
सत्य के साथ झूठ
मैंने अपनी बाइबल मंच पर रखी और प्रतीक्षा कर रहे उत्सुक चेहरों को आँखें गड़ाकर देखा जो उपदेश सुनने के लिए मेरा इंतज़ार कर रहे थे l मैंने प्रार्थना करके तैयारी की थी l मैं क्यों नहीं बोल पा रहा था?
तुम बेकार हो । तुम्हें कभी भी कोई नहीं सुनेगा, खासकर यदि उनको तुम्हारा अतीत पता है । और परमेश्वर कभी तुम्हें उपयोग नहीं करेगा । मेरे हृदय और मन में बैठे हुए, मेरे जीवन पर विभिन्न तरीकों से बोले गए इन शब्दों ने झूठ के खिलाफ एक दशक लंबे युद्ध को सुलगा दिया था जो मैंने आसानी से विश्वास किया था । हालाँकि मुझे पता था कि यह शब्द सही नहीं थे, मैं अपनी असुरक्षा और भय से बच नहीं पा रहा था । तो मैंने अपनी बाइबल खोली l
नीतिवचन 30:5 की ओर मुड़ते हुए, जोर से पढ़ने से पहले मैंने धीरे से साँस अन्दर खींची और छोड़ी l “परमेश्वर का एक एक वचन ताया हुआ है, ”मैंने पढ़ा, “वह अपने शरणागतों की ढाल ठहरा है ।” मैंने अपनी आँखें बंद की जब शांति ने मुझे अभिभूत किया, और मैंने भीड़ के साथ अपनी गवाही बाँटना शुरू किया ।
हम में से कई लोगों ने नकारात्मक शब्दों या विचारों की पंगु करने वाली शक्ति का अनुभव किया है । हालाँकि, परमेश्वर का शब्द “ताया हुआ,” सिद्ध और बिल्कुल सही है । जब हम अपने मूल्य या परमेश्वर के बच्चों के रूप में अपने उद्देश्य के बारे में आत्मा को कुचलने वाले विचारों पर विश्वास करने के लिए ललचाते हैं, तो परमेश्वर का स्थायी और अचूक सत्य हमारे दिमाग और हमारे दिलों की रक्षा करता है l हम भजनकार के साथ गूंज सकते है, जिसने लिखा : “हे यहोवा, मैं ने तेरे प्राचीन नियमों को स्मरण करके शान्ति पाई है” (भजन 119:52) l
हम नकारात्मक-बोल के स्थान पर बाइबल से झूठ का मुकाबला करें जो हमने परमेश्वर, अपने, और दूसरों के विषय स्वीकार किया है l
परमेश्वर के अनुग्रह में बढ़ना
अंग्रेज प्रचारक चार्ल्स एच. स्पर्जन (1834-1892) ने “पूरी शक्ति” से जीवन जीया l वह 19 साल की उम्र में पास्टर बने──और जल्द ही बड़ी भीड़ को प्रचार करने लगे । वह खुद ही अपने सभी उपदेशों को संपादित करते थे, जो जल्द ही 36 संस्करण बन गए, और उन्होंने अनेक टीकाएँ, प्रार्थना पर पुस्तकें लिखीं, और दूसरे लेखन भी l और वह औसतन एक सप्ताह में 6 किताबें पढ़ते थे! अपने एक उपदेश में स्पर्जन ने कहा, “कुछ न करने का पाप सभी पापों में सबसे बड़ा है, क्योंकि इसमें अधिकाँश अन्य शामिल हैं l . . . भयंकर आलस्य! प्रभु हमें इससे बचाइए!”
