सेवा करने हेतु एक साथ रचे गए
एक ग्रामीण क्षेत्र में, एक खलिहान बनाना एक सामाजिक कार्यक्रम है l एक किसान के परिवार को एक खलियान बनाने के लिए बहुत महीने लगेंगे परंतु गांव वाले साथ काम करके उसे जल्दी पूरा कर देते हैं l समय से पहले लकड़ियों का इंतजाम किया जाता है, औजारों को लाया जाता है l एक नियुक्त दिन में बहुत सबेरे पूरा गांव एक जगह एकत्र होता है, काम बांटे जाते हैं, और एक साथ मिलकर खलिहान बना दिया जाता है─कभी-कभी एक दिन में l
यह कलीसिया के लिए परमेश्वर के दर्शन की एक अच्छी तस्वीर है जिसमें हमारी भूमिका है। बाइबल कहती है “तुम सब मिलकर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो” (1 कुरिन्थियों 12:27) परमेश्वर ने हम में से प्रत्येक जन को विभिन्न रूप से योग्य बनाया है और कार्य को विभाजित किया है जिसमें हममें से प्रत्येक “एक साथ गठकर . . . ठीक ठीक कार्य” करते हैं ( इफिसियों 4:16) l हम समाज में “एक दूसरे का भार” उठाने के लिए प्रोत्साहित किये गए हैं (गलतियों 6:2)।
फिर भी हम इसे अक्सर अकेले ही करना चाहते हैं। हम परिस्थितियों को अपने नियंत्रण में रखने के लिए, अपनी आवश्यकताओं को अपने तक ही सीमित रखते हैं। और हम दूसरों की जरूरतों के बोझ को उठाने के लिए अपने कंधे को उपलब्ध करने में असमर्थ रहते हैं l परंतु परमेश्वर चाहता है कि हम अन्य लोगों से संपर्क करें। वो जानता है कि जब हम दूसरों की सहायता मांगते हैं और उनकी आवश्यकता के लिए प्रार्थना करते हैं तो खूबसूरत चीजें होती हैं l
हम एक दूसरे पर आश्रित होकर ही अनुभव कर सकते हैं कि परमेश्वर के पास हमारे लिए क्या है और वह उसे कैसे हमारे जीवन में अद्भुत तरीके से पूरा करता है─जैसे एक दिन में एक खलिहान का निर्माण।

साक्षी चिन्ह
“उसे देखें?” घड़ी साज़ ने हमारे घर में पुरानी बड़ी दीवार घड़ी की मरम्मत करते समय अपनी टॉर्च की रोशनी घड़ी में एक छोटे से चिन्ह पर चमकाया l उसने कहा “इसे लगभग एक शताब्दी पहले किसी अन्य घड़ी साज़ ने लगा दिया होगा।“ “जिसे ‘साक्षी चिन्ह’ कहा जाता है, और इससे मुझे इस घड़ी की यंत्रावली को ठीक करने के विषय सहायता मिलती है।“
तकनीकी खबरों और मरम्मत नियमावलियों के युग से पहले “साक्षी चिन्ह” का प्रयोग कर भविष्य में सूक्ष्मता से चलनेवाले पुर्जों को मिलाने के लिए मरम्मत करने वाले व्यक्ति की मदद करने में उपयोग किया जाता था l जिन्हें समय बचाने से बढ़कर उस दूसरे व्यक्ति के लिए नेंकी के एक चिन्ह स्वरूप छोड़ा जाता था जो उस पर बाद में काम करेगा।
जबकि हम परमेश्वर के कार्य में कार्यरत हैं तो बाइबल हमें इस बिखरी दुनिया में अपने साक्षी चिन्हों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। पौलुस रोम की कलीसिया को लिखता है कि “हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये प्रसन्न करे कि उसकी उन्नति हो” (रोमियो 15:2)। यह हमारे परमेश्वर का उदाहरण है जो “धीरज, और शान्ति का दाता” है, (पद 5)। यह पृथ्वी और स्वर्ग दोनों के अच्छे नागरिक बनना है।
