काम पर करुणा
मेरी दोस्त अनीता एक लेखा फर्म के लिए कुल वेतन भुगतान(payroll) की गणना करती है l यह एक सीधी नौकरी की तरह लग सकता है, लेकिन ऐसे समय होते हैं जब नियोक्ता अनुरोध के बाद देर से अपनी जानकारी जमा करते हैं l अनीता अक्सर इसकी पूर्ति के लिए लम्बे समय तक काम करती हैं ताकि कर्मचारी समय से अपना पैसा प्राप्त कर सकें l वह उन परिवारों के कारण विचार करती है जो किराने का सामान खरीदने, दवा खरीदने और आवास के लिए भुगतान करने के लिए उन आय श्रोतों(fund) पर निर्भर हैं l
अनीता का अपनी नौकरी के प्रति दयालु रवैया मुझे यीशु की ओर इशारा करता है l संसार में, उसने कभी-कभी लोगों की सेवा की जब वह उसके लिए असुविधाजनक था l उदाहरण के लिए, यूहन्ना बप्तिस्मा दाता के मारे जाने के बारे में सुनने के बाद मसीह कुछ समय अकेले रहना चाहता था, इसलिए वह एक अलग जगह की तलाश में एक नाव पर सवार हो गए (मत्ती 14:13) l शायद वह अपने रिश्तेदार के लिए शोक मनाना चाहता था और दुःख में होकर प्रार्थना करना चाहता था l
सिर्फ एक ही समस्या थी l उसके पीछे लोगों की भीड़ लगी l इस समूह की विभिन्न भौतिक ज़रूरतें थीं l लोगों को भेजना बहुत आसान होता, लेकिन “उसने निकलकर एक बड़ी भीड़ देखी और उन पर तरस खाया, और उनके बीमारों को चंगा किया” (पद.14) l
हालाँकि यह लोगों को सिखाने और उनकी बीमारियों को ठीक करने के लिए यीशु की बुलाहट का हिस्सा था, उसकी सहानुभूति ने उसके काम करने के तरीके को प्रभावित किया जिसमें उसने अपनी जिम्मेदारियों को पूरा किया l परमेश्वर हमें अपने जीवन में उसकी करुणा को पहचानने में मदद करें और हमें उसे दूसरों तक पहुंचाने की शक्ति दें l
एक दिव्य युगल गीत
बच्चों के एक संगीत प्रस्तुति पर, मैंने एक शिक्षक और एक छात्र को एक पियानों के सामने बैठते देखा l उनका युगल गीत शुरू होने से पहले, शिक्षक झुक कर कुछ अंतिम मिनटों के निर्देशों को फुसफुसाया l जैसे ही संगीत वाद्ययंत्र से प्रवाहित हुआ, मैंने देखा कि छात्र ने एक सरल धुन बजाया, जबकि शिक्षक की संगत ने गीत में गहराई और अतिशोभा जोड़ दी l रचना के अंत के निकट, शिक्षक ने अपनी सहमति का इशारा किया l
यीशु में हमारा जीवन एक एकल प्रदर्शन की तुलना में ज़्यादातर युगल गीत की तरह है l कभी-कभी, हालाँकि, मैं भूल जाता हूँ कि वह “मेरे बगल में बैठा है,” और यह केवल उसकी सामर्थ्य और मार्गदर्शन से है कि मैं “बजा सकता हूँ l मैं अपने दम पर सभी सही तानों’ को बजाने की कोशिश करता हूँ – अपनी ताकत में परमेश्वर की आज्ञापालन करना चाहता हूँ, लेकिन इसका अंत आमतौर पर नकली और खोखला लगता है l मैं अपनी सीमित क्षमता के साथ समस्याओं को सँभालने की कोशिश करता हूँ लेकिन इसका परिणाम अक्सर दूसरों के साथ मतभेद होता है l
मेरे शिक्षक की उपस्स्थिति सम्पूर्ण फर्क डालती है l जब मैं अपनी सहायता के लिए यीशु पर भरोसा करता हूँ, तो मैं अपने जीवन को ईश्वर के प्रति अधिक सम्मानजनक पाता हूँ l मैं ख़ुशी से सेवा करता हूँ, स्वतंत्र रूप से प्यार करता हूँ, और आश्चर्यचकित हूँ जब परमेश्वर मेरे रिश्तों को आशीष देता हैं l यह उसी प्रकार है जैसे यीशु ने अपने पहले शिष्यों से कहा था, “जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है” (यूहन्ना 15:5) l
