भरपूर जीवन
वर्ष 1918 था, प्रथम विश्व युद्ध के अंत के करीब, और फोटोग्राफर एरिक एनस्ट्रोम अपने काम का एक पोर्टफोलियो(सूची) बना रहे थे l वह एक तस्वीर को शामिल करना चाहते थे जिसने एक ऐसे समय में परिपूर्णता की भावना का संचार किया जो बहुत सारे लोगों को काफी खाली महसूस हुआ l अपनी अब तक की बहुप्रतीक्षित तस्वीर में, एक दाढ़ी वाला वृद्ध व्यक्ति एक मेज पर बैठा है, जिसका सर झुका हुआ है और उसके हाथ प्रार्थना में लगे हुए हैं l उसके सामने केवल एक किताब, चश्मा, एक कटोरी दलिया, एक ब्रेड और एक चाक़ू है l अधिक कुछ नहीं, लेकिन कुछ भी कम नहीं l
कुछ लोग कह सकते हैं कि तस्वीर अभाव प्रगट कर रही है l लेकिन एनस्ट्रोम की बात इसके विपरीत थी : यहाँ एक पूर्ण जीवन है, आभार में जीया गया जीवन, एक जीवन जिसे आप और मैं हमारी परिस्थितियों की परवाह किये बिना अनुभव कर सकते हैं l यीशु युहन्ना 10 में शुभसंदेश की घोषणा करता है : “बहुतायत का जीवन” (पद.10) l हम ऐसे शुभसंदेश को गंभीर क्षति पहुंचाते हैं, जब हम भरपूरी को कई चीजों के साथ जोड़ते हैं l जिस परिपूर्णता की बात यीशु करता है, वह सांसारिक श्रेणियों जैसे कि धन, या अचल संपत्ति में मापा नहीं जाता है, बल्कि एक दिल, मस्तिष्क, आत्मा, और कृतज्ञता में ताकत है कि अच्छा चरवाहा “भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है” (पद.11), और हमारी और हमारी दैनिक ज़रूरतों की चिंता करता है l यह एक भरपूर जीवन है – परमेश्वर के साथ आनंददायक सम्बन्ध – जो हम में से हर एक के लिए संभव है l
प्रशंसा की जीवन शैली
वालस स्टेग्नर की माँ की मृत्यु पचास वर्ष की उम्र में हुयी l जब वालस अस्सी वर्ष का हुआ, उसने अंततः उन्हें एक पत्र लिखा – “पत्र, बहुत देर बाद(Letter, Much Too Late)” – जिसमें उसने एक महिला के गुणों की प्रशंसा की, जो बड़ी हुयी, जिसने विवाह किया, और कठिन दिनों की कठोरता में दो बेटों की परवरिश की l वह उस प्रकार की पत्नी और माँ थी जो उत्साहित करनेवाली थी, यहाँ तक कि उन लोगों के लिए भी जो कम चाहने योग्य थे l उसने अपनी माँ की आवाज़ की ताकत से उन्हें याद किया l उसने लिखा : “तुमने कभी गाने का अवसर नहीं खोया l” जब तक वह जीवित रही, उसकी माँ ने बड़ी और छोटी आशीषों के लिए धन्यवाद देते हुए गाया l
भजनकार ने भी गाने का अवसर जाने नहीं दिया l उसने तब गाया जब दिन अच्छे थे, और जब वे इतने अच्छे नहीं थे l गीत विवशता अथवा दबाव में नहीं थे, परन्तु “आकाश और पृथ्वी . . . [के] कर्ता” (146:6) के प्रति स्वाभाविक प्रतिउत्तर था और किस प्रकार वह “भूखों को रोटी देता है” (पद.7) और “अंधों को आँखें देता है” (पद.8) और “अनाथों और विधवा .को . . . संभालता है” (पद.9) l यह वास्तव में गायन की जीवन शैली है, जो समय के साथ-साथ ताकत पैदा करता है जब दैनिक भरोसा “याकूब के परमेश्वर” में रखा जाता है जो “सदा के लिए” विश्वासयोग्य रहता है (पद.5-6) l
