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Articles by किर्स्टेन होल्मबर्ग

ऊपर देखना

भेंगा (अलग-अलग आकार की आँखें) स्क्विड(एक प्रकार का जल जंतु/घोंघा) समुद्र के “गोधुली क्षेत्र” में रहता है, जहाँ सूर्य की किरणें मुश्किल से पहुँचती हैं l स्क्विड का उपनाम उसकी दो बेहद अलग आंखों के लिए एक संदर्भ है : बाईं आंख का समय के साथ विकसित होकर दाएं से काफी बड़ा हो जाना - लगभग दोगुना बड़ा l इस जंतु का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगाया है कि स्क्विड अपनी दाहिनी आंख, छोटी वाली आँख का उपयोग नीचे गहरे अँधेरे में देखने के लिए करता है l बड़ी वाली, बांयी आँख से, ऊपर सूर्य की किरणों की ओर देखती है l
स्क्विड वर्तमान संसार में रहने का मतलब है और भविष्य की निश्चितता में भी हम उन लोगों के रूप में प्रतीक्षा करते हैं, जो “मसीह के साथ जिलाए गए [हैं]” का अविश्वसनीय चित्रण हैं (कुलुस्सियों 3:1) l कुलुस्सियों को लिखे गए पौलुस की पत्री में, उन्हे जोर देकर कहता है कि हमें “स्वर्गीय वस्तुओं पर [अपना] ध्यान लगाना है” क्योंकि हमारा जीवन “मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है” (पद. 2-3) l
पृथ्वीवासी के रूप में जो स्वर्ग में अपने जीवन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, हम अपनी वर्तमान वास्तविकता में हमारे आस-पास क्या हो रहा है, पर अपनी एक आँख प्रशिक्षित करते हैं l लेकिन जिस तरह से स्क्विड की बायीं आंख समय के साथ विकसित होती है, जो एक बड़ी और ऊपर क्या हो रहा है के प्रति संवेदनशील हो जाती है, हम, भी, परमेश्वर के आत्मिक क्षेत्र में काम करने के तरीकों के बारे में हमारी जागरूकता में वृद्धि कर सकते हैं l हम अभी तक पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं कि यीशु में जीवित होने का क्या मतलब है, लेकिन जब हम “ऊपर” देखते हैं, हमारी आँखें इसे अधिकाधिक देखना शुरू कर देंगी l

बताने के लिए दौड़ना

आधुनिक मैराथन(लम्बी दौड़) एक यूनानी दूत,  फाईडीपीडस की कहानी पर आधारित है l किंवदंती के अनुसार,  490 ई.पू. में वह अपने दुर्जेय शत्रु, हमलावर फारसियों के खिलाफ यूनानियों की जीत की घोषणा करने के लिए मैराथन से एथेंस तक लगभग पच्चीस मील (चालीस किलोमीटर) दौड़ा l आज,  लोग एक एथलेटिक उपलब्धि की व्यक्तिगत संतुष्टि के लिए मैराथन दौड़ते हैं,  लेकिन फाईडीपीडस का उसके प्रयास के पीछे एक बड़ा उद्देश्य था : उसके प्रत्येक कदम उसके अपने लोगों को खुशखबरी देने के वास्तविक खुशी के लिए आगे बढ़े थे!

लगभग पाँच सौ साल बाद,  दो महिलाएँ भी खुशखबरी देने के लिए दौड़ पड़ीं - इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण खबर l जब मरियम और मरियम मगदलीनी उस कब्र पर पहुंचीं जहां यीशु को उसकी सूली पर चढ़ाने के बाद रखा गया था,  तो उन्होंने इसे खाली पाया l एक स्वर्गदूत ने उन्हें बताया कि यीशु “”मृतकों में से जी उठा [है]” और उन्हें “उसके शिष्यों को समाचार देने के लिए” दौड़कर जाना है (मत्ती 28:7) l महिलाएँ, जो उन्होंने पाया था “भय और बड़े आनंद के साथ,” शिष्यों को बताने के दौड़ीं (पद.8) l  

यीशु के पुनरुत्थान के सम्बन्ध में हमारे पास वही हर्षित उत्साह हो,  और वह हमें दूसरों के साथ खुशखबरी साझा करने के लिए मज़बूर करे l हमें अपने उद्धारकर्ता के बारे में किसी व्यक्ति को बताने के लिए जिसे हमारे उद्धारकर्ता के विषय जानना ज़रूरी है अगले दरवाजे से आगे “दौड़” लगाने की भी आवश्यकता नहीं है l उसने मृत्यु के विरुद्ध लड़ाई जीत ली है, ताकि हम हमेशा के लिए उसके साथ विजयी रह सकते हैं!

