जानने के लिए बढ़ते जाना
“आप दूसरे के स्थान पर रखे जा रहे छात्र होंगे!” मैं सत्रह वर्ष का था और यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ कि मुझे जर्मनी में अध्ययन करने की स्वीकृति मिल गयी थी l परन्तु यह मेरे प्रस्थान से केवल तीन महीने पहले हुआ था, और मैंने जर्मन भाषा कभी नहीं पढ़ी थी l
उसके बाद के दिनों में मैंने खुद को अत्यधिक पढ़ने और सीखने का प्रयास करते हुए पाया – घंटों पढ़ाई करना और शब्दों को याद करने के लिए अपनी हथेली पर भी लिखना l
महीनों बाद मैं जर्मनी में एक कक्षा में था, हतोत्साहित क्योंकि मैं उस भाषा को अधिक नहीं जानता था l उस दिन एक शिक्षक ने मुझे एक बुद्धिमान सलाह दी l “किसी भाषा को सीखना रेत के एक टीले पर चढ़ने की तरह है l कभी-कभी आपको महसूस होगा कि आप आगे कहीं भी नहीं पहुँच रहे हैं l परन्तु आगे बढ़ते रहें और आप सफल हो जाएंगे l”
कभी-कभी मैं उस अंतर्दृष्टि पर चिंतन करता हूँ जब मैं विचार करता हूँ कि यीशु के शिष्य की तरह बढ़ने का अर्थ क्या होता है l प्रेरित पौलुस ने याद किया, “सब दशाओं में मैं ने तृप्त होना . . . सीखा है l” पौलुस को भी, व्यक्तिगत शांति रातोंरात नहीं मिली l पौलुस उसमें बढ़ता गया l पौलुस ने अपनी प्रगति का रहस्य साझा करता है : “जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें में सब कुछ कर सकता हूँ” (फिलिप्पियों 4:13) l
जीवन की अपनी चुनौतियां हैं l परन्तु जब हम उसकी ओर उन्मुख होते हैं जिसने “संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33), हम केवल यह नहीं पाते हैं कि वह हमें पार लगाने में विश्वासयोग्य है परन्तु यह कि उसकी निकटता से बढ़कर कुछ नहीं है l वह हमें अपनी शांति देता है, भरोसा करने में सहायता करता है, और उसके साथ तय दूरी चलने में समर्थ बनाता है l
न बदलने वाला
अभी हाल ही में हम दोनों पति-पत्नी अपने कॉलेज पुनर्मिलन समारोह में उपस्थित होने लिए केलिफोर्निया के सैंटा बारबरा गए – वह शहर जहाँ हम पैतीस वर्ष पूर्व एक दूसरे से मिले थे और प्रेम करने लगे थे l हमनें उन अनेक स्थानों को घूमने की भी योजना बनायी जहाँ हम अपने युवावस्था के कुछ सर्वोत्तम समय बिताए थे l परन्तु जब हम उस स्थान को गए जहाँ हमारा पसंदीदा मेक्सीकन रेस्टोरेंट हुआ करता था, हमें भवन निर्माण सामग्री स्टोर मिला l रेस्टोरेंट और चार दसक तक समाज की उसकी सेवा के यादगार के रूप में ताडय लोह (wrought iron) का एक तख्ता दीवार पर लटका हुआ था l
मैं उजाड़ परन्तु अभी तक परिचित उस संकरे मार्ग को एक टक देखता रहा, जहां एक समय रंगीन मेज़ और चमकीले छाते प्रसन्नता बिखेरते थे l हमारे चारोंओर इतना कुछ बदल गया था! फिर भी इस बदलाव के मध्य, परमेश्वर की विश्वासयोग्यता नहीं बदलती l दाऊद ने मर्मस्पर्शी ढंग से ध्यान दिया : “मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है l परन्तु यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है” (भजन 103:15-17) l दाऊद इस भजन का अंत इन शब्दों से करता है : “हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!” (पद.22) l
प्राचीन दार्शनिक हेराक्लितुस(philosopher Heraclitus) ने कहा, “आप उसी नदी में दो बार कदम नहीं रख सकते हैं l” हमारे चारोंओर जीवन हमेशा बदल रहा है, परन्तु परमेश्वर हमेशा एक सा है और अपनी प्रतिज्ञाएं पूरी करने के लिए हमेशा भरोसेमंद है! पीढ़ी से पीढ़ी तक उसकी विश्वासयोग्यता और प्रेम पर भरोसा किया जा सकता है l
बुद्धिमत्ता द्वारा चकित
“ऐसा महसूस होता है जैसे मैं जितना वृद्ध होता जाता हूँ, तुम उतना ही बुद्धिमान होते जाते हो l कभी-कभी जब मैं अपने बेटे से बात करता हूँ मैं अपने मुँह से आपके शब्द निकलते हुए सुनता हूँ!”
