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जीवन के उतार-चढ़ाव

एक फ़ेसबुक मेमोरी सामने आई, जिसमें मुझे मेरी पाँच साल की विजयी बच्ची दिखी, जब उसने साँप और सीढ़ी का एक मज़ेदार और मुक़ाबलेदार खेल जीता था। मैंने पोस्ट में अपने भाई और बहन को टैग भी किया था क्योंकि जब हम बच्चे थे तो हम अक्सर यह खेल खेला करते थे। यह खेल मनोरंजक है और कई सदियों से खेला जाता रहा है। यह लोगों को गिनती सीखने में भी मदद करता है और सीढ़ी पर चढ़ने और सबसे तेज 100 पायदान तक पहुंचकर गेम जीतने का रोमांच प्रदान करता है। पर ध्यान दें! यदि आप 98 पर पहुँच जाए, तो सांप से कटने के कारण आप काफी नीचे खिसक जाते हैं, जिससे जीतने में विलम्ब हो सकता है - या फिर - जीतने से चूक जाते हैं।

क्या यह बिल्कुल जीवन जैसा नहीं है? यीशु ने प्रेमपूर्वक हमें हमारे जीवन के दिनों के उतार-चढ़ाव के लिए तैयार किया। उन्होंने कहा कि हम “क्लेश” का अनुभव करेंगे (यूहन्ना 16:33), लेकिन उन्होंने शांति का संदेश भी साझा किया। हमें अपने सामने आने वाली परीक्षाओं से विचलित नहीं होना है। क्यों? मसीह ने संसार पर विजय प्राप्त की है! उसकी शक्ति से बढ़कर कुछ भी नहीं है, इसलिए हम भी उस “शक्तिशाली सामर्थ” के साथ जो उसने हमारे लिए उपलब्ध की है, उसके द्वारा हमारे रास्ते में आने वाली किसी भी चीज़ का सामना कर सकते हैं (इफिसियों 1:19)।

साँप और सीढ़ी की तरह, कभी-कभी जीवन एक सीढ़ी प्रस्तुत करता है जिससे हम ख़ुशी-खुशी ऊपर चढ़ जाए, और कभी-कभी हम फिसलन भरे साँप से नीचे गिर जाते हैं। लेकिन हमें जीवन का खेल बिना आशा के नहीं खेलना है। इन सब पर विजयी होने के लिए हमारे पास यीशु की शक्ति हैं। कटारा पैटन

 

परमेश्वर का न्याय और अनुग्रह

ब्रिटिश चित्रकार जॉन मार्टिन (1789-1854) सभ्यताओं के विनाश को दर्शाने वाले अपने सर्वनाशकारी दृश्‍यावली के लिए जाने जाते हैं। इन शानदार दृश्यों में, मनुष्य विनाश की भयावहता से पराजित हैं और सामने आते विनाश के आगे शक्तिहीन हैं। एक पेंटिंग में, द फॉल ऑफ नीनवे, काले घूमते बादलों के नीचे बढ़ती लहरों के विनाश से भागते लोगों को दिखाया है।

मार्टिन की पेंटिंग से दो हजार साल से भी पहले, भविष्यवक्ता नहूम ने नीनवे के विरुद्ध उसके आने वाले न्याय की भविष्यवाणी की थी। भविष्यवक्ता ने हिलते हुए पहाड़ों, पिघलती हुई पहाड़ियों और कांपती धरती की छवियों का इस्तेमाल किया था (नहूम 1:5)परमेश्वर के क्रोध को दर्शाते हुए उन लोगों पर जिन्होंने अपने लाभ के लिए दूसरों पर अत्याचार किया था। हालाँकि, पाप के प्रति परमेश्वर की प्रतिक्रिया अनुग्रह के बिना नहीं है। जबकि नहूम अपने सुनाने वालों को परमेश्वर की शक्ति की याद दिलाता है, साथ ही वह यह भी कहता है कि परमेश्वर “क्रोध करने में धीमा” है (पद 3) और “उन लोगों की परवाह करता है जो उस पर भरोसा करते हैं” (पद 7)।

न्याय के विवरण पढ़ना कठिन लगता है, लेकिन ऐसी दुनिया जहां बुराई का सामना नहीं किया जाता वह भयानक होगी। शुक्र है कि भविष्यवक्ता इसी भाव के साथ अपनी बात समाप्त नहीं करता। वह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर एक अच्छी और न्यायपूर्ण दुनिया चाहता है: “देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनाने वाला और शान्ति का प्रचार करने वाला आ रहा है!” (पद 15) वह शुभ समाचार यीशु है, जिसने पाप के परिणाम भुगते ताकि हम परमेश्वर के साथ शांति पा सकें (रोमियों 5:1, 6)। मैट लुकास

 