हमारी आवाजों की गुणवत्ता मुद्दा नहीं है, परन्तु परमेश्वर की भलाई की निरंतरता के लिए हमारा प्रत्युत्तर – प्रशंसा की जीवन शैली l जैसा कि पुराना गीत कहता है : मेरे दिल के भीतर एक मधुर गीत है l”
दाता को न भूलें
यह क्रिसमस से ठीक पहले था, और उसके बच्चों को कृतज्ञता(gratitude) को समझना मुश्किल लग रह था l वह जानती थी कि उस तरह की सोच में फिसलना कितना आसान था, लेकिन वह यह भी जानती थी कि वह अपने बच्चों के दिलों के लिए कुछ बेहतर चाहती थी l इसलिए उसने घर में घूमकर लाइट की स्विच, रसोई-भण्डार, रेफ्रीजरेटर का दरवाजा, वाशिंग मशीन और ड्रायर(कपड़े सुखाने की मशीन), और पानी की टोंटी पर रिबन(bow/ribbon) लगा दिए l प्रत्येक रिबन के साथ एक हाथ से लिखित नोट था : “कुछ एक उपहार जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें अनदेखा करना आसान है, इसलिए मैंने उन पर रिबन लगा दिए हैं l वह हमारे परिवार के लिए बहुत अच्छा है l यह न भूलें कि उपहार कहाँ से आए हैं l”
व्यवस्थाविवरण 6 में, हम देखते हैं कि इस्राएल राष्ट्र के भविष्य में मौजूदा स्थानों पर विजय शामिल था l इस प्रकार वे बड़े फलते-फूलते शहरों में जाकर रहते जो उन्होंने नहीं बनाए थे (पद.10), अच्छे-अच्छे पदार्थों से भरे हुए घरों में रहते जो उन्होंने नहीं भरे थे, और खुदे हुए कुँए, जो उन्होंने नहीं खोदे थे और दाख की बारियाँ और जैतून के वृक्ष, जो उन्होंने नहीं लगाए थे का लाभ प्राप्त करते (पद.11) l इन सभी आशीषों को सरलता से एक ही श्रोत पर वापस ले जाया जा सकता था – “[तुम्हारा] परमेश्वर यहोवा” (पद.10) l और जब परमेश्वर ने प्रेम से इन चीजों को दिया और उससे भी अधिक, मूसा यह सुनिश्चित करना चाहता था कि लोग सावधान रहें और न भूलें (पद.12) l
जीवन के कुछ कालों में भूलना आसान है l लेकिन परमेश्वर की अच्छाई, हमारे आशीषों के श्रोत को आँखों से ओझल न होने दें l
परमेश्वर का विशेष खज़ाना
एक विशाल सिह्हासन कक्ष की लाल्पना करें l सिंहासन पर बैठा हुआ एक महान रजा है l वह सभी प्रकार के परिचारकों से घिरा हुआ है, और प्रत्येक अपने सर्वोत्तम व्यवहार के साथ है l अब एक ऐसे बॉक्स/डिब्बे की कल्पना करें जो राजा के पाँवों के पास है l समय-समय पर राजा नीचे झुककर उस डिब्बे की सामग्री को अपने हाथों से टटोलता है l और डिब्बे में क्या है? मणि, सोना और रत्न विशेषकर राजा की रुचि अनुसार l इस बॉक्स में राजा का खज़ाना है, एक संग्रह जो उसे बहुत ख़ुशी देती है l क्या आप उस छवि को अपने मन की आँखों में देख सकते हैं?
