Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by सोचितल डिक्सॉन

शांति के साथ दृढ़ रहना

अपने संघर्षों और पुराने दर्द में परमेश्वर पर भरोसा रखते हुए जब मैं आगे बढ़ रही हूँ, छोटी से छोटी रूकावट भी क्रोधी आक्रमणकारी दुश्मन महसूस होता है l प्रथम समस्या मुझे दाहिनी ओर से दबाती है l दूसरी समस्या मुझे पीछे से धक्का देती है l तीसरी समस्या सामने से आक्रमण करती है l इन समयों में, जब मेरी ताकत क्षीण होती है और तुरन्त आराम नहीं मिलता, दौड़कर छिप जाना एक अच्छी सोच लगती है l किन्तु इसलिए कि मैं दर्द से भाग नहीं सकती, अपनी स्थिति को बदल नहीं सकती, अथवा अपनी भावनाओं को अनदेखा नहीं कर सकती, मैं धीरे-धीरे अपनी समस्या से निकलने के लिए परमेश्वर पर भरोसा करना सीख रही हूँ l

जब मुझे प्रोत्साहन, आराम, और साहस की ज़रूरत होती है, मैं भजनकारों के भजनों को प्रार्थनापूर्वक पढ़ती हूँ, जो ईमानदारी पूर्वक अपनी स्थितियों को परमेश्वर के निकट लाते हैं l मेरे एक प्रिय भजन में, दाऊद अपने बेटे, अबशालोम से भाग रहा है, जो उसका राज्य उससे छीनकर उसे मार डालना चाहता है l यद्यपि दाऊद अपनी दर्द भरी स्थिति पर विलाप करता है (भजन 3:1-2), वह परमेश्वर की सुरक्षा पर भरोसा रखकर अपनी प्रार्थना के उत्तर का इंतज़ार किया (पद.3-4) l राजा ने न अपनी नींद नहीं खोयी और न ही अनहोंनी से भयभीत हुआ, क्योंकि उसने परमेश्वर पर उसे थामने और बचाने के लिए भरोसा किया (पद.5-8) l

भौतिक और भावनात्मक पीड़ा अक्सर आक्रामक शत्रुओं के समान महसूस होते हैं l हम हार मानने के लिए प्रेरित होते हैं अथवा घबराहट में भाग जाने की इच्छा होती है जब हमें हमारे वर्तमान के संघर्ष में उसका हल दिखाई नहीं देता l किन्तु, दाऊद की तरह, हम भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्वर हमें थामेगा और हम उसके निरंतर और प्रेमी उपस्थिति में विश्राम कर सकते हैं l

कार्य पर प्रशिक्षण

अपने बेटे के अध्यापक से विज्ञान शिविर में सहयोगी बनने के आग्रह से मैंने संकोच किया। अपने बेटे को प्रेम करने और उसकी परवरिश में परमेश्वर ने मेरी सहायता की है परंतु दूसरों के लिए वह मेरा इस्तेमाल करेंगे इसका मुझे संदेह था।

आज भी मैं नहीं समझ पाती कि परमेश्वर-एकमात्र परिपूर्ण, सिर्फ एक जो हृदयों और जीवनों को बदल सकते हैं-समय के साथ हमें भी बदल देते हैं। तब पवित्र-आत्मा याद दिलाती है कि पौलुस ने कैसे तीमुथियुस को विश्वास से उसको मिले वरदान को चमकाने के लिए कार्य-पर-प्रशिक्षण आरंभ करने को कहा (2तीमुथियुस 1:6)। जैसे तीमुथियुस लोगों की सेवा करेगा, उसे साहस मिलेगा क्योंकि उसके सामर्थ के स्रोत परमेश्वर उसकी प्रेम करने और अनुशासित रहने में उसकी मदद करेंगे (पद 7)।

मसीह हमें बचाते और सामर्थी बनाते हैं ताकि mहम अपने जीवन से उन्हें आदर दें, हमारी योग्यता के कारण नहीं वरन इसी कि हम उनके परिवार के बहुमूल्य सदस्य हैं (पद 9)।

हमारा काम है परमेश्वर तथा दूसरों से प्रेम करें। मसीह का काम है हमें बचाएं और संसार के प्रति हमारी संकरी दृष्टि से बढ़कर उद्देश्य दें। प्रतिदिन जैसे हम उनके पीछे जहाँ वे ले जाएँ वहाँ चलते हैं, तो वह उनके प्यार और सच्चाई से दूसरों को उत्साहित करने में हमारा इस्तेमाल करते हुए हमें बदल देते हैं।

केवल प्रार्थना के द्वारा

मेरी मित्र ने कैंसर के उपचार के दौरान मुझे देर रात फ़ोन किया। उसके रुदन से मेरा दिल भर आया और मैंने प्रार्थना की। हे प्रभु, मैं क्या करूं?

