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बढ़ते हुए! अडिग

“रेस्ट/विश्राम(Rest)” नामक कविता में, कवि धीरे-धीरे “फुरसत” के समय को “काम” से अलग करने की हमारी प्रवृत्ति को चुनौति देता हुआ पूछता है, “क्या सच्ची फुरसत / सच्चा परिश्रम एक नहीं है?” यदि आप जीवन के कर्तव्यों से दूर रहकर उसके स्थान पर सच्ची फुरसत का अनुभव करना चाहते हैं, तो लेखक आग्रह करता है, “फिर भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें; उसका उपयोग करें, उसे व्यर्थ न गवाएँ ——/ अन्यथा वह आराम नहीं है l /क्या सुन्दरता निहारना चाहेंगे/ अपने निकट? चारों-ओर? / केवल कर्तव्य है / ऐसी ही स्थिति है l”

कवि इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सच्चा विश्राम और आनंद दोनों ही प्रेम और सेवा से मिलते हैं—एक विचार जो थिस्सलुनीकियों के लिए पौलुस का प्रोत्साहन याद दिलाता है l अपनी बुलाहट के वर्णन के द्वारा विश्वासियों को प्रोत्साहित करते हुए कि “उनका चाल-चलन परमेश्वर के योग्य हो” (1 थिस्सलुनीकियों 2:12) प्रेरित और अधिक निश्चित विवरण देता है l 

और ऐसे जीवन का चित्र जो वह बनाता है वह शांत सत्यनिष्ठा, प्रेम और सेवा का है l पौलुस प्रार्थना करता है कि परमेश्वर “ऐसा करें कि . . . आपका प्रेम एक दूसरे के प्रति और सब के प्रति बढ़ता और उमड़ता रहे’” (3:12) और वह यीशु में विश्वासियों से आग्रह करता है कि “चुपचाप रहने और अपना-अपना काम काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न [करें]” (4:11) l यह उस तरह का जीवन है, जिस तरह से परमेश्वर ने हमें सक्षम बनाया है, चुपचाप प्रेम और सेवा करना, जो दूसरों के समक्ष विश्वास के जीवन की सुन्दरता को प्रकट करता हैI (पद.12)  

अथवा, जैसे वह लेखक लिखता है, सच्चा आनंद “प्रेम करने और सेवा करने/ सबसे ऊंचा और सर्वोत्तम;/ आगे बढ़ने वाला! अडिग—/और यही सच्चा विश्राम है l”

अपनी चौकसी करो

एक व्यक्ति और अनेक मित्र स्की रिसोर्ट गेट से अन्दर गए जिस पर हिमस्खलन (Avalanche) के चेतावनी संकेत होने के बावजूद स्नोबोर्डिंग(बर्फ पर फिसलना) करने लगे l दूसरी बार नीचे आते समय, कोई चिल्लाया, “हिमस्खलन!” लेकिन वह व्यक्ति बच न सका और गिरती हुए बर्फ में दब कर मर गया l कुछ ने उसे नौसिखिया बताते हुए उसकी आलोचना की l लेकिन वह नौसिखिया नहीं था; वह एक “हिमस्खलन-प्रमाणित गाइड(Avalanche-certified guide)” था l एक शोधकर्ता ने कहा कि अक्सर सबसे अधिक हिमस्खलन प्रशिक्षण वाले स्कीयर(skiers) और स्नोबोर्डर्स (snowboarders) में ही दोषपूर्ण तर्क देने की सम्भावना देखने को मिलती है l “स्नोबोर्डर(snowboarder) की मृत्यु इसलिए हुयी क्योंकि उसने अपनी सतर्कता को हलके में लिया l 

जैसे ही इस्राएल प्रतिज्ञात देश में जाने की तैयारी करने लगा, परमेश्वर चाहता था कि उसके लोग अपनी चौकसी करें—सावधान और सचेत रहें l इसलिए उसने उन्हें उसके सभी “विधि और नियम” मानने की आज्ञा दी (व्यवस्थाविवरण 4:1-2) और अतीत में अनाज्ञाकारियों पर उसके दंड को स्मरण रखें (पद.3-4) l उन्हें स्वयं की जाँच करने और अपने आंतरिक जीवन पर नज़र रखने के लिए “चौकसी” करनी थी (पद.9) l इससे उन्हें बाहर से आध्यात्मिक खतरों और भीतर से आध्यात्मिक उदासीनता से बचने में मदद मिलती l 

हमारे लिए अपनी चौकसी छोड़ना और उदासीनता और आत्म-धोखे में पड़ना आसान है l लेकिन परमेश्वर हमें  जीवन में गिरने से बचने की शक्ति दे सकता है और जब हम गिरते हैं तो उसके अनुग्रह से क्षमा मिलती हैं l  उसका अनुसरण करके और उसकी बुद्धि और प्रावधान में आराम करके, हम अपने बचाव को बनाए रख सकते हैं और अच्छे निर्णय ले सकते हैं !

