देख सकते हैं: "एक दूसरे से प्रेम रखने के अतिरिक्त कोई ऋण बकाया न रहे।"
लेखक जेनी अल्बर्स सलाह देते हैं: “जब कोई टूटा हुआ होता है, तो उसे जोड़ने की कोशिश मत करो। (आप नहीं कर सकते।) जब कोई दर्द में हो, तो उसका दर्द दूर करने का प्रयास न करें। (आप नहीं कर सकते।) इसके बजाय, उस दर्द में उनके साथ में चलकर उन्हें प्रेम करें। (आप कर सकते हैं।) क्योंकि कभी-कभी लोगों को केवल यह जानने की आवश्यकता होती है कि वे अकेले नहीं हैं।"
क्योंकि यीशु, हमारा उद्धारकर्ता, हमारे सभी दुखों और पीड़ाओं में हमारे साथ चलता है, हम जानते हैं कि दूसरों के साथ चलने का क्या अर्थ है।
एक घर की अभिलाषा
ऐनीऑफ़ ग्रीन गेबल्स कहानियों के मुख्य पात्र ऐनी को एक परिवार की इच्छा थी। वह अनाथ थीं और उसने कभी एक ऐसे जगह पाने की आशा खो दी थी जिसे वह घर कह सके। फिर उसने यह जाना कि मैथ्यू नामक एक बूढा आदमी और उसकी बहन मरिला उसे स्वीकार करने के लिए तैयार थे। एक छोटी गाड़ी में उनके घर जाते हुए ऐनी ने बार–बार बकबक करने के लिए माफ़ी मांगी, पर मैथ्यू, जो एक शांत स्वभाव का था ने कहा, “तुम जितना चाहो उतना बात कर सकती हो। मुझे कोई आपत्ति नहीं है।” यह ऐनी के कानों के लिए संगीत था। उसे लगता था कि कोई भी कभी उसे अपने आसपास नहीं चाहता, तो उसकी बकबक क्यों सुनना चाहेगा। पहुंचने के बाद, उसकी उम्मीदें धराशायी हो गई जब उसे पता चला कि भाई–बहनों ने सोचा था की उन्हें खेत में मदद करने के लिए एक लड़का मिल रहा है। वह लौटाए जाने से डरी, लेकिन ऐनी की एक प्यार भरे घर की लालसा तब पूरी हुई जब उन्होंने उसे अपने परिवार का एक हिस्सा बनाया।
हम सब ने ऐसे समय का सामना किया है जब जब हम अनचाहे और अकेला महसूस करते हैं। लेकिन जब हम यीशु में उद्धार के द्वारा परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बनते हैं तो वह हमारे लिए एक सुरक्षित गढ़ बन जाता है। भजनसंहिता 62:2।वह हममें प्रसन्न होता है और हमे अपने साथ सब कुछ के बारे में बात करने के लिए आमंत्रित करता है — हमारी चिंता, परीक्षाएं, दुःख और आशा। भजनकार हमें कहता है “ परमेश्वर में आराम पाओ और अपने मन की बातें उससे खोल के कहो। (पद5,8)
संकोच न करें। जितना चाहे परमेश्वर से बात करें। वह बुरा नहीं मानेगा। वह आपके हृदयों से प्रसन्न है। उसमें आप एक घर पा सकते है।
अटूट विश्वास
अरुण अपने पिता की मृत्यु के बाद उनका सामान लेने के लिए वृद्धाश्रम में गया। कर्मचारियों ने उसे दो छोटे बक्से सौंपे। उसने कहा कि उस दिन उसे यह महसूस हुआ कि खुश रहने के लिए वास्तव में बहुत सारी संपत्ति नहीं चाहिए होती।
उसके पिता, सतीश, चिन्तामुक्त और हमेशा एक मुस्कान और दूसरों के लिए एक उत्साहजनक शब्द के साथ तैयार रहते थे। उनकी खुशी का कारण एक दूसरी "संपत्ति" थी जो किसी बक्से में नहीं समा सकती थी : उनके उद्धारकर्ता, यीशु में एक अटूट विश्वास।
यीशु हमसे आग्रह करते हैं कि “अपने लिए स्वर्ग में धन इकट्ठा करो" (मत्ती 6:20)। उन्होंने यह नहीं कहा कि हम एक घर या गाड़ी नहीं खरीद सकते हैं या भविष्य के लिए धन नहीं जोड़ सकते या हमारे पास अन्य कई संपत्तियां नहीं हो सकती। परन्तु वह हमसे यह आग्रह करते है कि हम जांचे कि हमारा हृदय कहाँ केंद्रित है। सतीश का ध्यान कहाँ था? दूसरों से प्रेम करने के द्वारा परमेश्वर से प्रेम करने पर। वह उन बड़े कमरों में ऊपर और नीचे घूमते थे जहां वे रहते थे, अपने मिलने वालों का अभिवादन और उनको प्रोत्साहित करते थे । अगर किसी की आंखों में आंसू होते, तो वह एक सुकून देने वाले शब्द या सुनने वाले कान या दिल से की गई प्रार्थना करने के लिए मौजूद रहते थे। उनका मन इस बात पर केंद्रित था कि वह अपना जीवन परमेश्वर का आदर और दूसरों की भलाई करने के लिए जीएँ।
हम शायद खुद से पूछना चाहेंगे कि क्या हम कम चीजों में भी खुश रह सकते हैं जो हमें दौड़-धूप कराती हैं और हमें परमेश्वर और दूसरों से प्रेम करने के अधिक महत्वपूर्ण विषय से विचलित करती हैं। "जहाँ [हमारा] धन है, वहाँ [हमारा] मन भी रहेगा" (पद 21 )। हम जिस चीज को महत्व देते हैं, वह इस बात से झलकती है कि हम कैसे जीवन जीते हैं।