प्रेम की विरासत
अपने पर-नाना की बाइबल के पन्ने उलटते समय एक खजाना मेरी गोद में गिरा l कागज़ का एक छोटा टुकड़ा, जिस पर, एक युवा की लिखावट में निम्नलिखित शब्द अंकित थे, “धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है l धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे” (मत्ती 5:3-4) l उन पदों के निकट मेरी माँ ने टेढ़ी-मेढ़ी लिखावट में अपना हस्ताक्षर किया था l
नाती-पोते बाइबल के पद लिखकर याद करें, मेरी पर-नानी अपनी आदत के अनुसार उनको ऐसा ही करना सिखाती थी l किन्तु इस पद के पीछे की कहानी से मेरी आँखें नम हो गयीं l मेरे नाना की मृत्यु तब हुई जब मेरी माँ बहुत छोटी थी, और उनका छोटा भाई(मेरे मामा) कुछ सप्ताह बाद चल बसे l उस दु:खद समय में मेरी पर-नानी ने मेरी माँ से यीशु और उसके आश्वासन की ओर देखने को कहा l
पौलुस ने तीमुथियुस को लिखा, “ मुझे तेरे उस निष्कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहले तेरी नानी लोइस और तेरी माता यूनीके में था, और मुझे निश्चय है कि तुझ में भी है” (2 तीमुथियुस 1:5) l विश्वास विरासत में नहीं मिलता है, यह बाँटा जाता है l तीमुथियुस की माँ और नानी ने उसके साथ अपना विश्वास बाँटा, और उसने विश्वास किया l
जब हम अपने निकट के लोगों को यीशु में आशा प्राप्त करने के लिए उत्साहित करते हैं, हम उनको प्रेम की विरासत देते हैं l उस छोटे से कागज़ के टुकड़े के द्वारा, मेरी माँ ने मेरी पर-नानी के प्रेम का प्रमाण छोड़ गयी जो वह अपने उद्धारकर्ता और अपने परिवार से करती थी l ओह, उसके विषय अपनी आने वाली पीढ़ी को बताना कितना भला है!
न बदलनेवाला प्रेम
मैं हाई स्कूल में पढ़ते समय विश्वविद्यालय के टेनिस टीम में खेलता था l मैं अपने किशोरावस्था में अपने घर से दो घर दूर एक टेनिस कोर्ट में घंटों खेलकर अपने कौशल का विकास करता था l
पिछली बार जब मैं उस शहर में गया, मैं आशा से उस टेनिस कोर्ट में दूसरों को खेलते हुए और कुछ पलों के लिए अपनी पुरानी यादें ताज़ी करने गया l किन्तु अब वे टेनिस कोर्ट जो मेरी यादों में बहुत परिचित थे, वहाँ नहीं थे l उनके स्थान पर एक खाली मैदान था, जिसमें उगे हुए घास कभी-कभी हवा से लहराते रहते थे l
उस दोपहर की बात मेरे मन में बैठ गयी जो जीवन की अल्पता/लघुता याद दिलाती है l एक स्थान जहाँ मैंने अपने युवावस्था की शक्ति जो अब मुझ में नहीं है खर्च की थी! उस अनुभव के विषय विचार करते हुए इस सच से मेरा सामना हुआ, जो वृद्ध राजा दाऊद कहता है : “मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है l परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है” (भजन 103:15-17)
हमारी उम्र बढती जाती है और हमारे चारोंओर का संसार बदल भी जाएगा, किन्तु परमेश्वर का प्रेम नहीं बदलता है l उसकी ओर मुड़नेवाले उसकी देखभाल के विषय निश्चित रहें l
भरोसा करना सीखना
किशोरावस्था में जब मां मुझे परमेश्वर पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करती तो मैं विरोध करता था। वो कहती थीं, "परमेश्वर पर भरोसा रखो, वह तुम्हे संभालेंगे”, "यह इतना सरल नहीं है, माँ!" मैं पलटकर कहताI "परमेश्वर उनकी सहायता करता है जो स्वयं अपनी सहायता करते हैं!"