चार्ल्स स्पर्जन ने लगन के साथ जीवन जीया, जिसका मतलब था कि उन्होंने परमेश्वर के अनुग्रह में बढ़ने और उसके लिए जीने के लिए “सब प्रकार का यत्न [किया]” (2 पतरस 1:5) l यदि हम मसीह के अनुयायी हैं, परमेश्वर यीशु की तरह और भी उन्नति करने के लिए हमारे मनों में “सब प्रकार का यत्न करके अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ . . . संयम . . . भक्ति . . . [बढ़ाने] (पद.5-7) की इच्छा और योग्यता डालेगा l
हम में से प्रत्येक के पास विभिन्न प्रेरणा, क्षमता और ऊर्जा स्तर है──हम में से सभी चार्ल्स स्पर्जन की गति के अनुसार जी नहीं सकते या जीने का प्रयास नहीं कर सकते! परन्तु जब हम वह सब जो यीशु ने हमारे लिए किया है समझते हैं, हमारे पास परिश्रमी, विश्वासयोग्य रहन-सहन के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है । और हमें उसके लिए जीने और उसकी सेवा करने के लिए हमारी सामर्थ्य परमेश्वर से प्राप्त श्रोतों द्वारा मिलती है l परमेश्वर अपनी आत्मा के द्वारा हमें हमारे ──बड़े या छोटे──प्रयासों को पूरा करने में सशक्त बनाता है ।

अवरुद्ध प्रार्थनाएँ
14 सालों तक, मार्स रोवर ऑपॉर्चुनिटी (Mars Rover Opportunity) ने नासा(NASA) के जेट प्रणोदन प्रयोगशाला (jet Propulsion Laboratory) में लोगों के साथ विश्वासयोग्यता से संवाद किया । 2004 में उतरने के बाद, वह मंगल की सतह पर 28 मील चला, हजारों तस्वीरें खींची, और अनेक सामग्रियों का विश्लेषण किया । लेकिन 2018 में, ऑपॉर्चुनिटी (Opportunity) और वैज्ञानिकों के बीच संवाद समाप्त हो गया जब धूल की एक बड़ी आंधी ने उसके सोलर पैनल को ढक दिया जिसकी वजह से रोवर ने अपनी शक्ति खो दी ।
क्या यह सम्भव है कि हम अपनी दुनिया से बाहर किसी के साथ संवाद को अवरुद्ध करने के लिए “धूल” को अनुमति दे सकते हैं? जब प्रार्थना की बात आती हैं──परमेश्वर के साथ संवाद करने में──कुछ चीजें हैं जो रास्ते में आ सकती हैं ।
पवित्रशास्त्र कहता है कि पाप परमेश्वर के साथ हमारे रिश्ते को अवरुद्ध कर सकता है । “यदि मैं मन में अनर्थ की बात सोचता, तो प्रभु मेरी न सुनता” (भजन 66:18) l यीशु निर्देश देता है, “और जब कभी तुम खड़े हुए प्रार्थना करते हो तो यदि तुम्हारे मन में किसी के प्रति कुछ विरोध हो, तो क्षमा करो : इसलिये कि तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा करें” (मरकुस 11:25) । प्रभु के साथ हमारा संवाद संदेह और रिश्ते की समस्याओं के द्वारा भी बाधित हो सकता है (याकूब 1:5-7;1 पतरस 3:7) l
ऑपॉर्चुनिटी (Opportunity) के संवाद की रुकावट स्थायी हो सकती है । पर हमारी प्रार्थनाओं को अवरुद्ध नहीं होनी चाहिए । पवित्र आत्मा के काम के द्वारा, परमेश्वर हमें उसके साथ पुनर्स्थापित संवाद के लिए प्यार से अपनी ओर खींचता है । जब हम अपने पापों का अंगीकार करते हैं और उसकी ओर मुड़ते हैं, प्रभु के अनुग्रह के द्वारा हम सबसे बड़े संवाद का अनुभव करते हैं जो कायनात ने कभी जाना है : एक एक के साथ हमारे और पवित्र परमेश्वर के बीच प्रार्थना l

बुद्धि जो हमें चाहिए