उपस्थित रहना

जब मनोरंजन उद्यान(theme park) के कर्मचारी जेन ने रोहित को अचानक जमीन पर झुककर आंसू बहाते देखा, तो वह मदद के लिए दौड़ी । रोहित, स्वलीनता(Autism-एक प्रकार की बीमारी) से पीड़ित एक युवा लड़का था जो सिसक रहा था, क्योंकि वह जिस झूले का आनंद लेने के लिए दिन भर इंतजार किया था वह टूट गया था l उसे अपने पैरों पर जल्दी खड़ा होने में मदद करने या उसे बेहतर महसूस करने का आग्रह करने के बजाय, जेन उसकी भावनाओं की पुष्टि करने और उसे रोने का समय देते हुए. रोहित के साथ बैठ गयी l

जेन की क्रियाएं इस बात का एक सुंदर उदाहरण हैं कि हम उन लोगों के साथ कैसे खड़े हो सकते हैं जो दुःखी या पीड़ित हैं । बाइबल हमें अय्यूब के घर की हानि, उसके पशुओं के झुण्ड(उसकी आय), उसका स्वास्थ्य, और उसके दस बच्चों की एक साथ हुई मौत के बाद उसके गंभीर दुःख के बारे में बताती है l जब अय्यूब के मित्रों को उसकी पीड़ा का पता चला, तो “वे आपस में यह ठानकर कि हम अय्यूब के पास जाकर . . .  उसको शांति देंगे, अपने अपने यहाँ से उसके पास चले” (अय्यूब 2:11) l अय्यूब शोक में धरती पर बैठ गया l जब वे पहुंचे, तो उसके मित्र — सात दिनों तक — उसके साथ निशब्द बैठे रहे क्योंकि उन्होंने उसके दुख की गहराई देखी ।

बाद में, अपनी मानवता में, अय्यूब के मित्रों ने उसे असंवेदनशील सलाह दी । लेकिन पहले सात दिनों के लिए, उन्होंने उसे उपस्थिति का शब्दहीन और कोमल उपहार दिया । हम शायद किसी के दुःख को नहीं समझ सकेंगे, लेकिन हमें केवल उनके साथ रहकर उन्हें अच्छी तरह से प्यार करने के लिए समझने की आवश्यकता नहीं है ।

उधार के जूते

एक विद्यार्थी के रूप में एक हाई स्कूल के छात्र ने अपने पड़ोस में लगी आग के दौरान अपने घर से भागने के कोलाहल में, राज्य-क्वालिफाइंग क्रॉस-कंट्री रेस(एक प्रकार की लम्बी दौड़) में भाग न ले सका, जिसके लिए वह प्रशिक्षण ले रहा था । इस प्रतियोगिता को छोड़ने का मतलब था कि उसे राज्य प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका नहीं मिलने वाला था - उसके चार साल के प्रशिक्षण की अंतिम घटना । परिस्थितियों के मद्देनजर, राज्य एथलेटिक्स बोर्ड ने इस छात्र को एक और मौका दिया : उसे एक कठिन ट्रैक/दौड़ने के मार्ग पर, "स्ट्रीट शूज़/सामान्य जूतों" में खुद से क्वालिफाइंग समय में चलना होगा, क्योंकि उसके दौड़ने वाले जूते उसके घर के चारपाई के नीचे जले हुए मलबे में थे । जब वह "दौड़" के लिए आया, तो वह अपने प्रतिद्वंद्वियों द्वारा आश्चर्यचकित हुआ, जो उसे उचित जूते देने के लिए आए थे और उसके साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसने राज्य प्रतियोगिता में प्रवेश करने के लिए आवश्यक शर्तें बनायी रखी थी ।