बुद्धिमत्तापूर्ण आनंद खोजना

महामारी जीत रही है — कोविड के मरीजों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध एक बड़े अस्पताल के आपातकालीन कक्ष के डॉक्टर को ऐसा ही लग रहा था। वह अपना सर्वश्रेष्ठ कैसे दे? छुट्टी के घंटों के दौरान, वह तनाव मुक्त रहने के लिए किसी भी छोटी चीज़ की बड़ी सी तस्वीर खींचते थें जैसे कि हिमकणों की। डॉक्टर कहते है, ‘’यह सुनने में पागलपन जैसा लगता है।’’ लेकिन कुछ छोटी लेकिन खूबसूरत चीजों में खुशी ढूंढना “मेरे सृष्टिकर्ता के साथ जुड़ने और दुनिया को इस तरह से देखने का यह मेरे लिए एक अवसर है और बहुत कम लोग इस पर ध्यान देने के लोग ही समय निकालते हैं।”

डॉक्टर ने कहा, बुद्धिमानी से ऐसे आनंद की खोज करना - तनाव कम करने और प्रतिरोधक्षमता बनाने के लिए - चिकित्सा पेशे में एक उत्तम बात है। लेकिन बाकी सब के लिए, उनकी यह सलाह है: “आपको सांस लेनी होगी। आपको सांस लेने और जीवन का आनंद लेने का एक तरीका ढूंढना होगा।

भजन संहिताकार दाऊद ने यह विचार भजन भजन संहिता 16 में व्यक्त किया जब उसने परमेश्वर में आनंद पाने की एक बुद्धिमान बात कही। उसने लिखा, “यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है।” “इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।” (पद 5, 9)।

तनाव को कम करने की कोशिश में लोग कई मूर्खतापूर्ण काम करते हैं। लेकिन इस डॉक्टर को बुद्धिमत्तापूर् भरा रास्ता मिल गया - जिसने उसे सृष्टिकर्ता की ओर इशारा किया, जो हमें अपनी उपस्थिति का आनंद प्रदान करता है। । “तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है” (पद 11)। उसमें, हम सदैव आनंद पाते हैं। पैट्रिशिया रेबॉन

 

परमेश्वर का धैर्यवान प्रेम

जब मैं अपनी सुंदर, रोएँदार बिल्ली का पेट सहलाती हूँ और उसके साथ खेलती, या जब वह शाम को मेरी गोद में आकर सो जाती है, तो कभी-कभी यह विश्वास करना कठिन लगता है कि यह वही बिल्ली है जिससे हम वर्षों पहले मिले थे। मेरी पालतू बिल्ली सड़कों पर रहती थी, बहुत पतली-दुबली और वह हर किसी से डर जाती थी। लेकिन यह धीरे-धीरे बदल गया जब मैंने हर दिन उसे खाना देना शुरू किया। एक दिन आख़िरकार उसने मुझे उसे सहलाने दिया, और बाकी तो सब इतिहास है।

मेरी बिल्ली का बदल जाना उस उपचार को दर्शाता है जो धैर्य और प्रेम से आ सकता है। यह मुझे यशायाह 42 में वर्णित परमेश्वर के हृदय की याद दिलाता है। वहां, हमें उनकी आत्मा से भरे एक आने वाले दास के बारे में बताया गया है (पद 1), जो अथक और “विश्वासयोग्यता से” परमेश्वर के “पृथ्वी पर न्याय” को स्थापित करने के लिए काम करेगा (पद 3-4) ।

पर वह सेवक—यीशु (मत्ती 12:18-20)—हिंसा से या शक्ति के पीछे भाग कर परमेश्वर के न्याय को नहीं लाएगा। पर, वह शांत और कोमल होगा (यशायाह 42:2), दूसरों द्वारा त्यागे गए लोगों की कोमलता और धैर्यपूर्वक देखभाल करेगा - ऐसे जो “चोट खाए हुए” और घायल हो (पद 3)।

परमेश्वर अपने बच्चों को कभी नहीं छोड़ते। उनके पास हमारे घायल दिलों की देखभाल करने के लिए दुनिया का सारा समय है, जब तक कि वे अंततः ठीक न होने लगें। उनके कोमल, धैर्यवान प्रेम के द्वारा हम धीरे-धीरे एक बार फिर प्रेम और भरोसा करना सीखते हैं। मोनिका ला रोज़

 

