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मरुभूमि में आग

1800 के दशक के अंतिम हिस्से में अमेरिका में एक मरुभूमि में सवारी करते समय, जिम वाइट ने धूएँ का एक विचित्र बादल भँवर की तरह आकाश की ओर उठते देखा l जंगल की आग समझते हुए, वह युवा चरवाहा उसके श्रोत की ओर बढ़ा, केवल यह जानने के लिए कि वह “धूँआ” चमगादड़ों का एक बड़ा झुण्ड था जो धरती में एक छेद से निकल रहा था l जिम गुफाओं की एक विशाल और शानदार प्रणाली में पहुँच गया जो बाद में एक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण बन गया l

जैसा कि एक मध्य पूर्वी रेगिस्तान में मूसा भेड़-बकरियों को चरा रहा था, उसने भी एक अजीब नज़ारा देखा, जिसने उसका ध्यान खींचा – एक धधकती हुई झाड़ी, जो जल कर भस्म नहीं हो रही थी (निर्गमन 3:2) l जब परमेश्वर ने झाड़ी में से बात की, तो मूसा ने महसूस किया कि वह पहले की तुलना में कहीं अधिक वैभवशाली प्राप्त कर लिया था l प्रभु ने मूसा से कहा, “मैं तेरे पिता का परमेश्वर, अब्राहम का परमेश्वर  . . . हूँ” (पद.6) l परमेश्वर गुलाम बनाए हुए  लोगों को छुटकारा और उन्हें अपने बच्चों (पद.10) के रूप में उनकी असली पहचान देना चाहता था (पद.10) l

छह सौ साल से भी पहले, परमेश्वर ने अब्राहम से यह वादा किया था : “भूमंडल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे” (उत्पत्ति 12:3) l मिस्र से इस्राएल का निकलना, उस आशीष में केवल एक कदम था – अब्राहम का वंश, उद्धारकर्ता(Messiah), के द्वारा अपनी सृष्टि को बचाने की योजना l 

आज हम उस वरदान का लाभ उठा सकते हैं, क्योंकि परमेश्वर सभी को यह बचाव प्रदान करता है l मसीह समस्त संसार के पापों के लिए मर गया l उस पर विशवास करके, हम भी जीवित परमेश्वर की संतान बन जाते हैं l

उनके संगीत की रचना

संगीत मण्डली निदेशक एरिआने एबेला ने अपने बचपन को अपने हाथों पर बैठकर बिताया – वह उन्हें छिपाना चाहती थी l जन्म से ही दोनों हाथों की ऊँगलियों के नहीं होने या एक साथ जुड़े होने के साथ-साथ, उसके पास बाँया पैर और उसके दाहिने पैर के पंजे नहीं थे l एक संगीत प्रेमी और उच्चतम स्वर(soprano) के साथ, उसने स्मिथ कॉलेज में शासन प्रणाली में विशिष्टता हासिल करने की योजना बनायीं थी l लेकिन एक दिन उसकी गायक-मण्डली के शिक्षक ने उसे गायक-मण्डली का संचालन करने के लिए कहा, जिससे उसके हाथ काफी दिखाई दिए l उस क्षण से, उसने अपनी जीविका (career) पाया, चर्च की गायक-मण्डलियों का संचालन किया और अब दूसरे विश्वविद्यालय की गायक-मण्डली के निदेशिका के रूप में काम कर रही है l एबेला बताती है, “मेरे शिक्षकों ने मुझमें कुछ देखा l”

उसकी प्रेरक कहानी विश्वासियों को यह पूछने के लिए आमंत्रित करती है, हमारी “सीमाओं” के बावजूद हमारा परमेश्वर, हमारा पवित्र शिक्षक, हममें क्या देखता है?  किसी भी चीज़ से अधिक, वह खुद को देखता है l “तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरुप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की” (उत्पत्ति 1:27 NLT) l

उसके शानदार “छवि वाहक,” के रूप में जब अन्य लोग हमें देखते हैं, तो हमें उसे प्रतिबिंबित करना चाहिये l एबेला के लिए, इसका मतलब यीशु है, उसके हाथ – या उसकी ऊँगलियों की कमी – सबसे अधिक मायने नहीं रखती है l सभी विश्वासियों के लिए भी यही सच है l 2 कुरिन्थियों 3:18 में कहा गया है, “परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश करके बदलते जाते हैं” (पद.18) l

एबेला के समान, हम मसीह की रूपांतरण करने वाले शक्ति (पद.18) द्वारा अपने जीवन को संचालित कर सकते हैं, एक जीवन गीत प्रस्तुत कर सकते हैं जो परमेश्वर के सम्मान के लिए बजता है l

हमारे हृदयों पर अंकित

1450 में जब जोहानस गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस को जंगम/चल प्रकार के साथ जोड़ा, तो उन्होंने पश्चिम में बड़े पैमाने पर जन संचार के युग की शुरुआत की और नए सामजिक क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार किया l दुनिया भर में साक्षरता बढ़ी और नए विचारों ने सामजिक और धार्मिक सन्दर्भों में तेजी से बदलाव लाए l गुटेनबर्ग ने बाइबल का पहला मुद्रित संस्करण प्रस्तुत किया l  इससे पहले, बाइबल की प्रति कड़ी मेहनत से हाथ से नक़ल करके बनायी जाती थी, और शास्त्री उत्पादन करने के लिए एक साल तक का समय लेते थे l

