श्रेणी  |  odb

किसी सूत्र की जरूरत नहीं

जब मेघना छोटी थी, उसके सुविचारित संडे स्कूल के शिक्षक ने कक्षा को सुसमाचार देने के लिए प्रशिक्षित किया, जिसमें कई सारे वचनों को याद करना और सुसमाचार साझा करने का एक सूत्र शामिल था। उसने और उसकी एक सहेली ने घबराहट के साथ अपने एक दूसरे दोस्त पर इसे करने की कोशिश की, इस डर से कि कहीं वे किसी महत्वपूर्ण वचन या कदम भूल न जाएँ। मेघना को "याद नहीं है कि यदि उस शाम का अंत मन परिवर्तन के साथ हुआ [लेकिन अनुमान है] ऐसा नहीं हुआ।" यह तरीका व्यक्ति से ज्यादा उस सूत्र पर केंद्रित प्रतीत हुआ।

 

अब, वर्षों बाद, मेघना और उनके पति अपने बच्चों में परमेश्वर के प्रति प्रेम और अपने विश्वास को और अधिक आकर्षक तरीके से साझा करते हैं। वे अपने बच्चों को परमेश्वर, बाइबल और यीशु के साथ एक व्यक्तिगत संबंध के बारे में सिखाने के महत्व को समझते हैं, लेकिन वे इसे परमेश्वर और उसके वचन से प्रेम करने के कारण अपने दैनिक जीवन के उदहारण से करते है । वे यह प्रदर्शित करते हैं कि "जगत की ज्योति" (मत्ती 5:14) होने और दयालुता और सत्कारशील शब्दों के माध्यम से दूसरों तक पहुँचने  का क्या अर्थ है । मेघना कहती हैं, "हम दूसरों को जीवन के वचन नहीं दे सकते, अगर वे खुद हमारे अंदर न हो।" जैसे वह और उनके पति अपने जीवन द्वारा दया दिखाना प्रदर्शित करते  हैं, इससे वे अपने बच्चों को "दूसरों को उनके विश्वास में आमंत्रित करने" के लिए तैयार करते हैं।

हमें दूसरों को यीशु तक ले जाने के लिए किसी नुस्खे की आवश्यकता नहीं है - जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है वे यह है कि परमेश्वर के लिए हमारा प्रेम विवश करता और हमारे द्वारा चमकता है। जैसे-जैसे हम उसके प्रेम में जीते और उसके प्रेम को साझा करते हैं, परमेश्वर दूसरों को भी उसे जानने के लिए आकर्षित करता है।

हमें दूसरों को यीशु तक ले जाने के लिए किसी नुस्खे की आवश्यकता नहीं है - जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है वे यह है कि परमेश्वर के लिए हमारा प्रेम विवश करे और हमारे द्वारा चमके। जैसे-जैसे हम उसके प्रेम में जीते और उसके प्रेम को साझा करते हैं, परमेश्वर दूसरों को भी उसे जानने के लिए आकर्षित करता है।

न्याय और यीशु

रोम के पहले सम्राट कैसर औगुस्तुस (ई.पूर्व 63─14 ई.सन्) चाहते थे कि उन्हें एक कानून-व्यवस्था शासक के रूप में जाना जाए। भले ही उसने दास श्रम, सैन्य विजय, और वित्तीय रिश्वतखोरी के बल पर अपने साम्राज्य का निर्माण किया, लेकिन उसने कानूनी नियत प्रक्रिया का एक उपाय स्थापित किया और अपने नागरिकों को लुस्टितिआ दी, एक देवी जिसे आज हमारी न्याय प्रणाली लेडी जस्टिस(न्याय की देवी) के रूप में संदर्भित करती है। उसने एक जनगणना का भी आह्वान किया जो मरियम और युसूफ को बेथलहम ले आया ताकि एक लम्बे समय से प्रतीक्षित शासक का जन्म हो सके जिसकी महानता पृथ्वी के छोर तक पहुंचेगी (मीका 5:2-4)।

न तो औगुस्तुस और न ही बाकी दुनिया यह अनुमान लगा सकती थी कि कैसे एक सर्वश्रष्ठ महान राजा जीकर और मरकर यह दिखाएगा कि वास्तव में न्याय किस प्रकार होता है। सदियों पहले, भविष्यवक्ता मीका के दिनों में, परमेश्वर के लोग एक बार फिर झूठ, हिंसा, और "गलत धन" की संस्कृति में खो गए थे (6:10-12)। परमेश्वर के प्रिय राष्ट्र ने उसकी दृष्टि खो दी थी। वह उनसे चाहता था कि वे संसार को दिखाएँ कि एक दूसरे के द्वारा सही काम करने का क्या मतलब है और उसके साथ नम्रता से चले(पद.8)।

