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जीवन की तेज़ धाराओं को पार करना

“बायीं ओर के सभी लोग, मजबूती से तीन बार आगे की ओर पतवार चलाएँ!” हम लोगों का  मांझी गाइड चिल्लाया l बायीं ओर वालों ने ताकत लगायी, और हमारे बेड़े को उस अशांत भँवर से खींच लिया l कई घंटों तक, हमने अपने गाइड के निर्देशों को सुनने का महत्व सीखा था l उसकी स्थिर आवाज़ ने बहुत कम नौका चलाने के अनुभव वाले छह लोगों को एक प्रचंड नदी में साथ मिलकर सबसे सुरक्षित जल मार्ग बनाने में कामयाबी दी l

जीवन का अपना मुसीबतों का भी हिस्सा है, क्या यह नहीं है? एक पल, यह सहज नौकायन है l फिर सहसा, हम अचानक खतरों से बचने के लिए पागल की तरह पैर मार रहे होते हैं l वह तनावपूर्ण क्षण हमें एक कुशल मार्गदर्शक के लिए हमारी ज़रूरत के बारे में जागरूक बनाते हैं, एक विश्वसनीय आवाज़ जो हमें अशांत समयों को पार करने मदद करती है l

भजन 32 में, परमेश्वर वह आवाज़ बनने की प्रतिज्ञा करता है : “मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूँगा” (पद.8) l इससे पहले, हम देखते हैं कि अपने पापों को मान लेना (पद.5) और प्रार्थनापूर्वक उसे ढूँढना (पद.6) उसकी सुनने की भी भूमिका निभाते हैं l फिर भी, मैं इस वास्तविकता में आराम पाता हूँ कि परमेश्वर प्रतिज्ञा करता है, “मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा और सम्मत्ति दिया करूँगा”(पद.8), एक ताकीद कि उसका मार्गदर्शन उस प्रेम के कारण है l इस अध्याय के अंत के निकट, भजनकार इस तरह समाप्त करता है, “जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा” (पद.10) l और जब हम उस पर भरोसा करते हैं, हम उसके इस प्रतिज्ञा में आराम पाते हैं कि वह जीवन के सबसे चट्टानी पथों में हमारा मार्गदर्शन करेगा l  

केवल पूछ लीजिये

उसके डॉक्टर ने कहा कि उसके अलग-थलग दृष्टि पटल(retina) को ठीक नहीं किया जा सकता था l लेकिन पंद्रह साल तक बिना दृष्टि के रहने के बाद, ब्रेल लिपि को सीखते हुए, और एक छड़ी और सेवा कुत्ते(Service dog) का उपयोग करते हुए – महिला का जीवन तब बदल गया जब उसके पति ने एक दूसरे नेत्र चिकित्सक से एक सरल प्रश्न पुछा : क्या उसकी मदद की जा सकती है? जवाब था हाँ l जैसे कि डॉक्टर ने पता लगाया, महिला की आँख में एक सामान्य स्थिति थी, मोतियाबिंद, जिसे डॉक्टर ने उसके दाहिनी आँख से हटा दिया l जब अगले दिन उसके आँख की पट्टी हटा दी गयी, उसकी दृष्टि 20/20 थी l उसकी बायीं आँख की दूसरी सर्जरी समान सफलता के साथ हुई l

एक साधारण प्रश्न ने कुष्ठ रोग से ग्रसित एक शक्तिशाली सैन्य व्यक्ति नामान के जीवन को भी बदल दिया l लेकिन नामान ने नबी एलिशा का निर्देश “जाकर यर्दन में सात बार डुबकी मार, तब तेरा शरीर ज्यों का त्यों जो जाएगा”(2 राजा 5:10) पर अहंकारपूर्वक क्रोध किया l हालाँकि, नामान के सेवकों ने सैन्य नेता से एक सरल प्रश्न पूछा : “यदि भविष्यद्वक्ता तुझे कोई भारी काम करने की आज्ञा देता, तो क्या तू उसे नहीं करता? (पद.13) l उसके पीछे लगे रहने से, नामान ने डुबकी लगाई “और उसका शरीर छोटे लड़के का सा हो गया; और वह शुद्ध हो गया” (पद.14) l

हमारे जीवन में, कभी-कभी हम किसी समस्या से जूझते हैं क्योंकि हम परमेश्वर से नहीं पूछते हैं l क्या आप मदद करेंगे? क्या मुझे जाना चाहिये? क्या आप अगुवाई करेंगे? हमारी मदद करने के लिए हमें उससे जटिल प्रश्न पूछने की ज़रूरत नहीं है l “उनके पुकारने से पहले ही मैं उनको उत्तर दूंगा,” परमेश्वर ने अपने लोगों से प्रतिज्ञा की (यशायाह 65:24) l इसलिए आज, बस उससे पूछे l