ये शब्द, कि "परमेश्वर उनकी सहायता करता है जो स्वयं अपनी सहायता करते हैं" बाइबिल में नहीं हैं इसके बजाए, परमेश्वर का वचन हमें अपनी दैनिक जरूरतों के साथ उन पर निर्भर करना सिखाता है।I यीशु ने कहा, "आकाश के पक्षियों को देखो!...?" (मत्ती 6:26-27)।
हर ऐसी चीज़ जिसका हम आनंद लेते हैं, यहां तक कि जीविका कमाने का सामर्थ जिससे हम“अपनी सहायता" करते हैं – एक ऐसे स्वर्गीय पिता का उपहार हैं जो हमारी समझ से बढ़कर हमसे प्रेम करते हैं और हमें कीमती जानते हैं।
जीवन के अंत के निकट आने पर मानसिक रोग के कारण माँ की सोच-समझने की शक्ति और यादाश्त जाती रही, परन्तु परमेश्वर पर उनका विश्वास बना रहा। कुछ समय हमारे वह घर में रही, तब मैंने करीब से देखा कि परमेश्वर कैसे अप्रत्याशित तरीकों से उनकी ज़रूरतों को पूरा करते थे। चिंता करने की बजाय, उन्होंने स्वयं को उसे सौंप दिया था जिसने उनकी देखभाल करने का वादा किया था। और उन्होंने दिखाया कि वह विश्वासयोग्य हैं।
घर की ओर इशारा करने की प्रार्थना
बचपन में मैंने अपने माता-पिता से पहली प्रार्थना सीखी कि "हे प्रभु, मैं सोने जाता हूँ, मैं अपनी आत्मा को तेरे ही हाथ में सौंप देता हूं।" जिसे मैंने अपने बच्चों को सिखाया। सोते समय इस प्रार्थना द्वारा अपने आप को परमेश्वर के हाथों में सौंपना मुझे तस्सली देता था।
बाइबिल की "प्रार्थना पुस्तक", भजन संहिता में ऐसी प्रार्थना है। "मैं अपनी आत्मा...;" (भजन संहिता 31:5) विद्वानों का मानना है कि यह "सोने के समय" की प्रार्थना थी जिसे यीशु के दिन में बच्चों को सिखाया जाता था ।
क्रूस पर यीशु की अंतिम पुकार से हम इसे पहचान सकते हैं। यीशु ने इसमें "पिता " शब्द जोड़ा: (लूका 23:46)। मृत्यु से पूर्व इन शब्दों के साथ प्रार्थना करते हुए, यीशु ने पिता के साथ अपने घनिष्ठ संबंध और ऐसे स्थान की ओर इशारा किया जहाँ विश्वासी उनके साथ रहेंगे (यूहन्ना 14:3)।
यीशु के क्रूस पर जान देने से परमेश्वर के साथ हमारा संबंध स्वर्गीय पिता के रूप में हो गया। यह जानकर कितनी तस्सली मिलती है कि यीशु के बलिदान से, हम परमेश्वर की सन्तान बनकर उनकी परवाह में विश्राम पा सकते हैं! हम निडर सो सकते हैं क्योंकि हमारा पिता इस वादे के साथ हम पर दृष्टि लगाए है कि वह मसीह के साथ हमें जी उठाएगें (1 थिस्सलुनीकियों 4:14)।
समय का उपहार
पोस्ट ऑफिस जाते हुए मैं जल्दी में था। मेरी लिस्ट में लिखे कई काम करने बाकि थे, परन्तु घुसते ही वहां दरवाजे तक लंबी लाइन देखकर मैं हताश हो गया। घड़ी देखकर मैं बड़बड़ाया "जितनी जल्दी हो रही थी थी उतनी देर लगेगी"।
मेरा हाथ अभी दरवाजे पर ही था कि एक बुजुर्ग अजनबी पीछे एक मशीन की ओर इशारा करते हुए बोला, "इस कापियर में मेरे पैसे तो जा चुके हैं पर मेरी फोटो कॉपी निकली नहीं है।" मैं तुरंत समझ गया कि परमेश्वर क्या चाहते थे। लाइन से निकल कर दस मिनट में मैंने मशीन ठीक कर दी।
मुझे धन्यवाद देकर वह चला गया। जब मैं वापस आया तो पाया कि लाइन अब खत्म हो चुकी थी। मैं सीधे काउंटर पर चला गया।
उस दिन का मेरा अनुभव मुझे यीशु के शब्दों की याद दिलाता है: "दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा: लोग पूरा नाप दबा दबाकर और हिला हिलाकर और उभरता..." (लूका 6:38)।
