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पुनः उठ खड़े हो

ओलंपिक धावक रेयान हॉल आधी लम्बी दौड़(half merathon) के लिए अमेरिकी रिकॉर्ड-धारक है l उन्होंने 13.1 मील (21 किलोमीटर) की दूरी को इक्यावन मिनट और तैंतालीस सेकंड के उल्लेखनीय समय में पूरा किया, जिससे वह एक घंटे के भीतर दौड़ने वाले पहले अमेरिकी एथलीट बन गए l जबकि हॉल ने रिकॉर्ड-सेटिंग की जीत का जश्न मनाया है, उसने एक दौड़ पूरी नहीं कर पाने की निराशा को भी जाना है l 

सफलता और असफलता दोनों का स्वाद चखने के बाद, उसे सँभालने के लिए हॉल यीशु में अपने विश्वास को श्रेय देता है l उसकी पसंददीदा बाइबल पदों में से एक नीतिवचन की किताब से एक उत्साहजनक अनुस्मारक है कि “धर्मी चाहे सात बार गिरे तौभी उठ खड़ा होता है” (24:16) l यह नीतिवचन हमें याद दिलाता है कि धर्मी लोग, जिन पर भरोसा करते हैं और परमेश्वर के साथ एक रिश्ता रखते हैं, वे इसके बावजूद भी परेशानियों और कठियाइयों का अनुभव करेंगे l हालाँकि, जब वे कठिनाई के मध्य भी निरंतर उसे ढूढ़ते है, परमेश्वर उन्हें फिर से उठ कर खड़े होने की ताकत देता है l

क्या आपने हाल ही में एक विनाशकारी निराशा या असफलता का अनुभव किया है और महसूस करते हैं कि आप कभी भी ठीक नहीं होंगे? पवित्रशास्त्र हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने ताकत पर भरोसा न करें, लेकिन परमेश्वर और उसके वादों पर अपना विश्वास बनाए रखें l जैसा कि हम उस पर भरोसा करते हैं, परमेश्वर की आत्मा हमें इस जीवन में आने वाली हर कठिनाई के लिए ताकत देता है, जो सांसारिक रूप से महत्वपूर्ण संघर्षों से मिलती है (2 कुरिन्थियों 12:9) l 

महानता

कथबर्ट उत्तरी इंग्लैंड में अति-प्रिय व्यक्तिव है l सातवीं शताब्दी में इस क्षेत्र के अधिकाँश हिस्से में सुसमाचार प्रचार के लिए जिम्मेदार, कथबर्ट ने सम्राटों को सलाह दिया और राज्य को प्रभावित किया; और उनकी मृत्यु के बाद, उनके आदर में डरहम शहर बनाया गया l लेकिन इन से अधिक तरीकों से कथबर्ट की विरासत महान है l 

एक महामारी(plague) द्वारा उस क्षेत्र को उजाड़ने के बाद, कथबर्ट ने एक बार प्रभावित इलाके का दौरा करते हुए दिलासा दी l एक गाँव को छोड़ते समय, उन्होंने पता लगाया कि क्या प्रार्थना करने के लिए कोई बचा है l हाँ एक बची थी──एक महिला, एक बच्चे को पकड़ी हुई l उसने पहले ही एक बेटे को खो दिया था, और जिस बच्चे को पकड़ी हुई थी वह भी मरने पर था l कथबर्ट ने बुखार से पीड़ित बच्चे को अपने बाहों में उठा लिया, उसके लिए प्रार्थना की, और उसके माथे को चूमा l उन्होंने उससे कहा, “डरो मत, क्योंकि तुम्हारे घर में और किसी की भी मृत्यु नही होगी l” बताते हैं कि बच्चा जीवित रहा l 

यीशु ने महानता का सबक देने के लिए एक छोटे बच्चे को गोद में लेकर, कहा, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है” (मरकुस 9:37) l यहूदी संस्कृत में किसी का “स्वागत” करने का अर्थ उसकी सेवा करना था, जिस प्रकार एक मेजबान एक अतिथि की करता है l चूकिं बच्चे वयस्कों की सेवा करते थे और उनकी सेवा नहीं की जाती थी, इसलिए यह विचार चौंकाने वाला था l यीशु के बोलने का मतलब? सबसे छोटे और निम्नतम की सेवा में ही सच्ची महानता निवास करती है l 

सम्राटों का सलाहकार l इतिहास को प्रभावित करने वाला l उसके सम्मान में एक शहर का बनाया जाना l लेकिन शायद स्वर्ग कथबर्ट की विरासत को इस तरह अधिक लिपिबद्ध करता है : एक माँ पर ध्यान दिया गया l एक माथे को चूमा गया l एक नम्र जीवन अपने स्वामी को प्रतिबिंबित किया l 

