छोटी-छोटी बातों में परमेश्वर की उपस्थिति
अपने 3 मास के "चॉकलेट" रंग के लैब्राडोर कुत्ते को जब मैं टीकाकरण और जांच के लिए पशु चिकित्सक के पास लाया तो डाक्टर ने जाँच पर देखा कि उसके बाएं पंजे पर फर के पीछे एक सफेद निशान था। वह मुस्कराकर कहने लगी, "परमेश्वर ने यहाँ से तुम्हें उठा कर चॉकलेट में डुबो दिया होगा।"
मैं हंस पड़ा। अनजाने में उसने परमेश्वर के उनकी सृष्टि में गहरे और व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने की सार्थक बात कह दी थी।
मत्ती 10:30 में यीशु ने कहा, “हमारे सिर के बाल भी गिने हुए हैं”। परमेश्वर इतने महान हैं कि वह हमारे जीवन की छोटी-छोटी बातों में भी रुचि रखते हैं। कोई भी बात इतनी छोटी नहीं जिसपर वे ध्यान न दें या जिसे उनके सम्मुख ना लाया जा सके। वह हमारा इतना ध्यान रखते हैं।
परमेश्वर ने ना केवल हमारी रचना की, वरन वे हमें थामते और हमारी रक्षा करते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि “शैतान छोटी-छोटी बातों में है”। "परंतु यह समझना बेहतर होगा कि उनमें परमेश्वर होते हैं। वे उन चीजों पर भी ध्यान रखते हैं जिन पर हम ध्यान नहीं दे पाते। कितने दिलासे की बात है कि हमारे दयालु और स्वर्गीय पिता-अपनी समस्त सृष्टि के साथ-अपने सामर्थी और प्रेमी हाथों से हमें थामें रहते हैं।
शान्ति को बाँटा गया
"परमेश्वर ने तुम्हें आज मेरे पास भेजा है!"
विमान के शिकागो पहुंचकर कर विदा लेते हुए उस महिला ने यह शब्द कहे। विमान में वह मेरे सामने बैठी थी, जहां मैंने उसके कई उड़ानों के बाद अब वापस लौटने के बारे में जाना। “बुरा ना मानें तो क्या मैं पूछ सकता हूं कि इतनी जल्दी वापसी का क्या कारण है”? मैंने पूछा। नीचे देखते हुए उसने कहा, “अपनी बेटी की नशे की लत के कारण मैंने उसे आज नशा मुक्ति केंद्र में डाला है”।
मैंने विनम्रता से उसे अपने बेटे की हेरोइन ड्रग से संघर्ष की कहानी सुनाई और कहा कि कैसे यीशु ने उसे मुक्त किया था। यह सुनकर, आंखों में आंसू होते हुए भी वह मुस्कुराने लगी। विमान उतरने के बाद हमने परमेश्वर से उसकी बेटी की बेड़ियों को तोड़ देने के लिए प्रार्थना की।
बाद में मैंने 2 कुरिन्थियों 1: 3-4 में पौलुस के शब्दों के बारे में सोचा:”हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर...:।
हमारे आस-पास ऐसे लोग हैं जिन्हें उस शांति से प्रोत्साहन पाने की आवश्यकता है जिसे केवल परमेश्वर दे सकते हैं। उनकी इच्छा है कि हम दयालु करुणा के साथ उनके पास जाकर उस प्रेम को साझा करें जिसे उन्होंने हमसे बांटा है। परमेश्वर आज हमें उन लोगों तक भेजें जिन्हें उनकी शांति की आवश्यकता है।
प्रार्थना का उपहार देना
"प्रार्थना के उपहार के बारे में मुझे नहीं पता था, जब तक मेरे बीमार भाई के लिए आपने प्रार्थना नहीं की थी। आपकी प्रार्थनाओं से हमें बड़ी शान्ति मिली!" हमारी कलीसिया का उसके भाई की कैंसर की जाँच के दौरान प्रार्थना करने के लिए धन्यवाद करते हुए लौरा की आँखों में आँसू थे। उसने कहा, "इस कठिन समय में आपकी प्रार्थना ने उसे बल और सारे परिवार को प्रोत्साहन दिया है।"