हो सकता है कि हमारा साक्षी चिन्ह छोटी सी बात दिखे, परंतु वह किसी के जीवन में बहुत बड़े अंतर को ला सकता है। प्रोत्साहन का शब्द, आवश्यकता में किसी व्यक्ति को एक आर्थिक उपहार, और एक सुनने वाले कान─यह सभी नेकी के चिन्ह हैं जिनका प्रभाव बहुत लंबे समय तक रहता है। परमेश्वर दूसरों के जीवन में आपके द्वारा एक साक्षी चिन्ह बनाने में आपकी सहायता करें।

परमेश्वर का दूतावास
लुडमिल्ला, एक विधवा स्त्री, जिसकी उम्र अस्सी वर्ष है, ने चेक गणराज्य में अपने घर को "स्वर्ग के राज्य का दूतावास" घोषित किया है, यह कहते हुए, "मेरा घर मसीह के राज्य का विस्तार है।" वह प्रेम भरे सत्कार के साथ उन अजनबियों और दोस्तों का स्वागत करती है जो आहत और जरूरतमंद हैं, कभी-कभी भोजन और सोने के लिए जगह प्रदान भी करती है─हमेशा एक दयालु और प्रार्थनापूर्ण भावना के साथ। अपने घर पर आने वाले लोगों की देखभाल में मदद करने के लिए पवित्र आत्मा की प्रेरणा पर भरोसा करते हुए, वह परमेश्वर द्वारा उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर देने के तरीकों से आनंदित होती है।
लुडमिल्ला यीशु की सेवा अपने घर और दिल को खोलने के द्वारा करती है, उस प्रमुख धार्मिक नेता के विपरीत जिसके घर पर यीशु ने एक सब्त के दिन खाना खाया था। यीशु ने व्यवस्था के इस शिक्षक से कहा कि उसे "गरीब, अपंग, लंगड़े, अंधों" का अपने घर में स्वागत करना चाहिए─उनका नहीं जो उसे चुका सकते हैं (लूका 14:13)। जबकि यीशु की टिप्पणी का अर्थ है कि उस फरीसी ने यीशु का स्वागत अपने घमंड के कारण किया (पद.12), लुडमिल्ला, इतने सालों बाद, लोगों को अपने घर में आमंत्रित करती है ताकि वह "परमेश्वर के प्रेम और उसकी बुद्धि का एक साधन" बन सके।
जैसा कि लुडमिल्ला कहती हैं, नम्रता से दूसरों की सेवा करना एक तरीका है जिससे हम “स्वर्ग के राज्य के प्रतिनिधि” बन सकते हैं। हम अजनबियों के लिए बिस्तर उपलब्ध करा पाए या नहीं, हमें अलग-अलग और रचनात्मक तरीकों से दूसरों की जरूरतों को अपनी से ऊपर रखना है । आज हम संसार के अपने हिस्से में परमेश्वर के राज्य का विस्तार कैसे कर सकते है?

परमेश्वर दागों को साफ करते हैं
क्या हो अगर हमारे कपड़े अधिक कार्यात्मक बन जाए , केचप या सरसों का सॉस या एक पेय गिराने के बाद वे अपने आप खुद को साफ करने की क्षमता रख पाए ? बीबीसी के अनुसार, चीन में इंजीनियरों ने एक विशेष "कोटिंग विकसित की है जिसके द्वारा सूती कपड़े पराबैंगनी रोशनी के संपर्क में आते ही खुद को दागों और दुर्गन्ध से साफ़ कर सकते हैं।" क्या आप स्वयं-सफाई कपड़े रखने के प्रभावों की कल्पना कर सकते हैं?