इस खजाने के लिए इब्री शब्द सेगुलाह(segulah) है, और इसका अर्थ है “विशेष संपत्ति l” यह शब्द पुराने नियम के निर्गमन 19:5; व्यवस्थाविवरण 7:6, और भजन 135:4 में मिलता है, जहाँ यह इस्राएल राष्ट्र का सन्दर्भ देता है l किन्तु वही शब्द चित्र नए नियम में प्रेरित पतरस के कलम द्वारा लिखा गया है l वह “परमेश्वर की प्रजा” का वर्णन कर रहा है, जिन पर “दया हुयी है” (पद.10), जो इस्राएल राष्ट्र के अलावा एक संग्रह है l दूसरे शब्दों में, वह उन लोगों के बारे में बात कर रहा है जो यीशु पर विश्वास करते हैं, यहूदी और गैरयहूदी दोनों l और वह लिखता है, “पर तुम . . . (परमेश्वर की) निज प्रजा हो” (पद.9) l
कल्पना करें! स्वर्ग का महान और शक्तिशाली राजा आपको अपने विशेष खज़ाना में शामिल किया है l उसने आपको पाप और मृत्यु की पकड़ से बचाया है l वह आपको अपना मानता है l राजा के शब्द है, “यह मुझे पसंद है l यह मेरा है l”
शांत जीवन जीना
आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? हम सभी ने इस प्रश्न को बच्चों के रूप में और कभी-कभी व्यस्क के रूप में भी सुना है l प्रश्न जिज्ञासा में उत्पन्न हुआ है, और उत्तर अक्सर महत्वकांक्षा के संकेत के रूप में सुना जाता है l मेरे जवाब वर्षों के दौरान आकार लेते गए, जो एक चरवाहा के रूप में शुरू हुआ, उसके बाद एक ट्रक ड्राईवर, उसके बाद एक सैनिक और मैं कॉलेज में प्रवेश करके एक डॉक्टर बनने की ओर बढ़ा l हालाँकि, मैं एक बार भी याद नहीं कर सकता कि किसी ने सुझाव दिया था या मैंने जानबूझकर “शांत जीवन” का पीछा किया था l
फिर भी पौलुस ने थिस्सलुनीकियों को यही बताया l पहले, उसने उनसे एक दूसरे से और परमेश्वर के सम्पूर्ण परिवार से और अधिक प्रेम करने का निवेदन किया (1 थिस्सलुनीकियों 4:10) l फिर उसने उन्हें एक सामान्य नसीहत दी जिसमें उनके हाथों द्वारा कोई भी विशिष्ट काम सम्मिलित होगा l “चुपचाप रहने . . . का प्रयत्न करो” (पद.11) l अब पौलुस का वास्तव में क्या मतलब था? उसने स्पष्ट किया : “[तुम] अपना-अपना काम काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो” ताकि बाहरवाले तुम्हें आदर दें और तुम किसी के लिए बोझ न बनो (पद.11-12) l हम बच्चों को उनके गुण या जुनून का पीछा करने में हतोत्साहित नहीं करना चाहते हैं, लेकिन शायद हम उन्हें प्रोत्साहित कर सकते हैं कि वे जो कुछ भी करना चाहते हैं, वे शांत भाव से करें l
जिस संसार में हम निवास करते हैं, महत्वकांक्षी और शांत शब्द इससे और अधिक अलग प्रतीत नहीं हो सकते थे l लेकिन वचन हमेशा प्रासंगिक हैं, इसलिए शायद हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि शांत जीवन जीना में कैसा महसूस हो सकता है?