दूसरों से प्रेम करने का सर्वोत्तम तरीका है उनके लिए प्रार्थना करना। इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण यीशु है। नया-नियम हमें यीशु के दूसरों के लिए प्रार्थना करने और हमारी ओर से पिता के पास जाने के बारे में बताता है। रोमियो 8:34 कहता है “वह परमेश्वर के दाहिने ओर हैं और हमारे लिए निवेदन भी करता है।" क्रूस पर निस्वार्थ प्रेम को दिखाने और पुनुरुथान और स्वरारोहर्ण के बाद प्रभु यीशु का आज भी हमारे लिए प्रार्थना करके अपनी परवाह दिखाना जारी है।
हमारे आस-पास ऐसे लोग हैं जिन्हें जरूरत है कि यीशु के समान हम प्रार्थनाओं से उन्हें प्रेम करें और उनके जीवन में परमेश्वर की सहायता को आमंत्रित करें। इसमें हम परमेश्वर से मदद मांग सकते हैं, और वह करेंगे! हमारा प्रेमी प्रभु दूसरों के लिए प्रार्थना करने का उपहार हमें उदारतापूर्वक दें, आज ही ।
परमेश्वर का प्रिय
उसका नाम डेविड था, पर लोग उसे “बाजा बजाने वाला" बुलाते थे। वह अस्त-व्यस्त सा रहने वाला बूढा था जो शहर के लोकप्रिय स्थानों में अक्सर दिख जाता था। वायलिन बजाने के अपने असाधारण कौशल से वह राहगीरों का दिल बहलाता, जो कभी-कभी उसके बक्से में पैसे डाल देते और आभार में सिर हिला कर डेविड मुस्कुरा देता था।
हाल ही में जब डेविड की निधन-सूचना एक स्थानीय समाचार पत्र में छपी, तो पता चला कि वह कई भाषाएँ बोलने वाला, विश्वविद्यालय से स्नातक प्राप्त और पूर्व चुनाव में राज्यसदन की सीट का उम्मीदवार था। जिन लोगों ने रूपरंग के आधार पर उनका आंकलन किया था, वह उनकी उपलब्धियों पर आश्चर्यचकित थे।
बाइबिल बताती है कि "परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया" (उत्पत्ति 1:27)। इससे हमारे भीतर निहित मूल्य का पता चलता है। हम कैसे भी दिखें, हमारी उपलब्धियां जो हों, या लोग जो भी सोचें, चाहे हमने अपने पाप में परमेश्वर से फिरने का चुनाव भी किया हो। परमेश्वर ने हमें इतना महत्वपूर्ण समझा कि अपने पुत्र को उद्धार के और उनके साथ अनंत जीवन जीने के मार्ग को दिखाने के लिए भेजा।
परमेश्वर हमसे प्रेम करते हैं। हम परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए उसे दूसरों के साथ साझा कर सकते हैं।
सामर्थ की ओर भागना
पैरी फोर!” जब मैंने तलवारबाजी सीखना शुरू किया तो मेरे कोच वार के प्रतिकूल बचाव की स्थिति (“पैरी”) ऊंची आवाज़ में बताते थे। जब वह अपना हथियार बढ़ाते तो मुझे सुनकर तुरंत प्रतिक्रिया देनी होती थी।
इस प्रकार सक्रिय होकर सुनना, यौन प्रलोभन में तत्काल आज्ञापालन की बात याद दिलाता है,। 1कुरिन्थियों 6:18 में पौलुस लिखते हैं, “ व्यभिचार से बचे रहो”। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हमें स्थिर रहना होता है (गलातियों 5:1; इफिसियों 6:11), परन्तु इस स्थान पर बाइबिल व्यावहारिक रूप से हमारे सर्वश्रेष्ठ बचाव का सकेंत देती है। "भाग जाओ!"
