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Articles by किर्स्टेन होल्मबर्ग

अत्यंत बेहतर

मेरा जन्म दिन मेरी माँ के जन्मदिन के बाद आता है l एक किशोरी के रूप में, मैं अपने बजट में रहकर ऐसा उपहार खरीदने का प्रयास करती हूँ जिससे मेरी माँ खुश हो जाए l उन्होंने मेरे उपहार को हमेशा पसंद किया, और अगले दिन मेरे जन्मदिन पर उसे मुझे दे दिया l कोई शक नहीं कि उनका उपहार मेरे उपहार को मात देता था l उनका उद्देश्य मेरे उपहार को फीका करना नहीं होता था, बल्कि वो अपने साधन से देती थीं, जो  मेरे से कहीं अधिक था l

मेरी माँ को देने की मेरी इच्छा मुझे दाऊद का परमेश्वर के लिए एक घर बनाने की इच्छा याद दिलाती है l अपने महल और उस तम्बू के विषय जहाँ परमेश्वर ने खुद को प्रगट किया था के बीच विरोध से प्रभाबित होकर, दाऊद परमेश्वर के लिए एक मंदिर बनाना चाहा l दाऊद के देने की इच्छा पूर्ति के स्थान पर, परमेश्वर ने उसे अत्यंत बेहतर उपहार दिया l परमेश्वर की प्रतिज्ञा थी कि दाऊद का एक पुत्र (सुलेमान) मंदिर ही नहीं बनाएगा (1 इतिहास 17:11), किन्तु वह दाऊद के लिए एक घर, एक वंश बनाएगा l वह प्रतिज्ञा सुलेमान से आरम्भ होकर अंततः यीशु में पूर्ण हुई, जिसकी राजगद्दी वास्तव में “सदैव स्थिर” है (पद. 12) l दाऊद अपने सिमित श्रोत में से देना चाहता था, किन्तु परमेश्वर ने कुछ असीमित देने की प्रतिज्ञा की l

दाऊद की तरह, हम भी परमेश्वर को कृतज्ञता और प्रेम से दें l और सर्वदा महसूस करें कि उसने यीशु में हमें अधिक बहुतायत से दिया है l

पर्याप्त

हम पति-पत्नी से हमारे घर में छोटे समूह की मेजबानी करने के आग्रह को मैंने अस्वीकार किया l बैठने के लिए अपर्याप्त स्थान और छोटा घर होने से मैंने  अयोग्यता महसूस की l हम यह भी नहीं जानते थे, हम इस चर्चा में मददगार होंगे या नहीं l मैं चिंतित थी कि मुझे भोजन पकाना होगा जिसके लिए मेरे पास उत्सुकता और धन कम था l मेरी समझ में हमारे पास “प्रयाप्त” साधन नहीं था, हमारे लिए करने को “पर्याप्त” नहीं था l किन्तु हम परमेश्वर और अपने समुदाय के लिए करना चाहते थे, इस कारण भय के बाद भी, हम तैयार हो गए l अगले पाँच वर्षों तक अपने बैठक में इस समूह की मेजबानी आनंददायक थी l

मैं परमेश्वर के सेवक, एलिशा के पास रोटी लानेवाले व्यक्ति के अन्दर भी समान अनिच्छा देखता हूँ l  एलिशा ने उसे लोगों को परोसने को कहा था, किन्तु वह व्यक्ति शंकित था  कि सौ लोगों के लिए वह अपर्याप्त होगा l वह अपनी मानवीय समझ में भोजन को अपर्याप्त मानकर परोसना नहीं चाहा l फिर भी वह पर्याप्त से अधिक था (2 राजा 4:44), क्योंकि परमेश्वर ने आज्ञाकारिता में दिए हुए उसके दान को, पर्याप्त बना दिया l

अयोग्य महसूस करने पर, अथवा अपने दान को अपर्याप्त समझने पर, याद रखे कि परमेश्वर चाहता है कि जो हमारे पास है उसे हम विश्वासयोग्य आज्ञाकारिता में दे दें l वह ही उसे “पर्याप्त” कर देगा l

खाली से भरपूर

बच्चों की एक लोकप्रिय पुस्तक में गाँव के एक गरीब बच्चे की कहानी है जिसने राजा के सम्मान में अपनी टोपी उतार दी l तुरंत ही दूसरी उसके सिर पर आ गयी, जिसे राजा अपमान समझकर क्रोधित हुआ l महल में दण्डित करने ले जाते समय बार्थोल्म्यु टोपी उतरता गया और लगातार नयी सुन्दर, बहुमूल्य मणि जड़ी और पंखों से सज्जित टोपियाँ उसके सिर पर आती गयी l राजा डरविन ने 500 वीं टोपी पसंद की और, बार्थोल्म्यु को क्षमा करके सोने के 500 टुकड़ों में टोपी खरीद ली l आखिर में, बार्थोल्म्यु परिवार की जीविका के लिए आज़ादी और  धन के साथ अपने घर चला गया l