मेरी बेटी की स्पष्टवादिता ने मुझे हँसाया l मैंने अपने माता-पिता के विषय उसी प्रकार महसूस किया और अपने बच्चों के परवरिश में अक्सर खुद को उनके शब्दों का उपयोग करते हुए पाया l जिसे मैंने किसी समय मुर्खता मानकर “ख़ारिज कर दिया था मेरे विचार में वे उससे भी अधिक बुद्धिमान साबित हुए – बस मैं पहले उसे पहचान नहीं पाया था l
बाइबल सिखाती है कि “परमेश्वर की मुर्खता” निपुण मानवीय बुद्धिमत्ता “से ज्ञानवान है” (1 कुरिन्थियों 1:25) l “जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना, तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा कि” अत्यंत दुखी उद्धारकर्ता के “इस प्रचार की मुर्खता के द्वारा विश्वास करनेवालों को उद्धार दे” (पद.21) l
परमेश्वर के पास हमेशा हमें चकित करने के तरीके हैं l संसार द्वारा विजयी राजा की अपेक्षा करने के स्थान पर, परमेश्वर का पुत्र दुखी सेवक के रूप में आकर क्रूस पर विनम्र मृत्यु सही – इससे पहले कि वह सर्वोत्कृष्ट महिमा में जी उठे l
परमेश्वर की बुद्धिमत्ता में, दीनता का महत्त्व घमण्ड से ऊपर है और करुणा और दया में होकर जिसके हम योग्य नहीं थे प्रेम अपना महत्त्व दर्शाता है l क्रूस के द्वारा, हमारा अजेय उद्धारकर्ता सर्वश्रेष्ठ बलिदान बन गया – जिससे उसमें विश्वास करनेवाले सभी का “पूरा पूरा उद्धार” (इब्रानियों 7:25) कर सके!