हर दिन हम अपने अच्छे शिक्षक के साथ एक युगल गीत गाते हैं – यह उसकी कृपा और सामर्थ्य है जो हमारे आध्यात्मिक जीवन का माधुर्य है l
बोलनेवाले केले
कभी हार न मानें l किसी के मुस्कुराने का कारण बनें l आप कमाल के हैं l यह नहीं कि आप कहाँ से हैं – आप जहां जा रहे हैं महत्वपूर्ण है l अमेरिका के एक स्कूल में कुछ स्कूली बच्चों ने अपने भोजनालय में इन संदेशों के साथ और संदेशों को केलों पर लिखा हुआ पाया l कैंटीन का प्रबंधक जिसका नाम स्टेसी था, ने फल पर इन उत्साहजनक नोट्स लिखने के लिए समय लिया, जिसे बच्चों ने “बोलनेवाले केले” करार दिया l
यह परवाह करने वाली पहुँच प्राचीन शहर अन्ताकिया में “आध्यात्मिक युवाओं” के लिए बरनबास का हृदय याद दिलाता है (प्रेरितों 11:22-24) l बरनबास लोगों को प्रेरित करने की अपनी क्षमता के लिए प्रसिद्ध था l एक अच्छे इंसान के रूप में जाना जाने वाला, विश्वास और पवित्र आत्मा से भरा हुआ, उसने नए विश्वासियों को “तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे” रहने के लिए प्रेरित किया” (पद.23) l मुझे लगता है कि वह उन लोगों के साथ समय बिताया जिनकी वह मदद करना चाहता था, इस तरह के शब्द कहते हुए कि : निरंतर प्रार्थना करते रहें l प्रभु पर भरोसा रखें l जब जीवन कठिन हो तो परमेश्वर के निकट रहें l
हममें से जो कुछ समय तक यीशु के साथ चले हैं समझते हैं कि यीशु के साथ जीना कितना कठिन हो सकता है l हम सभी को प्रोत्साहन देने और प्राप्त करने में सक्षम हों, जब परमेश्वर का आत्मा हमारा मार्गदर्शन करता है और हमें आध्यात्मिक सत्य की याद दिलाता है l
मध्यस्थ प्रार्थना
एक शनिवार की दोपहर, मेरा परिवार और मैं दोपहर के भोजन के लिए एक स्थानीय रेस्टोरेंट में रुक गए। जैसे ही वेटर ने हमारे खाने को मेज पर रखा, मेरे पति ने ऊपर देखकर उसका नाम पूछा। तब उसने कहा, “हम भोजन करने से पहले एक परिवार के रूप में प्रार्थना करते हैं। क्या आज हम आपके लिए प्रार्थना कर सकते हैं? संजय, जिसका नाम अब हम जानते थे, उसने हमें आश्चर्य और चिंता के मिश्रण से देखा। थोड़ी देर की चुप्पी के बाद उसने हमें बताया कि वह हर रात अपने दोस्त के सोफे पर सोता है, उसका बाइक ख़राब हो गया है, और उसके पास पैसे नहीं है।
जब मेरे पति ने चुपचाप परमेश्वर से संजय के लिए प्रबंध करने और उसे अपना प्रेम दिखाने के लिए कहा, मैंने सोचा कि हमारी मध्यस्थ प्रार्थना उसी के समान होती है जब पवित्र आत्मा हमारे कारण को लेता है और परमेश्वर के साथ उसे जोड़ देता है। हमारी सबसे बड़ी जरुरत के क्षणों में – जब हमें अहसास होता है कि हम अपने दम पर जीवन को संभाल नहीं सकते हैं, जब हम यह नहीं जानते कि परमेश्वर से क्या कहना है, “[पवित्र आत्मा] पवित्र लोगों के लिए परमेश्वर की इच्छा के अनुसार विनती करता है” आत्मा जो कहता है वह एक रहस्य है, लेकिन हमें आश्वासन मिला है कि यह हमेशा हमारे जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा के साथ ठीक बैठता है।
