भय का सामना
वारेन एक छोटे शहर में चर्च की पासबानी करने चला गया l उसकी सेवा में कुछ शुरूआती सफलता के बाद, एक स्थानीय व्यक्ति उसके विरुद्ध हो गया l एक कहानी गढ़कर वॉरेन पर भयावह कृत्यों का आरोप लगाते हुए, कहानी को स्थानीय अखबार तक ले गया और यहाँ तक कि स्थानीय निवासियों को वितरित करने हेतु आरोपों को पर्चों पर छपवा दिये l वारेन और उसकी पत्नी अत्यधिक प्रार्थना करने लगे l अगर झूठ पर विश्वास कर लिया गया होता, तो उनके जीवन का अंत हो जाता l
राजा दाऊद ने एक बार कुछ ऐसा ही अनुभव किया l उसे एक दुश्मन द्वारा बदनामी के हमले का सामना किया l “वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैं, उनकी सारी कल्पनाएँ मेरी ही बुराई करने की होती है,” उसने कहा (भजन 56:5) l इस निरंतर हमले ने उसे भयभीत और अशांत कर दिया (पद.8) l लेकिन लड़ाई के मध्य, उसने यह शक्तिशाली प्रार्थना की : “जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा . . . कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है” (पद.3-4) l
दाऊद की प्रार्थना आज हमारे लिए एक आदर्श हो सकती है l जब मैं भयभीत होता हूँ - भय या आरोप के समय में, हम परमेश्वर की ओर मुड़ते हैं l मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा - हम अपनी लड़ाई परमेश्वर के शक्तिशाली हाथों में रख देते हैं l कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है – उसके साथ स्थिति का सामना करते हुए, हम याद रखते हैं कि वास्तव में हमारे खिलाफ शक्तियां कितनी सीमित हैं l
अखबार ने वॉरेन के बारे में कहानी को नजरअंदाज कर दिया l किसी कारण से, पर्चे कभी वितरित नहीं हुए l आज आप किस लड़ाई से डरते हैं? परमेश्वर से बात करें l वह आपके साथ मिलकर लड़ने के लिए तैयार है l

मानव होना
“मिस्टर सिंगरमैन, आप क्यों रो रहे हैं?” बारह साल के अल्बर्ट से पूछा जब उसने मास्टर कारीगर को लकड़ी के एक बक्से को बनाते हुए देखा l
“मैं रोता हूँ,” उन्होंने कहा, “"क्योंकि मेरे पिता रोए थे, और क्योंकि मेरे दादा रोए थे l” बढ़ई का अपने युवा शिक्षार्थी को उत्तर देना लिटिल हाउस ऑन द प्रेयरी (Little House on the Prairie) के एक एपिसोड में एक कोमल क्षण प्रदान करता है l “आंसू,” मिस्टर सिंगरमैन ने समझाया, “एक ताबूत बनाते समय आ जाते हैं l”
“कुछ लोग रोते नहीं हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि यह कमजोरी का संकेत है,” उन्होंने कहा l “मुझे सिखाया गया था कि एक मनुष्य एक मनुष्य है क्योंकि वह रो सकता है l”
यीशु की आँखों में भावनाएँ उमड़ गयी होंगी क्योंकि उसने यरूशलेम के लिए अपनी चिंता की तुलना एक माँ मुर्गी का अपने बच्चों की देखभाल से की (मत्ती 23:37) l उसके शिष्य अक्सर उसकी आँखों में देखी बातों या उसकी कहानियों को सुनकर भ्रमित हो जाते थे l मजबूत होने का मतलब क्या था इस सम्बन्ध में उसका विचार अलग था l मंदिर से बाहर आते समय उसके साथ चलते हुए यह फिर हुआ l पत्थर की विशाल दीवारों और उनके आराधना स्थल की शानदार अलंकरण की ओर अपने शिष्यों का ध्यानाकर्षित करते समय (24:1), शिष्यों ने मानव उपलब्धि की ताकत पर ध्यान दिया l यीशु ने एक मंदिर देखा जो 70 ई.स्. में समतल किया जानेवाला था l