परमेश्वर के परिवार में जोड़े गए

कुछ साल पहले मैं अपने पिता के साथ उनके प्रिय शहर गई थी और उस पारिवारिक खेत का दौरा किया जहाँ वह पले-बढ़े थे। मैंने अजीब पेड़ों का एक समूह देखा। मेरे पिताजी ने समझाया कि जब बचपन में उन्हें शरारत करने की सूझती, तो वह एक फल के पेड़ से एक टूटी हुई शाखा लेते, एक अलग प्रकार के फल के पेड़ में चीरा लगाते, और टूटी हुई शाखा को तने से बाँध देते थे, जैसा की उन्होंने बड़ो को करते देखा था। उनकी शरारतों पर तब तक ध्यान नहीं गया जब तक कि उन पेड़ों पर उम्मीद से अलग फल लगने नहीं लगे।

जैसे ही मेरे पिताजी ने ग्राफ्टिंग की प्रक्रिया का वर्णन किया(जिसमे दो अलग-अलग पौधों के तनों को एक साथ जोड़ा जाता है, और वें एक ही पौधे के रूप में विक्सित होने लगते है) मुझे एक तस्वीर दिखी यह दर्शाते हुए कि परमेश्वर के परिवार में जोड़े जाने का हमारे लिए क्या मतलब है। मैं जानती हूँ कि मेरे दिवंगत पिता अब स्वर्ग में हैं क्योंकि यीशु में विश्वास के द्वारा उन्हें परमेश्वर के परिवार में जोड़ा गया था।

अंततः हमें भी स्वर्ग में होने का आश्वासन मिला है। प्रेरित पौलुस ने रोम में विश्वासियों को समझाया कि परमेश्वर ने अन्यजातियों, या गैर-यहूदियों के लिए एक मार्ग बनाया है जिससे परमेश्वर और उनका मेल-मिलाप हो सके: “जंगली जलपाई होकर उन में साटे गए, और जलपाई की जड़ की चिकनाई के भागी हुए है।” (रोमियों 11:17)। जब हम मसीह में अपना विश्वास रखते हैं, तो हम उसके साथ जुड़ जाते हैं और परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। “यदि तुम मुझ में बने रहो और मैं तुम में, तो तुम बहुत फल फलोगे” (यहुन्ना 15:5)।

जोड़े गए पेड़ों के समान, जब हम मसीह पर भरोसा करते हैं, तो हम एक नई रचना बन जाते हैं और बहुत फल पैदा कर सकते हैं। नैन्सी गैविलेन्स

 

मसीह पर बनाए हुए

आगरा में ताज महल, दिल्ली का लाल किला, मैसूर में रॉयल पैलेस, महाबलीपुरम में तट मंदिर सभी प्रसिद्ध नाम हैं। कुछ संगमरमर से बने हैं, कुछ लाल पत्थर से बने हैं, कुछ चट्टान को काटकर बनाए गए हैं और अन्य सोने से जड़े हुए हैं लेकिन इन सभी में एक चीज समान है, वे एक सामान्य शब्दावली के अंतर्गत आते हैं, वे सभी इमारतें हैं।

आत्मिक घर,वास्तव में, यीशु में विश्वासियों के लिए बाइबल में दिए गए नामों में से एक है। “तुम . .परमेश्वर का मंदिर हो,’’ प्रेरित पौलुस ने लिखा (1 कुरिन्थियों 3:9)। विश्वासियों के लिए अन्य नाम भी हैं: “झुंड” (प्रेरितों के काम 20:28), “मसीह की देह” (1 कुरिन्थियों 12:27), “भाई और बहनें” (1 थिस्सलुनीकियों 2:14), और भी कई।

इमारत का रूपक 1 पतरस 2:5 में दोहराया गया है, जहाँ पतरस कलीसिया से कहता है, “तुम भी आप जीवते पत्थरों के समान, एक आत्मिक घर बनते जाते हो।” फिर, पद 6 में, पतरस यशायाह 28:16 को बताता है, “"देखों, मैं सिय्योन में कोने के सिरे का चुना हुआ और बहुमूल्य पत्थर धरता हूँ।” यीशु ही अपनी इमारत की नींव है।

हम ऐसा समझ सकते है कि कलीसिया बनाना हमारा काम है, लेकिन यीशु ने कहा, “मैं अपनी कलीसिया बनाऊंगा” (मत्ती 16:18)। हमें परमेश्वर द्वारा “उसकी स्तुति का वर्णन करने” के लिए चुना गया है जिसने “तुम्हें अंधकार से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है” (1 पतरस 2:9)। जब हम उन स्तुतियों का बखान करते हैं, तो उसके भले काम जो वो करता है उसके लिए हम उसके हाथों में साधन बन जाते हैं। बिल क्राउडर

 