मेघा ने कूरियर खोला और एक बड़ा लिफाफा प्राप्त किया जिस पर उसके प्रिय मित्र का वापसी पता लिखा हुआ था l अभी कुछ ही दिन पहले, उसने उस मित्र के साथ एक संबंधपरक संघर्ष के बारे में बताया था । उसने उत्सुकता से पैकेज खोला और उसमें साधारण जूट की डोरी में रंग-बिरंगी मोतियों से सजा हार पाया l इन शब्दों के साथ एक कार्ड भी था “परमेश्वर के मार्ग खोजो l” मेघा उसे अपने गले में पहनते समय मुस्कुरायी l
नीतिवचन की पुस्तक बुद्धि की बातों का एक संकलन है──कई सुलैमान के द्वारा लिखी हुई हैं, जो अपने युग का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में प्रशंसित था (1 राजा 10:23) । मूलभूत सन्देश नीतिवचन 1:7 “यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है” से शुरू होकर उसके 31 अध्याय पाठक को बुद्धि की सुनने और मूर्खता से बचने का आह्वान करते हैं l बुद्धि──जानना कि कब क्या करना है──परमेश्वर के मार्ग को खोजने के द्वारा उसे आदर देने से मिलती है l आरंभिक पदों में, हम पढ़ते हैं, “अपने पिता की शिक्षा पर कान लगा, और अपनी माता की शिक्षा को न तज; क्योंकि वे मानो तेरे सिर के लिये शोभायमान मुकुट, और तेरे गले के लिये कन्ठ माला होंगी” (पद.8-9) l
मेघा के मित्र ने उसे उस बुद्धि के श्रोत की ओर मार्गदर्शित किया था जो उसकी ज़रूरत थी : “परमेश्वर के मार्ग खोजो l” उसका उपहार मेघा के ध्यान को उस मदद की खोज करने की
ओर केन्द्रित किया जो उसे चाहिए था ।
जब हम परमेश्वर का आदर करते हैं और उसका मार्ग ढूंढते हैं, तो हम जिन्दगी के सभी मामलों का सामना करने के लिए वह बुद्धि प्राप्त करेंगे जो हमें चाहिए । प्रत्येक और हर एक ।

अनाथ नहीं
जॉन सोवर्स अपनी किताब फादरलेस जेनरेशन(Fatherless Generation) में लिखते हैं कि “किसी पीढ़ी ने इस पीढ़ी के समान इतनी स्वैच्छिक पिता की उनुपस्थिति नहीं देखी है जहाँ 2.5 करोड़ बच्चे एकल माता-पिता के घर में बढ़ रहे हैं l” मेरे खुद के अनुभव में, यदि मैं अपने पिता से सड़क पर टकराता तो मैं उन्हें नहीं पहचानता । जब मैं बहुत छोटा था तब मेरे माता-पिता का तलाक हो गया था, और मेरे पिता की सारी तस्वीरें जला दी गईं थी l इसलिये मैंने वर्षों तक अनाथ महसूस किया । फिर 13 साल की उम्र में मैंने प्रभु की प्रार्थना सुनी (मत्ती 6:9-13) और मैंने अपने आप से कहा, तुम्हारे पास एक सांसारिक पिता नहीं हो सकता है पर अब परमेश्वर तुम्हारे पास स्वर्गीय पिता के रूप में है ।
मत्ती 6:9 में हमें प्रार्थना करना सिखाया जाता है, “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।” इससे पहले पद 7 प्रार्थना करते समय “बक बक न करो” करने के लिए कहता है, और हम आश्चर्य कर सकते हैं कि ये पद आपस में कैसे जुड़े हैं । मैंने यह एहसास किया कि क्योंकि परमेश्वर याद रखता है, हमें दोहराने की जरूरत नहीं है । वह सच में समझता है, तो हमें समझाने की जरूरत नहीं है । उसके पास एक करुणामय हृदय है, तो हमें उसकी भलाई के विषय अनिश्चित रहने की जरूरत नहीं है । और इसलिए कि वह आरम्भ से ही अंत जानता है, हम जानते हैं कि उसका समय सही है l
क्योंकि परमेश्वर हमारा पिता है, उसे कार्यवाही करने के लिए हमें “बहुत बोलने” (पद.7) की ज़रूरत नहीं है l प्रार्थना के द्वारा, हम ऐसे पिता से बात करते हैं जो हमसे प्रेम करता है और हमारी देखभाल करता है और यीशु के द्वारा हमें अपनी संतान बनाया है l