
प्रेम का सच्चा स्वभाव
महामारी तालाबंदी के दौरान, जेरी को अपना फिटनेस सेन्टर को बंद करने को विवश होना पड़ा और महीनों तक उसको कोई आमदनी नहीं हुई l एक दिन उसके एक मित्र से उसे एक सन्देश प्राप्त हुआ, जो उसे शाम 6.00 बजे उसके प्रतिष्ठान पर मिलने के लिए कह रहा था l जेरी को नहीं मालूम था क्यों लेकिन वह वहां गया l जल्द ही कारें पार्किंग स्थल पर पहुँचने लगीं l पहली कार के ड्राईवर ने इमारत के निकट फूटपाथ पर एक टोकरी रखी l उसके बाद एक के बाद दूसरी (लगभग 50) कारें आयीं l जो कारों के अन्दर थे उन्होंने जेरी को हाथ से इशारा किया या जोर से हेलो बोला, टोकरी के निकट पहुंचकर, और एक कार्ड या नगद डालें l कुछ लोगों ने पैसे दिए; सभी ने उसको प्रोत्साहित करने के लिए अपना समय दिया l
प्रेरित पौलुस के अनुसार, प्रेम का सच्चा स्वरूप बलिदानी है l उसने कुरिन्थियों को समझाया कि मकिदुनिया के लोगों ने “अपनी सामर्थ्य भर वरन् सामर्थ्य से भी बाहर” दिया ताकि वे प्रेरितों और दूसरों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दे सकें (2 कुरिन्थियों 8:3) l उन्होंने पौलुस से उनको और परमेश्वर के लोगों को देने के सुअवसर के लिए “निवेदन” किया l उनके देने का आधार स्वयं यीशु का बलिदानी हृदय था l वह स्वर्ग के धन को छोड़कर एक दास बनने और अपने ही जीवन को देने इस धरती पर आया l “वह धनी होकर भी [हमारे] लिए कंगाल बन गया” (पद.9) l
हम भी परमेश्वर से अनुरोध करें ताकि हम भी “इस दान के काम में भी बढ़ते जाएँ” (पद.7) जिससे दूसरों की आवश्यकताओं को प्रेमपूर्वक पूरा कर सकें l

सुनना मायने रखता है
“तुरंत आ जाइए l हम एक बर्फ के चट्टान से टकरा गए हैं l” ये प्रथम तीन शब्द आर एम एस कारपाथिया(Carpathia) के वायरलेस ऑपरेटर, हेरोल्ड कोट्टम के थे, जो डूबते हुए आर एम एस टाइटैनिक(Titanic) से अप्रैल 15, 1912 को 12.25 बजे सुबह प्राप्त हुए थे l कारपाथिया (Carpathia) तबाही स्थल पर पहुंचकर 706 जीवनों को बचानेवाला पहला जहाज़ होने वाला था l
कुछ दिनों के बाद अमेरिकी सिनेट की सुनवाई में, कारपाथिया(Carpathia) के कप्तान, आर्थर रोस्ट्रोन ने गवाही दी, “सब कुछ ईश्वरकृत था . . . . l वायरलेस ऑपरेटर उस समय अपने कक्ष में था, कोई भी शासकीय काम बिलकुल नहीं था, लेकिन कपड़े बदलते समय यूँही सुन रहा था . . दस मिनट के भीतर शायद वह सो गया होता, और वह उस सन्देश को नहीं सुना होता l”
सुनना मायने रखता है──विशेषकर परमेश्वर को सुनना l भजन 85 के लेखक, कोरहवंशियों, ने लिखते समय ध्यानपूर्वक आज्ञाकारिता का आग्रह किया, “मैं कान लगाए रहूँगा कि परमेश्वर यहोवा क्या कहता है, वह तो अपनी प्रजा से जो उसके भक्त हैं, शांति की बातें करेगा; परन्तु वे फिरके मुर्खता न करने लगें l निश्चय उसके डरवैयों के उद्धार का समय निकट हैं”(पद.8-9) l उनकी ताड़ना विशेषकर मार्मिक है क्योंकि उनके पूर्वज कोरह ने परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया था और बियाबान में नाश हो गए थे (गिनती 16:1-35) l
जिस रात टाइटैनिक डूबा, एक और जहाज़ नजदीक था, लेकिन वायरलेस ऑपरेटर सो चुका था l यदि वह संकट संकेत सुना होता और भी जानें बच गई होतीं l जब हम परमेश्वर की शिक्षा को सुनकर उसकी आज्ञा मानते हैं, वह जीवन के अत्यधिक अशांत जल में भी होकर जाने में हमारी मदद करेगा l