स्नेपडील नगर

उत्तर प्रदेश के एक गांव ने ऑनलाइन कॉरपोरेशन के सम्मान में अपना नाम बदलकर “स्नेपडील.कॉम नगर” रख लिया, जिसने उनकी मदद की। 2011 से पहले, गांव वालों को पानी लाने के लिए हर दिन कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी। लेकिन ऑनलाइन कंपनी की बदौलत अब उन्हें हैंडपंप के ज़रिए आसानी से साफ पानी मिल रहा है। सी.इ.ओ कुणाल भाल ने कहा कि यह एक अनाम कर्मचारी की वजह से संभव हुआ, जो पास के गांव से आया था। इस कर्मचारी ने ग्रामीणों की दुर्दशा को कॉरपोरेशन के साथ साझा किया और उसके सरल संदेश ने सैकड़ों लोगों के जीवनों में खुशियों भरा बदलाव ला दिया।

बाइबल में एक नबी के क्रांतिकारी कार्यों का वर्णन है। इस नबी ने निर्भीकता से क्रूर राजा अहाब को परमेश्वर का संदेश सुनाया। राजा के लिए उसका संदेश सुखद नहीं था, लेकिन यह सत्य था और उसने परमेश्वर की आज्ञाकारिता में इसे सुनाया (पद.42)। एलिय्याह जैसे अन्य नबी भी थे, जो उसी समय अवधि में रहते थे और भविष्यवाणी करते थे। जबकि उनके नाम और कार्य प्रसिद्ध हैं, इस नबी का नाम नहीं बताया गया है। फिर भी, उसने वह कार्य पूरा किया जो परमेश्वर ने उसके लिए निर्धारित किया था।

स्नैपडील नगर के कर्मचारी की तरह इस अनाम भविष्यवक्ता ने भी सच बोला, भले ही उसने यथास्थिति को चुनौती दी हो। ऐसी दुनिया में जहाँ मान्यता की माँग करना असामान्य नहीं है, हम अपने जीवन के हर पहलू में चुपचाप और बिना किसी दिखावे के परमेश्वर की आज्ञा मानने की कोशिश करें। जब हम परमेश्वर के बच्चों के रूप में अपने रिश्तों, बातों और कार्यों के माध्यम से उसका संदेश प्रसारित करते हैं, तो हम भी बदलाव के साधन बन सकते हैं। अनाम होने के बावजूद, हम अज्ञात नहीं हैं। क्योंकि परमेश्वर हमारे कर्मों को देखता है और वह जानता है कि हम क्या करते हैं, तब भी जब कोई और नहीं जानता (इब्रानियों 6:10)। —रेबेका विजयन

एक अच्छी बिरयानी

वर्षा की फूड स्टॉल पर सबसे ज्यादा बिकने वाला व्यंजन उसकी बिरयानी थी। वह प्याज को बहुत सावधानी से भूनती थी जब तक कि उसका रंग सुनहरा भूरा न हो जाए। इसलिए, वह चौंक गई जब एक नियमित ग्राहक ने कहा, “आपकी बिरयानी का स्वाद अलग लग रहा है, स्वाद में कुछ कमी लग रही है।” वर्षा की नई सहयोगी ने इस बार इसे तैयार किया था और बताया कि यह अलग क्यों थी: “मैंने प्याज उतनी देर तक नहीं भूनी जितनी देर रेसिपी में कहा गया था क्योंकि मैं इसे घर पर इसी तरह करती हूँ। मैंने मिर्ची पाउडर भी थोड़ा ज्यादा डाला था। मेरी राय में, इस तरह इसका स्वाद बेहतर लगता है।” उसने तय किया कि बताई गयी रेसिपी को नजरअंदाज करके वह इसे अपने तरीके से बनाएगी।

इसी तरह मैं भी कभी-कभी परमेश्वर के निर्देशों के साथ करती हूँ। पवित्रशास्त्र में दी गई उनकी आज्ञाओं का पूरी तरह से पालन करने के बजाय, मैं उन्हें अपनी राय के अधीन करती हूँ और अपने रास्ते पर आगे बढ़ती हूँ।

सीरियाई सेना का सेनापति नामान भी ऐसी ही गलती करने की कगार पर था।उसका कुष्ठ रोग ठीक हो जाए, इसके लिए एलीशा नबी के द्वारा यरदन में खुद को धोने के लिए परमेश्वर का निर्देश पाने पर, अभिमानी सेनापति क्रोधित हो गया। उसकी अपनी अपेक्षाएँ थीं कि उसकी आवश्यकता को कैसे संबोधित किया जाना चाहिए, यह मानते हुए कि उसकी राय परमेश्वर की आज्ञा से बेहतर थी (2 राजा 5:11-12)। हालाँकि, उसके सेवकों ने उसे एलीशा की बात सुनने के लिए मना लिया (पद 13)। परिणामस्वरूप, नामान चंगा हो गया।

जब हम परमेश्वर के तरीके से काम करते हैं, तो हमें एक ऐसी शांति का अनुभव होता है जो अवर्णनीय है। आइए उसके उद्देश्यों को पूरा करने में उसके साथ काम करें। करेन हुआंग