
बुलबुले में रहना
मुझे यकीन है कि हम में से कई बच्चे खेलते समय साबुन के "बुलबुले" उड़ा चुके हैं l इन बड़े और छोटे अर्धपारदर्शी पोलकों को चमकते हुए हवा में तैरते देखना एक परम आनंद है l ये मंत्रमुग्ध करने वाले "बुलबुले" केवल सुंदर नहीं हैं, लेकिन वे हमें जीवन के बारे में याद दिलाते हैं जो एक छोटी सी अनिश्चितता है l
हम कई बार महसूस कर सकते हैं कि हम "बुलबुले" में रह रहे हैं, अनिश्चित है कि हमारे पास जीवन की दौड़ में प्रतिस्पर्धा करने या खत्म करने के लिए क्या है l जब हम ऐसा महसूस कर रहे होते हैं, तो यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यीशु में हम अपनी नियति के विषय अनिश्चित नहीं हैं l परमेश्वर के बच्चों के रूप में, उसके राज्य में हमारा स्थान सुरक्षित है (यूहन्ना 14: 3) l हमारा विश्वास उसी से निकलता है जिसने यीशु को "आधारशिला" चुना है, जिस पर हमारा जीवन निर्मित है, और उसने हमें "जीवित पत्थर" होने के लिए चुना जो परमेश्वर की आत्मा से भरा हुआ है, ऐसे लोग बनने में सक्षम जैसे परमेश्वर की इच्छा थी (1 पतरस 2:5-6) l
मसीह में, हमारा भविष्य सुरक्षित है जब हम उसमें आशा रखते हैं और उसका अनुसरण करते हैं (पद.6) l क्योंकि “[हम] एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा [हैं], इसलिए कि जिसने [हमें] अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट [करें[“ (पद.9) l
यीशु के निगाहों में हम “बुलबुले पर” नहीं हैं l हम “चुना हुआ और बहुमूल्य” हैं (पद.4) l

समय-यात्रा पत्र (Time-Traveling Letters)
प्रत्येक वर्ष दस लाख से अधिक युवा अंतर्राष्ट्रीय पत्र-लेखन प्रतियोगिता में भाग लेते हैं l 2018 में, प्रतियोगिता का विषय था “कल्पना कीजिए कि आप समय के रास्ते यात्रा करने वाले एक पत्र हैं l आप अपने पाठकों को क्या सन्देश देना चाहेंगे?”
बाइबल में, हमारे पास पत्रों का एक संग्रह है जो समय के रास्ते हम तक पहुंचे हैं – पवित्र आत्मा की प्रेरणा और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद l जैसे-जैसे मसीही कलीसिया बढ़ती गई, यीशु के शिष्यों ने यूरोप और एशिया माइनर के स्थानीय कलीसियाओं को लिखा कि लोगों को मसीह में अपने जीवन को समझने में मदद करें; उनमें से बहुत से पत्र बाइबल में एकत्र किये गए जो आज हम पढ़ते हैं l
ये पत्र-लेखक पाठकों को क्या सन्देश देना चाहते थे? यूहन्ना अपने पहले पत्र में बताता है, कि वह “उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आँखों से देखा, वरन् जिसे हम ने ध्यान से देखा और हाथों से छुआ” के विषय लिख रहा था (1 यूहन्ना 1:1) l वह जीवित मसीह के साथ अपने सामना के विषय लिख रहा है (1 यूहन्ना 1:1) l वह लिखता है ताकि उसके पाठक एक दूसरे के साथ और “पिता के साथ और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ,” “सहभागी हों (पद.3) l जब हम परस्पर संगति करते हैं, वह लिखता है कि हमारा आनंद पूरा हो जाता है (पद.4) l बाइबल में पाए जाने वाले पत्र हमें ऐसी संगति में निकट लाते हैं जो समय के पार है – अनंत परमेश्वर के साथ संगति l