अपने हथियारबंदी पर भरोसा करें
एक युवा लेखक के रूप में जब मैं लेखन कार्यशाला में होता था अक्सर अपने विषय अनिश्चित होता था l मैं अपने चारोंओर देखता था और कमरों को असाधारण व्यक्तियों से भरा हुआ पाता था, यदि आप वास्तव में देखेंगे – औपचारिक प्रशिक्षण या वर्षों के अनुभव के साथ l मेरे पास इनमें से कोई भी नहीं था l परन्तु मेरे पास सुनने के कान थे जो बाइबल के किंग जेम्स अनुवाद(King James Version) की भाषा और उच्चारण और आवाज़ के उतार-चढ़ाव द्वारा साकार स्वरुप में आकार प्राप्त थे l एक प्रकार से, जो मैं करता था, यह ही मेरी अधिक हथियारबंदी थी, और उसके द्वारा मेरी लेखन शैली और आवाज़ मेरे लिए और मेरी आशा है कि दूसरों का आनंद बन गया है l
हमें यह चिन्ह दिखायी नहीं देता है कि जब गोलियात से लड़ने के लिए शाऊल का हथियार धारण करने की बात आयी तो वह युवा चरवाहा दाऊद अपने विषय अनिश्चित था (1 शमूएल 17:38-39) l वह उसे पहनकर बिलकुल चल नहीं पा रहा था l दाऊद ने समझ लिया कि एक व्यक्ति का कवच दूसरे के लिए कैदखाना बन सकता है – “इन्हें पहिने हुए मुझ से चला नहीं जाता” (पद.39) l इसलिए उसे उसपर भरोसा था जो वह जानता था l परमेश्वर ने उसे उस क्षण के लिए तैयार किया था जिसकी ज़रूरत थी (पद.34-35) l दाऊद अपनी हथियारबंदी के रूप में, गोफन और पत्थर से परिचित था, और परमेश्वर ने उस दिन इस्राएल के योद्धाओं को हर्ष दिलाने के लिए उन्हीं का उपयोग किया l
क्या आपने कभी अपने विषय अनिश्चित महसूस किया है, सोचते हुए कि यदि मेरे पास वह होता जो किसी और के पास है, तब मेरा जीवन भिन्न होता? उन वरदानों और अनुभवों पर विचार करें जो परमेश्वर ने ख़ास तौर पर आपको दिया है l परमेश्वर द्वारा आपको दी गयी हथियारबंदी पर भरोसा करें l
अंतिम शब्द
उसका नाम सारालिन था, और स्कूल में साथ पढ़ते समय मैं उसका दीवाना था l उसकी मुस्कराहट अद्भुत थी l मुझे नहीं मालूम कि वह उसके प्रति मेरी दीवानगी के विषय जानती थी, परन्तु मुझे शक है कि वह जानती थी l स्नातक की पढ़ाई के बाद मुझे नहीं मालूम वह कहाँ चली गयी l हम दोनों का जीवन अलग- अलग रास्ते पर चल दिया जैसा कि जीवनों के साथ होता है l
मैं कुछ ऑनलाइन मंचों(forum) के माध्यम से अपने स्नातक कक्षा के साथ सम्बन्ध रखता हूँ, और मैं सारलिन की मृत्यु के विषय सुनकर अत्यंत दुखित हुआ l मैं सोचता रहा कि इन बीते वर्षों में उसके जीवन ने कौन सी दिशा ली थी l मेरी उम्र बढ़ने के साथ ऐसी बातें और भी अधिक हो रही हैं, मित्रों और परिवार को खोने का अनुभव l परन्तु हममें से अनेक इसके विषय बात नहीं करना चाहते हैं l
जबकि हम अभी भी दुखित होते हैं, पौलुस जिस आशा के विषय बात करता है वह यह है कि मृत्यु अंत नहीं है (1 कुरिन्थियों 15:54-55) l कुछ है जो उसके बाद आने वाला है, एक अन्य शब्द : पुनरुत्थान l पौलुस उस आशा को मसीह के पुनरुत्थान की सच्चाई में स्थापित करता है (पद.12), और कहता है “और यदि मसीह नहीं जी उठा, तो हमारा प्रचार करना भी व्यर्थ है, और तुम्हारा विश्वास भी व्यर्थ है” (पद.14) l यदि विश्वासी के रूप में हमारी आशा केवल इसी संसार तक सिमित है, तो यह केवल दुर्गति है (पद.19) l
