

आशा प्रफुल्लित होगी
हाल ही में अमेरिका के एक शहर में कुछ खाली भूखंडों को साफ़ करके उसमें खुबसूरत फूल और हरे पौधे लगाए गए l इससे इस पड़ोस के निवासियों के समग्र मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा और उनके जीवन के दृष्टिकोण में सुधार हुआ l
अमेरिका के एक प्रसिद्ध कॉलेज के एक प्रोफेसर ने कहा है “ऐसे सबूतों की बढ़ती हुई संख्या है जो यह बताती है कि हरित स्थान मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है, और यह विशेष रूप से गरीब पड़ोस में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है l”
इस्राएल और यहूदा के कुचले हुए लोगों को यशायाह भविष्यवक्ता के दर्शन द्वारा तरोताज़ा आशा मिली कि परमेश्वर उनको खुबसूरत तरीके से पुनर्स्थापित करेगा l सभी विनाश और न्याय के बीच में, जो यशायाह ने भविष्यवाणी की थी, इस उज्ज्वल प्रतिज्ञा ने जड़ जमा ली : “जंगल और निर्जल देश प्रफुल्लित होंगे, मरुभूमि मगन होकर केसर के समान फूलेगी l वह अत्यंत प्रफुल्लित होगी और आनंद के साथ जयजयकार करेगी” (यशायाह 35:1-2) l
आज हमारी जो भी स्थिति हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, हम भी अपने स्वर्गिक पिता के खुबसूरत तरीकों से आनन्दित हो सकते हैं जो हमें नई आशा के साथ पुनर्स्थापित करता है, जिसमें उसकी सृष्टि शामिल है l जब हम उदास महसूस करते हैं, तो उसकी महिमा और वैभव पर विचार करना हमें संभालेगा l यशायाह ने प्रोत्साहित किया, “ढीले हाथों को दृढ़ करो और थरथराते हुए घुटनों को स्थिर करो” (पद.3) l
क्या कुछ फूल हमारी आशा को पुनः प्रज्वलित कर सकते हैं? एक नबी ने हाँ कहा l इसी प्रकार हमारे आशा-देनेवाले परमेश्वर ने भी l

एक महान कार्य
सुरक्षा गार्ड ने टेप का एक टुकड़ा देखकर उसे हटा दिया जो एक दरवाजे को बंद होने से रोक रहा था l बाद में, जब उसने दरवाजे को जांचा, तो पाया कि इसमें फिर से टेप लगा दिया गया था l उसने पुलिस को फोन किया, जिन्होंने पांच चोरों को गिरफ्तार किया l
वाशिंगटन डी.सी. अमेरिका में, एक प्रमुख राजनीतिक दल के मुख्यालय, वाटरगेट भवन में काम करते हुए, युवा गार्ड ने केवल अपनी नौकरी को गंभीरता से लेते हुए और उसे अच्छी तरह से करते हुए अपने जीवन के सबसे बड़े राजनीतिक घोटाले को उजागर किया था l
नहेम्याह ने यरूशलेम के चारों ओर की दीवार को फिर से बनाना शुरू किया — एक ऐसा काम जिसे उसने बहुत गंभीरता से लिया l प्रोजेक्ट के अंत में, पड़ोसी प्रतिद्वंद्वियों ने उससे पास के एक गाँव में मिलने के लिए कहा l एक दोस्ताना निमंत्रण की आड़ में एक घातक जाल था (नहेम्याह 6: 1-2) l फिर भी नहेम्याह की प्रतिक्रिया से उसके दृढ़ विश्वास की गहराई का पता चलता है : “मैं तो भारी काम में लगा हूँ, वहां नहीं जा सकता; मेरे इस छोड़कर तुम्हारे पास जाने से वह काम क्यों बंद रहे?’ (पद.3) l
हालाँकि वह निश्चित रूप से कुछ अधिकार रखता था, लेकिन नहेम्याह ने नायक के पैमाने पर बहुत ऊंचे श्रेणी में नहीं होगा l वह एक महान योद्धा नहीं था, कवि या नबी नहीं था, राजा या ज्ञानी नहीं था l वह एक पियाऊ/साकी(cup-bearer) था जो ठेकेदार बन गया था l फिर भी वह मानता था कि वह परमेश्वर के लिए कुछ महत्वपूर्ण कर रहा है l काश हम उसे गंभीरता से लें जो उसने हमें उसकी शक्ति और प्रावधान में करने के लिए दिया है l

