
2D सीट पर का व्यक्ति(The Man in Seat 2D)
प्रीति ने अपनी ग्यारह महीने की बेटी लिली और लिली की ऑक्सीजन मशीन के साथ हवाई जहाज के संकीर्ण गलियारे से गयी l वह अपने बच्चे के फेफड़ों की पुरानी बीमारी के इलाज के लिए यात्रा कर रही थी l अपनी साझा सीट पर बैठने के कुछ समय बाद, एक फ्लाइट परिचर ने यह कहते हुए प्रीति से संपर्क किया, कि प्रथम श्रेणी में एक यात्री उसके साथ सीट बदलना चाहता था l चेहरे पर कृतज्ञता के आँसू के साथ, प्रीति ने अधिक बड़ी सीट पर बैठने चली गयी, जबकि वह अजनबी शुभचिंतक उसकी सीट पर आ गया l
प्रीति के शुभचिंतक में उस प्रकार की उदारता सन्निहित थी जो पौलुस तिमोथी को लिखे अपने पत्र में प्रोत्साहित करता है l पौलुस ने तीमुथियुस से कहा कि जो उसकी देखभाल में हैं उनको आज्ञा दें कि वे “भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्पर हों” (1 तीमुथियुस 6:18) l पौलुस कहता है, अहंकारी बनना और इस संसार के धन में अपनी आशा रखना लुभावना है l इसके बदले, वह सलाह देता है कि हम उदारता का जीवन और दूसरों की सेवा करने वाला जीवन पर केन्द्रित होकर, केसली फ्लाइट में 2D सीट पर के उस व्यक्ति की तरह भले कामों में “धनी” बने l
चाहे हमारे पास बहुत है या हम अभाव में हैं, हम सभी दूसरों के साथ जो कुछ भी है उसे साझा करने के लिए तैयार होकर उदारता से जीने की प्रचुरता का अनुभव कर सकते हैं l जब हम ऐसा करते हैं, पौलुस कहता है कि हम “सच्चे जीवन को वश में कर [लेंगे]” (पद.19) l

क्या परमेश्वर है?
लीला कैंसर से मर रही थी, और उसका पति, तिमोथी, यह नहीं समझ पा रहा था कि एक प्रेमी परमेश्वर अपनी पत्नी को पीड़ित क्यों होने देगा l उसने ईमानदारी से एक बाइबल शिक्षक और सलाहकार के रूप में कई लोगों की सेवा उसकी की थी l “आपने ऐसा क्यों होने दिया?” उसने पुकारा l इसके बावजूद तिमोथी परमेश्वर के साथ चलने में विश्वासयोग्य रहा l
“तो अभी भी तुम परमेश्वर में विश्वास क्यों करते हो?” मैंने उससे खुलकर पूछा l “कौन सी बात तुम्हें उससे दूर नहीं जाने देता है?”
“पहले जो हुआ है, उसके कारण,” तिमोथी ने जवाब दिया l जबकि वह अब परमेश्वर को “देख” नहीं सकता था, उसने उन समयों को याद किया जब परमेश्वर ने उसकी मदद की थी और उसकी रक्षा की थी l ये संकेत थे कि परमेश्वर अभी भी उसके परिवार की देखभाल कर रहा था l “मैं उस परमेश्वर को जानता हूँ जिसमें मैं विश्वास करता हूँ जो अपने तरीके से मदद करेगा,” उसने कहा l
तिमोथी के शब्द यशायाह 8:17 में लिखी यशायाह की अभिव्यक्ति को प्रतिध्वनित करती है l यहाँ तक कि जब वह परमेश्वर की उपस्थिति महसूस नहीं कर सकता था क्योंकि उसके लोग अपने शत्रुओं की ओर से मुसीबत के लिए तैयारी कर रहे थे, वह “यहोवा की बाट [जोहेगा] l” उसने परमेश्वर में उन संकेतों के कारण भरोसा किया जो उसने अपनी निरंतर उपस्थिति के विषय दिया था (पद.18) l
ऐसे समय होते हैं जब हम महसूस कर सकते हैं कि हमारी परेशानियों में परमेश्वर हमारे साथ नहीं है l ऐसे समय में ही हम अपने जीवन में उसके कार्यों को अतीत और वर्तमान में देख सकते हैं l वे ही अदृश्य परमेश्वर के दृश्य अनुस्मारक हैं – एक परमेश्वर जो हमेशा हमारे साथ है और अपने समय और तरीके से उत्तर देगा l

