यीशु को समर्पित करना
1951 में, जोसेफ स्टालिन के डॉक्टर ने उन्हें अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अपने कार्यभार को कम करने का सलाह दिया। सोवियत संघ के शासक ने चिकित्सक पर जासूसी का आरोप लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया। जिस अत्याचारी ने झूठ के साथ इतने लोगों पर अत्याचार किया था, वह सत्य का पालन नहीं कर सका—और जैसा उसने कई बार किया था—उसने उस सत्य बताने वाले को हटा दिया। वैसे भी सत्य का जीत हुआ। स्टालिन की मृत्यु 1953 में हुयी।
यिर्मयाह भविष्यवक्ता, जिसे अपने भयानक भविष्यवाणियों के लिए गिरफ्तार किया गया और जंजीरों में रखा गया (यिर्मयाह 38:1–6; 40:1), यहूदा के राजा को ठीक-ठीक बताया कि यरूशलेम का क्या होगा। उसने राजा सिदकिय्याह से कहा, “जो कुछ मैं तुझसे कहता हूँ उसे यहोवा की बात समझकर मान ले” (38:20)। शहर के आसपास की सेना के सामने आत्मसमर्पण करने में विफल रहने से स्थिति और भी बदतर हो जाएगी। “तेरी सब स्त्रियाँ और बाल-बच्चे कसदियों के पास निकाल कर पहुँचाए जाएँगे,” यिर्मयाह ने चिताया “और तू भी कसदियों के हाथ से न बचेगा” (पद 23)।
सिदकिय्याह उस सत्य पर कार्य करने में असफल रहा। आखिरकार बेबीलोनियों ने राजा को पकड़ लिया, उसके सभी बेटों को मार डाला, और शहर को जला दिया (अध्याय 39)।
एक मायने में, हर इंसान सिदकिय्याह की दुविधा का सामना करता है। हम पाप और घटिया विकल्पों के अपने स्वयं के जीवन की दीवारों में फँसे हुए हैं। अक्सर, हम उन लोगों से जो हमें अपने बारे में सच्चाई बताते हैं से बचकर काम को बदतर बना देते हैं। हमें केवल उसकी इच्छा के प्रति समर्पण करने की आवश्यकता है जिसने कहा, "मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।" (यूहन्ना 14:6)।
प्रार्थना के माध्यम से प्रेम
बहुत देर हो चुकी थी, टॉम को अपने लड़ाकू जूतों के नीचे डरावना "क्लिक" महसूस हुआ। वह तुरंत कूद गया। जमीन के नीचे छिपा हुआ घातक उपकरण विस्फोट नहीं हुआ। बाद में, विस्फोटक निपटान टीम ने वहाँ से 36 किलो उच्च विस्फोटक खोद निकाला। टॉम ने उन जूतों को तब तक पहना जब तक वे टूटकर गिर नहीं गये। "मेरे भाग्यशाली जूते," वह उन्हें बुलाता है।
टॉम ने शायद अपने बाल-बाल बचने को याद करने के लिए उन जूतों को पकड़ रखा होगा। लेकिन लोग अक्सर वस्तुओं को "भाग्यशाली" मानने या उन्हें अधिक आध्यात्मिक लेबल "धन्य" देने के लिए प्रलोभित होते हैं। खतरा तब आता है जब हम किसी वस्तु को परमेश्वर के आशीर्वाद के स्रोत के रूप में श्रेय देते है— यहां तक कि एक प्रतीक भी क्यों न हो।
इस्राएलियों ने इसे कठिन तरीके से सीखा। पलिश्ती सेना ने उन्हें युद्ध में हरा दिया था। किसी ने "यहोवा की वाचा का संदूक" लेकर दोबारा लड़ने के बारे में सोचा (1 शमूएल 4:3)। यह एक अच्छा विचार प्रतीत हुआ (पद 6–9) आख़िरकार, वाचा का सन्दूक एक पवित्र वस्तु थी।