प्रतियोगी उसकी मदद करने के लिए बाध्य नहीं थे l वे अपनी स्वाभाविक इच्छाओं को पूरी कर सकते थे (गलतियों 5:13); ऐसा करने से शायद जीतने के अपने सुअवसर में सुधार ला सकते थे l लेकिन पौलुस ने हमें अपने जीवनों में आत्मा के फल प्रगट करने का आग्रह करता है – “प्रेम में एक दूसरे के दास बनो” और “कृपा” और “भलाई” प्रदर्शित करो (पद.13, 22) l जब हम अपनी सहज प्रवृत्ति पर कार्य नहीं करने में हमारी मदद करने के लिए आत्मा पर झुक जाते हैं, तो हम अपने आसपास के लोगों से बेहतर तरीके से प्यार करने में सक्षम होते हैं ।

सूखे से बच जाना

मई 2019 में मानसून की विफलता के कारण चेन्नई शहर को पानी की बड़ी कमी का सामना करना पड़ा । सड़कों पर प्लास्टिक के बर्तनों की कतारें पानी के ट्रकों का इंतजार करती थीं, जो सूखे से पीड़ित स्थानीय लोगों को सीमित मात्रा में पानी पहुंचाती थीं । उपनगरों में जहां माना जाता है कि हरियाली होनी चाहिये, सूखी घास और सूखे पौधे अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की बूंदों का इंतजार करते थे ।

सूखे पौधे और खरपतवार ही हैं, जिसकी मैं कल्पना करता हूँ जब मैं यिर्मयाह में एक व्यक्ति का वर्णन पढ़ता हूं, “जिसका मन यहोवा से भटक जाता है” (यिर्मयाह 17: 5) । वह कहता है कि जो लोग “मनुष्य” से अपनी ताकत पाते हैं, वे "निर्जल देश के अधमरे पेड़ के समान [होंगे]” और कभी भलाई न [देखेंगे]” (पद.5-6) l इसके ठीक उलट वे लोग हैं जो लोगों के बजाय परमेश्वर पर अपना भरोसा रखते हैं, पेड़ों की तरह, उनकी मजबूत, गहरी जड़ें उससे ताकत खींचती हैं, जिससे वे जीवन से भरे रहते हैं, यहां तक ​​कि सूखे जैसी परिस्थितियों में भी ।

सूखे पौधे और पेड़ दोनों की जड़ें होती हैं, फिर भी यदि पौधे अपने जीवन-स्रोत से जुड़े नहीं रहते, तो वे सूख जाते हैं और मर जाते हैं । दूसरी ओर, पेड़ अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, जिससे वे फलने-फूलने और जीवित रहने में सक्षम होते हैं, जो कि कठिनाई के समय उन्हें बनाए रख सकता है । जब हम परमेश्‍वर के लिए उपवास रखते हैं, और बाइबल में उपस्थित बुद्धि से ताकत और हौसला बढ़ाते हैं और प्रार्थना में उससे बात करते हैं, हम भी जीवन-यापन, जीवन-निर्वाह के पोषण का अनुभव कर सकते हैं ।

हमारे हृदयों पर अंकित

1450 में जब जोहानस गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस को जंगम/चल प्रकार के साथ जोड़ा, तो उन्होंने पश्चिम में बड़े पैमाने पर जन संचार के युग की शुरुआत की और नए सामजिक क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार किया l दुनिया भर में साक्षरता बढ़ी और नए विचारों ने सामजिक और धार्मिक सन्दर्भों में तेजी से बदलाव लाए l गुटेनबर्ग ने बाइबल का पहला मुद्रित संस्करण प्रस्तुत किया l  इससे पहले, बाइबल की प्रति कड़ी मेहनत से हाथ से नक़ल करके बनायी जाती थी, और शास्त्री उत्पादन करने के लिए एक साल तक का समय लेते थे l