उसके रुदन ने मेरा दिल चीर डाला। उसकी पीड़ा को कम या उसकी स्थिति को सही या उसे प्रोत्साहित करने के लिए मैं कुछ ना कर सकी। परंतु मैं जानती थी कि कौन सहायता कर सकते हैं। प्रार्थना में मुश्किल हुई तो मैं फुसफुसाई यीशु, यीशु, यीशु।

उसका रोना सिसकियों में बदल कर धीमी सासों में थम गया। उसके पति ने बताया कि, "वह सो गई है" । "हम कल फोन करेंगे।" फोन रख कर मैंने रोते-रोते प्रार्थना की।

प्रेरित मरकुस ऐसे पिता की कहानी बताता है शैतान के चुंगल में फंसे अपने पुत्र को यीशु के पास लाया (मरकुस 9:17)। अपनी जटिल समस्या के वर्णन केk साथ उसकी प्रार्थना में संदेह था (पद 20-22)। उसने यीशु से उसके अविश्वास का उपाय करने को कहा। यीशु के नियंत्रण लेते ही पिता और पुत्र को मुक्ति और शांति मिली (पद 25-27)। 

हमारे प्रियजनों को पीड़ा हो तो स्वभाविक तौर पर हम सही करना चाहते हैं, परंतु केवल प्रभु यीशु ही हमारी सहायता कर सकते हैं। यीशु नाम पुकारने से, वे उनके सामर्थ और उपस्थिति पर विश्वास करने में हमें सक्षम बनाते हैं।

बढ़ाने वाले की महिमा

एक दिन मैंने अपने आँगन में नरगिस के फूलों को खिले देखा। मैंने न तो इन्हें बोया था, न ही खाद या पानी डाला था। मैं समझ नहीं पाया कि यह फूल क्यों और कैसे खिले।

बीज बोने के दृष्टांत में यीशु ने आध्यात्मिक परिपक्वता के रहस्य को चित्रित किया है। उन्होंने परमेश्वर के साम्राज्य की तुलना बीज बोने वाले किसान से की है (मरकुस 4:26)। यीशु ने कहा, अंकुर आप फूटता है, चाहे किसान सोए या जागे या इस बढ़ने की प्रक्रिया को समझे या नहीं। भूमि के मालिक को फसल का लाभ मिला (पद 27-29)। भले ही उस का बढ़ना इस बात पर निर्भर नहीं था कि उसे मिट्टी के नीचे हो रही गतिविधि की कितनी समझ थी। नरगिस के फूलों के समान बीजों का बढ़ना परमेश्वर के समय और सामर्थ के कारण हुआ।

चाहे वह हमारे व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास की या फिर यीशु के आने तक कलीसिया की बढ़ोतरी की परमेश्वर की योजना की बात हो, परमेश्वर के रहस्यमई तरीके हमारी अपनी क्षमताओं या उनके कामों की समझ पर निर्भर नहीं हैं। तोभी, परमेश्वर उन्हें जानने, उनकी सेवा करने और बढ़ाने वाले की स्तुति और अपनी आध्यात्मिक परिपक्वता के फल का लाभ उठाने के लिए हमें आमंत्रित करते हैं जिसे वे हममें और हमारे द्वारा विकसित करते हैं।

हम नहीं टूटेंगे

कैलिफ़ोर्निया में रहने के नाते मैं सर्द चीजों से दूर रहती हूँ। हालांकि, बर्फ के चित्र देखना मुझे पसंद हैं। इसलिए जब इलिनोइस से मेरी मित्र ने उसकी खिड़की के बाहर के दृश्य का चित्र भेजा तो मैं मुस्कराने लगी। पर चमकीली बर्फ़ की चादर के बोझ से झुकी शाखाओं को देखकर मेरी प्रशंसा उदासीनता में बदल गई। कोई शाख बर्फ़ का बोझ कितनी देर सह पाएगी? उस भार को देखकर मैं अपने कंधों के बारे में सोचने लगी जो चिंताओं के बोझ से झुके हुए थे।

