आप अकेले नहीं हैं
“आपको देखकर बहुत ख़ुशी हुई !” “आपको, भी!” “बहुत ख़ुशी है कि आप यहाँ हैं!” शुभकामनाएँ गर्मजोशी और स्वागत के थे । एक दूसरे शहर की एक सेवाकाई के सदस्य अपने शाम के कार्यक्रम से पहले ऑनलाइन एकत्र हुए । उनके वक्ता के रूप में, मुझे बुलाते हुए, मैं चुपचाप देखता रहा, जब बाकी लोग वीडियो कॉल पर इकट्ठे होने लगे । एक अंतर्मुझी के रूप में और किसी को नहीं जानने के कारण, मैंने एक सामाजिक रूप से बाहरी व्यक्ति की तरह महसूस किया । फिर अचानक, एक स्क्रीन खुला और वहां मेरे पास्टर थे । फिर एक और स्क्रीन खुला । लम्बे समय से एक चर्च मित्र भी कॉल में शामिल हो रहे थे । उन्हें देखकर, मुझे अब अकेला महसूस नहीं हुआ । ऐसा लगता था, परमेश्वर, समर्थन भेजा था ।
इज़ेबेल और अहाब के प्रकोप से बचकर निकलने के बाद “अकेला [नबी] रह गया है” के जैसा अनुभव करने के बावजूद एलिय्याह अकेला नहीं था (1 राजा 19:10) । मरुभूमि के बियाबान में चालीस दिन और चालीस रात तक यात्रा करने के बाद, एलिय्याह होरेब पर्वत पर एक गुफा में छिप गया । लेकिन परमेश्वर ने उसे सेवा में वापस बुलाकर उससे कहा, “लौटकर दमिश्क के जंगल को जा, और वहां पहुँचकर अराम का राजा होने के लिए हजाएल का और इस्राएल का राजा होने को निमशी के पोते येहू का, और अपने स्थान पर नबी होने के लिए आबेलमहोला के शापात के पुत्र एलिशा का अभिषेक करना” (पद.15-16) ।
परमेश्वर ने उसके बाद आश्वस्त किया, “तौभी मैं सात हज़ार इस्राएलियों को बचा रखूँगा । ये तो वे सब हैं, जिन्होंने न तो बाल के आगे घुटने टेके, और न मुँह से उसे चूमा है” (पद.18) । जैसा कि एलिय्याह ने सीखा, परमेश्वर की सेवा करते समय हम अकेले सेवा नहीं करते हैं । जब परमेश्वर सहायता पहुंचाता है, हम मिलकर सेवा करते हैं ।

यीशु का एक सच्चा शिष्य
जब एक कला संग्राहक ने अपनी वैन गोग चित्रकारी (एक प्रसिद्ध पाश्चात्य चित्रकार) एक कला विशेषज्ञ को दिखाया, विशेषज्ञ ने उस पर एक नज़र डाली और कहा कि यह असली नहीं है । संग्राहक ने उसके बाद उस चित्रकारी को अपनी अटारी में छिपा दिया, जहाँ वह पचास वर्षों तक रखा रहा । उसकी मृत्यु के बाद, और अगले चार दशकों तक उस चित्रकारी का रह रह कर मूल्यांकन होता रहा । हर बार यह पक्का किया गया कि वह नकली था──2012 तक, जब तक कि एक विशेषज्ञ ने चित्रकारी फलक(canvas) के धागा विभाजन(thread separation) को गिनने के लिए कंप्यूटर का उपयोग नहीं किया । उसने पता लगाया कि यह एक ही कैनवास से वैन गोग के एक और चित्रकारी के रूप में काटा गया था । कला संग्राहक के पास वैन गोग का असली चित्रकारी था ।
क्या आप नकली की तरह अनुभव करते हैं? क्या आप डरते हैं कि यदि लोग आपको जाचेंगे, वह जान जाएंगे कि आप कितना कम प्रार्थना करते हैं, कितना कम देते हैं, और कितना कम सेवा करते हैं? क्या आप ताँक-झाँक करनेवाली आँखों से दूर, अटारी में छिपने के लिए प्रलोभित हैं?