छुटकारे की आशा

वह आदमी छुटकारे से परे लग रहा था l उसके अपराधों में आठ गोलीबारी (छह की हत्या) और 1970 के दशक में न्यूयॉर्क शहर को दहलाने वाली लगभग 1,500 आग की घटनाएँ शामिल थीं l वह अपने अपराधों के घटनास्थलों पर पत्र छोड़ते हुए पुलिस का मज़ाक उड़ाता रहा, और अंततः उसे गिरफ्तार कर लिए गया और प्रत्येक हत्या के लिए क्रमानुगत पच्चीस साल की सज़ा हुई l

फिर भी परमेश्वर इस आदमी के पास पहुँच गया l आज वह मसीह में एक विश्वासी है जो पवित्रशास्त्र में प्रतिदिन समय व्यतीत करता है, उसने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरा खेद व्यक्त किया है, और उनके लिए प्रार्थना करता रहता है l यद्यपि चार दशकों से अधिक समय तक कैद रहने के बाद, यह व्यक्ति जो छुटकारे से परे था, वह परमेश्वर में आशा पाता है और दावा करता है, “मेरी स्वतंत्रता एक शब्द में पायी जाती है : यीशु l”

पवित्रशास्त्र एक और अविश्वसनीय परिवर्तन का वर्णन करता है l दमिश्क के मार्ग पर जीवित मसीह से उसकी मुलाकात से पूर्व, शाऊल(जो बाद में प्रेरित पौलस बन गया) “प्रभु के चेलों को धमकाने और घात करने की धुन में था” (प्रेरितों 9:1) l फिर भी पौलुस का हृदय और जीवन यीशु द्वारा रूपांतरित कर दिया गया (पद.17-18), और वह इतिहास में उसके लिए सबसे शक्तिशाली गवाहों में से एक बन गया l वह व्यक्ति जो एक समय मसीहियों की मृत्यु की योजना बनाता था सुसमाचार की आशा को फैलाने में अपने जीवन को समर्पित कर दिया l

छुटकारा हमेशा परमेश्वर का एक अद्भुत काम है l कुछ कहानियाँ अधिक नाटकीय हैं, परन्तु आधारभूत सच्चाई वही है : हममें से कोई भी उसकी क्षमा के लायक नहीं है, फिर भी यीशु एक शक्तिशाली उद्धारकर्ता है! “जो उसके द्वारा परमेश्वर के पास आते हैं, वह उनका पूरा पूरा उद्धार [करता है]” (इब्रानियों 7:25) l

हस्तांतरित प्रेम

मेरी बेटी नैन्सी ड्रियू (एक जासूसी उपन्यास श्रृंखला) से मोहित हो गयी है l पिछले तीन हफ़्तों में, उसने कम से कम एक दर्जन उपन्यास पढ़े, जिसमें एक जासूस लड़की का वर्णन है l वह जासूसी कहानियों से अपने लगाव/प्रेम को ईमानदारी से दर्शाती है : मैं जब छोटी थी उस समय  भी इन पुस्तकों से प्रेम करती थी, और नीली जिल्द वाली प्रतियां जो मेरी माँ 1960 के दशक में पढ़ती थी अभी भी उनके घर के एक शेल्फ में सजी हुई हैं l

इस स्नेह को स्थानांतरित होते देख मुझे आश्चर्य होता है कि मैं और क्या स्थानांतरित कर रहा हूँ l तीमुथियुस को लिखे अपने दूसरे पत्र में, पौलुस ने लिखा है कि जब उसने तीमुथियुस के बारे में सोचा, तो उसे “निष्कपट विश्वास” याद आया जो तीमुथियुस की दादी और माँ में था l मुझे आशा है कि रहस्यों/जासूसी से प्रेम के साथ, मेरी बेटी विश्वास की विरासत भी प्राप्त कर रही है – और वह सेवा” भी करेगी जैसे उसके नाना-नानी ने भी की है, कि वह प्रार्थना करेगी, और कि वह “उस जीवन की प्रतिज्ञा के अनुसार जो मसीह यीशु में है” थामे रहेगी l (2 तीमुथियुस 1:1) l

मैं यहाँ उन लोगों के लिए भी आशा रखता हूँ जिनके पास यीशु को जानने वाले माता-पिता या नाना-नानी/दादा-दादी नहीं हैं l यद्यपि तीमुथियुस के पिता का उल्लेख नहीं किया गया है, पौलुस तीमुथियुस को अपना “प्रिय पुत्र” (पद.2) कहता है l जिन लोगों के पास विश्वास स्थानांतरित करने वाले परिवार नहीं है, वे अभी भी चर्च में माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी ढूंढ सकते हैं – ऐसे लोग जो हमें यह जानने में मदद करेंगे कि “पवित्र जीवन” (पद.9) कैसे जिया जाए, और परमेश्वर द्वारा दिए गए “सामर्थ्य और प्रेम और संयम” के उपहारों को ग्रहण किया जाए l हमें (पद.7) l सचमुच, हम सभी के पास एक सुन्दर विरासत है l