अगली बार जब आप परमेश्वर के मार्गदर्शन, प्रावधान और किसी और के जीवन में सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं, तो दयालुता का कार्य आपको याद दिलाए कि आपकी आध्यात्मिक ज़रूरतें भी परमेश्वर के समक्ष उठायी जा रही हैं जो आपका नाम जानता है और आपकी समस्याओं की परवाह करता है।
वह सब कुछ जानता है
हमारे घर में दो वर्षों तक एक पालतू मछली(fighter fish) थी l मेरी छोटी बेटी अक्सर झुककर उस टैंक में खाना डालते के बाद उसके साथ बातें करती थी l जब बालवाड़ी में पालतू जानवरों का विषय आया, तो उसने गर्व से दावा किया कि वह उसका है l आखिरकार, मछली मर गयी, और मेरी बेटी दुखित हुयी l
मेरी माँ ने मुझे सलाह दी कि मैं अपनी बेटी की भावनाओं को करीब से सुनूँ और उसे बताऊँ, “परमेश्वर इसके विषय सब कुछ जानता है l” मैं सहमत था कि परमेश्वर सब कुछ जानता है, फिर भी अचंभित हुआ, कि वह तसल्लीबक्श कैसे होगा? तब यह मेरे मन आया कि परमेश्वर केवल हमारे जीवनों की घटनाओं से अवगत ही नहीं है – वह दयापूर्वक हमारी आत्माओं में देखता है और जानता है कि वे हमें कैसे प्रभावित करते हैं l वह समझता है कि हमारी उम्र, पिछले घाव, या संसाधनहीन होने के आधार पर “छोटी चीजें” बड़ी चीजों के समान महसूस हो सकती हैं l
यीशु ने एक विधवा के दान का वास्तविक आकार - और दिल देखा – जब उसने मंदिर के एक दान पेटी में दो सिक्के डाले l उन्होंने बताया कि उसके लिए इसका क्या मतलब है जब उसने कहा, “इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है . . . इसने . . . अपनी सारी जीविका डाल दी है” (मरकुस 12:43-44) l
विधवा अपनी स्थिति के विषय शांत थी लेकिन यीशु ने पहचान लिया कि दूसरों ने जिसे एक छोटा दान समझा था वह उस विधवा के लिए बलिदान था l वह हमारे जीवन को उसी तरह से देखता है l काश हम उसकी असीम समझ में आराम पाएँ l
सुन्दरता के लिए समय
कई पश्चिमी देशों में दिसम्बर और जनवरी के सर्दियों के महीने कई हफ़्तों के लिए ठन्डे और नीरस होते हैं : बर्फ के टुकड़ों के बीच से निकलते मटमैले घास, धुंधला आसमान, और कंकाल वृक्ष l यद्यपि, एक दिन कुछ असामान्य रात भर में हुआ l तुषार ने बर्फ के क्रिस्टलों से सभी वस्तुओं पर एक आवरण बना दिया था l बेजान और निराशाजनक परिदृश्य एक सुन्दर दृश्य बन गया था जो सूरज के प्रकाश में चमक रहा था और जिसने मुझे चकाचौंध कर दिया l
कभी-कभी हम समस्याओं को उस कल्पना के बिना देखते हैं जिससे विश्वास विश्वास होता है l हम उम्मीद करते हैं कि दर्द, डर और निराशा हमें हर सुबह सलाम करेगा, लेकिन कुछ अलग होने की संभावना को नज़रंदाज़ करते हैं l हम परमेश्वर की शक्ति के द्वारा स्वास्थ्यलाभ, वृद्धि या जीत की उम्मीद नहीं करते हैं l फिर भी बाइबल कहती है कि परमेश्वर वह है को मुश्किल समय में हमारी मदद करता है l वह टूटे हुए दिलों को आरोग्य करता है और बंधन से लोगों को मुक्त करता है l वह विलाप करनेवालों के सिर पर “राख दूर करके सुन्दर पगड़ी [बांधता है] . . . हर्ष का तेल [लगाता है] और उनकी उदासी हटाकर यश का ओढ़ना [ओढ़ाता है]” (यशायाह 61:3) l