मेरी प्रतीक्षा की घड़ियाँ खत्म हो गईं क्योंकि किसी अन्य की जरूरत की ओर मेरा ध्यान खींच कर उसे अपना समय देने के लिए मेरी मदद करके परमेश्वर ने मेरी जल्दी में बाधा डाल दी। उन्होंने मुझे एक उपहार दिया। एक ऐसा सबक जिसे मैं जब घड़ी देखूं याद करने की अपेक्षा करता हूँ।
शरणस्थान
परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिए भला है; मैंने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है l भजन 73:28
जब हम ओकलाहामा में रहते थे मेरा एक मित्र टोर्नेडो तूफ़ान का “पीछा करता था l” जॉन ध्यानपूर्वक अन्य अंकित करनेवालों(chaser) एवं स्थानीय रडार की मदद से रेडियो संपर्क द्वारा तूफान का पीछा करता था l वह तूफान और अपने बीच दूरी बनाकर रखते हुए तूफान की दिशा और उसके विनाशक मार्ग पर ध्यान रखता था ताकि वह लोगों के मार्ग में हानि की सम्भावना होने पर अचानक आनेवाले बदलाव की रिपोर्ट दे सके l
एक दिन कीप के आकार के तूफ़ान(funnel cloud) के अचानक अपना मार्ग बदलने पर जॉन खुद ही गंभीर खतरे में पड़ गया l संयोग से, उसे आश्रय मिल गया जिससे उसकी जान बच गयी l
उस दोपहर को जॉन का अनुभव मुझे एक और विनाशकारी मार्ग के विषय सोचने को विवश करता है : हमारे जीवनों में पाप l बाइबल कहती है, “प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा से खीँचकर और फंसकर परीक्षा में पड़ता है l फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है” (याकूब 1:14-15) l
यहाँ एक प्रगति है l जो आरम्भ में हानि रहित दिखाई देता हो, वह शीघ्र ही नियंत्रण से बाहर होकर बर्बादी ला सकता है l किन्तु जब परीक्षा डराने लगे, तब परमेश्वर विनाशक तूफान में शरणस्थान है l
परमेश्वर का वचन हमसे कहता है कि वह कभी भी हमारी परीक्षा नहीं लेता है, और हम केवल अपने चुनावों को ही दोषी करार दे सकते हैं l किन्तु जब हमारी परीक्षा होती है, “वह परीक्षा के साथ [हमारा] निकास भी करेगा कि [हम] सह [सकें]” (1 कुरिन्थियों 10:13) l जब हम परीक्षा की घड़ी में उसकी ओर मुड़कर यीशु से मदद मांगते हैं, वह हमें जयवंत होने के लिए सामर्थ्य देता है l
यीशु सदैव हमारा शरणस्थान है l
पूर्ण भरोसा की घोषणा
लॉरा की माँ कैंसर से संघर्ष कर रही थी l एक दिन सुबह के समय लॉरा ने अपनी सहेली के साथ उसके लिए प्रार्थना की l उसकी सहेली ने, जो कई वर्षों से प्रमस्तिष्क पक्षघात(Cerebral Palsy) के कारण निःशक्त हो गयी थी, इस तरह प्रार्थना की : “प्रभु, आप मेरे लिए सब कुछ करते हैं l कृपया लॉरा की माँ के लिए भी सब कुछ करें l”
लॉरा अपनी सहेली के परमेश्वर पर “पूर्ण भरोसा की घोषणा” से द्रवित हो गयी l उस क्षण पर विचार करते हुए, वह बोली, “मैं हर परिस्थिति में कितनी बार परमेश्वर की आवश्यकता महसूस करती हूँ? यह कुछ ऐसा है जो मुझे हर दिन करना चाहिए!”
यीशु जब पृथ्वी पर था, उसने निरंतर अपना भरोसा अपने स्वर्गिक पिता पर दर्शाया l कोई सोच सकता है कि क्योंकि यीशु मानव शरीर में परमेश्वर था, आत्म-निर्भर होने के लिए उसके पास सबसे अच्छा कारण हो सकता था l किन्तु इसलिए कि यीशु ने सबत के दिन अर्थात् विधित तौर पर निर्धारित विश्राम दिन में “कार्य” अर्थात् किसी को चंगा किया था, धार्मिक अधिकारियों द्वारा इससे सम्बंधित कारण पूछने पर, उसने उत्तर दिया, “मैं तुम से सच-सच कहता हूँ, पुत्र आप से कुछ नहीं कर सकता, केवल वह जो पिता को करते देखता है” (यूहन्ना 5:19) l यीशु ने भी परमेश्वर पर अपना पूर्ण भरोसा दर्शाया!