परन्तु इस्राएलियों का दृष्टिकोण गलत था। अपने आप में, सन्दूक उनके लिए कुछ भी नहीं ला सकता था। एक सच्चे परमेश्वर की उपस्थिति के बजाय किसी वस्तु में अपना विश्वास रखने से, इस्राएलियों को और भी बुरी हार का सामना करना पड़ा, और शत्रु ने सन्दूक पर कब्ज़ा कर लिया (पद 10–11)।
स्मृति चिन्ह जो हमें प्रार्थना करने या परमेश्वर की भलाई के लिए धन्यवाद देने की याद दिलाते हैं, ठीक हैं। लेकिन वे कभी आशीर्वाद का स्रोत नहीं है। वह परमेश्वर है - और केवल परमेश्वर ही है।
यीशु अनुकरण करने के योग्य है
रोनित एक धार्मिक गैर मसीही परिवार से आती है। उनकी आत्मिक चर्चाएं बड़ी ही अरुचिकर व औपचारिक होती थी। उसने कहा “मैं सभी प्रार्थनाओं को करती हूं परंतु मुझे [परमेश्वर से] कुछ सुनाई नहीं देता।"
उसने बाइबल पढ़ना आरंभ किया धीरे-धीरे उसका विश्वास यीशु को एक मसीहा मानने की ओर बढ़ा। रोनित निरीक्षण के बारे में बताया कि मैंने अपने हृदय में एक स्पष्ट आवाज को सुना जो मुझसे कह रही थी तुम बहुत कुछ सुन चुकी हो बहुत कुछ देख चुकी हो अब समय आ गया है कि तुम विश्वास करो परंतु उनके समक्ष एक समस्या थी उसके पिता। वह उस क्षण को याद करती है जब उसके पिता ने इसके प्रति अपना रौद्र रूप दिखाया।
जब यीशु इस पृथ्वी पर चलते थे तो उनके पीछे भीड़ चलती थी (लूका 14:25) हमें स्पष्ट रूप से पता नहीं है कि भीड़ क्या ढूंढ रही थी, परंतु यीशु चेलों की तलाश में था । और उसके लिए कीमत चुकानी पड़ती है । “यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्नी और बच्चों और भाइयों और बहिनों वरन् अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता", यीशु ने कहा (पद 26)। उसने एक गढ़ बनाने के विषय कहानी कही । "पहले बैठकर खर्च न जोड़े....? उसने पूछा (पद 28)। यीशु का मतलब अपने परिवार से घृणा करना नहीं था परंतु यह कहना चाह रहे थे कि इन सबसे बढ़कर हमें उसका चुनाव करना है । उन्होंने कहा, "तुम में से जो कोई अपना सब कुछ त्याग न दे, वह मेरा चेला नहीं हो सकता"(पद 33)।
रोनित अपने परिवार को बहुत प्रेम करती हैं फिर भी उसने कहा चाहे कितनी भी कीमत क्यों ना हो मैंने जान लिया है कि वह योग्य है। यीशु आपका मार्गदर्शन कर रहे हैं तो उनका अनुसरण करने के लिए आपको क्या त्यागने की आवश्यकता हो सकती है?
मैं कौन हूँ?
किज़ोम्बो बैठा कैम्प फयर(camp fire) देख रहा था और अपने जीवन के बहुत बड़े प्रश्नों पर विचार कर रहा था। मैंने क्या हासिल किया है? उसने सोचा। और बहुत ही जल्दी उसे उत्तर मिला: वास्तव में बहुत ज्यादा नहीं। वह अपनी जन्म भूमि पर वापस आ गया था, उस स्कूल में सेवा कर रहा था जिसे उसके पिता ने वर्षावन (rain forest) में शुरू किया था। वह अपने पिता की दो गृहयुद्धों से बचने की सशक्त कहानी भी लिखने की कोशिश कर रहा था। मैं यह सब करने की कोशिश करने वाला कौन होता हूं?