क़र्ज़ चुकाने में नाकाम और बच्चों के दासत्व में जाने के भय से एक विधवा आर्थिक तंगी में एलिशा के पास आई (2 राजा 4) l परमेश्वर ने एक हांड़ी तेल को गुणित करके क़र्ज़ भरने के लिए और दैनिक आवश्यकताओं को पूरी करने के लिए उधार लिए गए अनेक बर्तन भर दिए (पद.7) l

जैसे परमेश्वर ने विधवा को आर्थिक मदद दी, वह मेरे लिए उद्धार का प्रबंध करता है l मैं पाप से दिवालिया हूँ, किन्तु यीशु ने मेरा क़र्ज़ भर दिया- और मुझे अनंत जीवन भी देता है l यीशु के  बिना, हम उस निर्धन, गाँव के बच्चे की तरह अपने राजा के विरुद्ध किये गए गुनाह के बदले कुछ नहीं दे सकते l परमेश्वर हमारे लिए अद्भुत रूप से अत्यधिक फिरौती देता है, और उस पर भरोसा करनेवालों को अनंत जीवन भी देगा l  

परमेश्वर को दे दें

किशोरावस्था में, बड़ी चुनौतियों अथवा जोखिम भरे बड़े फैसलों से परेशान होने पर, मेरी माँ ने दृष्टिकोण प्राप्त करने हेतु उन्हें लिख लेने के फाएदे सिखाए l किसी ख़ास अध्ययन अथवा कार्य के विषय अनिश्चित होने पर अथवा वयस्क होने की अवस्था की डरावनी सच्चाइयों से कैसे निपटा जाए, मैंने अपनी माँ की तरह उनकी मूल सच्चाइयों, उसके उपयुक्त परिणामों के साथ संभव कार्यवाही योजनाओं को लिखने की आदत बनायी l उस पृष्ठ पर मन लगाते हुए, मैं परेशानी से कदम पीछे हटाते हुए उन्हें अपनी भावनाओं की बजाए सच्चाइयों पर आधारित होकर देख पाती थी l

जिस तरह कागज़ पर विचारों को अंकित करने से मुझे नए दृष्टिकोण मिलते थे, प्रार्थना में परमेश्वर के सामने मन लगाने से उसका दृष्टिकोण प्राप्त होता है और हम उसकी सामर्थ्य याद कर पाते हैं l मनहूस शत्रु से एक चुनौतीपूर्ण पत्र प्राप्त करने के बाद राजा हिजकिय्याह ने ऐसा ही किया l अशुरों ने अनेक राष्ट्रों की तरह यरूशलेम को भी नाश करने की धमकी दी l हिजकिय्याह ने पत्र को प्रभु के आगे फैलाकर प्रार्थनापूर्वक अपने लोगों के छुटकारे के लिए प्रार्थना की ताकि संसार पहचान जाए कि  वह “केवल यहोवा” है (2 राजा 19:19) l

घबराहट, डर, या गहरी जानकारी वाली स्थितियों का सामना करते हुए हमें अपनी योग्यता से बढ़कर चाहिए l हिजकिय्याह की तरह प्रभु के पास जाएँ l उसकी तरह हम भी परमेश्वर के समक्ष अपनी समस्या रखकर अपने बेचैन हृदयों के लिए उसके मार्गदर्शन पर भरोसा रखें l

ईमानदार खोज

प्रत्येक शनिवार हमारा परिवार दौड़ के मैदान के किनारे खड़ा होकर मेरी बेटी को उत्साहित करता है जब वह हाई स्कूल क्षेत्र पार टीम के साथ दौड़ती है l समापन रेखा को पार करने के बाद, सभी धावक फिर से अपने टीम के सदस्यों, कोच और सभी माता-पिता से मिलते हैं l समाप्त करनेवालों के चारों-ओर कभी-कभी तो 300 से भी अधिक लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, और इतने लोगों के बीच एक को ढूँढना कठिन होता है l हम ध्यानपूर्वक भीड़ में उसको तब तक ढूंढते हैं जब तक वह मिल नहीं जाती है, और धाविका, हमारी दुलारी बेटी के चारों ओर अपनी बाहें डालते हैं जिसे  हम देखने आए थे l