भरपूर जीवन
सत्रहवीं सदी के दार्शनिक थॉमस होब्स ने सुविदित से लिखा है कि अपनी स्वाभाविक अवस्था में मानव जीवन “अकेला, गरीब, अप्रिय, पशुवत्, और छोटा है l” उन्होंने तर्क दिया कि हमारी प्रवृत्ति दूसरों पर प्रभुत्व प्राप्त करने की होती है; अतः कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार की स्थापना आवश्यक होगी l
मानवता की धूमिल दृष्टि उस हालात की तरह लगती है जिसका वर्णन यीशु ने किया जब उसने कहा, “जितने मुझे से पहले आए वे सब चोर और डाकू हैं” (यूहन्ना 10:8) l लेकिन यीशु निराशा के मध्य आशा प्रदान करता है l “चोर . . . केवल चोरी करने और घात करने और नष्ट करने को आता है,” लेकिन फिर अच्छी खबर : “मैं इसलिए आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं” (पद.10) l
भजन 23 उस जीवन का एक तरोताज़ा तस्वीर प्रस्तुत करता है जो हमारा चरवाहा हमें देता है l उसमें, हमें “कुछ घटी” नहीं होती (पद.1) और वह हमारे “जी में जी ले आता है” (पद.3) l वह अपनी सिद्ध इच्छा के सही मार्ग में अगुवाई करता है, ताकि जब हम अंधकार भरे समय का भी सामना करते हैं, हमें डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि वह हमें शांति देने के लिए उपस्थित रहता है (पद.3-4) l वह विपत्ति के समय आशीषों से अभिभूत करता है (पद.5) l उसकी भलाई और करुणा हर दिन हमारे साथ रहती है, और हमें सदा के लिए उसकी उपस्थिति का अवसर मिलता है पद.6) l
काश हम चरवाहे की बुलाहट का उत्तर दें और उस पूरा, भरपूर जीवन का अनुभव करें जो वह हमें देने आया l

ठीक सीधे
एक ट्रेक्टर को सीधी कतार में चलाने के लिए एक किसान को एक स्थिर दृष्टि और एक दृढ़ भुजा की ज़रूरत होती थी l लेकिन दिन के अंत में बेहतरीन दृष्टि भी पिछली करारों पर नयी कतार बना देती थीं और सबसे मजबूत भुजाएं भी थक जाते थे l लेकिन अब एक स्वपरिचालन (autosteer) मौजूद है – एक जी.पी.एस. आधारित तकनीक जो रोपण, खेती और छिड़काव करते समय एक इंच के भीतर सटीकता की अनुमति देता है l यह अविश्वसनीय रूप से कुशल है और इसे हाथों से चलाने की आवश्यकता नहीं होती l बस एक विशाल ट्रेक्टर में बैठने की कल्पना करें और स्टीयरिंग पकड़ने के बजाय, मानों आप चिकन 65(चिकन व्यंजन) के एक टांग को पकड़े हुए होते हैं l एक अद्भुत उपकरण जो आपको सीधे आगे की ओर बढ़ाता जाता है l
आप योशिय्याह का नाम याद करते होंगे l जब वह केवल “आठ वर्ष का था” (2 राजा 22:1) तो उसे राजा बनाया गया था l सालों बाद, अपने चौबीस से छब्बीस साल की उम्र में, मंदिर का महायाजक हिलकिय्याह को “व्यवस्था की पुस्तक” मिली (पद.8) l उसके बाद यह युवा राजा के समक्ष पढ़ा गया, जिसने परमेश्वर के प्रति अपने पूर्वजों की अवज्ञा से दुखित होकर अपने वस्त्र फाड़े l योशिय्याह ने वह करने की ठान ली जो “यहोवा की दृष्टि में थी है” (पद.2) l यह पुस्तक लोगों का मार्गदर्शन करने का उपकरण बन गयी, ताकि दायें या बाएं मुड़ना न हो l परमेश्वर के निर्देश चीजों को सही करने के लिए थे l
दिन-ब-दिन हमें मार्गदर्शन करने के लिए पवित्रशास्त्र को अनुमति देना हमारे जीवन को परमेश्वर और उसकी इच्छा को जानने के अनुरूप रखता है l बाइबल एक अद्भुत हथियार है, जिसका अगर पालन किया जाए, तो हम सीधे आगे बढ़ते रहते हैं l