संकट में पड़ने से पहले सही कदम उठाना बचाव है। छोटे-छोटे समझौते विनाशकारी हार ला सकते हैं। अनैतिक विचार, इंटरनेट पर गलत चित्र देखना और छेड़ खानी भरी मित्रता-यह ऐसे कदम है जो हमें विनाश के मार्ग पर ले जाते हैं और परमेश्वर और हमारे बीच में दूरी लाते हैं।
प्रलोभन में परमेश्वर भागने का मार्ग भी प्रदान करते हैं। क्रूस पर यीशु की मृत्यु के माध्यम से वह हमें आशा क्षमा और एक नया आरम्भ प्रदान करते हैं-चाहे हम जहां भी रहे हों और हमने जो भी किया हो। जब हम अपनी कमजोरियों में यीशु की ओर भागते हैं, वह हमें मुक्त कर देते हैं मुक्त कर देते हैं जिससे जीवन उनके सामर्थ में जी सकें।
सच्ची आशा
कुछ समय पहले मैं एक मित्र के साथ एम्पायर स्टेट बिल्डिंग में गया। लाइन छोटी लग रही थी, बस कोने तक ही। परन्तु अन्दर पहुंचे तो देखा, लाइन लॉबी से लेकर सीढ़ियों तक और एक अन्य कमरे तक फैली हुई थी । हर मोड़ और भी दूरी को बता रहा था।
आकर्षणस्थलों और थीम पार्क की लाइनों के रूट ऐसे बनाए जाते हैं जिससे भीड़ कम दिखे। फिर भी हर मोड़ पर वास्तविक दशा से निराशा हाथ आती है।
कभी कभी जीवन की निराशाएं और अधिक गंभीर हो जाती हैं। जो नौकरी मिलने की आशा हो वह नहीं मिलती, जिन मित्रों पर भरोसा किया उन्हीं ने धोखा दिया, जो संबंध बनाए वे नकाम हुए। लेकिन इन पलों में, परमेश्वर पर हमारी आशा रखने के बारे में वचन एक सत्य कहता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, "क्लेश से धीरज और धीरज से खरा निकलना..."। (रोमियों 5:3-5)
जब उनपर हम विश्वास रखते हैं, तो परमेश्वर अपनी आत्मा द्वारा, धीरे से बता देते हैं कि वे हमें बिना शर्त प्रेम करते हैं और एक दिन हम उनके साथ होंगे-चाहे कैसी भी बाधाओं का हमें सामना करना पड़े। एक ऐसे संसार में जो अक्सर हमें निराश करता है, यह जानना कितना भला है कि परमेश्वर हमें सच्ची आशा देते हैं।
पिछला पहला होगा
हाल ही में मैं एक बड़े विमान में चढ़नेवाला अंतिम यात्री था जिसे कोई सीट भी नहीं मिली थी l विमान के अन्दर उसके पंख के पास दो सीटों के बीच में एक सीट मुझे मिली किन्तु मुझे अपना सामान बिलकुल पीछे की कतार के सीट के ऊपर बने स्थान में रखना पड़ा l अर्थात् सब लोगों के बाहर निकलने के बाद ही मैं अपना सामान निकाल सकता था l
मैं अपनी सीट पर बैठते समय मुस्कराने लगा और उसी समय मानों प्रभु की ओर से एक विचार आया : “ठहरने से तुम्हारी कुछ भी हानि नहीं होगी l इससे तुम्हारा भला होगा l” इसलिए मैंने अतिरिक्त समय का आनंद उठाने का निर्णय किया, और विमान के उतरने के बाद दूसरे यात्रियों को उनके सामान उतरवाने में और एक विमान परिचारक को सफाई करने में सहायता भी की l जब मैंने अपना बैग उतारा, मुझे फिर हंसी आयी क्योंकि किसी ने सोचा कि मैं विमान-कंपनी के लिए काम करता था l
उस दिन के अनुभव से मैं यीशु द्वारा शिष्यों से कहे गए शब्दों पर विचार करने को विवश हुआ : “यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सब से छोटा और सब का सेवक बने” (मरकुस 9:35) l
मैं ठहरा रहा क्योंकि मेरी मजबूरी थी, किन्तु यीशु के “उलटे” राज्य में, उनके लिए आदर का एक स्थान है जो अपने आप से आगे बढ़कर दूसरों की ज़रूरतों में सहायता करते हैं l
यीशु हमारे उतावली, और जहां लोग पहले सेवा की मांग करते हैं, वाले संसार में “इसलिए नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु इसलिए आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिए आने प्राण दे” (मत्ती 20:28) l हम दूसरों की सेवा करके ही उसकी सर्वोत्तम सेवा कर सकते हैं l हम जितना झुकेंगे, उतना ही उसके निकट रहेंगे l
लुका छुपी
“आप मुझे नहीं देख सकते हैं!”