बेबीलोन में सत्तर वर्षों के बन्धुआई के बाद, परमेश्वर यहूदियों को वापस यरूशलेम और यहूदा ले गया l यशायाह उनके लिए परमेश्वर के आनंद का वर्णन करता है, और उनके घर वापसी की तीर्थयात्रा के लिए राजमार्गों और उनको वापस स्वीकार करने के लिए फाटक के तैयार करने का वर्णन करता है l परमेश्वर अपने पवित्र लोगों के लिए अपनी बुलाहट को दृढ़ करके उनके गौरव को एक नए नाम से पुनःस्थापित करता है, “यहोवा के छुड़ाए हए . . . न-त्यागी हुयी नगरी” (यशा. 62:12) l वह उनको बेबीलोन के अलग-अलग स्थानों से वापस अपने पास लौटा लाया l

इस्राएलियों की तरह, हम भी परमेश्वर की प्रिय संतान हैं, जिसे परमेश्वर ईमानदारी से खोजता है l यद्यपि एक समय हमारे पाप ने हमें उससे दूर कर दिया, यीशु का बलिदान हमें वापस उसके पास ले आता है l वह जी लगाकर हमें दूसरों के बीच खोजता है, और हृदय से गले लगान चाहता है l

गहराई में से

समस्या के संकेत की चेतावनी पर मैंने जल की बारीकी से जांच की l मैंने जीवन-रक्षक की छः घंटे की शिफ्ट ड्यूटी में, तरणताल के किनारे से तैरनेवालों की सुरक्षा पर ध्यान देता रहा l अपनी जगह छोड़ना, अथवा अपनी सावधानी में ढीला होना, तरणताल में तैरनेवालों के लिए भयानक परिणाम ला सकता था l किसी तैराक की चोट या कौशल की कमी के कारण उसके डूबने की आशंका में, उसे तरणताल के बाहर निकलना मेरी जिम्मेदारी थी l

पलिश्तियों के विरुद्ध युद्ध में परमेश्वर की सहायता अनुभव करने के बाद (2 शमूएल 21:15-22), दाऊद अपने बचाव की तुलना “गहरे जल” (22:17) में से खींचकर बाहर निकाले जाने से करता है l स्वयं दाऊद का-और उसके लोगों का जीवन-उसके शत्रुओं के गंभीर खतरे में थी l परमेश्वर ने मुसीबत में डूबते हुए दाऊद के जीवन को बाहर निकाल लिया l जबकि तैरनेवालों की सुरक्षा के लिए जीवन-रक्षकों को भुगतान किया जाता है, अपितु, परमेश्वर, दाऊद से प्रसन्न  होकर उसे बचाया ([पद. 20) l मेरा हृदय यह जानकार अति आनंदित है कि परमेश्वर बाध्यता के कारण नहीं किन्तु अपनी इच्छा  से मेरी सुरक्षा करता है l

जीवन की समस्याओं से अभिभूत होने पर, हम इस ज्ञान में विश्राम पा सकते हैं कि परमेश्वर हमारा जीवन-रक्षक है, हमारे संघर्ष को जानता है और, अपनी प्रसन्नता के कारण हमारी सुरक्षा करता है l

पहले जाना

हमने धीरज से अपने बेटे को ठीक होने और हमारे परिवार में अपने नए जीवन को अनुकूल बनाने में मदद की l एक अनाथालय में उसके आरंभिक दिनों का मानसिक आघात उसको नकारात्मक बना रहा था l जबकि मुझ में उसके आरंभिक दिनों की कठिनाइयों में अत्यधिक सहानुभूति थी, मैं भावनात्मक रूप से उसके व्यवहारों के कारण उससे खुद को अलग करना चाही l लज्जित होकर, मैंने उसके चिकित्सक से बताया l उसके कोमल उत्तर कठोर था : “वह चाहता है कि उसके प्रेम दिखने से पूर्व आप आगे बढ़कर उसे प्रेम दिखाएं l”

यूहन्ना परमेश्वर के प्रेम को परस्पर प्रेम का स्रोत और कारण बताते हुए पत्री के पानेवालों को प्रेम की अद्वितीय गहराई में ले जाता है (1 यूहन्ना 4:7,11) l मैं दूसरों को ऐसा प्रेम दिखाने में अक्षम हूँ, चाहे अजनबी, मित्र, अथवा मेरे अपने बच्चे हों l फिर भी यूहन्ना के शब्द मुझ में ऐसा करने की नूतन इच्छा और योग्यता उत्पन्न करते हैं : परमेश्वर आगे चला l  उसने अपने पुत्र को भेजकर अपने प्रेम की सम्पूर्णता दर्शाया l मैं बहुत धन्यवादित हूँ कि वह हममें से अपना हृदय वापिस लेकर हमारे समान नहीं करता l  