छिपा हुआ यीशु
हाल ही में मेरा बेटा जेफ़ एक “बेघर मिथ्याभास(homeless simulation)” में भाग लिया l वह अपने शहर के सड़कों पर, खुले आसमान के नीचे जमाव बिंदु से कम तापमान में तीन दिन और दो रात गुज़ारे l वह भोजन, पैसा, या आश्रय के बिना अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए अनजान लोगों की दया पर आश्रित रहा l उनमें से एक दिन उसका भोजन केवल एक सैंडविच था, जो एक व्यक्ति उसे लाकर दिया था जिसने उसे एक फ़ास्ट-फ़ूड रेस्टोरेंट में बासी भोजन मांगते हुए सुना था l
जेफ़ ने बाद में मुझसे कहा कि यह सबसे कठिन काम था जो उसने कभी किया हो, फिर भी इस बात ने दूसरों के प्रति उसके दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया था l उसने अपने मिथ्याभास(simulation) के बाद एक दिन बेघर लोगों को खोजकर सरल तरीकों से उनकी सहायता की जिन्होनें उसके सड़क पर रहते समय उसपर दया दिखाई थी l उनको यह जानकार आश्चर्य हुआ कि वह बेघर नहीं था और उन्होंने उनकी नज़रों से जीवन को देखने के लिए उसको धन्यवाद दिये l
मेरे बेटे का अनुभव यीशु के शब्दों की याद दिलाता है : “मैं नंगा था, और तुमने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, और तुमने मेरी सुधि ली, मैं बंदीगृह में था, और तुम मुझसे मिलने आए . . . तुमने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया” (मत्ती 25:36, 40) l चाहे हम प्रोत्साहन का एक शब्द बोलें या एक थैला किराने का सामान दें, परमेश्वर हमें प्रेम से दूसरों की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए बुलाता है l दूसरों के प्रति हमारी दयालुता उसके प्रति दयालुता है l
फंदे से बाहर
द वीनस फ्लाईट्रैप(एक मांसाहारी पौधा) नार्थ कैरोलिना में हमारे घर से थोड़ी दूर बलुवा जलमयभूमि वाले एक छोटे क्षेत्र में सबसे पहले खोजा गया l इन पौधों को देखना दिलचस्प है क्योंकि वे मांसाहारी हैं l
वीनस फ्लाईट्रैप पौधे खिले फूल की तरह दिखाई देनेवाले रंगीन फंदों में मीठा-सुगंध वाला मकरंद छोड़ते हैं l उसमें कीट का प्रवेश, बाहरी किनारों के संवेदकों को सक्रीय कर देता है, और फंदा एक क्षण से भी कम समय में बंद हो जाता है जिससे शिकार पकड़ लिया जाता है l फंदा आगे और भी बंद होकर एंजाइम छोड़ता है और अपने शिकार को खा लेता है, जिससे पौधे को पोषण मिलता है जो बलुआ मिटटी नहीं देती है l
परमेश्वर का वचन एक और फंदे के विषय बताती है जो अचानक पकड़ लेती है l प्रेरित पौलुस ने अपने उत्तरजीवी तीमुथियुस को चिताया : “जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा और फंदे और बहुत सी व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा दी हैं l क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए बहुतों ने विशवास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है” (1 तीमुथियुस 6:9-10) l
धन और भौतिक वस्तुएं सुख की प्रतिज्ञा करते हैं, परन्तु जब वे हमारे जीवनों में प्रथम स्थान ले लेते हैं, हम खतरनाक भूमि पर होते हैं l हमारे लिए मसीह के द्वारा परमेश्वर की भलाइयों पर केन्द्रित होकर हम धन्यवादी, दीन हृदयों के साथ जीवन जी कर इस फंदे से बच सकते हैं – “पर संतोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है” (पद.6) l
हमें परमेश्वर की तरह इस संसार की अस्थायी वस्तुएं कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकती हैं l सच्ची, स्थायी संतोष केवल उसके साथ हमारे सम्बन्ध में ही पायी जाती है l
परमेश्वर के प्रति ईमानदार
मेरे तीन वर्ष के पोते का दिन खराब ढंग से शुरू हुआ l वह अपना पसंदीदा शर्ट ढूढ़ नहीं पा रहा था l जूते जो वह पहनना चाहता था बहुत ही भड़कीला था l वह अपनी दादी से परेशान और उनपर क्रोधित होने के बाद बैठकर रोने लगा l
“तुम इतना परेशान क्यों हो?” मैंने पूछा l हम थोड़े समय तक बाते करते रहे और उसके शांत होने के बाद, मैंने कोमलता से पूछा, “क्या तुम अपनी दादी के लिए अच्छे रहे हो?” वह विचारपूर्वक अपने जुते की ओर देखकर उत्तर दिया, “नहीं, मैं बुरा था, मुझे क्षमा करें l”
मेरा दिल उसके पक्ष में गया l अपने किये का इनकार करने की बजाए, वह ईमानदार था l आनेवाले क्षणों में हम यीशु से क्षमा और बेहतर करने के लिए सहायता मांगे l
यशायाह 1 में, परमेश्वर उन गलतियों के लिए अपने लोगों का सामना करता है जो उन्होंने की थीं l रिश्वत और अन्याय अदालतों में व्याप्त था, और अनाथों और विधवाओं से भौतिक लाभ उठाया जाता था l फिर भी परमेश्वर करुणा से प्रतियुत्तर देकर, यहूदा के लोगों से अपनी गलती मानकर उससे फिरने को कहता है : “आओ हम आपस में वादविवाद करें : तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएँगे” (यशायाह 1:18) l
परमेश्वर हमसे चाहता है कि हम अपने पापों के विषय उसके सामने खुले हुए हों l वह प्यार से क्षमा के साथ ईमानदारी और पश्चाताप की ज़रूरत पूरा करता है : “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l इसलिए कि हमारा परमेश्वर करुनामय है, नयी शुरुआत हमारा इंतज़ार कर रही है!