उद्देश्य पर जीना
“हम छुट्टी पर जा रहे हैं!” मेरी पत्नी ने उत्साह से हमारे तीन वर्षीय पोते अजय को बताया जब हम अपनी यात्रा के पहले चरण में घर से निकले l छोटे अजय ने उन्हें विचारमग्न ढंग से देखकर कर जवाब दिया, “मैं छुट्टी पर नहीं जा रहा हूँ। मैं एक मिशन पर जा रहा हूँ!”
हमें यकीन नहीं है कि हमारे पोते ने "एक मिशन पर" जाने की अवधारणा को कहां प्राप्त किया, लेकिन उसकी टिप्पणी ने मुझे विचारने के लिए कुछ दिया, जब हम हवाई अड्डे पर गए : जब मैं इस छुट्टी पर जा रहा हूँ और कुछ दिनों के लिए अवकाश लेता हूँ, क्या मैं इस बात को ध्यान में रख रहा हूँ कि मैं अभी भी “मिशन पर हूँ” और प्रत्येक क्षण परमेश्वर के साथ और उसके लिए जी सकूँ? क्या मुझे अपने हर काम में उसकी सेवा करना याद है?
प्रेरित पौलुस ने रोमी साम्राज्य की राजधानी रोम में रहने वाले विश्वासियों को “आशा में आनंदित; क्लेश में स्थिर; प्रार्थना में नित्य” (रोमियों 12:11) लगे रहने के लिए उत्साहित किया l उसका कहना था कि यीशु में हमें अपना जीवन उद्देश्य और उत्साह के साथ जीना है l यहां तक कि सबसे नीरस क्षण नए अर्थ प्राप्त करते हैं जब हम परमेश्वर की ओर आशा से देखते हैं और उसके उद्देश्यों के लिए जीते हैं l
जब हम ट्रेन में अपने-अपने सीटों पर बैठ गए, मैंने प्रार्थना की, “प्रभु, मैं आपका हूँ l इस सैर में जो कुछ आप मेरे लिए रखे हैं, मुझे उसे याद रखने में मदद करें l”
हर दिन उसके साथ एक अनंत महत्वपूर्ण मिशन है!

परमेश्वर द्वारा नामित
नटखट l मीठी l मोटे l ये कुछ 'उपनाम' हैं जिन्हें हम अपने बच्चों को देते हैं l इन नामों में से अधिकांश उनके चरित्र, उनकी शारीरिक रूप का वर्णन करने के लिए बनाए गए हैं, या वे प्रीतिकर होने के लिए होते हैं l
उपनाम केवल बच्चों तक ही सीमित नहीं हैं - हम उन्हें बाइबिल में भी इस्तेमाल होते हुए पाते हैं l उदाहरण के लिए, यीशु ने प्रेरित याकूब और यूहन्ना को "गर्जन के पुत्र" कहा (मरकुस 3:17) l किसी के द्वारा खुद को उपनाम देना पवित्रशास्त्र में दुर्लभ है, फिर भी ऐसा तब होता है जब नाओमी नाम की एक महिला लोगों से उसे "मारा" पुकारने को कहती है, जिसका अर्थ है "कड़वाहट" (रूत 1:20), क्योंकि उसके पति और दो बेटों की मृत्यु हो गई थी l उसने महसूस किया कि ईश्वर ने उसके जीवन को कड़वा बना दिया है (पद. 21) l
खुद को दिया गया नया नाम नाओमी उसके साथ न रह सका, हालांकि, वे विनाशकारी नुकसान उसकी कहानी का अंत नहीं थे l उसके दुःख के बीच में, परमेश्वर ने उसे रूत के रूप में, एक युवा बहु से आशीषित किया था, जिसने अंततः पुनर्विवाह किया और एक पुत्र को जन्म दिया, जिससे नाओमी को फिर से एक परिवार मिला l
यद्यपि उन कठिनाइयों के आधार पर जिन्हें हमने अनुभव किये हैं या जो गलतियाँ हमने की हैं, हम कभी-कभी अपने आप को “असफल” या “अप्रिय” जैसे कड़वे उपनाम देने के लिए लुभाए जा सकते हैं, वे नाम हमारी कहानियों का अंत नहीं है l हम उन उपनामों के स्थान पर हमें परमेश्वर द्वारा दिया गया नाम, “प्रिया” दे सकते हैं (रोमियों 9:25), और उन तरीकों की तलाश कर सकते हैं , जिसके द्वारा वह हमारे लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी प्रबंध करता है l