यद्यपि हमारे पापी भाव परमेश्वर के प्रेम को आमंत्रित नहीं करता, वह हमें देने में अटल है (रोमि. 5:8) l उसका “पहले जानेवाला” प्रेम उसके प्रेम हमें परस्पर प्रेम हेतु प्रतिउत्तर एवं प्रतिबिम्ब के रूप में विवश करता है l

टेबल रॉक

मेरे शहर के सामने एक चट्टानी पहाड़ी मैदान, टेबल रॉक पर एक बड़ा, चमकदार क्रूस, खड़ा है l निकट की भूमि पर अनेक घर बनाए गए, किन्तु हाल ही में सुरक्षा कारणों से मालिकों से वहाँ से हटने को बोला गया है l टेबल रॉक के सुदृढ़ आधार पर होने के बावजूद, ये मकान सुरक्षित नहीं हैं l वे अपनी नींव के ऊपर से सरक रहे हैं-करीब तीन इंच प्रतिदिन-जिससे जल पाइपलाइन के टूटने का जोखिम उत्पन्न है, जो सरकन को और बढ़ाएँगी l

यीशु उसके शब्दों को सुनकर उस पर चलनेवालों को चट्टान पर घर बनानेवालों से तुलना करता है (लूका 6:47-48) l उनके घर आंधियों में भी टिके रहते हैं l तुलनात्मक तौर पर, वह कहता है कि जिस घर का नींव सुदृढ़ नहीं है-उसके वचन पर नहीं चलनेवालों की तरह-आंधियों का सामना नहीं कर पाएंगे l

कई अवसर पर, मैं अपने विवेक की बातें नहीं सुनने की परीक्षा में पड़ा हूँ जब परमेश्वर ने मेरे देने से अधिक मुझ से मांगी है, और मेरी सोच थी कि मेरा प्रतिउत्तर “काफी निकट” था l फिर भी सरकती पहाड़ी पर के घरों ने दर्शाया है कि उसके प्रति आज्ञाकारिता की तुलना में “निकटता” महत्वहीन है l उन लोगों की तरह जिन्होंने दृढ़ नींव पर अपने घर बनाए और अक्सर आक्रमण करती जीवन की आंधियाँ सहते हैं, हमें भी अपने प्रभु की बातें पूरी तरह मानना होगा l

अँधेरे पथ

पारिवारिक अवकाश से घर लौटते समय, सड़क मध्य ऑरेगन के कुछ विरान भाग से होकर थी l  लगभग दो घंटों तक हम गहरी घाटियों और मरुभूमि के पठारी क्षेत्रों से होकर निकले l अन्धकार में दस से भी कम गाड़ियों की हेड लाइट्स दिखाई दीं l आख़िरकार,  पहाड़ों के बीच-बीच क्षितिज पर चाँद दिखाई दिया, किन्तु निचले क्षेत्रों से जाते समय छिप गया l मेरी बेटी ने चाँद के प्रकाश को परमेश्वर की उपस्थिति  का ताकीद कहा l मैं परमेश्वर की उपस्थिति बताने हेतु उससे उसे देखने के लिए कहा l उत्तर था, “नहीं, किन्तु यह अवश्य ही लाभदायक रहेगा l

मूसा की मृत्यु पश्चात, यहोशू को परमेश्वर की चुनी हुई इस्राएली प्रजा को प्रतिज्ञात देश में ले जाने हेतु नेतृत्व मिला l दिव्य अधिकार-पत्र प्राप्ति बाद भी, यहोशू कार्य के चुनौतीपूर्ण स्वभाव से चुनौती महसूस किया होगा l परमेश्वर ने भविष्य की यात्रा में यहोशू के  साथ रहने का आश्वासन दिया (यहोशू 1:9) l

जीवन का मार्ग अनिश्चित क्षेत्र से गुज़रता है l हम अस्पष्ट मार्गों में भिन्न स्थितियों में गुज़रते हैं l परमेश्वर का मार्ग सर्वदा दिखाई नहीं देता, किन्तु उसने “जगत के अंत तक सदा” साथ रहने की प्रतिज्ञा की है (मत्ती 28:20) l चाहे कोई भी अनिश्चितता या चुनौती हो हमारे पास महान आश्वासन है l अँधेरे मार्ग में भी, ज्योति हमारे साथ है l