अपने जीवन की रूप-रेखा, और रंग के नीचे, गहराई में देखें । यदि आप अपने मार्गों से मुड़ गए हैं और यीशु में विश्वास किये हैं, तब आप और वह एक ही कैनवास के हिस्से हैं । यीशु की तस्वीर का उपयोग करने पर, “मैं दाखलता हूँ : तुम डालियाँ हो” (यूहन्ना 15:5) । यीशु और आप सीवनहीन संपूर्णता बनते हैं ।
यीशु में विश्राम करना आपको उसका सच्चा शिष्य बनाता है । यह अपनी तस्वीर को सुधारने का भी केवल एक तरीका है । उसने कहा, “जो मुझे में बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते” (पद.5) ।

परमेश्वर की प्रशंसा करें
शिष्यता सम्मलेन में पूरे सप्ताह गर्मी के मौसम की गर्मी और उमस ने हमें घेर लिया, लेकिन आखिरी दिन हमने ठंडी हवा के झोंके का स्वागत किया । मौसम में बदलाव और परमेश्वर द्वारा किये गए अद्भुत कार्य के लिए धन्यवाद देते हुए, सैंकड़ों ने परमेश्वर की प्रशंसा, आराधना करने के लिए अपनी आवाजें मिलाईं । कईयों ने परमेश्वर के समक्ष पूरे दिल से गाने के लिए स्वतंत्रता का अनुभव करते हुए, हृदयों, आत्माओं, शरीरों, और मनों को उसके सामना अर्पित किया । जब मैं दशकों बाद उस दिन के विषय विचार करती हूँ, मुझे परमेश्वर की प्रशंसा के निर्मल आश्चर्य और आनंद की याद आती है ।
राजा दाऊद जानता था कि परमेश्वर की आराधना पूरे मन से कैसे की जाती है । वह अतिआनन्दित हुआ──नाचने, कूदने, और उत्सव मनाने के द्वारा──जब वाचा का संदूक, जो परमेश्वर की उपस्थिति प्रगट करता था, यरूशलेम में पहुँचा । (1 इतिहास 15:29) । यद्यपि उसकी पत्नी मीकल ने उसके उन्माद पर ध्यान दिया और “उसे मन ही मन तुच्छ जाना” (पद.29), दाऊद ने उसकी आलोचना को उसे एक सच्चे परमेश्वर की आराधना करने से रोकने नहीं दिया । यहाँ तक कि यदि वह मर्यादाहीन दिख भी रहा था, वह परमेश्वर को राष्ट्र की अगुवाई करने में उसका चुनाव करने के लिए धन्यवाद देना चाहता था (2 शमूएल 6:21-22 देखें) ।
दाऊद ने “यहोवा का धन्यवाद करने का काम आसाप और उसके भाइयों को सौंप दिया : यहोवा का धन्यवाद करो, उससे प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो , उसके सब आश्चर्यकर्मों का ध्यान करो” (1 इतिहास 16:7-9) । हम भी अपनी प्रशंसा और भक्ति को उंडेल कर परमेश्वर की पूर्ण आराधना करने में अपने को समर्पित करें ।

यीशु लेबिल(Jesus ।abel)
“बेटा, मेरे पास तुम्हें देने के लिए बहुत कुछ नहीं है । लेकिन मेरे पास एक अच्छा नाम है, इसलिए इसे नहीं बिगाड़ना ।” ये बुद्धिमान वजनी शब्द जेरोम के पिता ने कहे जब वह कॉलेज के लिए रवाना हुआ । जेरोम ने अपने पिता को उद्धृत किया जब उसने एक व्यवसायी एथलिट के रूप में मंच पर पुरस्कार प्राप्त किये । ये मूल्यवान शब्द जो जेरोम ने अपने सम्पूर्ण जीवन के दौरान अपने साथ ले कर चला इतने प्रभावशाली रहे हैं कि उसने अपने पुत्र से समान शब्द बोलते हुए अपना दिलचस्प भाषण समाप्त किया । “बेटा, मेरे पास अधिक कुछ नहीं है जो मैं तुम्हें दे सकता हूँ जो हमारे भले नाम से अधिक महत्वपूर्ण है ।”