धन की खोज
जॉन और मेरी अपनी भूसंपत्ति में अपने कुत्ते को घुमा रहे थे जब वे एक जंग लगे कनस्तर से जो हाल ही की बारिश के कारण धरती से थोड़ा बाहर दिखाई दे रहा था, ठोकर खाकर लड़खड़ा गए l उन्होंने उस कनस्तर को घर ले जाकर खोला, और उसमें उनको सौ साल से भी पुराने सोने के सिक्कों का गुप्त भण्डार मिला! दम्पति पुनः उस स्थान पर लौटकर सात और कनस्तरों को ढूँढ निकाला जिनमें कुल मिलकर 1,427 सिक्के थे l उसके बाद उन्होंने अपने धन को सुरक्षित रखने के लिए दूसरी जगह गाड़ दिया l
उन सिक्कों के भण्डार (मूल्य $10 लाख) को सैडल रिज होर्ड(Saddle Ridge Hoard) कहा जाता है, जो अमरीकी इतिहास में अपने प्रकार की सबसे बड़ी खोज है l यह कहानी असाधारण रूप से यीशु द्वारा बताए गए एक दृष्टांत की याद दिलाता है : “स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाया और छिपा दिया, और मारे आनंद के जाकर अपना सब कुछ बेच दिया और उस खेत को मोल ले लिया” (मत्ती 13:44) l
गड़े हुए धन की कहानियाँ सदियों से कल्पनाओं को जीती हैं, यद्यपि इस प्रकार की खोज बिरले ही होती है l परन्तु यीशु एक ऐसे धन के विषय बताते हैं जो उन सब की पहुँच में है जो अपने पापों का अंगीकार करते हैं और उसको ग्रहण करते हैं और उसका अनुसरण करते हैं (यूहन्ना 1:12) l
हम उस धन का थाह कभी नहीं लगा सकते हैं l जब हम अपने पुराने जीवन को छोड़ते हैं और परमेश्वर और उसके उद्देश्यों का पीछा करते हैं, हम उसके मूल्य जो जान जाते हैं l परमेश्वर हमारी कल्पना से परे हमें “अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु मे हम पर है, आनेवाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन”(इफिसियों 2:7) – उसके पुत्र और पुत्री के रूप में नया जीवन, इस पृथ्वी पर नया उद्देश्य, और उसके साथ समझ से बाहर अनंतता का आनंद - देता है l
प्रार्थना में लगे रहें
केविन ने अपनी आँखों से आंसू पोछा जब वह अपनी पत्नी, कैरी के पढ़ने के लिए कागज़ का एक टुकड़ा लिए हुए था l वह जानता था कि कैरी और मैं अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करते थे कि वह यीशु में पुनः विश्वास करने लग जाए l “यह पर्ची उसकी मृत्यु के बाद मेरी माँ की बाइबल में मिली, और मुझे आशा है कि यह तुम्हें प्रोत्साहित करेगी,” उसने कहा l उस पर्ची के ऊपरी भाग पर ये शब्द थे, “मेरे पुत्र, केविन के लिए l” उन शब्दों के नीचे उसके उद्धार के लिए एक प्रार्थना थी l