एक दास समान राजा ने मनुष्य रूप में होकर उस तरह के न्याय को व्यक्त किया जिसे दुखित,, भूलाए गए और असहाय लोग लंबे समय से चाहते थे। यीशु में ही मीका की भविष्यवाणी पूरी हो सकी जिसके द्वारा परमेश्वर और मनुष्य, और मनुष्यों के बीच में सही संबंधो की स्थापना हो पाई। यह कैसर के बाहरी प्रवर्तन जैसी कानून-व्यवस्था से नहीं आ सकता था, बल्कि हमारे दास राजा यीशु की दया, भलाई और आत्मा की स्वतंत्रता से आया है।

खामियों के साथ

रोम के पहले सम्राट कैसर औगुस्तुस (ई.पूर्व 63─14 ई.सन्) चाहते थे कि उन्हें एक कानून-व्यवस्था शासक के रूप में जाना जाए। भले ही उसने दास श्रम, सैन्य विजय, और वित्तीय रिश्वतखोरी के बल पर अपने साम्राज्य का निर्माण किया, लेकिन उसने कानूनी नियत प्रक्रिया का एक उपाय स्थापित किया और अपने नागरिकों को लुस्टितिआ दी, एक देवी जिसे आज हमारी न्याय प्रणाली लेडी जस्टिस(न्याय की देवी) के रूप में संदर्भित करती है। उसने एक जनगणना का भी आह्वान किया जो मरियम और युसूफ को बेथलहम ले आया ताकि एक लम्बे समय से प्रतीक्षित शासक का जन्म हो सके जिसकी महानता पृथ्वी के छोर तक पहुंचेगी (मीका 5:2-4)।

न तो औगुस्तुस और न ही बाकी दुनिया यह अनुमान लगा सकती थी कि कैसे एक सर्वश्रष्ठ महान राजा जीकर और मरकर यह दिखाएगा कि वास्तव में न्याय किस प्रकार होता है। सदियों पहले, भविष्यवक्ता मीका के दिनों में, परमेश्वर के लोग एक बार फिर झूठ, हिंसा, और "गलत धन" की संस्कृति में खो गए थे (6:10-12)। परमेश्वर के प्रिय राष्ट्र ने उसकी दृष्टि खो दी थी। वह उनसे चाहता था कि वे संसार को दिखाएँ कि एक दूसरे के द्वारा सही काम करने का क्या मतलब है और उसके साथ नम्रता से चले(पद.8)।

एक दास समान राजा ने मनुष्य रूप में होकर उस तरह के न्याय को व्यक्त किया जिसे दुखित,, भूलाए गए और असहाय लोग लंबे समय से चाहते थे। यीशु में ही मीका की भविष्यवाणी पूरी हो सकी जिसके द्वारा परमेश्वर और मनुष्य, और मनुष्यों के बीच में सही संबंधो की स्थापना हो पाई। यह कैसर के बाहरी प्रवर्तन जैसी कानून-व्यवस्था से नहीं आ सकता था, बल्कि हमारे दास राजा यीशु की दया, भलाई और आत्मा की स्वतंत्रता से आया है।

प्रेम गीत

शनिवार की दोपहर एक शांत नदी के किनारे एक पार्क। दौड़ने वाले(joggers) गुजरते हैं, मछली पकड़ने की छड़ें चक्कर खाति हैं, पक्षी मछली और बचे हुए भोजन के लिए लड़ रहे होते हैं,  और मेरी पत्नी और मैं उस जोड़े को देख रहे होते। वे सांवले थे , शायद अपने चालीसवें दशक में होंगे। वह बैठी हुई उसकी आँखों में टकटकी लगाए देखती, जबकि वह बिना किसी शर्मीलेपन का संकेत देते हुए, उसके लिए अपनी ही भाषा में एक प्रेम गीत गाता, जो हवा द्वारा ले जाया जाकर हम सभी को सुनाई देता।  

इस आनंदमय दृश्य ने मुझे सपन्याह की पुस्तक के बारे में सोचने पर मजबूर किया। सबसे पहले आपको आश्चर्य हो सकता है कि क्यों। सपन्याह के दिनों में, परमेश्वर के लोग झूठे देवताओं (1:4-5) को दण्डवत करने के द्वारा भ्रष्ट हो गए थे, और इस्राएल के भविष्यद्वक्ता और याजक अब अभिमानी और अपवित्र (3:4) थे। अधिकांश पुस्तक में, सपन्याह न केवल इस्राएल पर बल्कि पृथ्वी के सभी राष्ट्रों पर परमेश्वर के आने वाले न्याय की घोषणा करता है (पद.8)।

तौभी सपन्याह कुछ और भी देख पता है। उस अन्धकार के  दिन में से एक ऐसे लोग निकलेंगे जो पूरे हृदय से परमेश्वर से प्रेम करते होंगे  (पद. 9-13)। इन लोगों के लिए परमेश्वर उस दूल्हे के समान होगा जो अपने प्रियतम से प्रसन्न होता है : "वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा" (पद.17)।

सृष्टिकर्ता, पिता, योद्धा, न्यायाधीश। पवित्रशास्त्र परमेश्वर के लिए कई नाम का उपयोग करता है। लेकिन हममें से कितने लोग परमेश्वर को एक गायक के रूप में देखते हैं जिसके होठों पर हमारे लिए एक प्रेम गीत है?