किज़ोम्बो की शंकाएँ मूसा की तरह लगती हैं। परमेश्वर ने अभी-अभी मूसा को एक मिशन दिया था: "इसलिए मैं तुझे फ़िरौन के पास भेजता हूँ कि तू मेरी इसराएली प्रजा को मिस्र से निकल ले आए" (निर्गमन 3:10)। मूसा ने उत्तर दिया, "मैं कौन हूँ?" (पद-11) मूसा के कुछ कमजोर बहाने के बाद, परमेश्वर ने उससे पूछा, "तेरे हाथ में वह क्या है?" वह एक लाठी थी (4:2) परमेश्वर के निर्देश पर, मूसा ने उसे ज़मीन पर फेंक दिया। लाठी सांप बन गया. अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के विरुद्ध, मूसा ने उसे उठाया। और फिर से, वह एक लाठी बन गयी (पद- 4)। परमेश्वर की शक्ति में, मूसा फिरौन का सामना कर सकता था। उसके हाथ में वस्तुतः मिस्र के "देवताओं" में से एक - एक साँप-था। मिस्र के देवता एक सच्चे परमेश्वर के लिए कोई ख़तरा नहीं थे।
किज़ोम्बो ने मूसा के बारे में सोचा, और उसे परमेश्वर का उत्तर महसूस हुआ: तुम्हारे पास मैं और मेरा वचन है। उसने उन दोस्तों के बारे में भी सोचा जिन्होंने उसे अपने पिता की कहानी लिखने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि अन्य लोग उसके जीवन में परमेश्वर की शक्ति के बारे में जान सकें। वह अकेला नहीं था। अपने आप में, हमारा सर्वोत्तम प्रयास भी अपर्याप्त हैं। लेकिन हम उस परमेश्वर की सेवा करते हैं जो कहता है, “निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा।" (3:12)।
सभी उत्तर
डेल अर्नहार्ड्ट जूनियर उस भयानक क्षण का वर्णन करते हैं जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके पिता चले गए हैं। मोटर रेसिंग के दिग्गज डेल अर्नहार्ड सीनियर की डेटोना 500 के अंत में एक भयानक दुर्घटना में मौत हो गई थी - एक दौड़ जिसमें डेल जूनियर ने भी भाग लिया था। युवा अर्नहार्ड्ट ने कहा, मुझ में से ऐसा शोर आ रहा है कि मैं यह नहीं कर सकता। यह सदमे दुःख और भय की आवाज है। और फिर एकाकी सत्य यह है कि: “अब मुझे यह स्वयं ही करना होगा।”
अर्नहार्ड्ट जूनियर ने बताया कि पिताजी का होना एक सहायक पत्र (cheat sheet) जैसा था। पिताजी का होना सभी उत्तरों को जानने जैसा था।
यीशु के शिष्यों ने सभी उत्तरों के लिए उसकी सहायता लेना सीख लिया था। सूली पर चढ़ाये जाने की पूर्व संध्या पर उसने उन्हें आश्वासन दिया कि वह उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा। यीशु ने कहा, “मैं पिता से विनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा जो तुम्हारी सहायता करेगा और सदैव तुम्हारे साथ रहेगा – सत्य का आत्मा” (यूहन्ना 14:16–17)।
यीशु ने वह सांत्वना उन सभी को दी जो उस पर विश्वास करेंगे। उन्होंने कहा, “यदि कोई मुझ से प्रेम रखे तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।” (पद 23)।
जो लोग मसीह का अनुसरण करना चुनते हैं उनके भीतर आत्मा है जो उन्हें सभी चीजें सिखाता है और उन्हें यीशु द्वारा सिखाई गई हर चीज की याद दिलाता है (पद 26)। हमारे पास सभी उत्तर नहीं हैं, लेकिन हमारे पास उत्तर देने वाले की आत्मा है।
भविष्यद्वक्ताओं का संदेश