सदियों से, प्रिंटिंग प्रेस ने आपके और मेरे जैसे लोगों को पवित्रशास्त्र तक सीधी पहुँच का विशेषाधिकार प्रदान किया है l जबकि हमारे पास इलेक्ट्रॉनिक संस्करण भी उपलब्ध हैं, उसके आविष्कार के कारण हम में से कई लोग अक्सर अपने हाथों में एक भौतिक बाइबल रखते हैं l बाइबल की दूसरी प्रति तैयार करने में सर्वथा कीमत और समय लगाने के बावजूद भी जो दुर्लभ थी आज हमारी ऊँगलियों पर आसानी से मौजूद है l

परमेश्वर के सत्य तक पहुँच एक अद्भुत विशेषाधिकार है l नीतिवचन के लेखक से संकेत मिलता है कि हमें पवित्रशास्त्र में उसके निर्देशों का पालन करना चाहिये जैसे कि कुछ “अभिलाषित” हो जैसे “[हमारी] आँख की पुतली” (नीतिवचन 7:2) और उसकी बुद्धिमत्ता के शब्दों को “[हमारे] हृदय की पटिया पर लिख लेना” (पद.3) l जैसा कि हम बाइबल को समझना चाहते हैं और उसकी बुद्धि के अनुसार जीना चाहते हैं, हम, शास्त्रियों की तरह, परमेश्वर की सच्चाई को अपनी “ऊँगलियों” से अपने हृदयों में उतार रहे हैं, और हम जहां भी जाते हैं, हम अपने साथ ले जाते हैं l

अपनी प्रार्थनाओं द्वारा दूसरों से प्रेम

यह पहला सवाल था जो एक मिशनरी ने अपनी पत्नी से पूछा जब भी उसकी पत्नी को जेल में उससे मिलने की अनुमति दी गई । उसे उसके विश्वास के लिए झूठा अभियुक्त बनाया गया था और दो साल के लिए कैद किया गया था l जेल में परिस्थितियों और विरोध के कारण उसका जीवन अक्सर खतरे में रहता था, और दुनिया भर के विश्वासियों ने उसके लिए ईमानदारी से प्रार्थना की थी । वह आश्वस्त होना चाहता था कि वे नहीं रुकेंगे, क्योंकि उसका मानना ​​था कि परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं का शक्तिशाली तरीके से उपयोग कर रहा था ।

दूसरों के लिए हमारी प्रार्थनाएँ - विशेष रूप से वे जो अपने विश्वास के लिए सताए जाते हैं - एक महत्वपूर्ण उपहार हैं । पौलुस ने यह स्पष्ट किया जब उसने कुरिंथुस में विश्वासियों को अपनी मिशनरी यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों के बारे में लिखा । वह "भारी बोझ से दबा” हुआ था, यहाँ तक कि वह “जीवन से भी हाथ धो” बैठा था (2 कुरिन्थियों 1: 8) । लेकिन फिर उसने कहा कि परमेश्वर ने उसे छुडाया था और उस उपकरण का वर्णन किया जिसका उपयोग परमेश्वर ने उसे करने के लिए किया : “हमारी यह आशा है कि वह आगे को भी बचाता रहेगा l तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे” (पद 10–11 महत्व दिया) ।

परमेश्वर हमारी प्रार्थना के माध्यम से अपने लोगों के जीवन में महान भलाई करने के लिए आगे बढ़ता है। दूसरों से प्यार करने का एक सबसे अच्छा तरीका उनके लिए प्रार्थना करना है, क्योंकि हमारी प्रार्थनाओं के माध्यम से हम उस सहायता के द्वार को खोलते हैं जो केवल परमेश्वर दे सकता है l जब हम दूसरों के लिए प्रार्थना करते हैं, तो हम उसकी सामर्थ्य में उनसे प्यार करते हैं । उससे बड़ा या अधिक प्रेम करने वाला कोई नहीं है ।

अभी, फिर अगला

मैं हाल ही में एक कॉलेज के दीक्षान्त में भाग लिया, जिसके दौरान वक्ता ने अपनी स्नातक डिग्री की प्रतीक्षा कर रहे युवा वयस्कों के लिए एक आवश्यक चुनौती प्रदान की l उन्होंने उल्लेख किया कि यह उनके जीवन का एक समय है जब हर कोई उनसे पूछ रहा है, “आगे क्या है?” वे आगे किस कैरियर/जीविका का पीछा करेंगे? वे आगे पढ़ाई कहाँ करेंगे या भविष्य में काम कहाँ करेंगे? तब उन्होंने कहा कि अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह था कि वे अभी क्या कर रहे थे?

अपनी विश्वास यात्रा के संदर्भ में, वे कौन से दैनिक निर्णय ले रहे होंगे जो उन्हें यीशु के लिए जीने के लिए मार्गदर्शन करेंगे और खुद के लिए नहीं?

उनके शब्दों ने मुझे नीतिवचन की किताब की याद दिला दी, जो बताती है कि अब कैसे जीना है l उदाहरण के लिए : वर्तमान में, ईमानदारी का अभ्यास(11:1); वर्तमान में, सही मित्रों का चयन (12:26); वर्तमान में, ईमानदारी से जीना(13:6); वर्तमान में, अच्छा निर्णय लेना(13:15); वर्तमान में, समझदारी से बोलना(14: 3) l

वर्तमान में परमेश्‍वर के लिए पवित्र आत्मा की अगुवाई में जीना, आगे के लिए निर्णय लेना सरल बना देता है l “बुद्धि यहोवा ही देता है; . . . वह सीधे लोगों के लिए खरी बुद्धि रख छोड़ता है . . . जो खराई से चलते हैं, उनके लिए वह ढाल ठहरता है . . . और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है” (2:6-8) l परमेश्वर वर्तमान में उसके दिशानिर्देशों के अनुकूल जीवन जीने के लिए हमारे ज़रूरतों का प्रबंध करे, और आगे उसके आदर के लिए क्या है में हमारा मार्गदर्शन करें l