ऐसा नहीं है कि परमेश्वर केवल तब ही हमें खुश करना चाहता है जब हमारे पास समस्याएँ हैं l यह है कि वह स्वयं ही परीक्षा के दौरान हमारी आशा है l भले ही हमें असली राहत पाने के लिए स्वर्ग की प्रतीक्षा करने पड़े, परमेश्वर हमारे साथ उपस्थित है, हमें उत्साहित कर रहा है और अक्सर हमें खुद की झलक दे रहा है l हमारे जीवन की यात्रा में, हम संत औगुस्टीन के शब्दों को समझ सकते हैं : “मेरे सबसे गहरे घाव में मैंने आपकी महिमा देखी, और उसने मुझे चकाचौंध कर दिया l”
हमारा मार्गदर्शक प्रकाश
एक संग्रहालय में, मैं प्राचीन दीपों/चिरागों के प्रदर्शनी के निकट ठहर गया l एक संकेत ने दर्शाया कि वे इस्राएल के हैं l नक्काशीदार डिजाइनों से सजे, इन अंडाकार आकर के मिटटी के बर्तनों में दो छिद्र थे – एक ईंधन के लिए, और एक बाती के लिए l हालाँकि इस्राएली आमतौर पर उन्हें दीवार के आलों(alcove) में इस्तेमाल करते थे, लेकिन काफी छोटा होने के कारण वह किसी व्यक्ति के हाथ की हथेली में फिट हो जाता था l
शायद इस तरह के छोटे प्रकाश ने राजा दाऊद को एक प्रशंसा गीत लिखने के लिए प्रेरित किया जिसमें उसने कहा, “हे यहोवा, तू ही मेरा दीपक है, और यहोवा मेरे अंधियारे को दूर करके उजियाला कर देता है” (2 शमूएल 22:29) l दाऊद ने इन शब्दों को परमेश्वर द्वारा युद्ध में विजय देने के बाद गाया l अपने ही देश के अन्दर और बाहर दोनों के प्रतिरोधियों ने छिपकर उसे मारने का इरादा किया था l परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध के कारण, दाऊद अँधेरे में दुबका नहीं l वह उस भरोसे के साथ शत्रु के साथ मुकाबले में आगे बढ़ा जो परमेश्वर की उपस्थिति से आता है l परमेश्वर की सहायता के साथ, वह उन चीजों को स्पष्ट रूप से देख सकता था ताकि वह अपने लिए, अपने सैनिकों के लिए और अपने राष्ट्र के लिए अच्छे निर्णय ले सके l
दाऊद ने अपने गीत में जिस अन्धकार का वर्णन किया है, उसमें दुर्बलता, पराजय और मृत्यु का डर था l हममें से बहुत से लोग उसी प्रकार की चिंताओं के साथ जीते हैं, जो घबराहट और तनाव पैदा करते हैं l जब अँधेरा हम पर दबाव डालता है, हम शांति पाते हैं कि परमेश्वर हमारे साथ भी है l जब तक हम यीशु से आमने सामने नहीं मिलेंगे, तब तक पवित्र आत्मा की दिव्य ज्योंति हमारे मार्ग को रोशन करने के लिए हमारे अंदर रहती है l
खतरनाक सामग्री
साईरन की आवाज़ बढ़कर कानों को चुभने वाली आवाज़ तक बढ़ गयी जब एक आपातकालीन वाहन गति से मेरे कार के निकट से निकली l उसकी चमकती रोशनी ने मेरे कार की विंडशील्ड(कार का हवारोधी शीशा) से होकर चमकते हुए, ट्रक के किनारे पर छपे हुए “खतरनाक सामग्री” शब्दों को प्रकाशित कर दी l बाद में मुझे पता चला कि यह किसी विज्ञान प्रयोगशाला की ओर गति से जा रहा था जहाँ 400 गैलन सल्फ्यूरिक एसिड का कंटेनर(container) रिसना शुरू हो गया था l आपातकालीन श्रमिकों को इसे तुरंत रोकना था क्योंकि यह अपने संपर्क में आनेवाले किसी भी चीज को क्षति पहुँचा सकता था l