“जो मसीह में सो गए हैं” (पद.18) हम उन्हें एक दिन फिर देखेंगे – दादा-दादी, नाना-नानी और माता-पिता, मित्र और पड़ोसी, या शायद स्कूल के मित्र जिनसे हम प्रेम करते थे l
मृत्यु के पास अंतिम अधिकार नहीं है l पुनरुत्थान के पास है l
गाने का एक कारण
एक व्यक्ति के लिए जो नियमावली के अनुसार जीवन जीता है, कहने का अर्थ है कि, यह एक बड़ी हार महसूस हो रही थी l मैं क्या करता? ठीक है, मुझे नींद आ गयी l जब हमारे बच्चे शाम को बाहर जाते हैं उन्हें दिए गए समय में ही घर लौटना होता है l वे अच्छे बच्चे हैं, परन्तु मेरी आदत हो गयी है कि उनके हाथों से सामने वाले दरवाजे की घुंडी घुमाने की आवाज़ आने तक मैं इंतज़ार करूँ l मुझे ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है : मैंने ऐसा करने का चुनाव किया है l परन्तु एक रात मैंने अपनी बेटी को मुस्कराकर मुझे कहते हुए सुना, “पापा, मैं सुरक्षित हूँ l आपको सो जाना चाहिए l” हमारे श्रेष्ट इरादों के बावजूद, पिता अपने प्रहरी स्थानों पर सो जाते हैं l यह नम्र करने वाली बात थी, और यह मानवीय है l
परन्तु यह परमेश्वर के साथ कभी नहीं होता है l भजन 121 उसके विषय जो अपने बच्चों का निगहबान और संरक्षक हैं का पुनः आश्वस्त करनेवाला एक गीत है l भजनकार घोषित करता है कि परमेश्वर जो हमारी हिफ़ाजत करता है “कभी न ऊंघेगा” (पद.3) l और इस बात पर बल देने के लिए, वह पद.4 में इस सच्चाई को दोहराता है : वह “न ऊंघेगा और न सोएगा l”
क्या कभी आप कल्पना कर सकते हैं? परमेश्वर अपने प्रहरी स्थान पर कभी नहीं सोता है l वह सदैव हमारी हिफ़ाजत करता है – बेटा और बेटी और चाचा और चाची और माता, और पिता सभों की l यह इतना आवश्यक नहीं कि यह उसे करना होगा, परन्तु इसके बदले कि, अपने प्रेम के कारण, वह ऐसा करता है l इस प्रतिज्ञा के विषय गाने लायक है l
शेखी मारना
वास्तविक होने का अर्थ क्या होता है? छोटे बच्चों की पुस्तक द वेलवेटीन रैबिट(The Velveteen Rabbit) में इस बड़े प्रश्न का उत्तर दिया गया है l यह नर्सरी(शिशु सदन) में खिलौनों और वेलवेटीन खरगोश की कहानी है जिसमें वह वास्तविक बनने के लिए एक बच्चे को उसे प्यार करने की अनुमति देता है l एक और खिलौना वृद्ध और बुद्धिमान स्किन घोड़ा था l उसने “मशीनी खिलौने को शेखी मारते और इठलाते देखा था, और धीरे-धीरे टूटकर . . . और समाप्त होते देखा था l” वे प्रभावशाली और अच्छे दिखाई देते थे, किन्तु जब प्रेम करने की बात आयी उस समय उनका शेखी बघारना आख़िरकार व्यर्थ निकला l
शेखी मारना प्रबलता से आरम्भ होता है, परन्तु आखिर में यह धूमिल हो जाता है l यिर्मयाह तीन ऐसे क्षेत्र बताता है जहां यह प्रगट है : “बुद्धिमत्ता . . . ताकत . . . धन” (यिर्मयाह 9:23) l बुद्धिमान वृद्ध नबी अपने लम्बे अनुभव से एक या दो बातें जानता था, और उसने प्रभु की सच्चाई द्वारा ऐसे घमण्ड का सामना किया : “परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ l (पद.24) l
आइए हम, बच्चे, अपने परमेश्वर, हमारे अच्छे पिता के विषय घमण्ड करें l उसके महान प्रेम की कहानी में, आप और हम एक अद्भुत तरीके से बढ़ते हैं और अधिकाधिक वास्तविक बनते जाते हैं l