मसीह हमें दिखाता है कि स्वस्थ लोग जानते हैं कि कब रोना है और क्यों l वह रोया क्योंकि उसके पिता को परवाह है और उसकी आत्मा उन बच्चों के लिए कराहती है जो अभी तक नहीं देख पाए हैं कि उसका दिल किससे टूटता है l

कभी भी अकेला नहीं
“द इकोनॉमिस्ट 1843 की पत्रिका में मैगी फर्ग्यूसन ने लिखा, “यह कोई पीड़ा हो सकती है जो आवासहीनता, भूख या बीमारी से अधिक कष्टदायक हो सकता है l उनका विषय है? अकेलापन l फर्ग्यूसन ने किसी भी सामाजिक या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, दिल दहलाने वाले उदाहरणों का उपयोग करते हुए कि अकेला होना कैसा महसूस होता है अकेलेपन की बढ़ती गति को लेखबद्ध किया l
अकेला महसूस करने का दुख हमारे दिन के लिए नया नहीं है l वास्तव में, अकेलापन की पीड़ा सभोपदेशक की प्राचीन किताब के पन्नों से गूँजती है l अक्सर राजा सुलैमान के नाम, पुस्तक उन लोगों के दुखों का वर्णन करता है जो किसी भी सार्थक रिश्तों की कमी महसूस करते हैं (4:7–8) l उपदेशक ने कहा कि उल्लेखनीय धन प्राप्त करना संभव है और फिर भी उससे कोई उपयोगिता अनुभव नहीं करना क्योंकि इसे साझा करने वाला कोई नहीं है l
लेकिन उपदेशक ने साहचर्य की सुंदरता को भी पहचान लिया, यह लिखते हुए कि जितना आप अकेले दम पर हासिल करेंगे, मित्र आपको उससे अधिक करने में मदद करेंगे (पद.9); सहयोगी जरूरत के समय मदद करते हैं (पद.10); साथी आराम लाते हैं (पद.121); और मित्र कठिन परिस्थितियों में सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं (पद.12) l
अकेलापन ख़ासा एक संघर्ष है – परमेश्वर ने हमें दोस्ती और समुदाय के लाभों की पेशकश करने और प्राप्त करने के लिए बनाया है l यदि आप अकेला महसूस कर रहे हैं, तो प्रार्थना करें कि परमेश्वर आपको दूसरों के साथ सार्थक संबंध बनाने में मदद करे l इस बीच, इस वास्तविकता में प्रोत्साहन पाएं कि विश्वासी कभी भी वास्तव में अकेला नहीं होता है क्योंकि यीशु की आत्मा हमेशा हमारे साथ है (मत्ती 28:20) l

बत्ती जला दें
जब हमदोनों पति-पत्नी ने अपने बेटों से मिलने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक(cross-country move), जाने की तयारी की तो मैं यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि हम अपने व्यस्क बेटों के साथ संपर्क बनाए रखेंगे l मैंने अनूठा उपहार ढूंढ़ लिया, वायरलेस इंटरनेट से जुड़ा मित्रता लैंप, जो रिमोट से जलाया जा सकता है l जब मैंने अपने बेटों को लैंप दिये, तो मैंने समझाया कि जब मैं अपने लैंप को स्पर्श करुँगी, तो उनके चालू हो जाएंगे - अपने प्यार और निरंतर प्रार्थनाओं की एक दीप्त याद दिलाने के लिए l कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारे बीच कितनी बड़ी दूरी है, उनके लैंप पर एक थपथपाहट हमारे घर में भी रोशनी को सक्रीय करेगी l हालाँकि हमें पता था कि हमारी मुलाकात के व्यक्तिगत क्षणों को कुछ भी प्रतिस्थापित नहीं कर सकते थे, फिर भी हर बार जब हम उन लैम्प्स को जलाते हैं हम यह जानकार प्रोत्साहित होते हैं कि हमें प्यार किया जाता है और हमारे लिए प्रार्थना की जाती है l