बेसबॉल की 1906 वर्ल्ड सीरीज़ से पहले, खेल लेखक ह्यू फुलर्टन ने एक समझदारी वाली भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा कि शिकागो क्बस जिनके जीतने की उम्मीद थी, पहले और तीसरे गेम हारेंगे और दूसरा जीतेंगे। और चौथे दिन बारिश होगी। उनकी हर बात सही थी। फिर 1919 में उनके विश्लेषणात्मक कौशल ने उन्हें बताया कि कुछ खिलाड़ी जानबूझकर वर्ल्ड सीरीज़ गेम हार रहे थे। फुलर्टन को संदेह था कि जुआरियों ने उन्हें रिश्वत दी है। उनकी लोकप्रिय राय ने उनका उपहास किया। लेकिन फिर से वह सही थे।
फुलर्टन कोई भविष्यवक्ता नहीं थे — बस वह एक बुद्धिमान व्यक्ति थे जिन्होंने सबूतों का अध्ययन किया। यिर्मयाह एक वास्तविक भविष्यवक्ता (नबी) था जिसकी भविष्यवाणियाँ हमेशा सच होती थीं। एक जूएँ को पहने हुए यिर्मयाह ने यहूदा को बेबीलोन के सामने आत्मसमर्पण करने और जीवित रहने के लिए कहा (यिर्मयाह 27:2, 12)। झूठे भविष्यद्वक्ता हनन्याह ने उसका खंडन किया और तब हनन्याह भविष्यद्वक्ता ने उस जूएँ को जो यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता की गर्दन पर था, उतार कर तोड़ दिया। (28:2–4,10)। यिर्मयाह ने उससे कहा, “हनन्याह सुनो! यहोवा ने तुझे नहीं भेजा है, और आगे कहा, इसी वर्ष में तू मरेगा” (पद 15–16)। दो महीने बाद हनन्याह की मृत्यु हो गई (पद 17)।
नया नियम हमें बताता है, “पूर्व युग में परमेश्वर ने बापदादों से थोड़ा थोड़ा करके और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। पर इन अन्तिम दिनों में हम से अपने पुत्र के द्वारा बातें की।” (इब्रानियों 1:1–2)। यीशु के जीवन, मृत्यु, और पुनरुत्थान के द्वारा, और पवित्र शास्त्र के द्वारा, और पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के द्वारा परमेश्वर का सत्य आज भी हमें निर्देश देता है।
गवाह
अपनी कविता “द विट्नेसेस(The Witnesses)” में हेनरी वड्सवर्थ लॉन्गफेलो (1807-1882) एक डूबे हुए गुलाम जहाज का वर्णन किया है l “जंजीरों में कंकाल” के बारे में लिखते हुए, लॉन्गफेलो ने दासत्व के अनगिनित अज्ञात पीड़ितों का शोक मनाया l अंतिम पद ऐसा है, “ये दासों का दुःख है,/ वे रसातल से चमकते हैं,/ वे अज्ञात कब्रों से रोते हैं,/ हम गवाह हैं!”
लेकिन ये गवाह किससे बात करते हैं? क्या ऐसी मूक गवाही व्यर्थ नहीं है?
एक साक्षी है जो यह सब देखता है l जब कैन ने हाबिल को घात किया, तो उसने दिखावा किया कि कुछ नहीं हुआ था l “क्या मैं अपने भाई का रखवाला हूँ?” उसने खारिज करते हुए ईश्वर से कहा l परन्तु परमेश्वर ने कहा, “तेरे भाई का लहू भूमि से मेरी ओर चिल्लाकर मेरी दोहाई दे रहा है! इसलिए अब भूमि जिसने तेरे भाई का लहू तेरे हाथ से पीने के लिए अपना मुँह खोला है, उसकी ओर से तू शापित है” (उत्पत्ति 4:9-10)
कैन चेतावनी के रूप में जीवित है l “दुष्ट कैन के समान न बनें, और जिसने अपने भाई को घात किया, चेला यूहन्ना ने चेतावनी दी (1 यूहन्ना 3:12) l हबील जीवित है, लेकिन अलग तरीके से l इब्रानियों के लेखक ने कहा, “विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिए चढ़ाया l” और “अब तक बातें करता है” (इब्रानियों 11:4) l
हबील अभी भी बोलता है! तो उन भूले-बिसरे गुलामों की हड्डियां भी l हमें ऐसे सभी पीड़ितों को याद रखना चाहिए और हर जगह उत्पीड़न का विरोध करना चाहिए l ईश्वर यह सब देखता है l उसके न्याय की जीत होगी l
लम्बी खेल