केविन ने समझाया, “मैं इस पर्ची को अपनी निजी बाइबल में रखता हूँ l” मेरी माँ ने मेरे उद्धार के लिए पैंतिस वर्षों से अधिक तक प्रार्थना की l मैं परमेश्वर से बहुत दूर था, और अब मैं विश्वासी हूँ l” वह हमारी ओर एक टक देखते हुए अपने आंसुओं में से मुस्कुराया : “अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करने में हार न मानना – चाहे जितना समय लग जाए l”
उसके प्रोत्साहन के शब्दों ने मुझे यीशु द्वारा लूका के सुसमाचार में प्रार्थना के विषय बताई गयी कहानी की भूमिका पर सोचने को विवश किया l लूका इन शब्दों के साथ आरम्भ करता है, “फिर [यीशु ने] इसके विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए, उनसे यह दृष्टांत कहा” (18:1) l
इस कहानी में, यीशु एक “अधर्मी न्यायी” (पद.6) जो केवल इसलिए एक निवेदन को मान लेता है क्योंकि वह आगे को और परेशान नहीं होना चाहता है, की तुलना सिद्ध स्वर्गिक पिता से करता है जो गहराई से हमारी चिंता करता है और इच्छित है कि हम उसके पास आएँ l जब भी हम प्रार्थना करते हैं हम उत्साहित हों कि परमेश्वर सुनता है और हमारी प्रार्थनाओं का स्वागत करता है l
उधार ली हुई आशीष
दोपहर के भोजन के समय, मेरे मित्र जेफ़ ने प्रार्थना की : “पिता, आपको धन्यवाद आपने हमें सांस लेने के लिए अपनी हवा और खाने के लिए अपना भोजन दिया है l” जेफ़ हाल ही में नौकरी छूटने की कठिनाई से गुज़रा था, इसलिए परमेश्वर में उसका भरोसा और स्वीकृति कि सब कुछ उसका है ने मुझे पूरी तरह प्रेरित किया l मैंने खुद को विचार करते हुए पाया : क्या मैं ईमानदारी से समझता हूँ कि मेरे जीवन में सबसे बुनियादी, दैनिक वस्तुएं भी वास्तव में परमेश्वर की ही हैं, और वह मुझे केवल उनका उपयोग करने दे रहा है?
जब राजा दाऊद यरूशलेम में मंदिर बनाने के लिए इस्राएलियों से भेंट स्वीकार किया, उसने प्रार्थना की, “मैं क्या हूँ और मेरी प्रजा क्या है कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है l” उसके बाद उसने आगे उसमें जोड़ा, “सब तेरा ही है” (1 इतिहास 29:14, 16) l
बाइबल हमें बताती है कि “सम्पति प्राप्त करने की सामर्थ्य” और आजीविका भी उसी की ओर से मिलती है (व्यवस्थाविवरण 8:18) l यह समझ कि सब कुछ जो हमारा है उधार ही का है इस संसार की वस्तुओं पर हमारी पकड़ को ढीला करके खुले हाथों और हृदय से जीने में हमें प्रोत्साहित करता है-उदारतापूर्वक साझा करते हुए क्योंकि हम प्रतिदिन नेकियों के लिए बहुत ही धन्यवादित है l
परमेश्वर उदार दाता है-इतना प्रेमी कि उसने ”हम सब के लिए” अपना पुत्र भी दे दिया (रोमियों 8:32) l इसलिए कि हमें बहुत अधिक मिला है, काश हम भी सभी छोटी और बड़ी आशीष के लिए उसे ह्रदय को छू जाने वाला अपना धन्यवाद प्रेषित करें l