छोटे बच्चे “लुका छुपी” खेलते समय विश्वास करते हैं कि अपनी आँखों को बंद करने से वे छिप जाते हैं l वे मानते हैं कि यदि वे आपको नहीं देख सकते हैं, तो आप भी उन्हें नहीं देख सकते हैं l
चाहे वयस्कों को वह जितना भी भोला महसूस हो, हम कभी-कभी परमेश्वर के साथ भी ऐसा ही करते हैं l जब हम जानते हुए कुछ गलत करने की इच्छा करते हैं, हमारा अभिप्राय अपने मन की करते हुए परमेश्वर को अलग करना हो सकता है l
नबी यहेजकेल ने परमेश्वर से दर्शन में बेबीलोन में निर्वासित अपने लोगों के विषय यह देखा l प्रभु ने उससे कहा, “क्या तूने देखा है कि इस्राएल के घराने के पुरनिये अपनी नक्काशीवाली कोठरियों के भीतर अर्थात् अंधियारे में क्या कर रहे हैं? वे कहते हैं कि यहोवा हम को नहीं देखता” (यहेज. 8:12) l
किन्तु परमेश्वर सब कुछ देखता है, और यहेजकेल का दर्शन इसका प्रमाण है l फिर भी उनके पाप करने पर, परमेश्वर ने अपने पश्च्तापी लोगों को एक नयी प्रतिज्ञा दी : “मैं तुमको नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नयी आत्मा उत्पन्न करूँगा” (36:26) l
हमारे लिए, परमेश्वर ने क्रूस पर पूर्ण दंड चुकाकर अपनी कोमल करुणा से टूटापन और पाप का विद्रोह ख़त्म किया l यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर हमें केवल नया आरंभ ही नहीं देता है, किन्तु जब हम उसके पीछे चलते हैं वह हमारे हृदय परिवर्तन के लिए हमारे अन्दर काम भी करता है l परमेश्वर कितना अच्छा है! जब हम खोए हुए थे और अपने पाप में छिपे हुए थे, परमेश्वर, यीशु के द्वारा, हमें “ढूढ़ने और [हमारा] उद्धार करने आया” (लूका 19:10; रोमि. 5:8) l
हमारी प्रार्थना, परमेश्वर का समय
कभी-कभी परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देने में समय लेता है, और हमें इसे समझने में कठिनाई होती है l
याजक जकरयाह की यही स्थिति थी, जब जिब्राइल स्वर्गदूत एक दिन यरूशलेम के मंदिर में एक वेदी के निकट उसके सामने प्रगट हुआ l जिब्राइल ने उससे कहा, “हे जकरयाह, भयभीत न हो, क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गयी है ; और तेरी पत्नी इलीशिबा से तेरे लिए एक पुत्र उत्पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्ना रखना” (लूका 1:13, तिरछे अक्षर जोड़े गए हैं) l
किन्तु शायद जकरयाह ने वर्षों पहले परमेश्वर से पुत्र माँगा होगा, और उसने जिब्राइल के सन्देश से संघर्ष किया क्योंकि इलीशिबा के बच्चे जनने का समय समाप्त हो चुका था l फिर भी, परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुन ली l
परमेश्वर की करूणा सिद्ध है l वह हमारी प्रार्थना को केवल वर्षों तक ही नहीं किन्तु हमारे समय से परे पीढ़ियों तक याद रख सकता है l वह उन्हें कभी नहीं भूलता है और हमारे द्वारा उसके सामने अपने निवेदनों को लाने के बहुत समय बाद उत्तर दे सकता है l कभी-कभी उसका उत्तर “नहीं” हो सकता है और दूसरे समय में “ठहरो”-किन्तु उसका उत्तर प्रेम से पूर्ण होता है l परमेश्वर के मार्ग हम समझते नहीं हैं, किन्तु हम भरोसा कर सकते हैं कि वे अच्छे हैं l
जकरयाह ने यह सीख लिया l उसने एक पुत्र माँगा, किन्तु परमेश्वर ने उससे कहीं अधिक दिया l उसका पुत्र बड़ा होकर उद्धारकर्ता की सूचना देनेवाला नबी बनने वाला था l
जकरयाह का अनुभव एक ख़ास सच्चाई को प्रगट करनेवाला था जो हमारी प्रार्थना के समय हमें उत्साहित कर सकता है : परमेश्वर का समय कभी-कभी ही हमारे मन के अनुसार होता है, किन्तु इसके लिए इंतज़ार करना लाभदायक है l