उसकी मृत्यु द्वारा जीवन
दक्षिण अमरीका में जोएना नाम की एक महिला मसीह के सुसमाचार द्वारा जेलों में कैदियों के लिए आशा लाने के लिए उत्सुक थी l जोएना प्रतिदिन कैदियों से मुलाकात करने लगी, और उनको क्षमा और मेल मिलाप का सरल सुसमाचार सुनाने लगी l उसने उनका विश्वास जीत लिया, और उन्हें अपने अपमानजनक बचपन के बारे में बात करने के लिए तैयार किया, और उन्हें संघर्षों को हल करने का एक बेहतर तरीका दिखाया l उसकी मुलाक़ात आरम्भ होने वाले वर्ष से पहले, जेल में बंदियों और सुरक्षाकर्मियों के विरुद्ध हिंसा की 279 घटनाएँ पंजीकृत की गई; जो अगले वर्ष केवल दो थीं l
प्रेरित पौलुस ने लिखा, “यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है : पुरानी बातें बीत गई है; देखो, सब बातें नई हो गई हैं” (2 कुरिन्थियों 5:17) l हालाँकि हम हमेशा उस नयेपन को देख नहीं सकते हैं जिस तरह जोएना ने नाटकीय रूप से दर्शाया, पर रूपांतरित करने की सुसमाचार की सामर्थ्य सबसे बड़ी आशा है – विश्व में बल देनेवाली l नई सृष्टि l कितनी अद्भुत सोच है! यीशु की मृत्यु ने हमें उसके जैसा बनने के सफ़र पर उतारा है – एक ऐसा सफ़र, जिसका समापन तब होगा जब हम उसे आमने-सामना देखेंगे (देखें 1 युहन्ना 3:1-3) l
यीशु में विश्वासियों के रूप में हम अपने जीवन को नई सृष्टि के रूप में मनाते हैं l फिर भी हमें कभी भी इस बात से ध्यान नहीं हटाना चाहिये कि मसीह की क़ीमत क्या है l उसकी मृत्यु से हमें जीवन मिलता है l “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिए पाप ठहराया कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ” (2 कुरिन्थियों 5:21) l

जाने देना
“आपके पिता की मृत्यु सक्रिय रूप से हो रही है,” मरणासन्न रोगियों के आश्रय स्थल(hospice) की नर्स बोली l “सक्रिय रूप से मृत्यु होना” मरने की प्रक्रिया की अंतिम चरण को संदर्भित करता है और मेरे लिए एक नया शब्द था, अजीब तरह से एक एकल सड़क पर यात्रा करने जैसा महसूस होना l मेरे पिता के अंतिम दिन, नहीं जानते हुए कि वे हमारी सुन पा रहे हैं कि नहीं, मेरी बहन और मैं उनके बिस्तर के निकट बैठ गए l हमने उनके सुन्दर गंजे सिर को चूमा l हमने उनको परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं फुसफुसायी l हमने एक गाना गया और 23वाँ भजन उद्धृत किया l हमने उन्हें बताया कि हम उनसे प्यार करते हैं और हमारे पिता होने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया l हमें पता था कि उनका दिल यीशु के साथ रहने के लिए लालायित था, और हमने उनसे कहा कि वह जा सकते हैं l उन शब्दों को बोलना जाने देने के लिए पहला कठिन कदम था l कुछ मिनटों के बाद, हमारे पिताजी का उनके शास्वत घर में ख़ुशी से स्वागत किया गया l
किसी प्रियजन का अंतिम छुटकारा कष्टदायक होता है l यहाँ तक कि यीशु के आँसू बह गए जब उसके अच्छे मित्र लाजर की मृत्यु हो गई (यूहन्ना 11:35) l लेकिन परमेश्वर के वादों के कारण, हमें शारीरिक मृत्यु के आगे आशा है l भजन 116:15 कहता है कि ईश्वर के “भक्त” – जो उसके हैं – उसके लिए “अनमोल” है l हालाँकि वे मर जाते हैं, वे फिर से जीवित होंगे l
यीशु प्रतिज्ञा करता है, “पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ; जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए तौभी जीएगा, और जो कोई जीवित है और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनंतकाल तक न मरेगा” (यूहन्ना 11:25-26) l यह जानने में हमें कितना सुकून मिलता है कि हम हमेशा के लिए परमेश्वर की उपस्थिति में होंगे l