परमेश्वर के सभी बच्चों को पवित्र आत्मा द्वारा उज्वल प्रकाश को साझा करनेवाला बनने का सुअवसर है l हमें परमेश्वर की अनंत आशा और शर्तहीन प्रेम का कान्तिमान प्रकाशस्तंभ के रूप में जीने के लिए अभिकल्पित किया गया है l जब हम सुसमाचार साझा कर रहे हैं और यीशु के नाम में दूसरों की सेवा कर रहे हैं, तो हम शानदार प्रकाश बिंदु और जीवित साक्षी बन जाते हैं l हर एक अच्छा काम, दयालु मुस्कान, प्रोत्साहन के कोमल शब्द, और हार्दिक प्रार्थना परमेश्वर की ईमानदारी और उसके शर्तहीन और जीवन को बदलने वाला प्यार की एक उज्जवलित याद दिलाती है (मत्ती 5:14-16) ।
जहाँ भी परमेश्वर हमारी अगुवाई करता है, और जिस भी प्रकार से हम उसकी सेवा करते हैं, हम उसके द्वारा दूसरों को उसकी ज्योति चमकाने में मदद करने के लिए उपयोग किये जा सकते हैं l जब परमेश्वर, अपनी आत्मा द्वारा, सच्ची रौशनी प्रदान करता है, हम उसकी ज्योति और उसकी उपस्थिति का प्रेम प्रतिबिंबित कर सकते हैं l

यीशु के समान
एक लड़के के रूप में, धर्मशास्त्री ब्रूस वेयर निराश थे कि 1 पतरस 2:21–23 हमें यीशु की तरह बनने के लिए कहता है l वेयर ने अपनी पुस्तक द मैन क्राइस्ट जीसस(The Man Christ Jesus) में अपनी युवावस्था के बारे में लिखा l "उचित नहीं, मैंने निर्धारित किया l खासतौर पर तब जब परिच्छेद ‘ऐसे व्यक्ति के क़दमों का अनुसरण करने के लिए कहता है ‘जिसने पाप नहीं किया l’ यह पूरी तरह से विचित्र था . . . मैं बिलकुल यह नहीं देख पा रहा था कि कैसे परमेश्वर वास्तव में चाहता है कि हम इसे गंभीरता से लें l”
मैं समझता हूँ कि वेयर को बाइबिल की चुनौती इतना हतोत्साहित करनेवाला क्यों महसूस हो सकता था! एक पुराना वृन्द्गीत/कोरस कहता है, “यीशु की तरह बनना, यीशु की तरह बनना l मेरी इच्छा, उसके जैसा बनना l” लेकिन जैसा कि वेयर ने ध्यान दिया कि हम ऐसा करने में असमर्थ हैं l अपने आप से, हम यीशु की तरह कभी नहीं बन सकते हैं l
हालाँकि, हम अकेले नहीं हैं l परमेश्वर की संतान को पवित्र आत्मा दिया गया है, कुछ हद तक ताकि हम में मसीह का रूप बन जाए (गलतियों 4:19) l इसलिए यह आश्चर्य की बात महसूस न हो कि पौलुस के पवित्र आत्मा सम्बंधित महान अध्याय में हम पढ़ते हैं, “जिन्हें उसने पहले से जान लिया है उन्हें पहले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों” (रोमियों 8:29) l परमेश्वर हममें अपने कार्य को पूरा करेगा l और वह इसे हममें यीशु की आत्मा के द्वारा करता है l
जब हम अपने जीवनों में आत्मा के कार्य के प्रति समर्पण करते हैं, हम वास्तव में और अधिक यीशु की तरह बन जाते हैं l यह जानना कितना सान्तवना देनेवाला है कि हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा कितनी बड़ी है!