एक खुद को साफ़ करने वाली परत दाग़ वाले कपड़ों के लिए काम कर सकती है, लेकिन केवल परमेश्वर ही आत्मा पर लगे दाग़ों को साफ कर सकते हैं। प्राचीन यहूदा में, परमेश्वर अपने लोगों से क्रोधित था क्योंकि उन्होंने "अपनी पीठ फेर ली थी,” खुद को भ्रष्टाचार और बुराई के लिए दे दिया था, और झूठे देवताओं की आराधना कर रहे थे (यशायाह 1:2-4)। लेकिन स्थिति को और बदतर बनाने के लिए, उन्होंने बलिदान चढ़ाने, धूप जलाने, बहुत प्रार्थना करने और पवित्र सभाओं में एक साथ इकट्ठा होने के द्वारा स्वयं ही खुद को शुद्ध करने की कोशिश की। फिर भी उनके पाखंडी और पापी हृदय बने रहे (पद. 12-13)। उनके लिए उपाय यह था कि वे अपने होश में आ जाएं और पश्चातापी हृदय से उनकी आत्मा पर लगे दागों को एक पवित्र और प्रेममय परमेश्वर के सामने लाये। उसका अनुग्रह उन्हें शुद्ध करेगा और उन्हें आत्मिक रूप से "बर्फ के समान सफेद" बना देगा (पद १८)।
जब हम पाप करते हैं, तो कोई स्व-सफाई समाधान नहीं होता। एक विनम्र और पश्चातापी हृदय के साथ, हमें अपने पापों को स्वीकार करना है और उन्हें परमेश्वर की पवित्रता के साफ़ करने वाले प्रकाश के नीचे लाना है। हमें उनसे फिरकर और उसके पास लौटना है। और वह एकमात्र, जो आत्मा के दाग़ों को साफ करता है, हमें पूर्ण क्षमा और नयी संगति प्रदान करेगा।
जानने की सीमाओं से परे
यह एक कठिन दिन था जब मेरे पति को पता चला कि कई अन्य लोगों की तरह, उन्हें भी जल्द ही कोविद-19 महामारी के परिणामस्वरूप रोजगार से निकाल दिया जाएगा। हमें विश्वास था कि परमेश्वर हमारी मूल जरूरतों को पूरा करेंगे, लेकिन यह कैसे होगा इसकी अनिश्चितता अभी भी भयानक थी।
जैसे ही मैं अपनी उलझी हुई भावनाओं के साथ आगे बढ़ी, मैंने खुद को सोलहवीं शताब्दी के सुधारक जॉन ऑफ द क्रॉस की एक पसंदीदा कविता पर दोबारा गौर करते हुए पाया। शीर्षक "मैं अंदर गया, मुझे नहीं पता कहाँ," कविता समर्पण की यात्रा में पाए जाने वाले आश्चर्य को दर्शाती है, जब, "जानने की सीमाओं को पार करते हुए," हम "परमेश्वर को उसके सभी रूपों में समझना" सीखते हैं। और इसलिए ऐसे समय के दौरान मैंने और मेरे पति ने यही करने की कोशिश की : जो हमारे नियंत्रण में है उससे अपना ध्यान हटाकर और अनपेक्षित, रहस्यमय और उन सुन्दर तरीको को समझे जिनके द्वारा हम परमेश्वर को अपने चारों ओर पा सकते है।
प्रेरित पौलुस ने विश्वासियों को देखी से अनदेखी, बाहरी से भीतर की वास्तविकताओं की ओर, और अस्थायी संघर्षों से "सनातन महिमा जो उन सब से अधिक है" की यात्रा के लिए आमंत्रित किया (2 कुरिन्थियों 4:17)।
पौलुस ने ऐसा आग्रह इसलिए नहीं किया क्योकि उसे उनके संघर्षों पर सहानुभूति नहीं थी। वह जानता था कि जो कुछ वे समझ सकते हैं, उसे छोड़ देने के द्वारा ही वे आराम, आनंद और आशा का अनुभव कर सकते हैं जिसकी उन्हें अत्यधिक आवश्यकता थी (पद. 10, 15-16)। तथा वे सभी चीजों को नया बनाने वाले मसीह के जीवन के आश्चर्य को जाने।