जैसे ही मैंने इस समाचार पर विचार किया, मैंने सोचा कि मेरे मुँह से कठोर या आलोचनात्मक शब्द “रिसने” पर यदि हर समय साईरन की तेज़ आवाज़ सुनाई देती है तो क्या हो सकता है? दुर्भाग्यवश, यह हमारे घर के चारों ओर कोलाहलपूर्ण हो सकता था l
नबी यशायाह ने अपने पाप के विषय जागरूकता की इस भावना को साझा किया l जब उसने एक दर्शन में परमेश्वर की महिमा देखी, वह अपनी अयोग्यता से अभिभूत हो गया l उसने पहचान लिया कि वह “अशुद्ध होंठवाला मनुष्य” था और उसी समस्या को साझा करने वाले लोगों के साथ रहता था (यशायाह 6:5) l उसके आगे जो हुआ मुझे आशा देती है l एक स्वर्गदूत ने एक अंगारे से उसके होंठों को छूकर समझाया, “तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए” (पद.7) l
हम पल पल अपने शब्दों के विषय निर्णय कर सकते हैं – लिखित या उच्चारित दोनों l क्या वो “खतरनाक” सामग्री होगी, या हम परमेश्वर की महिमा को हमें दोषी ठहराने देंगे और उसके अनुग्रह को हमें चंगा करने देंगे ताकि हम जो भी व्यक्त करते हैं उसके द्वारा उसकी महिमा हो?
एक बंधन में बंधे हुए
एक सहेली ने मुझे एक घर के अन्दर लगानेवाला एक पौधा दी जो चालीस वर्षों से अधिक समय से उसके पास था l वह पौधा मेरी ऊंचाई का था, और उसके अलग-अलग कमजोर तनों से बड़े पत्ते निकलते थे l समय के साथ, पत्तों के वजन ने पौधे के तीनों तनों को भूमि की ओर नीचे झुका दिए थे l उसके तनों को सीधा करने के लिए, मैंने उस गमले के नीचे से खूंटा से सहारा देकर पौधे को खिड़की के निकट रख दिया ताकि सूर्य के किरणों से उसके पत्ते सीधे हो जाएँ और पौधे की ख़राब स्थिति ठीक हो जाए l
उस पौधे को प्राप्त करने के शीघ्र बाद, मैंने एक स्थानीय व्यवसायिक केंद्र के प्रतीक्षालय में उसी प्रकार का एक पौधा देखा l वह भी तीन पतले तनों से उगा था, परन्तु उनको मजबूती देने के लिए उन्हें एक साथ बाँध कर, उनके भीतरी भाग को और अधिक मजबूत कर दिया गया था l यह पौधा बिना किसी सहायता के सीधा खड़ा था l
कोई भी दो व्यक्ति एक ही “गमले” में वर्षों तक रह सकते हैं, फिर भी अलग अलग बढ़ सकते हैं और परमेश्वर की आशीषों में से कुछ ही का आनंद प्राप्त कर सकते हैं l जब परमेश्वर के साथ उनके जीवन मिल जाते हैं, हालाँकि, अब स्थायित्व और निकटता का बहुत बड़ा भाव है l सम्बन्ध और अधिक मजबूत हो जाएगा l “जो डोरी तीन धागों से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती” (सभोपदेशक 4:12) l
घरेलु पौधे की तरह, विवाह और मित्रता को पोषण की ज़रूरत होती है l इन संबंधों की देखभाल में आत्मिक रूप से एक होना ज़रूरी है ताकि हर एक विशेष बंधन के मध्य में परमेश्वर उपस्थित है l वह प्रेम और अनुग्रह का अनंत श्रोत है – चीजें जिनकी हमें परस्पर जुड़कर आनंदित रहने के लिए सबसे अधिक ज़रूरत है l