सब की पहुँच में
एलयूथेरा के छोटे कैरिबियन द्वीप पर एक मानव निर्मित पुल से, आगंतुक अटलांटिक के उत्तेजित गहरे नीले जल और कैरिबियन सागर के शांत फिरोजी जल के बीच के स्पष्ट अंतर का आनंद ले सकते हैं l समय के बीतने के साथ, तूफ़ान ने धरती के मूल भूभाग को मिटा दिया जो किसी समय पत्थर का प्राकृतिक मेहराब था l ग्लास विंडो ब्रिज(Glass Window Bridge) जो एलयूथेरा पर पर्यटकों का आकर्षण है “धरती पर “सबसे संकीर्ण जगह” के रूप में जाना जाता है l
बाइबल अनंत जीवन की ओर जाने वाले मार्ग का वर्णन संकरा “और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं” के रूप में करती है (मत्ती 7:14) l फाटक छोटा है क्योंकि परमेश्वर का पुत्र ही एकमात्र पुल है जो पतित मानव और परमेश्वर का मेल पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से करा सकता है (पद.13-14 यूहन्ना 10:7-9; 16:13 देखें) l हालाँकि, पवित्रशास्त्र यह भी कहता है कि हरेक जाति, राष्ट्र और समाजीय दर्जा के लोग स्वर्ग में प्रवेश कर सकते हैं और राजाओं के राजा को दण्डवत करेंगे और उसके सिंहासन के चारों ओर उपासना करेंगे (प्रकाशितवाक्य 5:9) l विरोध और एकता की यह अद्भुत छवि में परमेश्वर के सब भिन्न-भिन्न खूबसूरत लोग शामिल हैं l
यद्यपि हम अपने पापों के कारण परमेश्वर से अलग हैं, परमेश्वर द्वारा सृष्ट हर व्यक्ति मसीह के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध के द्वारा मेल के इस संकरे पथ पर चलकर स्वर्ग में अनंतता में प्रवेश करने के लिए आमंत्रित हैं l क्रूस पर उसके बलिदान, कब्र से पुनरुथान, और स्वर्ग में आरोहण ही वह सुसमाचार है जो सब के पहुँच में है और जो आज और हर दिन साझा करने के योग्य है l

अनुशासित करनेवाला प्रेम
उसने दरवाज़ा जोर से बंद किया l उसने पुनः दरवाज़ा जोर से किया l मैं गराज में गया, एक हथौड़ा और एक पेंचकस पकड़ा, और अपनी बेटी के कमरे में गया l धीरे से मैं फुसफुसाया, “प्रिय l तुम्हें अपने क्रोध को नियंत्रित करना सीखना होगा l” उसके बाद मैंने दरवाज़े को उसके कब्जों से अलग करके गराज में रख दिया l मेरी आशा थी कि अस्थायी रूप से दरवाज़े को हटाना उसे आत्म-नियंत्रण के महत्त्व को याद करने में मदद करेगा l
नीतिवचन 3:11-12 में, बुद्धिमान शिक्षक अपने पाठकों को परमेश्वर का अनुशासन स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करता है l शब्द अनुशासन का अनुवाद “सुधार” हो सकता है l एक नेक और प्रेमी पिता के जैसे, परमेश्वर आत्म-विनाशक व्यवहार को सुधारने के लिए अपनी आत्मा एवं पवित्र वचन के द्वारा बात करता है l परमेश्वर का अनुशासन सम्बन्धात्मक है──जो हमारे लिए सर्वोत्तम है उसके लिए उसके प्रेम और उसकी इच्छा में जड़वत l कभी-कभी वह परिणाम के समान दिखाई देता है l कभी-कभी परमेश्वर किसी का उपयोग हमारे कमज़ोर विषय को प्रगट करने के लिए करता है l अक्सर, यह असुखद होता है, लेकिन परमेश्वर का अनुशासन एक उपहार है l
लेकिन हम उसे उस नज़रिए से नहीं देखते हैं l बुद्धिमान व्यक्ति ने चिताया, “यहोवा की शिक्षा से मुंह न मोड़ना” (पद.11) l कभी-कभी हम परमेश्वर के अनुशासन से डरते हैं l दूसरे समयों में हम अपने जीवनों में बुरी चीजों को परमेश्वर का अनुशासन मान लेते हैं l यह प्रेमी पिता के हृदय से बहुत दूर है जो इसलिए अनुशासित करता है क्योंकि वह हममें आनंद लेता है और हमें सुधारता है क्योंकि वह हमें प्यार करता है l
परमेश्वर के अनुशासन से डरने के बजाय, हम उसे स्वीकार करना सीखें l जब हम अपने हृदयों में परमेश्वर के सुधार की आवाज़ सुनते हैं या पवित्र वचन पढ़ते समय दोषभावना का अनुभव करते हैं, हम परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं कि वह सर्वोत्तम की ओर अगुवाई करने में हममें पर्याप्त रूप से आनंदित होता है l