भुलाया नहीं गया

“अंकल, क्या आपको वो दिन याद है जब आप मुझे नाई की दूकान और सुपरमार्केट में ले गए थे? मैं एक भूरे रंग का पैंट, एक नीली चारखानेदार स्वेटर, भूरे मोज़े, और भूरे रंग के जूते पहने था l वह दिन था गुरूवार, अक्टूबर 20, 2016 l” मेरे भांजे की स्वलीनता(autism)-सम्बंधित चुनौतियाँ उसके असाधारण स्मृति से दूर हो गई हैं जो किसी घटना के वर्षों बाद भी दिन और दिनांक और कपड़े जो वह पहना था याद रख सकता है l 

जिस तरह से उसे बनाया गया है उसके कारण, मेरे भांजे के पास इस प्रकार की स्मृति है जो मुझे सर्वज्ञानी, प्रेमी परमेश्वर──समय और अनंतता का पालक──की याद दिलाता है l वह तथ्यों को जानता है और अपने वादों या अपने लोगों को नहीं भूलेगा l क्या आपके पास ऐसे क्षण हैं जब आपने सवाल किया हो कि परमेश्वर आपको भूल गया या नहीं भूला? जब दूसरे अधिक स्वस्थ, आनंदित या अधिक सफल या अन्यथा बेहतर दिखाई देते हैं? 

प्राचीन इस्राएल की आदर्श से भी कम स्थिति ने उसके बोलने का कारण बना, “यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है” (यशायाह 49:14) l लेकिन मामला यह नहीं था l परमेश्वर की अनुकम्पा और देखभाल स्नेह के स्वाभाविक बंधन से अधिक था जो माताओं का अपने बच्चों के लिए होता है (पद.15) l “त्याग दिया है” या “भूल गया है” जैसे सूचक पत्र को अपनाने से पहले परमेश्वर ने अपने पुत्र, यीशु में और के द्वारा क्या किया है के विषय विचार करें l सुसमाचार में जो क्षमा लेकर आता है, परमेश्वर ने स्पष्ट कहा है, “मैं तुझे नहीं भूल सकता” (पद.15) l

यीशु के साथ चलना

पहाड़ों पर पैदल चलनेवाले बिना चर्बी की भोजन  आपूर्ति, जलरोधक जूते, और एक नक्शा, जैसे आवश्यक सामन हैं जो वे लेकर चलते हैं l यह लम्बी पैदल यात्रा मार्ग में संकरी खाड़ी, आसपास की झील और जंगल, और ऊपर पहाड़ों पर, हज़ारों फीट की ऊंचाई पार करना शामिल होता है l इसलिए कि पहाड़ की ऊंचाई के कारण पहाड़ पर तिरछे चढ़ने में कई सप्ताह लग सकते हैं, सही मात्रा में आपूर्ति लेकर चलना जोखिम का काम है l बहुत अधिक आपूर्ति लेकर चलने से आप इसे लेकर चलने में थक जाएंगे; बहुत कम लेकर चलेंगे तो यात्रा में आपकी ज़रूरत की वस्तु कम पड़ जाएगी l 

यीशु में विश्वासियों के रूप में अपनी यात्रा को अच्छी तरह से समाप्त करने के लिए भी सावधनीपूर्वक विचार की आवश्यकता है कि हम क्या लेकर चलते हैं l इब्रानियों 12 में, प्रेरित पौलुस हमसे “हर एक रोकनेवाली वस्तु और उलझानेवाले पाप को दूर” करने की नसीहत देता है l वह हमारे जीवन की तुलना “एक दौड़” से करता है “जिसमें हमें दौड़ना है” जिसमें हमें “निराश होकर साहस नहीं [छोड़ना]” है (पद. 1,3) l हमारे लिए परमेश्वर के उद्देश्य के बाहर पाप का  अत्यधिक बोझ उठाना या चीजों द्वारा विकर्षित होना अनावश्यक बोझ ढोना है l 

जैसे पहाड़ पर पैदल चलने के लिए पैकिंग सूची दी गयी है, परमेश्वर ने बाइबल में यीशु का अनुसरण करने के लिए दिशा निर्देश दिया है l हम जान सकते हैं कि पवित्रशास्त्र के प्रकाश में कौन-सी आदतें, सपने और इच्छाएँ हैं जिनकी जांच आवश्यक है l जब हम कम सामान लेकर यात्रा करते हैं, हम सही तौर से समाप्त करेंगे l