“सर्वोतम धन सांसारिक या अस्थायी नहीं होता”, यह कह कर यीशु हमें अपनी चिंताओं का त्याग कर देने को कहते हैं। ब्रह्मांड का सृष्टिकर्ता और निर्वाहक अपने बच्चों से प्रेम करता है, और उन्हें तृप्त करता है, तो हमें चिंता करके अनमोल समय व्यर्थ करने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर जानते हैं कि हमें क्या चाहिए और वही हमारी देखभाल करेंगे (मत्ती 6:19-32)। वह सर्वप्रथम हमें उनके पास आने, वर्तमान में उनकी उपस्थिति और प्रावधान पर भरोसा करने, और हर दिन विश्वास से जीने को कहते हैं (पद 33-34)।

जीवन में,  हम परेशानियों और अनिश्चितताओं का सामना करेंगे, जो हमारे कंधों को झुका सकती हैं। जब हम परमेश्वर पर भरोसा करेंगे, तो भले ही चिंता हमें झुका दे पर हमें तोड़ नहीं पाएगी।

निर्भय होकर देना

मेरा बेटा जेवियर छह साल का था, जब मेरी एक मित्र अपने शिशु के साथ हमारे यहाँ आई थी और जेवियर उसे कुछ खिलौने देना चाहता था। उसकी उदारता देखकर मैं खुश थी जब तक कि वह उसे एकदुर्लभ स्टफ़ टॉय ना देने लगा,  मेरी मित्र ने विनम्रता से मना किया तो उसने कहा, "बाँटने के लिए मेरे डैडी मुझे बहुत खिलौने देते हैं।" उदारता से देने की बात उसने मुझ से सीखी थी,  पर मैंने प्रायः अपनी वस्तुओं को परमेश्वर और अन्य लोगों से छिपा कर रखने की कोशिश की है। परन्तु मेरा स्वर्गीय पिता मुझे सब कुछ देता है इसे स्मरण करके बाँटना आसान हो जाता है।

 

इस्राएलियों को जो परमेश्वर ने उन्हें दिया था उसका एक भाग लेवी याजकों को देने, और उन पर भरोसा करने का आदेश मिला था, जो दूसरों की आवश्यकतानुसार मदद करेंगे। जब लोगों ने मना किया, तो मलाकी नबी ने कहा कि वे परमेश्वर को लूट रहे थे (मलाकी 3:8–9)। यदि वे यह दिखाते हुए, कि उन्हें परमेश्वर के प्रबन्ध और सुरक्षा पर भरोसा है, स्वेच्छा से देंगे (10–11) तब सारी जातियां उन्हें परमेश्वर के धन्य लोग बुलाएंगी (12)।

स्वेच्छापूर्ण और निडर दान, हमारे प्यारे पिता की देखभाल में हमारे आत्मविश्वास को दिखाता है-जो एक महान दानी हैं।

सामर्थी और सहज रूप से उपलब्ध

जब मुझे माँ के कैंसर का समाचार मिला तब मेरे पति ऑफिस में थे। एक मेसेज छोड़ कर मैं मित्रों और परिवार को फोन करने लगी। कोई भी उपलब्ध नहीं था। कांपते हाथों से चेहरे को ढक कर, मैं सिसकने लगी, "परमेश्वर मेरी मदद करें।" उन क्षणों में जब मैं पूरी तरह से अकेला महसूस कर रही थी तब एक आश्वासन ने, कि परमेश्वर मेरे साथ थे, मुझे शान्ति दी।

जब मेरे पति आ गए और मित्रों और परिवार से भी प्रोत्साहन मिलने लगा तो मैंने परमेश्वर को धन्यवाद दिया। फिर भी, अकेलेपन और दु:ख के उन कुछ घंटों में परमेश्वर की शांति देने वाली उपस्थिति ने मुझे यह आश्वासन दिया था कि परमेश्वर विश्वसनीय हैं और अति सहज से मिलने वाले सहायक हैं, मेरी हर ज़रूरत के समय में कभी भी, कहीं भी।