पिता पर यीशु की निर्भरता आखिरी उदहारण प्रस्तुत करता है कि परमेश्वर के साथ सम्बंधित रहने का अर्थ क्या होता है l हर क्षण हमारे द्वारा ली जाने वाली सांस परमेश्वर की ओर से उपहार है, और उसकी इच्छा है कि हम उसकी सामर्थ्य से भर जाएँ l जब हम प्रेम करने और हर क्षण प्रार्थना और उसके वचन पर निर्भरता से सेवा करते हैं, हम उसके ऊपर पूर्ण भरोसा की घोषणा करते हैं l
विनम्र प्रेम
बेंजामिन फ्रैंकलिन ने अपने युवावस्था में बारह सद्गुणों की सूची बनाए थे जिनमें वे अपने जीवन काल में उन्नत्ति करना चाहते थे l उन्होंने उस सूची को अपने मित्र को दिखाया, जिसने उन्हें उसमें “विनम्रता” जोड़ने को कहा l फ्रैंकलिन को यह विचार पसंद आ गया l उनके मित्र ने हर एक गुण में उसकी सहायता के लिए कुछ मार्गदर्शिका भी जोड़ दीं l विनम्रता के सम्बन्ध में फ्रैंकलिन के विचारों में, उसने उसका अनुकरण करने के लिए यीशु का उदहारण दिया l
यीशु हमें विनम्रता का सर्वश्रेष्ठ नमूना देता है l परमेश्वर का वचन हमें बताता है, “जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो; जिसने परमेश्वर के स्वरुप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा l वरन् अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरुप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया” (फ़िलि.2:5-5) l
यीशु ने सबसे महान विनम्रता प्रस्तुत की l पिता के साथ अनंतता से होने के बावजूद, उसने प्रेम में क्रूस के नीचे झुकने का चुनाव किया कि अपनी मृत्यु के द्वारा वह हर एक को उन्नत कर सके जो उसके प्रेम की उपस्थिति में उसे स्वीकार करता है l
हम दूसरों की सेवा करके अपने स्वर्गिक पिता की सेवा करने का प्रयास करते हैं और इस तरह यीशु की विनम्रता का अनुसरण करते हैं l यीशु की दया हमें दूसरों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अलग करके अलगाव की सुन्दरता का असाधारण झलक लेने देता है l “सर्व प्रथम मैं” [अहम्] वाले संसार में विनम्र बनना सरल नहीं है l किन्तु हमारे उद्धारकर्ता के प्रेम में विश्राम करते समय, वह हमें उसका अनुसरण करने के लिए सब कुछ देगा l
दाँत निकलने के दिन
मेरी पत्नी ने मुझे लेब्राडोर जाति का एक पिल्ला दिया जिसका नाम हमने मैक्स रखा l एक दिन चिंतन करते समय मेरे कमरे में मुझे अपने पीछे कागज़ के चबाने की आवाज़ आयी l मैं मुड़कर मैक्स को देखा जिसने गलती की थी l उसके सामने एक पुस्तक खुली थी और उसके मुँह से एक पन्ना लटक रहा था l
हमारे पशु चिकित्सक के अनुसार मैक्स के “दूध के दाँत टूटकर नए दाँत निकल रहे” हैं l कुत्ते के बच्चों के दूध के दाँत टूटकर स्थायी दाँत निकलते समय वे अपने मसूड़ों को आराम देने के लिए कुछ भी चबा लेते हैं l हमें मैक्स पर ध्यान देकर निश्चित करना था कि वह ऐसा कुछ भी न कुतरे जिससे उसका नुक्सान हो l हमें उसके बदले उसे स्वास्थ्यप्रद आदतें सिखानी होगी l
मैक्स के चबाने की आदत और उस पर ध्यान देने की मेरी ज़िम्मेदारी मुझे सोचने को विवश करती है कि हम अपने मनों और हृदयों में क्या “चबाते” हैं l क्या हम वेब अथवा टीवी देखते समय ध्यानपूर्वक विचार करते हैं कि हमारी अनंत आत्मा क्या ग्रहण कर रही है? बाइबल हमें उत्साहित करती है, “नए जन्मे हुए बच्चों के सामान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिए बढ़ते जाओ, क्योंकि तुम ने प्रभु की कृपा का स्वाद चख लिया है”(1 पतरस 2:2-3) l यदि हम मसीह के अनुयायी बनकर रहना चाहते हैं तो हमें प्रतिदिन खुद को परमेश्वर के वचन और सच्चाई से भरना होगा l तब ही हम उसमें बढ़कर परिपक्व हो सकते हैं l