जब टून के देश में तख्तापलट हुआ, तो सेना ने यीशु में विश्वासियों को आतंकित करना और उनके खेत के जानवरों को मारना शुरू कर दिया। अपना जीविका खोने के बाद, टून का परिवार विभिन्न देशों में बिखर गया। नौ साल तक टून अपने परिवार से दूर एक शरणार्थी शिविर में रहा। वह जानता था कि परमेश्वर उसके साथ है, लेकिन बिछड़ने के दौरान परिवार के दो सदस्यों का मौत हो गया। टून मायूस हो गया।
बहुत समय पहले, एक अन्य लोगों के समूह ने क्रूर उत्पीड़न का सामना किया। इसलिए परमेश्वर ने मूसा को उन लोगों—इस्राएलियों—को मिस्र से बाहर ले जाने के लिए नियुक्त किया। मूसा अनिच्छा से सहमत हुआ। लेकिन जब वह फिरौन के पास गया, तो मिस्र का अधिकारी अत्याचार को और बढ़ा दिया (निर्गमन 5:6-9)। उसने कहा “मैं यहोवा को नहीं जानता, और मैं इस्राएलियों को नहीं जाने दूँगा" (पद 2)। लोगों ने मूसा से शिकायत किया, जिसने परमेश्वर से शिकायत किया (पद 20-23)।
अंत में, परमेश्वर ने इस्राएलियों को मुक्त कर दिया और उन्हें वह स्वतंत्रता मिली जो वे चाहते थे - लेकिन परमेश्वर के तरीके और समय के अनुसार। टून ने एक शरणार्थी शिविर में अपने वर्षों का अच्छा उपयोग किया, नई दिल्ली के एक सेमिनरी में मास्टर डिग्री हासिल किया। अब वह अपने लोगों के लिए एक पादरी है - उसके जैसे शरणार्थी जिन्हें एक नया घर मिल गया। वह कहता है। "एक शरणार्थी के रूप में मेरा कहानी एक सेवक के रूप में अगुआई करने के लिए भट्टी बना," अपनी गवाही में, टून निर्गमन 15:2 में मूसा के गीत का वर्णन करते है: "यहोवा मेरा बल और भजन का विषय है।" और आज, वह हमारा भी है।
कुछ सही करना
एक कैदी “जेसन”का पत्र ने मुझे और मेरी पत्नी को चकित कर दिया। हम विकलांग लोगों का सहायता के लिए पिल्लों को "पालते" हैं ताकि वे सर्विस डॉग बन सकें। ऐसा ही एक पिल्ला अगले प्रशिक्षण चरण के लिए पास हो गया, जिसे कैदियों द्वारा चलाया जाता था, जिन्हें कुत्तों को प्रशिक्षित करना सिखाया जाता था। जेसन का पत्र हमें उसके अतीत के लिए दुख व्यक्त किया, लेकिन फिर उसने कहा, "स्नीकर्स सत्रहवाँ कुत्ता है जिसे मैंने प्रशिक्षित किया है, और वह सबसे अच्छी है। जब मैं उसे अपनी ओर देखते हुए देखता हूं, तो मुझे ऐसा लगता है कि अनन्तः मैं कुछ सही कर रहा हूं।”
सिर्फ जेसन के पास ही पछतावा नहीं है। हम सबके पास है। यहूदा का राजा मनश्शे के पास बहुत था। दूसरा इतिहास 33 उसके कुछ अत्याचारों का रूपरेखा देता है: बुतपरस्त देवताओं के लिए यौन रूप से स्पष्ट वेदियों का निर्माण करना (पद 3), जादू टोना करना, और अपने बच्चों को बलि चढ़ाना (पद 6)। उसने पूरे देश को इस घिनौने रास्ते पर चलाया (पद 9)।
“यहोवा ने मनश्शे और उसकी प्रजा से बातें की, परन्तु उन्होंने कुछ ध्यान नहीं दिया” (पद 10)। आखिरकार, परमेश्वर ने उसका ध्यान आकर्षित किया। बेबीलोनियों ने आक्रमण किया, "... वे मनश्शे को नकेल डालकर, और पीतल की बेड़ियों से जकड़कर, उसे बाबेल को ले गए" (11)। इसके बाद, मनश्शे ने अनन्तः कुछ सही किया। “तब संकट में पड़कर वह अपने परमेश्वर यहोवा को मानने लगा, और अपने पूर्वजों के परमेश्वर के सामने बहुत दीन हुआ, और उससे प्रार्थना की” (पद 12)। परमेश्वर ने उसे सुना और राजा के रूप में पुनर्स्थापित किया। मनश्शे ने मूर्तिपूजक प्रथाओं को एक सच्चे परमेश्वर के आराधना में बदल दिया (पद. 15-16)।
क्या आपका पछतावा आपको भस्म करने का धमकी देता है? अभी भी बहुत देर नहीं हुआ है। परमेश्वर हमारे पश्चाताप के विनम्र प्रार्थना को सुनता है।