सदियों से, प्रिंटिंग प्रेस ने आपके और मेरे जैसे लोगों को पवित्रशास्त्र तक सीधी पहुँच का विशेषाधिकार प्रदान किया है l जबकि हमारे पास इलेक्ट्रॉनिक संस्करण भी उपलब्ध हैं, उसके आविष्कार के कारण हम में से कई लोग अक्सर अपने हाथों में एक भौतिक बाइबल रखते हैं l बाइबल की दूसरी प्रति तैयार करने में सर्वथा कीमत और समय लगाने के बावजूद भी जो दुर्लभ थी आज हमारी ऊँगलियों पर आसानी से मौजूद है l

परमेश्वर के सत्य तक पहुँच एक अद्भुत विशेषाधिकार है l नीतिवचन के लेखक से संकेत मिलता है कि हमें पवित्रशास्त्र में उसके निर्देशों का पालन करना चाहिये जैसे कि कुछ “अभिलाषित” हो जैसे “[हमारी] आँख की पुतली” (नीतिवचन 7:2) और उसकी बुद्धिमत्ता के शब्दों को “[हमारे] हृदय की पटिया पर लिख लेना” (पद.3) l जैसा कि हम बाइबल को समझना चाहते हैं और उसकी बुद्धि के अनुसार जीना चाहते हैं, हम, शास्त्रियों की तरह, परमेश्वर की सच्चाई को अपनी “ऊँगलियों” से अपने हृदयों में उतार रहे हैं, और हम जहां भी जाते हैं, हम अपने साथ ले जाते हैं l

प्रतिद्वंद्वी या सहयोगी

1947 में हुए बंटवारे के बाद से भारत और पाकिस्तान कई सालों से एक-दूसरे के साथ विवादों में रहे हैं,  हालांकि हर शाम किसी दूसरे के विपरीत झंडा उतारने

 की रस्म को वाघा बॉर्डर पर देखा जा सकता है l धूमधाम और भव्यता के साथ,  यह अत्यधिक नृत्य शैली (choreografted) में आयोजित दस्तूर दोनों देशों के सैन्यकर्मियों के एक तेज सलामी के साथ समाप्त होती है, और एक दोस्ताना हाथ मिलाने वाले मित्रवत संबंधों को दर्शाता है l संघर्ष के वर्षों और तीन बड़े युद्धों के बावजूद यह दैनिक बातचीत इन दोनों देश के पुरुषों के लिए एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्वक सामना करने का एक अवसर है,  हालांकि वे अपनी राष्ट्रीय सीमाओं से अलग हैं l

कुरिन्थुस में विश्वासियों ने अपने मुख्य सार्वजनिक मार्ग में सीमारेखा नहीं खींची होगी,  लेकिन वे विभाजित थे l वे उन लोगों के प्रति अपनी निष्ठा के परिणामस्वरूप झगड़ रहे हैं जिन्होंने उन्हें यीशु के बारे में सिखाया था : पौलुस, या अपुल्लोस, या कैफा(पतरस) l पौलुस ने उन सभी को “एक ही मन और एक ही मत” होकर चलने के लिए कहते हुए (1 कुरिन्थियों 1:10),  उनको यह याद दिलाया कि यह मसीह ही है जो उनके लिए क्रूस पर चढ़ाया गया,  न कि उनके आध्यात्मिक अगुए l

हम आज भी वैसा ही व्यवहार करते हैं, क्या यह सच नहीं है?  हम कभी-कभी उन लोगों का भी विरोध करते हैं,  जो विशिष्ट रूप से हमारे महत्वपूर्ण विश्वास को साझा करते हैं – जो उन्हें सहयोगी के बजाय उन्हें प्रतिद्वंद्वी बनाते हैं l जैसे मसीह स्वयं विभाजित नहीं है,  हम,  उसके सांसारिक प्रतिनिधि के रूप में - उसका शरीर हैं -  हमें असहमतियों को महत्वहीन बातों पर हमें विभाजित करने की अनुमति नहीं देना है l इसके बजाय,  हम उसमें अपनी एकता का उत्सव मानाएं l