भजन 46 कहता हैं, परमेश्वर हमारा शरणस्थान...हमारा ऊँचा गढ़ है। परमेश्वर ने चेले बनाए ताकि वे प्रार्थनाएँ करते हुए एक-दूसरे को प्रोत्साहन और सहायता दें। लेकिन वे यह स्पष्ट भी करते हैं कि वह सामर्थी और सहज रूप से उपलब्ध रहते हैं। जब हम परमेश्वर को पुकारते हैं, तब हमारे लिए उनके उपाय के उनके वादे पर विश्वास कर सकते हैं। वह अपने लोगों के माध्यम से और साथ ही उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति के माध्यम से हमें शांति देंगे।

लेखा रद्द करने वाला

अपना मेडिकल बिल देख कर मेरे आंसू निकल आए। पति लम्बे समय से बेरोजगार थे। यदि मासिक किश्त दें तोभी आधा बिल चुकाने में भी कई साल लगेंगे। अपनी स्थिति स्पष्ट करके भुगतान की योजना का आग्रह करने के लिए डॉक्टर के ऑफिस में फ़ोन करने से पहले मैंने एक प्रार्थना की। थोड़ा समय बाद, रिसेप्शनिस्ट ने मुझे बताया कि डॉक्टर ने हमारे बिल को ख़ारिज कर दिया है।

मैंने सिसकते हुए उसका आभार पूर्वक धन्यवाद किया। फ़ोन रखते हुए, मैंने परमेश्वर की प्रशंसा की। मैंने उस बिल को रख लिया, यह याद दिलाने के लिए नहीं कि मुझे कितना चुकाना था, परन्तु उसे जो परमेश्वर ने किया था।

परमेश्वर ने मेरे पापों के लेखे को रद्द किया है। वचन आश्वासन देता है कि यहोवा “दयालु, अनुग्रहकारी” और “अति करूणामय” हैं, “हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं करता” (भजन 103:8,10)। जब मनफिराव करके हम मसीह को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करते हैं तब “उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, वह हमारे अपराधों को हमसे उतनी दूर करते हैं।” (पद 12) उनका बलिदान ने उस लेखे को मिटाया है जो हमें चुकाना था। पूर्णतः।

अपनी समर्पित स्तुति और आभार युक्त प्रेम देकर, हम उनके लिए जीवन जी सकते हैं और दूसरों के साथ भी उसे बाँट सकते हैं।

विश्वास-निर्माण की समृतियाँ

संगीत से भरपूर चर्च में प्रवेश करके, मैंने उस भीड़ को देखा जो नए वर्ष की संध्या उत्सव में इकट्ठा हुई थी l पिछले वर्ष की प्रार्थनाओं को याद करने पर आनंद ने मेरे हृदय को आशा से भर दिया l हमारी मंडली ने मिलकर बिगड़े बच्चों, प्रियों की मृत्यु, नौकरियों का छूटना, और टूटे संबंधों पर दुःख प्रगट किया l किन्तु हमने परमेश्वर का अनुग्रह भी अनुभव किया जब हमने परिवर्तित हृदय और व्यक्तिगत संबंधों को ठीक होते देखा था l हमने विजय, विवाह, दीक्षांत, और लोगों को बप्तिस्मा लेकर परमेश्वर के परिवार में आने का उत्सव मनाया l हमारे बीच बच्चों का जन्म हुआ, और बच्चे गोद लिए गए, अथवा प्रभु की उपस्थिति में समर्पित किये गए के साथ और बहुत कुछ l

कलीसिया परिवार द्वारा परीक्षा का सामना करने के इतिहास को याद करते समय, जैसे यिर्मयाह ने अपना “दुःख और मारा मारा फिरना” याद किया(विलाप. 3:29), मैंने माना कि “हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है”(पद.22) l जैसे नबी ने अपने को भरोसा दिलाया कि बीते दिनों में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता अमर रही, उसके शब्दों ने मुझे भी आराम दिया : “जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिए यहोवा भला है” (पद.25) l

उस शाम, हमारी मण्डली का हर एक व्यक्ति परमेश्वर के जीवन परिवर्तन करने वाले प्रेम का एक प्रतीक था l हम आगे के वर्षों में मसीह की स्वतंत्र देह के सदस्य के रूप में जिस भी स्थिति का सामना करेंगे, हम प्रभु पर निर्भर रह सकते हैं l और जैसे हम लगातार उसे खोजते हुए एक दूसरे की सहायता करते हैं, हम भी, यिर्मयाह की तरह, परमेश्वर का न बदलनेवाला चरित्र और निर्भरता में अपनी आशा को विश्वास निर्माण की स्मृतियों द्वारा प्रमाणित होते देख सकते हैं l