एक अच्छा नाम यीशु में विश्वासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है । कुलुस्सियों 3:12-17 में पौलुस के शब्द हमें उसके विषय याद दिलाते हैं जिसके हम प्रतिनिधि हैं (पद.17) । चरित्र एक वस्त्र की तरह है जो हम धारण करते हैं; और यह परिच्छेद “यीशु लेबिल(Jesus ।abe।)” के वस्त्र का प्रदर्शन(disp।ay) करता है । “इसलिए परमेश्वर के चुने हुओं के समान . . . बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो . . . एक दूसरे की सह लो और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो . . . इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबंध है बाँध लो” (पद.12-14) । यह केवल “रविवारीय वस्त्र” नहीं है । इन्हें हमें हर जगह, सब समय, पहनना है, जब परमेश्वर उसे प्रतिबिंबित करने के लिए हममें काम करता है । जब हमारे जीवन इन गुणों से चरितार्थ होते हैं, हम दर्शाते हैं कि हम उसका नाम धारण किये हुए हैं ।
जब वह हमारी ज़रूरतें पूरी करता है हम प्रार्थनापूर्वक और सावधानी से उसका प्रतिनिधित्व करें ।

दुःख के लिए शब्दावली
जब मोहन और रेखा ने अपने एकलौते बच्चे को स्वर्ग को दे दिया, उन्होंने संघर्ष किया कि अब वे दोनों अपने को क्या संबोधित करेंगे । एक बच्चे को खो चुके माता-पिता का वर्णन करने के लिए हिंदी भाषा में कोई विशिष्ट शब्द नहीं है । पति के बिना पत्नी विधवा है । पत्नी के बिना पति विधुर होता है । माता-पिता के बिना एक बच्चा अनाथ होता है । एक माता-पिता, जिनके बच्चे की मृत्यु हो गयी है, पीड़ा की अपरिभाषित खाई है ।
गर्भपात/अकाल प्रसव(miscarriage) । शिशु की अचानक मृत्यु । आत्महत्या । बिमारी । दुर्घटना । मृत्यु एक बच्चे को इस संसार से छीन लेती है और उसके बाद उत्तरजीवी(surviving) माता-पिता की अभिव्यक्त पहचान छीन लेती है ।
फिर भी परमेश्वर खुद ऐसे विनाशकारी दुःख को समझता है क्योंकि उसका एकलौता पुत्र, यीशु ने, क्रूस पर मरते समय उसे पुकारा, “हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ” (लूका 23:46) । यीशु के पृथ्वी पर के जन्म से पूर्व परमेश्वर पिता था और पिता ही बना रहा जब यीशु ने अपनी साँस को त्यागा । परमेश्वर पिता बना रहा जब उसके पुत्र का मृत शरीर कब्र में रखा गया । परमेश्वर आज भी अपने पुनरुथित पुत्र के पिता के रूप में जीवित है जो हर एक माता-पिता को आशा देता है कि एक बच्चा फिर से जीवित हो सकता है ।
आप स्वर्गिक पिता को क्या पुकारते हैं जो इस संसार के लिए अपने पुत्र को बलिदान करता है? आपके और मेरे लिए? पिता । अभी भी, पिता । जब दुःख की शब्दावली में हानि के दुःख को समझाने के लिए शब्द नहीं हैं, परमेश्वर हमारा पिता है और हमें अपने बच्चे संबोधित करता है (1 यूहन्ना 3:1) ।