अपनी वाणी का उपयोग

आठ साल की उम्र से, लीसा हकलाहट के साथ संघर्ष करती थी और सामाजिक स्थितियों से डरने लगी जहाँ उसे लोगों से बात करने की ज़रूरत होती थी l लेकिन आगे जीवन में, वाक्-चिकित्सा(स्पीच थेरेपी/speech therapy) की सहायता से अपनी चुनौती पर विजय पाने के बाद लीसा ने अपनी आवाज़ को दूसरों की मदद करने में उपयोग करने का निर्णय लिया l वह एक भावनात्मक संकट टेलेफोन हॉटलाइन(इमोशनल डिस्ट्रेस टेलीफोन हॉट लाइन/emotional distress telephone hotline) के लिए परामर्शदाता के रूप में कार्य करने लगी l 

इस्राएलियों को दासत्व से बाहर निकालने में सहायता करने के लिए बोलने के विषय में मूसा को अपनी चिंताओं का सामना करना पड़ा l परमेश्वर ने उसे फिरौन के साथ संवाद करने के लिए कहा, परन्तु मूसा ने विरोध किया क्योंकि वह अपनी बोलने की क्षमता में आत्मविश्वास महसूस नहीं करता था (निर्गमन 4:10) l परमेश्वर ने उसे चुनौती दी, “मनुष्य का मुँह किसने बनाया है? तब उसने मूसा को यह कहते हुए आश्वास्त किया, “मैं तेरे मुख के संग होकर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखलाता जाऊँगा” (पद.11-12) l 

परमेश्वर का प्रतिउत्तर हमें याद दिलाता है कि वह हमारी सीमाओं में भी हमारे द्वारा शक्तिशाली रूप से कार्य कर सकता है l लेकिन इसे अपने हृदय में जानते हुए भी, इसे जीना कठिन हो सकता है l मूसा संघर्ष करता रहा और किसी और को भेजने के लिए परमेश्वर से विनती की (पद.13) l इसलिए परमेश्वर ने मूसा के भाई हारून को उसके साथ जाने दिया (पद.14) l 

हममें से हर एक के पास आवाज़ है जो दूसरों की सहायता कर सकता है l हम भयभीत हो सकते हैं l हम अक्षम महसूस कर सकते हैं l हमें लग सकता है कि हमारे पास सही शब्द नहीं हैं l 

परमेश्वर जानता है हम कैसा महसूस करते हैं l वह दूसरों की सेवा करने के लिए शब्द और हमारी सारी आवश्यकता पूरी कर सकता है और अपने काम को पूरा कर सकता है l 

परमेश्वर का प्रेम

1917 में, वित्तीय घाटे की असफलता से कैलिफ़ोर्निया का एक व्यवसायी, फ्रेडरिक लेहमन ने, “द लव ऑफ़ गॉड(The Love of God)” गीत के शब्द लिखे l उसकी प्रेरणा ने उसे पहले दो अंतरा लिखने के लिए प्रेरित किया, लेकिन वह तीसरे पर अटक गया l उसने एक कविता को याद किया जो वर्षों पहले खोजी गयी थी, जो एक जेल की दीवारों पर लिखी गयी थी l एक कैदी परमेश्वर के प्रेम के बारे में गहरी जागरूकता व्यक्त करते हुए, इसे वहां पत्थर पर कुरेद कर गया था l संयोग से वह कविता और लेहमन के भजन के छंद दोनों समान थे l उसने इसे अपना तीसरा अंतरा बनाया l 

ऐसा समय होता है जब हम लेहमन और जेल की कोठरी से कवि के समान कठिन नाकामयाबियों का सामना करते हैं l निराशा के समय, हम भजनकार दाऊद के शब्दों को प्रतिध्वनित करके बेहतर महसूस करते हैं और “[परमेश्वर के] पंखो तले शरण [लेते हैं]” (भजन 57:1) l अपनी परेशानियों के साथ “परमेश्वर को [पुकारना] (पद.2), उससे अपने  वर्तमान की आजमाइश और “सिंहों के बीच में” होने के अपने डर के बारे में बात करना ठीक है (पद.4) l हमें जल्द ही अतीत में परमेश्वर के प्रावधान की सच्चाई की याद आ जाती है, और दाऊद के साथ जुड़ जाते हैं जो कहता है, “मैं गाऊँगा वरन् कीर्तन करूँगा . . . मैं . . . पौ फटते ही जाग उठूँगा” (पद. 7-8) l 

“द लव ऑफ़ गॉड इज़ ग्रेटर फार(The Love of God is greater far),” यह गीत घोषणा करता है, और उसमें जोड़ता है “इट गोज़ बियॉन्ड द हाईयेस्ट स्टार(it goes beyond the highest star) l” यह वास्तव में हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता के समय में है जब हमें गले लगाना है कि वास्तव में परमेश्वर का प्रेम कितना महान है—जो निस्संदेह “आकाशमंडल तक पहुँचता है” (पद.10) l