गलत फायदा नहीं उठाना

कई कैदी अपने जेल के समय को कम करने के लिए सड़क के किनारे का कचरा इकठ्ठा कर रहे थे जब उनके पर्यवेक्षक/जेलर, जेम्स अचानक गिर गए l वे उनकी सहायता के लिए दौड़े और महसूस किया कि वह एक चिकित्सीय आपात स्थिति में है l एक कैदी ने मदद के लिए जेम्स का फोन लिया l पुलिस विभाग ने बाद में अपने पर्यवेक्षक को तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के लिए कैदियों को धन्यवाद दिया, विशेष रूप से इसलिए कि वे उनकी उपेक्षा कर सकते थे – उनकी बड़ी हानि में क्योंकि उन्हें आघात(stroke) पहुंचा था – या भागने के लिए स्थिति का खुद लाभ उठा सकते थे l 

कैदियों की दया के कार्य पौलुस और सीलास के विपरीत नहीं है जब वे जेल में थे l जब उनके कपड़े उतारकर, बेंत लगाकर, उन्हें जेल में डाल दिया गया, एक बड़ा भूकंप आया जिससे उन के सब बंधन खुल गए और जेल की नींव हिल गयी और उसके दरवाजे खुल गए (प्रेरितों 16:23-26) l जब जेलर जागा, वह स्वाभाविक रूप से अनुमान लगाया कि कैदी भाग गए होंगे, इसलिए उसने अपने आप को मार डालने की तयारी की (कल्पना करके कि उनके भागने के लिए उसको क्या सज़ा मिलेगी) l जब पौलुस ने ऊंचे शब्द से पुकारा , “हम सब यहीं है!” (पद.28) जेलर उनके व्यवहार से द्रवित हो गया – कैदियों के विषय जो असामान्य था – कि वह उस परमेश्वर के विषय उत्सुक हो गया जिसके वे उपासक थे, और अंततः वह भी उसमें विश्वास कर लिया (पद.29-34) l

जिस प्रकार हम दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं दर्शाता है कि हम क्या विश्वास करते हैं और किसको महत्व देते हैं l जब हम हानि के बदले भलाई करने का निर्णय करते हैं, हमारे व्यवहार उनको उस परमेश्वर के विषय जिसको हम जानते और प्रेम करते हैं सोचने के लिए प्रेरित करेंगे l

2D सीट पर का व्यक्ति(The Man in Seat 2D)

प्रीति ने अपनी ग्यारह महीने की बेटी लिली और लिली की ऑक्सीजन मशीन के साथ हवाई जहाज के संकीर्ण गलियारे से गयी l वह अपने बच्चे के फेफड़ों की पुरानी बीमारी के इलाज के लिए यात्रा कर रही थी l अपनी साझा सीट पर बैठने के कुछ समय बाद, एक फ्लाइट परिचर ने यह कहते हुए प्रीति से संपर्क किया, कि प्रथम श्रेणी में एक यात्री उसके साथ सीट बदलना चाहता था l चेहरे पर कृतज्ञता के आँसू के साथ, प्रीति ने अधिक बड़ी सीट पर बैठने चली गयी, जबकि वह अजनबी शुभचिंतक उसकी सीट पर आ गया l

प्रीति के शुभचिंतक में उस प्रकार की उदारता सन्निहित थी जो पौलुस तिमोथी को लिखे अपने पत्र में प्रोत्साहित करता है l पौलुस ने तीमुथियुस से कहा कि जो उसकी देखभाल में हैं उनको आज्ञा दें कि वे “भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्पर हों” (1 तीमुथियुस 6:18) l पौलुस कहता है, अहंकारी बनना और इस संसार के धन में अपनी आशा रखना लुभावना है l इसके बदले, वह सलाह देता है कि हम उदारता का जीवन और दूसरों की सेवा करने वाला जीवन पर केन्द्रित होकर, केसली फ्लाइट में 2D सीट पर के उस व्यक्ति की तरह भले कामों में “धनी” बने l

चाहे हमारे पास बहुत है या हम अभाव में हैं, हम सभी दूसरों के साथ जो कुछ भी है उसे साझा करने के लिए तैयार होकर उदारता से जीने की प्रचुरता का अनुभव कर सकते हैं l जब हम ऐसा करते हैं, पौलुस कहता है कि हम “सच्चे जीवन को वश में कर [लेंगे]” (पद.19) l